# दीवारों पर रंगरोगन से नहीं छिपती भीतर की कमजोरी, आगरा के सिविल इंजीनियर ने बताए पुराने मकान की सुरक्षा जांचने के तरीके

> मकान की उम्र और आंतरिक मजबूती जांचने के लिए केवल नया पेंट काफी नहीं होता। निर्माण सामग्री के लैब परीक्षण और समय रहते तकनीकी निरीक्षण से मकान को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

**Type:** article · **Category:** जीवनशैली · **Published:** 2026-09-25 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/lifestyle/divaron-para-rngarogana-se-nahin-chhipati-bhitara-ki-kamajori-agra-ke-sivila-injiniyara-ne-batae-purane-makana-ki-suraksha-janchan-38622 · **Language:** Hindi
**Tags:** मकान सुरक्षा, सिविल इंजीनियरिंग, घर की मरम्मत, स्ट्रक्चरल ऑडिट, आगरा, भवन निर्माण

अक्सर देखा जाता है कि रिहायशी इमारत पुरानी पड़ने पर लोग केवल ऊपर से चूना या पेंट करवाकर तसल्ली कर लेते हैं। वास्तविकता यह है कि चमकदार रंग से इमारत के बुनियादी ढांचे की असल सेहत का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। किसी भी पुराने निर्माण में प्रयुक्त गारे, कंक्रीट और ईंटों का अंदरूनी हाल समझना बेहद जरूरी होता है। अगर घर के किसी हिस्से में दरारें उभर रही हों, सीपेज का असर दिख रहा हो, लोहे की छड़ों पर जंग चढ़ चुकी हो अथवा कोई दीवार एक तरफ झुकने लगी हो, तो इन संकेतों को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है।

## प्रयोगशाला परीक्षण से समझें निर्माण सामग्री का दम
आगरा के सिविल इंजीनियर अजय भदौरिया बताते हैं कि किसी पुराने ढांचे की मौजूदा स्थिति समझने के लिए उसमें लगी सामग्री की वैज्ञानिक जांच कराई जा सकती है। इस प्रक्रिया में किसी तकनीकी जानकार की देखरेख में प्लास्टर, मसाले, प्रयुक्त ईंट और चूने के छोटे-छोटे टुकड़े एकत्र किए जाते हैं। इन सैंपलों को आधुनिक टेस्टिंग लैब भेजा जाता है, जहां इनके भौतिक और रासायनिक गुणों का विश्लेषण कर यह परखा जाता है कि सामग्री का बॉन्डिंग सामर्थ्य कितना शेष रह गया है।

## किफायती बजट में उपलब्ध है टेस्टिंग की सुविधा
अजय भदौरिया के अनुसार आगरा के स्थानीय क्षेत्रों में इस तरह की टेस्टिंग सुविधा काफी किफायती दरों पर सुलभ है। लगभग 5 से 6 हजार रुपये के खर्च में मकान मालिक अपनी दीवारों के कंक्रीट, ईंट और मसाले की वास्तविक शक्ति का ब्योरा प्राप्त कर सकते हैं। ताजनगरी में इसके लिए भगवान टॉकीज के निकट, संजय प्लेस, रोहता तथा शास्त्रीपुरम जैसे इलाकों में स्थित टेस्टिंग लैब्स की सेवाएं ली जा सकती हैं। इन जांचों से मकान के घटकों की सेहत स्पष्ट हो जाती है।

हालांकि, यह ध्यान रखना चाहिए कि केवल लैब रिपोर्ट यह प्रमाणित नहीं कर सकती कि इमारत अगले कितने वर्षों तक खड़ी रहेगी। इसके लिए किसी योग्य स्ट्रक्चरल इंजीनियर द्वारा पूरी बिल्डिंग का प्रत्यक्ष भौतिक निरीक्षण जरूरी होता है। अनुभवी पेशेवर ही यह तय कर सकता है कि बीम, कॉलम या लोड-बेयरिंग दीवारों को अतिरिक्त जैकेटिंग अथवा रेट्रोफिटिंग की दरकार है या नहीं।

## सीलन और दरारों को नजरअंदाज न करें
मकान की छतों से टपकता पानी, प्लास्टर का उखड़ना, छज्जों में लोहे की सरिया का फूलना या दीवारों का संतुलन बिगड़ना खतरे के लक्षण हो सकते हैं। इन विकृतियों को मौसमी खराबी समझकर अनदेखा करने के बजाय तुरंत तकनीकी परामर्श लेना चाहिए। आरंभिक स्तर पर ही फॉल्ट पकड़ में आ जाने से मामूली मरम्मत कराकर बड़ी अनहोनी और बड़े आर्थिक नुकसान दोनों से बचा जा सकता है।

## शुरुआती गुणवत्ता और नियमित देखरेख ही आधार
निर्माण उद्योग में 16 वर्षों का कार्य अनुभव रखने वाले सिविल इंजीनियर अजय भदौरिया का मानना है कि किसी भी भवन का जीवनकाल शुरुआत में इस्तेमाल किए गए मैटेरियल और कारीगरी के स्तर पर निर्भर करता है। नीव भरते समय उम्दा दर्जे की रेत, पुख्ता सरिया, शुद्ध पानी और प्रमाणित सीमेंट का संयोजन अपनाना चाहिए। सही निर्माण तकनीकों का पालन करने पर इमारत साधारणतया 60 वर्ष तक सुगमता से टिकी रह सकती है।

