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  "type": "article",
  "title": "दीपावली की सफाई के दौरान इन 10 चीजों को घर से बाहर निकालना क्यों माना जाता है शुभ",
  "summary": "दीपावली से पहले घर की शुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने के लिए अनुपयोगी और खंडित वस्तुओं को हटाने की सलाह दी जाती है।",
  "content": "दीपावली का पावन पर्व केवल दीपों की जगमगाहट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्वच्छता, पवित्रता और घर में नई ऊर्जा के संचार का भी उत्सव माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिस स्थान पर पूरी तरह स्वच्छता और शुद्धि का वातावरण होता है, वहां सुख-समृद्धि और मां लक्ष्मी का वास होता है। इसी वजह से त्योहार से पहले घरों के कोने-कोने को चमकाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। अगर आप भी इस त्योहारी मौसम में घर की सफाई का काम शुरू करने जा रहे हैं, तो कुछ ऐसी चीजों की पहचान करना बेहद आवश्यक है जो वास्तु और स्वास्थ्य की दृष्टि से घर में रुकावट पैदा करती हैं।\n\nटूटे बर्तन, कांच और बंद घड़ियों का वास्तु प्रभाव\nघर में मौजूद टूटे हुए कांच, दरार पड़े कप, प्लेट या क्षतिग्रस्त बर्तनों को रखना वास्तु नियमों के अनुसार शुभ नहीं माना जाता। ऐसी चीजें घर के परिवेश में नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा देती हैं, इसलिए सफाई के पहले चरण में ही इन्हें बाहर कर देना चाहिए। इसके साथ ही, कई घरों में दीवार पर या दराजों में बंद अथवा खराब घड़ियां पड़ी रहती हैं। वास्तु विज्ञान में बंद घड़ी को समय के ठहर जाने और प्रगति में बाधा का संकेत माना गया है। दीपावली की पूजा से पहले या तो इन घड़ियों में नई बैटरी लगाकर ठीक करा लें, अन्यथा इन्हें घर से हटा दें ताकि जीवन में सकारात्मक समय का प्रवाह बना रहे।\n\nफटे जूते-चप्पल और सूखे कांटेदार पौधों से दूरी\nमुख्य दरवाजे के बाहर या कमरों में बिखरे पुराने, घिसे और फटे जूते-चप्पल दरिद्रता को आमंत्रित करने वाले माने जाते हैं। त्योहारी स्वच्छता के दौरान ऐसे किसी भी अनुपयोगी फुटवियर को तुरंत हटा देना चाहिए। इसी तरह पेड़-पौधों के मामले में भी सजगता जरूरी है। घर में सूखे, मुरझाए या कैक्टस जैसे कांटेदार पौधे रखना अशांति और तनाव का कारक माना जाता है। ऐसे पौधों के स्थान पर वातावरण को शुद्ध और मनमोहक बनाने के लिए तुलसी अथवा मनी प्लांट जैसे शुभ और हरियाली बढ़ाने वाले पौधे लगाने की सलाह दी जाती है।\n\nरद्दी, पुराने अखबार और खराब इलेक्ट्रॉनिक उपकरण\nसालों से अलमारियों या छतों पर जमा पुराने अखबार, पुरानी मैगजीन और रद्दी कागजात सिर्फ धूल और कीट-पतंगों को ही न्योता नहीं देते, बल्कि वे घर में भारीपन और नकारात्मकता भी बढ़ाते हैं। इन्हें कबाड़ी को सौंपकर घर को व्यवस्थित और हल्का बनाया जा सकता है। इसके अलावा, घरों में अक्सर खराब टोस्टर, बिना काम के पड़े पुराने चार्जर, फ्यूज बल्ब और खराब ट्यूबलाइट जमा हो जाते हैं। ऐसे अप्रचलित और खराब इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जीवन की गति में अवरोध माने जाते हैं, इसलिए इन्हें भी घर में जगह नहीं देनी चाहिए।\n\nखंडित मूर्तियां, एक्सपायर्ड दवाइयां और जंग लगा लोहा\nवास्तु शास्त्र और धार्मिक मर्यादा के अनुसार घर के मंदिर या किसी भी कमरे में टूटे हुए फोटो फ्रेम और खंडित मूर्तियां नहीं रखनी चाहिए। दीपावली की विशेष पूजा से पहले ऐसी मूर्तियों को पूरी श्रद्धा और सम्मान के साथ किसी पवित्र जलाशय में विसर्जित कर देना चाहिए। इसके साथ ही, प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स में पड़ी एक्सपायर दवाइयां और प्रसाधन कक्ष में रखे पुराने क्रीम व पाउडर सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं, जिनकी छंटाई सबसे पहले करनी चाहिए। अंत में, घर के कोनों में पड़े जंग लगे लोहे के औजार या कबाड़ शनि के प्रभाव और ऊर्जा में भारीपन का कारण बनते हैं। इसके अतिरिक्त दुख या तनाव देने वाली पुरानी यादों से जुड़ी वस्तुओं को भी विदा कर घर में केवल उल्लास और सौहार्द का माहौल तैयार करना चाहिए।