डांडिया रातों में पारंपरिक परिधानों संग भा रहे हाथ से रंगे जूते और गुजराती गहने इस त्योहारी दौर में गरबा प्रेमियों के बीच पारंपरिक परिधानों के साथ हाथ से रंगे कलात्मक जूते, एलईडी लाइट वाले स्नीकर्स और कौड़ियों से सजे हल्के गुजराती गहने खूब लोकप्रिय हो रहे हैं। शरद पूर्णिमा के आगमन के साथ ही चारों तरफ डांडिया और गरबा की जबरदस्त धूम देखने को मिल रही है। पारंपरिक परिधानों के रंगों और संगीत की तेज़ ताल पर थिरकते कदम इस पूरे उत्सव की सबसे बड़ी पहचान माने जाते हैं। इस त्योहारी मौसम में फैशन केवल भारी-भरकम और पारंपरिक घाघरा-चोली तक ही सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसके साथ पहनी जाने वाली एक्सेसरीज और फुटवियर भी उतना ही अहम स्थान बना चुके हैं। डांस फ्लोर पर घंटों थिरकने के लिए लोग अब खूबसूरती के साथ-साथ सुविधा और आराम को भी पहली प्राथमिकता दे रहे हैं, जिसके चलते ट्रेडिशनल कपड़ों के साथ नए दौर के ट्रेंडी और चटकीले उत्पादों का मिलाजुला स्टाइल काफी पसंद किया जा रहा है। हाथ से रंगे कलात्मक जूतों का नया चलन फुटवियर के मामले में इस बार हाथ से रंगे आर्टवियर जूतों ने बाजार में अपनी मजबूत पकड़ बना ली है। आर्टवियर बाय सिया की फाउंडर सिया गुगाले के अनुसार, वे खास फैब्रिक रंगों का इस्तेमाल करके जूतों पर हाथ से पेंटिंग तैयार करती हैं। इसके बाद इन रंगों को हीट-सेट किया जाता है ताकि वे लंबे समय तक टिके रहें। बाद में इन पर आकर्षक एम्ब्रायडरी, पैच, शीशे (मिरर), लेस और रंग-बिरंगे फैब्रिक जोड़कर इन्हें सजाया जाता है। इस तरह के कस्टमाइज्ड जूतों की शुरुआती कीमत ₹1,500 रखी गई है। इस खास डिजाइन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ग्राहक अपने नाप, पसंदीदा ब्रांड या फिर अपने पुराने जूते भेजकर भी उन्हें अपनी पसंद के अनुसार कस्टमाइज करवा सकते हैं। पारंपरिक गरबा परिधानों के साथ पहने जाने वाले ये जूते डांडिया प्रेमियों को न केवल एक नया और आधुनिक लुक देते हैं, बल्कि लगातार कई घंटों तक डांस करते वक्त पैरों को थकान और दर्द से भी बचाते हैं। एलईडी लाइट्स वाले चमकते स्नीकर्स की बढ़ती मांग हाथ से पेंट किए गए जूतों के साथ-साथ इस बार पहले से लगी एलईडी लाइट्स वाले जूते भी युवाओं के बीच जबरदस्त आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। देशी मोरनी की ओनर श्वेता पटेल का कहना है कि ये खास एलईडी जूते उत्सव की जीवंत ऊर्जा को पूरी तरह दर्शाते हैं और महफिल में लोगों के बीच बातचीत का एक बड़ा जरिया भी साबित हो रहे हैं। इन चमकते जूतों की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बाजार में इनकी रोजाना लगभग 100 जोड़ियां बिक रही हैं। इन जूतों की कीमत ₹2,000 से लेकर ₹3,500 के बीच है। रात के अंधेरे में जब रंग-बिरंगी रोशनी बिखेरते इन जूतों के साथ गरबा के कदम पड़ते