दीपावली पर कोटा डोरिया साड़ियों की बढ़ी भारी मांग, कैथून के बुनकरों को मिले 3 लाख रुपये तक की जरी साड़ियों के ऑर्डर त्योहारी सीजन में कैथून की प्रसिद्ध कोटा डोरिया साड़ियों की मांग देश-विदेश में तेजी से बढ़ रही है, जहां सोने-चांदी की जरी वाली साड़ियों की कीमत 3 लाख रुपये तक पहुंच गई है। दीपावली के त्योहारी मौसम में राजस्थान के पारंपरिक हथकरघा उद्योग में नई जान आ गई है। कैथून कस्बे में तैयार होने वाली ऐतिहासिक और बारीक बुनाई वाली कोटा डोरिया साड़ियों की मांग इस समय देश के प्रमुख महानगरों के साथ-साथ विदेशों में भी जबरदस्त तरीके से बढ़ रही है। त्योहार पर पारंपरिक परिधान पहनने के बढ़ते रुझान के कारण स्थानीय बुनकरों को लगातार ऑनलाइन मंचों और सीधे संपर्कों के माध्यम से बड़े पैमाने पर ऑर्डर मिल रहे हैं। मांग को समय रहते पूरा करने के लिए कारीगर अपने हथकरघों पर लगातार काम में लगे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्सव का माहौल बना हुआ है। कैथून में महीन बुनाई और महीनों की कड़ी मेहनत कोटा जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर बसा कैथून कस्बा इस पारंपरिक बुनाई शैली का मुख्य केंद्र है। यहां साड़ियों का निर्माण मशीनों के बजाय बुनकरों की व्यक्तिगत कारीगरी, धैर्य और पारंपरिक तकनीकों से होता है। बुनाई प्रक्रिया इतनी जटिल और श्रमसाध्य है कि एक साधारण कोटा डोरिया साड़ी को पूरा करने में 15 से 20 दिन का समय लग जाता है। यदि साड़ी में सामान्य डिजाइनर पैटर्न शामिल हो, तो इसे बनाने में कारीगरों को 20 से 25 दिन लग जाते हैं। विशेष अवसरों के लिए तैयार की जाने वाली शाही साड़ियों में असली सोने और चांदी के तारों वाली जरी का काम किया जाता है। ऐसी एक विशेष शाही साड़ी को तैयार करने में पूरे तीन महीने का समय लगता है। इस तरह के भारी और बेहद बारीक काम के लिए तीन से चार कुशल बुनकर एक साथ मिलकर एक ही साड़ी पर कई हफ्तों तक काम करते हैं, ताकि हर धागे का खिंचाव और पैटर्न बिल्कुल सटीक रहे। हल्कापन, खट पैटर्न और जीआई टैग की वैश्विक साख कोटा डोरिया वस्त्र की मुख्य पहचान इसका बेहद हल्का वजन और इसकी अनोखी चौकोर जालीदार संरचना है, जिसे स्थानीय भाषा में 'खट' कहा जाता है। इसमें शुद्ध रेशम और कपास के धागों को एक विशेष अनुपात में मिलाकर बुना जाता है, जिससे कपड़े में मजबूती के साथ-साथ कोमलता और चमक आती है। जब इन कपड़ों में सोने और चांदी के धागों से जरी का काम जोड़ा जाता है, तो परिधान की भव्यता काफी बढ़ जाती है। कारीगरी और इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री के आधार पर बाजार में इन साड़ियों की कीमत 10 हजार रुपये से शुरू होकर 3 लाख रुपये तक जाती है। विदेशी बाजारों में रहने वाले भारतीय समुदाय और अप्रवासी भारतीय (एनआरआई) सीधे कैथून के बुनकरों से संपर्क करके या अपने रिश्तेदारों के माध्यम से इन साड़ियों की विशेष खरीदारी कर रहे हैं। सौ साल से भी अधिक पुरानी इस बुनाई कला को ऐतिहासिक रूप से कोटा के राजपरिवार से संरक्षण प्राप्त हुआ था। बाद में इसकी प्रामाणिकता और विरासत को देखते हुए भारत सरकार ने इसे आधिकारिक तौर पर भौगोलिक संकेतक यानी जीआई टैग भी प्रदान किया। 70 से 80 करोड़ रुपये का वार्षिक कारोबार और 9 हजार हथकरघे इस पारंपरिक उद्योग का दायरा केवल एक कस्बे तक सीमित नहीं है। कैथून कस्बे में लगभग 6 हजार हथकरघे संचालित हैं, जबकि इसके आसपास के 12 ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 3 हजार हथकरघों पर यह काम लगातार चल रहा है। इस तरह समूचे क्षेत्र में कुल मिलाकर लगभग 9 हजार हथकरघों के जरिए प्रतिदिन 400 से 500 साड़ियों का उत्पादन किया जाता है। आंकड़ों के अनुसार, कोटा डोरिया वस्त्र उद्योग का कुल वार्षिक कारोबार लगभग 70 से 80 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच चुका है। मौजूदा त्योहारी सीजन में मिले भारी ऑर्डरों ने स्थानीय कारीगरों, रंगरेजों और बुनकरों की आमदनी और भविष्य की उम्मीदों को काफी मजबूत किया है। यह पारंपरिक कला आज न केवल एक पहनावे के रूप में पसंद की जा रही है, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर और कुशल श्रम के मेल के रूप में अपनी अंतरराष्ट्रीय पहचान को भी लगातार मजबूत कर रही है। इसका आप पर असर कोटा डोरिया साड़ियों की बढ़ती मांग से पारंपरिक हथकरघा बुनकरों को आर्थिक मजबूती मिल रही है और त्योहारी खरीदारों को प्रामाणिक विकल्प मिल रहे हैं। • खरीदारों के लिए: त्योहारी सीजन में असली हाथ से बुनी साड़ियों के लिए सीधे कैथून के बुनकरों से संपर्क किया जा सकता है। साधारण साड़ियों की शुरुआती कीमत 10 हजार रुपये है, जबकि सोने-चांदी की जरी वाली विशेष साड़ियों के लिए 3 लाख रुपये तक का बजट रखना होगा। • आर्डर और समय: विशेष रूप से तैयार कराई जाने वाली डिजाइनर और जरी साड़ियों के लिए हफ्तों पहले बुकिंग करानी होती है। साधारण साड़ी बनने में 15 से 25 दिन और सोने-चांदी के तारों वाली भारी साड़ी में पूरे 3 महीने का समय लगता है। • राजस्थान में: कैथून और आसपास के 12 गांवों के लगभग 9 हजार हथकरघा परिवारों की आय में त्योहारी मांग से सीधा उछाल आया है। प्रतिदिन तैयार हो रही 400 से 500 साड़ियों से क्षेत्र का लगभग 70 से 80 करोड़ रुपये का वार्षिक कारोबार और मजबूत हो रहा है। • प्रवासी भारतीयों के लिए: विदेशों में रहने वाले ग्राहक अब सीधे स्थानीय संपर्कों और ऑनलाइन माध्यमों से प्रामाणिक जीआई टैग वाली साड़ियां मंगवा सकते हैं। इससे बिचौलियों के बिना सीधे मूल कारीगरों को उनका उचित पारिश्रमिक मिलता है। ऐसा क्यों हुआ त्योहारी सीजन में पारंपरिक हस्तनिर्मित वस्त्रों के प्रति बढ़ते आकर्षण और विशिष्ट बुनाई तकनीकों के कारण कोटा डोरिया साड़ियों की मांग में जोरदार उछाल आया है। • त्योहारी मांग और सांस्कृतिक रुझान: दीपावली पर विशेष और पारंपरिक परिधान पहनने की बढ़ती प्राथमिकता ने हथकरघा उत्पादों के प्रति ग्राहकों का रुझान बढ़ाया है। खरीदार आधुनिक मशीनी कपड़ों के बजाय हाथ से तैयार की गई विशिष्ट कलाकृतियों को तरजीह दे रहे हैं। • विशेष बुनाई और सोने-चांदी की जरी: कोटा डोरिया का हल्का वजन, जालीदार खट पैटर्न और असली सोने-चांदी के तारों की बुनाई इसे अद्वितीय बनाती है। ऐसे दुर्लभ और शाही डिजाइन अन्य सामान्य वस्त्रों में आसानी से नहीं मिलते। • जीआई टैग और वैश्विक पहुंच: भारत सरकार द्वारा प्राप्त जीआई टैग और कोटा राजपरिवार के ऐतिहासिक संरक्षण ने इस कपड़े को अंतरराष्ट्रीय विश्वसनीयता दी है। इसके चलते देश के बड़े शहरों के साथ-साथ विदेशों से भी बड़े पैमाने पर ऑर्डर आ रहे हैं। सवाल-जवाब 1. कोटा डोरिया साड़ियों की शुरुआती और अधिकतम कीमत कितनी है? बाजार में इन साड़ियों की शुरुआती कीमत 10 हजार रुपये है, जबकि असली सोने और चांदी की जरी से बनी विशेष शाही साड़ियों की कीमत 3 लाख रुपये तक पहुंच जाती है। 2. कोटा डोरिया बुनाई का मुख्य केंद्र कहां स्थित है? इस बुनाई का प्रमुख केंद्र कैथून कस्बा है, जो कोटा शहर से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित है। 3. एक साधारण और एक सोने-चांदी की जरी वाली साड़ी बनाने में कितना समय लगता है? एक साधारण साड़ी बनाने में 15 से 20 दिन और सामान्य डिजाइनर साड़ी में 20 से 25 दिन लगते हैं, जबकि सोने-चांदी की जरी वाली विशेष साड़ी तैयार होने में पूरे 3 महीने का समय लगता है। 4. कोटा डोरिया कपड़े की मुख्य बनावट की क्या खासियत है? यह कपड़ा बेहद हल्का होता है और इसमें रेशम व कपास के बारीक धागों से चौकोर जालीदार पैटर्न बुना जाता है, जिसे 'खट' कहा जाता है। 5. कैथून और आसपास के क्षेत्र में कितने हथकरघे संचालित हैं और प्रतिदिन कितनी साड़ियां बनती हैं? कैथून में करीब 6 हजार और आसपास के 12 गांवों में 3 हजार हथकरघे हैं, जहां प्रतिदिन लगभग 400 से 500 साड़ियां तैयार होती हैं। 6. कोटा डोरिया उद्योग का कुल सालाना कारोबार कितना है? कोटा डोरिया का कुल वार्षिक कारोबार लगभग 70 से 80 करोड़ रुपये आंका गया है। https://trendkia.com/lifestyle/dipavali-para-kota-doria-sariyon-ki-barhi-bhari-manga-kaithun-ke-bunakaron-ko-mile-3-lakha-rupaye-taka-ki-zari-sariyon-ke-rdara-54202 TrendKia — Har trend, sabse pehle.