डीप वॉइस पाने की होड़ में वॉयसमैक्सिंग ट्रेंड की गिरफ्त में युवा, एआई ऐप्स और एक्सरसाइज से वोकल कॉर्ड्स को नुकसान का बड़ा खतरा सोशल मीडिया पर लुक्समैक्सिंग के बाद अब वॉयसमैक्सिंग का क्रेज बढ़ रहा है। युवा अपनी आवाज को भारी और मर्दाना बनाने के लिए अजीबोगरीब तरीकों और एआई टूल्स का सहारा ले रहे हैं, जबकि डॉक्टर्स इसे गले के लिए खतरनाक बता रहे हैं। इंटरनेट और सोशल मीडिया के दौर में शारीरिक बनावट तथा व्यक्तित्व को निखारने के नए ट्रेंड्स तेजी से वायरल हो रहे हैं। लुक्समैक्सिंग और प्रोटीनमैक्सिंग की लहर के बाद अब युवाओं के बीच वॉयसमैक्सिंग नाम का एक नया चलन देखने को मिल रहा है। टिकटॉक और इंस्टाग्राम जैसे लोकप्रिय प्लेटफॉर्म्स पर युवा लड़के अपनी आवाज की पिच को कम करने और उसे अधिक भारी बनाने के दावों के साथ वीडियो बना रहे हैं। लड़कों का मानना है कि एक गहरी और मर्दाना आवाज उनके डेटिंग गेम को अधिक प्रभावी बनाती है। इस सोच के तहत कई युवा बिना किसी वैज्ञानिक आधार के खतरनाक वोकल एक्सरसाइज कर रहे हैं और अपनी आवाज का विश्लेषण करने के लिए आधुनिक एआई ऐप्स की मदद ले रहे हैं। हालांकि, स्वास्थ्य और वोकल एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह तरीका पूरी तरह से गलत है और इससे गले को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है। वॉयसमैक्सिंग का बढ़ता क्रेज और युवाओं की सोच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वॉयसमैक्सिंग ट्रेंड के तहत युवाओं को यह समझाया जा रहा है कि लड़कियां भारी आवाज वाले लड़कों की ओर अधिक आकर्षित होती हैं। इस आकर्षण को पाने की चाहत में युवा लड़के कई तरह के हथकंडे अपना रहे हैं। वे मान रहे हैं कि आवाज की टोन जितनी ज्यादा डीप होगी, उनका प्रभाव दूसरों पर उतना ही बेहतर पड़ेगा। यही वजह है कि इंटरनेट पर ऐसे ट्यूटोरियल्स और टिप्स की बाढ़ आ गई है जहां आवाज को तुरंत भारी बनाने के नुस्खे बताए जा रहे हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार, इंटरनेट पर देखकर बिना सही जानकारी के गले पर दबाव डालना वोकल कॉर्ड्स के लिए बेहद नुकसानदायक साबित हो सकता है। मनुष्य की आवाज की बनावट और इसका जैविक विज्ञान मानव शरीर में आवाज की उत्पत्ति और उसकी पिच के पीछे एक वैज्ञानिक प्रक्रिया कार्य करती है। हमारे गले में एक वॉयस बॉक्स स्थित होता है जिसे वैज्ञानिक भाषा में लैरिंग्स कहा जाता है। यह कार्टिलेज से मिलकर बना होता है और सांस की नली यानी विंडपाइप के ठीक ऊपरी हिस्से पर स्थित रहता है। गले के बाहर की ओर जो हिस्सा उभरा हुआ दिखाई देता है, उसे आमतौर पर एडम्स एप्पल कहा जाता है। लैरिंग्स के भीतर वोकल फोल्ड्स मौजूद होते हैं, जो मांसपेशियों की संरचना होते हैं। इन वोकल फोल्ड्स की लंबाई, मोटाई और उनमें होने वाले कंपन से ही किसी व्यक्ति की आवाज की पिच तय होती है। किशोरावस्था यानी प्यूबर्टी के समय लड़कों के शरीर में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का स्राव तेजी से बढ़ता है। यह हार्मोन वोकल फोल्ड्स को मोटा और लंबा बना देता है, जिसके कारण लड़कों की आवाज लड़कियों की तुलना में अधिक भारी हो जाती है। एक बार जब शरीर का विकास पूरा हो जाता है और प्यूबर्टी की उम्र बीत जाती है, तब आवाज की पिच प्राकृतिक रूप से फिक्स हो जाती है। इसके बाद बिना किसी मेडिकल सर्जरी के इसे स्वाभाविक रूप से बदलना संभव नहीं होता। टिकटॉक हैक्स की हकीकत और वोकल हेल्थ के जोखिम टिकटॉक और अन्य सोशल मीडिया ऐप्स पर वॉयसमैक्सर्स कई प्रकार की अजीबोगरीब वोकल ट्रेनिंग टिप्स दे रहे हैं। वोकल एक्सपर्ट्स और सिंगिंग टीचर्स का मानना है कि इनमें से कुछ सामान्य