हैं, तो पूरे पंडाल में सबकी निगाहें थिरकते पैरों पर ही टिक जाती हैं। रंगीन धागों और कौड़ियों से सजे हेयर एक्सेसरीज पैरों की खूबसूरती और आराम के बाद बालों के स्टाइल में भी पारंपरिक गुजराती टच को शामिल किया जा रहा है। अलग-अलग रंगों के धागों, मोतियों और कौड़ियों से तैयार की गई हेयर ब्रेड्स यानी चोटियां और बन एक्सेसरीज काफी ट्रेंड कर रही हैं। यह सादे से सादे हेयरस्टाइल को भी तुरंत भव्य फेस्टिव लुक में बदल देती हैं। गुजराती और राजस्थानी लोक संस्कृति से प्रेरित ये एक्सेसरीज बालों में बेहद आसानी से लगाई जा सकती हैं। डांडिया खेलते समय यह बालों और पल्लू को सही तरीके से संभाले रखने में मदद करती हैं। इनमें लगे रंग-बिरंगे टसल और पोंग्स पीछे से देखने पर बालों के पूरे लुक को बेहद खूबसूरत बना देते हैं। गले के लिए कौड़ियों और घुंघरुओं वाले हल्के चोकर्स गले के आभूषणों की बात करें तो रंगीन धागों और कौड़ियों से बने चोकर्स इस समय बड़ा स्टाइल स्टेटमेंट बने हुए हैं। पीले तथा अन्य चटक रंगों के मजबूत धागों में पिरोए गए ये मिरर-वर्क चोकर्स और उनके साथ की मैचिंग इयररिंग्स पारंपरिक परिधानों के साथ पूरी तरह मेल खाते हैं। कौड़ियों, शीशों और घुंघरुओं का यह अनूठा तालमेल पारंपरिक गुजराती आभूषणों की याद ताजा करता है। इनकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि बिना किसी भारी वजन के ये पहनने वाले को एक शाही और भारी-भरकम फेस्टिव लुक प्रदान करते हैं। इसके चलते महिलाएं बिना किसी परेशानी या भारीपन के पूरी रात आराम से गरबा का आनंद ले पाती हैं। कलाई के लिए मिरर वर्क वाले कड़े और पैचवर्क बैग्स हाथों के श्रृंगार के लिए धागे और शीशे के काम से सजे चौड़े कड़े (रिस्ट कफ्स) भी काफी खरीदे जा रहे हैं। साधारण कांच की चूड़ियों के साथ जब इन चौड़े कड़ों को पहना जाता है, तो कलाइयों की खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है। यह कलाई पर काफी कोमल रहते हैं, जिससे गरबा खेलते समय हाथों के घुमाव और मूवमेंट में कोई रुकावट नहीं आती और पहनावे को पारंपरिक स्वरूप भी मिलता है। इसके अलावा, डांस फ्लोर पर जरूरी सामान सुरक्षित रखने के लिए पैचवर्क और कौड़ियों से सजे ट्रेडिशनल बैकपैक भी चलन में आ चुके हैं। इनमें चटकीले रंगों के कपड़े, छोटे शीशे और लंबे गुलाबी टसल लगे होते हैं जो देखने में काफी आकर्षक लगते हैं। इस प्रकार पारंपरिक कला और आधुनिक सुविधा का यह मेल गरबा के पूरे अनुभव को और भी खास बना रहा है। इसका आप पर असर गरबा नाइट्स के दौरान पारंपरिक परिधानों के साथ आरामदायक स्नीकर्स और हल्के गहनों का चलन डांस करने वालों को बिना किसी शारीरिक परेशानी के घंटों उत्सव का आनंद लेने में मदद कर रहा है। • पैरों के आराम पर असर: पारंपरिक चप्पलों या हील्स की जगह कस्टमाइज्ड शूज पहनने से डांसर्स को पैरों में होने वाले