# दीवाली पूजन में जटा वाले सूखे नारियल का विधान, सुख और बरकत के लिए तिजोरी तक ऐसे पहुंचाएं

> दीपावली के अवसर पर सूखे नारियल और पंचोपचार विधि से किए जाने वाले विशेष पूजन के नियम सामने आए हैं। जानिए इसे सुरक्षित रखने और गोपाल सहस्रनाम पाठ का महत्व।

**Type:** article · **Category:** जीवनशैली · **Published:** 2026-11-05 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/lifestyle/divali-pujana-men-jata-vale-sukhe-nariyala-ka-vidhana-sukha-aura-barakata-ke-lie-tijori-taka-aise-pahunchaen-56877 · **Language:** Hindi
**Tags:** दीपावली, लक्ष्मी पूजा, नारियल उपाय, पंडित कल्कि राम, गोपाल सहस्रनाम, तिजोरी पूजन, धार्मिक परंपरा

दीपावली के पावन पर्व पर मां लक्ष्मी की कृपा और घर में संपन्नता बनाए रखने के लिए जटा वाले सूखे नारियल का एक पारंपरिक अनुष्ठान विशेष फलदायी माना गया है। अयोध्या के ज्योतिषाचार्य पंडित कल्कि राम ने इस संबंध में विस्तार से विधान साझा किया है, जिसके अनुसार विधिपूर्वक पूजन और नारियल की स्थापना से परिवार में सुख और समृद्धि का स्थायी वास होता है। इस पूरे अनुष्ठान को समयबद्ध और नियमों के साथ पूरा करने पर बल दिया गया है।

## त्योहार से एक दिन पहले तैयारी और संकल्प
इस धार्मिक विधि की शुरुआत दीपावली से ठीक एक दिन पहले हो जाती है। सबसे पहले एक साबुत जटा वाला सूखा नारियल लाकर उसे घर के किसी अत्यंत स्वच्छ, पवित्र और सुरक्षित स्थान पर रख दिया जाता है। नारियल रखते समय मन ही मन देवी लक्ष्मी का ध्यान करना अनिवार्य है। इसके साथ ही पूरे मनोयोग से संकल्प लेने का नियम है, ताकि पूजा का उद्देश्य सिद्ध हो सके और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार बना रहे।

## दीपावली की शाम लाल कपड़े में लपेटने का नियम
इसके अगले चरण में दीपावली के दिन सूर्यास्त के समय की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होती है। सूर्यास्त होते ही एक नया लाल सूती कपड़ा लेकर उस नारियल को वहां से आदरपूर्वक लाया जाता है। इसके पश्चात प्रथम पूज्य भगवान गणेश और धन की देवी मां लक्ष्मी का श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हुए नारियल को उस नए लाल कपड़े में अच्छी तरह लपेटा जाता है।

## पंचोपचार विधि से पूजन और तिजोरी में स्थापना
नारियल को मुख्य पूजन स्थल पर लाने के बाद, भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की प्रतिमा के निकट दीपक प्रज्वलित कर इसे स्थापित किया जाता है। इसके उपरांत पंचोपचार पद्धति से अनुष्ठान आगे बढ़ता है, जिसमें धूप, दीप, पुष्प, सुगंध और नैवेद्य अर्पित कर नारियल का आदरपूर्वक पूजन किया जाता है। इस क्रम के बाद घर में धन संचय के मुख्य स्थान, जैसे तिजोरी अथवा अलमारी में भी श्रद्धा भाव से पूजा की जाती है। अंत में लाल कपड़े में बंधे उसी नारियल को तिजोरी या धन रखने वाले स्थान पर ससम्मान रख दिया जाता है।

## गोपाल सहस्रनाम के 108 पाठ का महत्व
पंडित कल्कि राम के अनुसार, दीपावली की शाम को मंत्र और स्तोत्र साधना का भी विशेष महत्व होता है। शाम की पूजा के दौरान गोपाल सहस्रनाम अथवा संतान गोपाल सहस्रनाम का 108 बार पाठ करना अत्यंत कल्याणकारी बताया गया है। ऐसी दृढ़ मान्यता है कि इस समग्र अनुष्ठान और पाठ से घर में आर्थिक बरकत टिकती है तथा सभी सदस्यों के जीवन में शांति और खुशहाली बनी रहती है।