हालांकि, यह कोई पत्थर की लकीर नहीं है। भूगर्भीय स्थिति, वास्तुशिल्प का डिजाइन, स्थानीय मौसम और पानी की निकासी जैसी बातें भी आयु निर्धारण में बड़ी भूमिका निभाती हैं। इसके अलावा हर एक या दो वर्ष के अंतराल पर भवन का पेशेवर मुआयना कराते रहना चाहिए। समय-समय पर छोटे-मोटे रिपेयर या रिनोवेशन कराने से प्लास्टर की दरारें और छत की सीलन बड़े खतरे में नहीं बदलतीं और घर दशकों तक सुरक्षित बना रहता है।

## इसका आप पर असर
मकान की तकनीकी जांच कराने से ढांचागत हादसों की रोकथाम होती है और अनावश्यक खर्च से बचाव होता है।

- **भारत में:** पुराने भवनों में रहने वाले नागरिक मामूली बजट में निर्माण सामग्री की प्रयोगशाला जांच कराकर अनहोनी से बच सकते हैं। इससे उन्हें सही समय पर मरम्मत कराने और घर के सुरक्षित जीवनकाल को बढ़ाने में मदद मिलती है।
- **आगरा में:** स्थानीय निवासी संजय प्लेस, रोहता, शास्त्रीपुरम और भगवान टॉकीज के पास मौजूद टेस्टिंग लैब्स का सीधा लाभ उठा सकते हैं। करीब 5 से 6 हजार रुपये खर्च करके वे अपने मकान की मजबूती का प्रामाणिक ब्योरा हासिल कर सकते हैं।
- **संपत्ति मालिकों के लिए:** छतों में सीलन, दीवार में झुकाव या सरिया में जंग दिखते ही तत्काल सिविल इंजीनियर से संपर्क करना चाहिए। शुरुआती चरण में ही खराबी ठीक करवा लेने से बड़े पुनर्निर्माण का भारी खर्च बच जाता है।
- **नया घर बनाने वालों के लिए:** निर्माण के समय उच्च कोटि की ईंट, सरिया, सीमेंट और बालू का चयन भविष्य के बड़े खर्चों को रोकता है। सही इंजीनियरिंग मानकों के साथ तैयार किया गया मकान लगभग 60 वर्षों तक बिना गंभीर संकट के सुरक्षित रहता है।

## ऐसा क्यों हुआ
घरों के जर्जर होने और अचानक दरारें आने की मुख्य वजह निर्माण सामग्री की प्राकृतिक उम्र, नमी का असर और समय पर देखभाल न होना है।

- **नमी और जंग का असर:** छतों और दीवारों में पानी रिसने से भीतर मौजूद लोहे की सरिया में जंग लग जाती है। सरिया के फूलने से प्लास्टर और कंक्रीट का तालमेल टूट जाता है, जिससे दीवारें कमजोर हो जाती हैं।
- **गुणवत्ताहीन सामग्री का इस्तेमाल:** पुराने निर्माण के दौरान यदि घटिया सीमेंट, कम पकी ईंट या अमानक बालू प्रयुक्त हुआ हो, तो समय के साथ गारे की पकड़ ढीली पड़ जाती है। यह गिरावट लंबे समय बाद बड़ी दरारों के रूप में प्रकट होती है।
- **नियमित जांच की अनदेखी:** मकान बनने के बाद अधिकांश लोग सालों तक कोई तकनीकी मुआयना नहीं कराते। शुरुआती सूक्ष्म दरारें धीरे-धीरे लोड-बेयरिंग ढांचे को अस्थिर कर देती हैं।
- **मौसमी और भूगर्भीय कारक:** तापमान में उतार-चढ़ाव, जमीन की नमी और नींव की मिट्टी का बैठना भी दीवारों के झुकने का कारण बनता है। समय रहते स्ट्रक्चरल इंजीनियर से जांच न कराने पर जोखिम लगातार बढ़ता जाता है।

## सवाल-जवाब

### 1. पुराने मकान की मजबूती जांचने के लिए लैब में किन चीजों का सैंपल लिया जाता है?
विशेषज्ञ की निगरानी में दीवार से मसाले, सीमेंट प्लास्टर, प्रयुक्त ईंट और चूने के नमूने लेकर जांच के लिए लैब भेजे जाते हैं।

### 2. आगरा में मकान की सामग्री जांच कराने में कितना खर्च आता है?
सिविल इंजीनियर अजय भदौरिया के अनुसार आधुनिक लैब्स के जरिए इस जांच में करीब 5 से 6 हजार रुपये का खर्च आता है।

### 3. आगरा में निर्माण सामग्री टेस्टिंग लैब किन इलाकों में स्थित हैं?
आगरा में संजय प्लेस, भगवान टॉकीज के पास, रोहता और शास्त्रीपुरम में ऐसी जांच सुविधाएं उपलब्ध हैं।

### 4. दीवारों में किस तरह के लक्षण दिखने पर तुरंत जांच करानी चाहिए?
दीवारों पर दरारें, छत में लगातार सीलन, सरिया में जंग या दीवार में झुकाव दिखने पर बिना देर किए जांच करानी चाहिए।

### 5. क्या केवल लैब टेस्ट से मकान की कुल उम्र तय की जा सकती है?
नहीं, लैब जांच से सामग्री की मजबूती पता चलती है, लेकिन पूरी सुरक्षा परखने के लिए स्ट्रक्चरल इंजीनियर से समग्र भवन का मुआयना जरूरी है।

### 6. सही सामग्री से बना मकान सामान्यतः कितने वर्षों तक सुरक्षित रहता है?
उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री और सही तकनीक से बना मकान लगभग 60 वर्षों तक टिकाऊ बना रह सकता है, हालांकि यह रखरखाव पर भी निर्भर करता है।

### 7. मकान की स्थिति की जांच कितने समय के अंतराल पर करानी चाहिए?
विशेषज्ञों के अनुसार हर एक से दो साल के अंतराल में घर की तकनीकी स्थिति का मुआयना कराते रहना चाहिए।

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