दाल और सब्जी में किस वक्त डालें कौन सा मसाला, सही तरीके से पकाने पर बढ़ेंगे स्वाद और सेहत दोनों दाल और सब्जियों में हल्दी, मिर्च और धनिया सही क्रम में डालने से खाने की महक, रंगत और पोषक तत्व पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं। भारतीय खानपान में दाल और सब्जियों की असली पहचान उनमें डाले जाने वाले बुनियादी मसालों से होती है। अक्सर लोग खाना पकाते समय हल्दी, मिर्च और धनिया पाउडर को किसी भी वक्त कड़ाही में डाल देते हैं। लेकिन रसोई विज्ञान के अनुसार मसालों को एक निश्चित क्रम में शामिल करने से न केवल भोजन का जायका कई गुना बढ़ जाता है, बल्कि मसालों के प्राकृतिक पोषक तत्व भी जलने से बच जाते हैं और शरीर को उनका पूरा लाभ मिलता है। तड़के से लेकर मसाला भूनने का सही क्रम किसी भी सब्जी या दाल की शुरुआत तेल अथवा घी गर्म करके की जाती है। सबसे पहले जीरा, राई और अन्य साबुत खड़े मसालों का तड़का लगाया जाता है। जब तड़का चटक जाए, तब प्याज और टमाटर डालकर भुना जाता है। इसी दौरान हल्दी पाउडर मिलाना चाहिए। हल्दी को शुरुआत में प्याज और टमाटर के साथ भूनने से उसका कच्चापन पूरी तरह दूर हो जाता है और वह अपनी गहरी पीली रंगत और सोंधा स्वाद पूरे मसाले में छोड़ देती है। मिर्च और धनिया पाउडर डालने का उचित समय हल्दी के अच्छी तरह मिल जाने के बाद ही लाल या हरी मिर्च शामिल करनी चाहिए। मिर्च को बहुत पहले डालकर तेज आंच पर ज्यादा देर तक पकाने से वह जल सकती है और उसका प्राकृतिक स्वाद कड़वा हो सकता है। इसलिए हल्दी के बाद मिर्च डालकर मध्यम आंच पर हल्का पकाना सबसे बेहतर माना जाता है। इसके बाद सबसे अंत में धनिया पाउडर डाला जाता है। धनिया की महक और उसका सोंधापन बहुत नाजुक होता है। यदि धनिया पाउडर को शुरुआत में डालकर देर तक पकाया जाए, तो उसकी सुगंध और पौष्टिकता खत्म हो जाती है। इसीलिए जब मसाला पूरी तरह भुनने के करीब हो, तब धनिया पाउडर मिलाकर हल्का सा चला लेना चाहिए। वहीं दूसरी ओर, ताजे हरे धनिए की पत्तियों को कभी भी आंच पर ज्यादा नहीं पकाना चाहिए, बल्कि व्यंजन के पूरी तरह पक जाने के बाद उसे ऊपर से गार्निश करना चाहिए। हल्दी, मिर्च और धनिए के औषधीय गुण हल्दी केवल खाने को आकर्षक पीला रंग देने का काम नहीं करती, बल्कि यह एक बेहद शक्तिशाली औषधि भी है। हल्दी में करक्यूमिन नाम का मुख्य घटक होता है, जो एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुणों से भरपूर होता है। यह तत्व शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है और सर्दी-जुकाम, अंदरूनी सूजन तथा पाचन से जुड़ी दिक्कतों में राहत दिलाता है। मिर्च भोजन में जरूरी तीखापन और स्वाद जोड़ने का काम करती है। हरी मिर्च में प्रचुर मात्रा में विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट मौजूद होते हैं, जबकि लाल मिर्च व्यंजन को गहरा रंग और चटपटापन देती है। सीमित और संतुलित मात्रा में मिर्च खाने से पाचन क्रिया और मेटाबॉलिज्म तेज होता है तथा भूख खुलकर लगती है। धनिया पाउडर और ताजी हरी पत्तियां दोनों ही पेट और हाजमे के लिए रामबाण मानी जाती हैं। धनिए में मौजूद जरूरी विटामिन्स और मिनरल्स शरीर को पोषण देते हैं। हरा धनिया खाने में ताजगी और भीनी खुशबू भरता है, जबकि पिसा हुआ धनिया पाउडर दालों और रसेदार सब्जियों की ग्रेवी को गाढ़ापन और एक संतुलित