दर्द और छालों से राहत मिलती है। इससे लोग बिना रुके रात भर डांडिया खेल सकते हैं। • बजट और खर्च: हाथ से रंगे जूते ₹1,500 से और एलईडी शूज ₹2,000 से ₹3,500 के बीच मिल रहे हैं। अपने पुराने जूतों को कस्टमाइज करवाकर नए जूते खरीदने का खर्च भी बचाया जा सकता है। • गहनों के भारीपन से मुक्ति: भारी धातु वाले आभूषणों की जगह धागे और कौड़ियों वाले चोकर्स पहनना ज्यादा सुविधाजनक है। यह भारी लुक देने के साथ-साथ त्वचा पर बहुत हल्के महसूस होते हैं। • सामान संभालने की सुविधा: गरबा पंडालों में मोबाइल और जरूरी सामान रखने के लिए पैचवर्क वाले ट्रेडिशनल बैकपैक उपयोगी साबित हो रहे हैं। इससे दोनों हाथ डांडिया खेलने के लिए पूरी तरह आजाद रहते हैं। ऐसा क्यों हुआ गरबा उत्सवों में लंबे समय तक डांस करने की जरूरत और आधुनिक युवाओं की सुविधा की मांग ने पारंपरिक फैशन में इस बदलाव को जन्म दिया है। भारी कपड़ों और सख्त फुटवियर के कारण होने वाली शारीरिक दिक्कतों ने डिजाइनरों को नए विकल्प पेश करने के लिए प्रेरित किया। • सुविधा और आधुनिकता का मेल: पारंपरिक उत्सवों में घंटों खड़े रहने और लगातार डांस करने के कारण पैरों में दर्द एक आम समस्या थी। खेलकूद के जूतों पर पारंपरिक कला उकेरने से स्टाइल और आराम दोनों एक साथ मिल गए। • सोशल मीडिया और अलग दिखने की चाह: रात के समय गरबा पंडालों में रोशनी के बीच चमकने वाले एलईडी शूज और रंग-बिरंगे जूते फोटो और वीडियो में बेहद आकर्षक लगते हैं। युवाओं में महफिल में सबसे अलग दिखने की चाह ने इस मांग को बढ़ाया है। • हल्के पारंपरिक विकल्पों की मांग: भारी धातु के गहने पसीने और उछलकूद के दौरान असुविधाजनक हो जाते थे। गुजराती लोक कला से जुड़े कौड़ी, धागे और शीशे के आभूषणों ने भारी वजन के बिना पारंपरिक लुक देने का आसान रास्ता दिया। सवाल-जवाब 1. हाथ से रंगे जूतों की शुरुआती कीमत क्या है? कस्टमाइज्ड हैंड-पेंटेड जूतों की शुरुआती कीमत ₹1,500 है। 2. क्या ग्राहक अपने खुद के जूते भी कस्टमाइज करवा सकते हैं? हाँ, ग्राहक अपने साइज, पसंदीदा ब्रांड या पुराने जूते भेजकर अपनी पसंद के अनुसार डिजाइन करवा सकते हैं। 3. एलईडी लाइट्स वाले जूते किस कीमत में मिल रहे हैं? एलईडी लाइट्स वाले जूते ₹2,000 से लेकर ₹3,500 की कीमत में उपलब्ध हैं। 4. कौड़ियों और धागे से बने चोकर्स का मुख्य फायदा क्या है? ये चोकर्स वजन में बहुत हल्के होते हैं और बिना भारीपन महसूस कराए एक पारंपरिक और भव्य लुक देते हैं। 5. गरबा खेलते समय सामान रखने के लिए कौन सा बैग ट्रेंड में है? पैचवर्क, कौड़ियों, शीशे और लंबे टसल से सजे ट्रेडिशनल बैकपैक सामान रखने के लिए ट्रेंड कर रहे हैं। https://trendkia.com/lifestyle/dandiya-raton-men-parnparika-paridhanon-snga-bha-rahe-hatha-se-rnge-jute-aura-gujarati-gahane-43711 TrendKia — Har trend, sabse pehle.