## इसका आप पर असर
इस पारंपरिक पूजा विधि से दीपावली पर्व पर घर की आर्थिक स्थिति और आध्यात्मिक वातावरण को सुव्यवस्थित करने में मदद मिलती है।

- **तैयारी का समय:** पूजा की पूरी सामग्री और जटा वाला नारियल दीवाली से एक दिन पहले ही सुरक्षित स्थान पर रख लें। इससे त्योहार के दिन किसी तरह की हड़बड़ी नहीं होगी और मानसिक एकाग्रता बनी रहेगी।
- **शाम का सही मुहूर्त:** नारियल को लाल कपड़े में लपेटने की प्रक्रिया ठीक सूर्यास्त के समय करनी होती है। शाम की मुख्य लक्ष्मी पूजा के साथ इस समय को व्यवस्थित करना जरूरी है।
- **तिजोरी का रखरखाव:** तिजोरी या अलमारी में नारियल रखने से पहले उस जगह की सफाई और पूजन आवश्यक है। अपने धन संचय स्थान को पहले से व्यवस्थित कर लें ताकि अनुष्ठान में बाधा न आए।
- **मंत्र पाठ की अवधि:** शाम को 108 बार गोपाल सहस्रनाम के पाठ के लिए अतिरिक्त समय निकालना होगा। इस पाठ को शांतिपूर्वक पूरा करने के लिए शाम के समय का समुचित नियोजन करें।

## ऐसा क्यों हुआ
दीपावली पर्व पर धन, सुख और शांति के आगमन के लिए धार्मिक शास्त्रों और ज्योतिष परंपराओं में विशिष्ट प्रतीकों के उपयोग का विधान है।

- **नारियल का धार्मिक महत्व:** हिंदू धार्मिक मान्यताओं में श्रीफल यानी नारियल को देवी लक्ष्मी और संपन्नता का साक्षात प्रतीक माना जाता है। जटा वाले सूखे नारियल को अक्षुण्ण समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा संचित करने का माध्यम माना गया है।
- **लाल रंग और पंचोपचार:** लाल सूती कपड़ा मंगल और ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि पंचोपचार विधि देवी-देवताओं के प्रति पूर्ण समर्पण दर्शाने का पारंपरिक तरीका है। इन तत्वों के संगम से पूजा स्थल पर आध्यात्मिक वातावरण निर्मित होता है।
- **गोपाल सहस्रनाम का उद्देश्य:** मान्यताओं के अनुसार सहस्रनाम पाठ मन को एकाग्र करने और घर में खुशहाली लाने के उद्देश्य से किया जाता है। दीपावली की शुभ रात्रि पर ऐसे स्तोत्रों की आवृत्ति से सकारात्मक प्रभाव कई गुना बढ़ने की मान्यता है।

## सवाल-जवाब

### 1. दीपावली पर किस प्रकार के नारियल का उपयोग करने का विधान है?
इस उपाय के लिए जटा वाले सूखे नारियल का उपयोग किया जाता है।

### 2. नारियल को सुरक्षित स्थान पर कब रखना चाहिए?
दीपावली से ठीक एक दिन पहले नारियल को साफ और सुरक्षित स्थान पर रखकर मां लक्ष्मी का ध्यान व संकल्प लिया जाता है।

### 3. दीपावली के दिन नारियल को किस समय और कैसे लाया जाता है?
दीपावली की शाम सूर्यास्त के समय नए लाल सूती कपड़े की मदद से नारियल को वापस लाया जाता है।

### 4. घर लाने के बाद नारियल का पूजन किस विधि से किया जाता है?
गणेश जी और लक्ष्मी जी की मूर्ति के पास दीपक जलाकर धूप, दीप, फूल, सुगंध और नैवेद्य से पंचोपचार पूजन किया जाता है।

### 5. पूजा संपन्न होने के बाद नारियल को कहां स्थापित किया जाता है?
लाल कपड़े में लिपटे हुए नारियल को घर की तिजोरी या अलमारी जैसे धन रखने के स्थान पर रखा जाता है।

### 6. दीपावली की शाम को किस पाठ को 108 बार करने का उल्लेख है?
दीपावली की शाम गोपाल सहस्रनाम या संतान गोपाल सहस्रनाम का 108 बार पाठ करना शुभ माना गया है।

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