\n\nइसका आप पर असर\nघर की व्यवस्था और स्वच्छता में सुधार करके आप त्योहारी मौसम में परिवार के स्वास्थ्य और सकारात्मक माहौल को सुनिश्चित कर सकते हैं।\n\n• दैनिक स्वच्छता: अनुपयोगी सामान हटाने से घर में जगह बनती है और धूल-मिट्टी के कण कम होते हैं। इससे घर के सदस्यों को मौसमी एलर्जी और संक्रमण से बचने में मदद मिलती है।\n• स्वास्थ्य सुरक्षा: एक्सपायर हो चुकी दवाओं और पुराने सौंदर्य प्रसाधनों को फेंकने से आकस्मिक विषाक्तता का खतरा टलता है। यह कदम बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए बेहद आवश्यक माना जाता है।\n• आर्थिक समझदारी: रद्दी और पुराने लोहे के कबाड़ को समय पर बेचने से तुरंत थोड़ी नकदी प्राप्त हो जाती है। इस राशि का उपयोग दीये या त्योहारी सजावट के नए सामान खरीदने में किया जा सकता है।\n• मानसिक शांति: रुकावट पैदा करने वाली चीजों और पुरानी नकारात्मक यादों को दूर करने से तनाव घटता है। साफ-सुथरा और खुला कमरा परिवार के भीतर बेहतर संवाद और प्रसन्नता को बढ़ावा देता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nदीपावली से पहले विशेष सफाई और कुछ वस्तुओं को हटाने की परंपरा वास्तु मान्यताओं, धार्मिक पवित्रता और घरेलू स्वच्छता के संयोजन पर आधारित है।\n\n• वास्तु और ऊर्जा संतुलन: खंडित और रुकी हुई वस्तुओं को जीवन की गति और प्रगति को बाधित करने वाला माना जाता है। टूटे कांच और बंद घड़ियों को हटाने का उद्देश्य वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा और संतुलन को फिर से स्थापित करना है।\n• सफाई की सदियों पुरानी परंपरा: वर्षा ऋतु के समापन और शरद ऋतु के आगमन के साथ कीट-पतंगों और फफूंद को समाप्त करने के लिए वार्षिक सफाई आवश्यक मानी जाती रही है। पुराने समय से ही इसे स्वच्छता के प्रतीक के रूप में त्योहार से जोड़ा गया है।\n• सुरक्षा और स्वास्थ्य मानक: अलमारियों में रखी पुरानी रासायनिक सामग्री और एक्सपायर दवाइयां गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा करती हैं। इसलिए किसी भी बड़े पर्व से पहले इनकी छंटाई को घरेलू सुरक्षा का अनिवार्य हिस्सा माना गया है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. दीपावली से पहले टूटे बर्तन और कांच को हटाना क्यों जरूरी है?\nवास्तु के अनुसार टूटे हुए कांच और बर्तन घर में नकारात्मक ऊर्जा लाते हैं, इसलिए इन्हें तुरंत हटाना चाहिए।\n\n2. बंद पड़ी घड़ियों को लेकर वास्तु शास्त्र क्या सलाह देता है?\nबंद घड़ी को प्रगति में बाधा माना जाता है, अतः दीपावली से पहले इसे ठीक करा लेना चाहिए या घर से बाहर कर देना चाहिए।\n\n3. घर में कांटेदार और सूखे पौधों की जगह कौन से पौधे लगाने चाहिए?\nसूखे या कैक्टस जैसे कांटेदार पौधों के स्थान पर तुलसी और मनी प्लांट जैसे सकारात्मक पौधे लगाने चाहिए।\n\n4. खंडित मूर्तियों के साथ क्या किया जाना चाहिए?\nघर में रखी खंडित मूर्तियों और टूटे फोटो फ्रेम को दीपावली पूजन से पहले सम्मानपूर्वक किसी पवित्र जल में विसर्जित करना चाहिए।\n\n5. अलमारी में रखी एक्सपायर दवाइयों को निकालना क्यों आवश्यक है?\nपुरानी एक्सपायर दवाइयां और खराब सौंदर्य प्रसाधन स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक होते हैं और सुरक्षा जोखिम पैदा करते हैं।",
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  "publishedAt": "2026-11-04",
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