स्वाद प्रदान करता है। इसका आप पर असर मसाले डालने के तरीके में छोटा सा बदलाव करने से आपके रोज के भोजन का स्वाद सुधरता है और मसालों के पोषक तत्व जलने से बचते हैं। • दैनिक खानपान पर असर: खाना बनाते समय हल्दी पहले, फिर मिर्च और अंत में धनिया डालने की आदत डालें। इस आसान बदलाव से सब्जी में तेल और मसाले जलने का कड़वा स्वाद पूरी तरह बंद हो जाएगा। • औषधीय लाभ: हल्दी को अत्यधिक तेज आंच पर सीधे पकाने के बजाय प्याज-टमाटर के साथ भूनें। इससे करक्यूमिन के एंटी-इन्फ्लेमेटरी और रोग प्रतिरोधक गुण नष्ट नहीं होंगे। • खुशबू और ताजगी: पिसे धनिए को हमेशा मसाला भूनने के आखिरी मिनटों में मिलाएं। इससे भोजन में धनिए की भीनी महक बरकरार रहेगी और ताजगी बनी रहेगी। • पाचन में सुधार: सीमित मिर्च और उचित तरीके से पके मसाले पेट में जलन और एसिडिटी की समस्या से बचाते हैं। इससे मेटाबॉलिज्म बेहतर रहता है और भोजन आसानी से पचता है। ऐसा क्यों हुआ रसोई में मसालों को एक खास क्रम में डालने का नियम मसालों की रासायनिक संरचना, तापमान सहन करने की क्षमता और उनके सुगंधित तेलों की प्रकृति पर आधारित है। • जलने की संवेदनशीलता: हल्दी में कठोरता होती है और उसका कच्चा स्वाद जाने के लिए भूनना जरूरी होता है, जबकि मिर्च बहुत जल्दी काली पड़ जाती है। मिर्च को देर से डालने से वह तेज तापमान पर जलकर कड़वी होने से बच जाती है। • सुगंधित तेलों का वाष्पीकरण: पिसे धनिए के अंदर मौजूद वाष्पशील सुगंधित तत्व तेज गर्मी में तुरंत उड़ जाते हैं। इसी कारण धनिए को अंत में डाला जाता है ताकि उसकी भीनी खुशबू मसाले के अंदर ही कैद रहे। • रंग और तेल का जुड़ाव: हल्दी के औषधीय गुण और करक्यूमिन वसा में घुलनशील होते हैं। प्याज और टमाटर के साथ मध्यम आंच पर पकने से हल्दी का रंग तेल में पूरी तरह खिलकर बाहर आता है। सवाल-जवाब 1. सब्जी या दाल बनाते समय हल्दी किस वक्त डालनी चाहिए? तड़का लगाने के बाद जब प्याज और टमाटर भूने जा रहे हों, तब हल्दी डालनी चाहिए ताकि उसका कच्चापन दूर हो सके। 2. मिर्च पाउडर को हल्दी के बाद क्यों डाला जाता है? मिर्च को तेज आंच पर ज्यादा देर पकाने से वह जल सकती है और स्वाद कड़वा हो सकता है, इसलिए इसे हल्दी के बाद डाला जाता है। 3. धनिया पाउडर मसाला भूनने के अंत में क्यों मिलाया जाता है? लंबे समय तक पकाने से धनिया पाउडर की खुशबू और पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं, इसलिए इसे मसाला तैयार होने के अंतिम चरण में मिलाते हैं। 4. ताजे हरे धनिए की पत्तियों को कब डालना चाहिए? ताजे हरे धनिए को कभी आंच पर नहीं पकाना चाहिए, बल्कि पकवान पूरी तरह तैयार होने के बाद ऊपर से गार्निश करना चाहिए। 5. हल्दी में कौन सा मुख्य औषधीय तत्व होता है? हल्दी में करक्यूमिन नामक तत्व होता है, जो एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुणों से भरपूर होता है। 6. हरी मिर्च और लाल मिर्च से शरीर को क्या फायदे मिलते हैं? हरी मिर्च में विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, और सीमित मात्रा में मिर्च खाने से मेटाबॉलिज्म सुधरता है और भूख बढ़ती है। https://trendkia.com/lifestyle/dala-aura-sabji-men-kisa-vakta-dalen-kauna-sa-masala-sahi-tarike-se-pakane-para-barhenge-svada-aura-sehata-donon-40727 TrendKia — Har trend, sabse pehle.