बातें सही हो सकती हैं, जैसे कि डायाफ्राम से सांस लेना और गले को नमी देने के लिए पर्याप्त पानी पीना। यह दोनों ही आदतें वोकल हेल्थ के लिए फायदेमंद मानी जाती हैं। लेकिन इसके अलावा बताए जा रहे अधिकांश हैक्स रिस्की हैं और उनके पीछे कोई प्रामाणिक रिसर्च नहीं है। उदाहरणात्मक रूप से, कई युवा अपनी आवाज को गहरा करने के लिए नेक क्रंचेज जैसी कठिन एक्सरसाइज कर रहे हैं। उनका मानना है कि गर्दन की मांसपेशियों को मजबूत बनाने से आवाज की गहराई बढ़ जाएगी। हालांकि, वोकल प्रोफेशनल्स ने स्पष्ट किया है कि आवाज की गहराई जबड़े के तनाव को कम करने और सही ब्रीदिंग तकनीक से आती है। गर्दन की बाहरी मसल्स बनाने का आवाज की टोन या गहराई से कोई संबंध नहीं होता है। म्यूइंग, माउथ टेपिंग और एआई ऐप्स का इस्तेमाल आवाज और चेहरे की बनावट को बदलने के लिए लुक्समैक्सिंग की तरह ही इसमें भी म्यूइंग तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसमें लड़के अपनी जीभ को मुंह के ऊपरी हिस्से यानी पैलेट पर दबाकर रखते हैं। इतना ही नहीं, रात को सोते समय मुंह से सांस लेने से रोकने के लिए कई युवा अपने मुंह पर टेप लगाकर सो रहे हैं ताकि वे केवल नाक से ही सांस लें। इसके अलावा, स्मार्टफोन ऐप्स भी इस ट्रेंड को बढ़ावा दे रहे हैं। ‘वॉयसमैक्स- टॉक लाइक ए चैड’ नाम का ऐप काफी चर्चित हो रहा है, जो यूजर की आवाज को रिकॉर्ड करके उसकी आकर्षण क्षमता और मर्दानगी के आधार पर रेटिंग प्रदान करता है। इसी तरह ‘वॉयसमैक्स एआई’ नाम का टूल दावा करता है कि 80 परसेंट लड़कियां केवल आवाज की गुणवत्ता से आकर्षित होती हैं। यह एआई टूल यूजर की रिकॉर्डिंग सुनकर बताता है कि उसकी आवाज लड़कियों को पसंद आएगी या नहीं। हालांकि, रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स और वास्तविक जीवन के अनुभव बताते हैं कि लड़कियां इस प्रकार की बनावटी और कृत्रिम रूप से भारी बनाई गई आवाजों से बिल्कुल इम्प्रेस नहीं होती हैं। इसके विपरीत, अपनी आवाज को जबरदस्ती दबाने या भारी करने की कोशिश से वोकल कॉर्ड्स में सूजन और वोकल फटीग की समस्या हो सकती है। इसका आप पर असर पाठकों के लिए: • स्वास्थ्य सुरक्षा: सोशल मीडिया पर दिखाए जाने वाले वॉयसमैक्सिंग या नेक एक्सरसाइज जैसे अनसर्टिफाइड ट्रेंड्स को बिना डॉक्टर की सलाह के न आजमाएं, इससे गले और वोकल कॉर्ड्स में हमेशा के लिए खराबी आ सकती है। • जागरूकता: एआई ऐप्स द्वारा दिए जाने वाले 80% अट्रैक्शन के दावों पर भरोसा न करें, क्योंकि असली बातचीत में बनावटी आवाज उलटी भारी पड़ सकती है। सवाल-जवाब 1. वॉयसमैक्सिंग क्या है? वॉयसमैक्सिंग एक सोशल मीडिया ट्रेंड है जिसमें युवा लड़के अपनी आवाज को भारी और गहरा बनाने के लिए वोकल एक्सरसाइज और एआई ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं। 2. क्या वोकल एक्सरसाइज से आवाज हमेशा के लिए भारी हो सकती है? नहीं, प्यूबर्टी के बाद इंसान के वोकल कॉर्ड्स की लंबाई और पिच फिक्स हो जाती है, जिसे एक्सरसाइज से बदला नहीं जा सकता। 3. वॉयसमैक्सिंग से गले को क्या नुकसान हो सकता है? आवाज को जबरदस्ती दबाने या भारी करने की कोशिश से वोकल कॉर्ड्स में सूजन, थकान और गले में स्थायी खराबी आ सकती है। 4. वॉयसमैक्सिंग में लड़के किन एआई ऐप्स का इस्तेमाल कर रहे हैं? लड़के 'वॉयसमैक्स- टॉक लाइक ए चैड' और 'वॉयसमैक्स एआई' जैसे ऐप्स का उपयोग कर रहे हैं जो आवाज की मर्दानगी और आकर्षण की रेटिंग देते हैं। https://trendkia.com/lifestyle/dipa-voisa-pane-ki-hora-men-voicemaxing-trenda-ki-giraphta-men-yuva-ai-aipsa-aura-eksarasaija-se-vokala-kordsa-ko-nukasana-ka-bara-19115 TrendKia — Har trend, sabse pehle.