दूध, पीली सरसों और मेथी के लेप से चेहरे के अनचाहे बालों और रंगत पर क्या असर पड़ता है पार्लर के महंगे ब्यूटी ट्रीटमेंट और केमिकल वाले उत्पादों के विकल्प के तौर पर पारंपरिक देसी उबटन का चलन बढ़ा है। दूध, पीली सरसों और मेथी दाने से बना यह लेप चेहरे की त्वचा को निखारने और फेशियल हेयर की ग्रोथ घटाने में कितना असरदार है, समझें। त्वचा की रंगत संवारने और चेहरे पर दिखने वाले अनचाहे रोएं साफ करने के लिए अक्सर हर महीने या दो महीने के अंतराल पर ब्यूटी पार्लर के चक्कर लगाने पड़ते हैं। अपर लिप्स की थ्रेडिंग करवानी हो, चेहरे के अतिरिक्त बाल हटाने हों या फिर ग्लो पाने के लिए फेशियल कराना हो, इन सब ब्यूटी प्रक्रियाओं में वक्त और पैसे दोनों का भारी खर्च होता है। इसके साथ ही बाजार में मिलने वाले कई सौंदर्य प्रसाधनों में तेज रसायनों का इस्तेमाल होता है, जो हर तरह की त्वचा को रास नहीं आते। ऐसे में सैलून के खर्चों से बचने और केमिकल के दुष्प्रभावों से दूर रहने के लिए कई लोग प्राकृतिक व पारंपरिक घरेलू उपचारों का सहारा लेते हैं। इन्हीं नुस्खों में मेथी, पीली सरसों और गाय के दूध से तैयार किया जाने वाला लेप काफी चर्चा में रहता है, जिसे लेकर दावा किया जाता है कि यह चेहरे पर चमक लाने के साथ बालों की बढ़त को धीमा कर सकता है। पारंपरिक उबटन तैयार करने के लिए जरूरी चीजें इस घरेलू उबटन को बनाने के लिए घर की रसोई में आसानी से मिलने वाली तीन प्राथमिक सामग्रियों की आवश्यकता होती है। इनमें गाय का ताजा दूध, पीली सरसों के दाने और मेथी दाना शामिल हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में गाय का दूध बहुत सुलभता से उपलब्ध हो जाता है, जबकि शहरी रसोईघरों में भी सरसों और मेथी रोजमर्रा के मसालों में शामिल रहते हैं। इन तीनों प्राकृतिक घटकों का पारंपरिक रूप से त्वचा की देखभाल में इस्तेमाल होता रहा है और जब इन्हें सही अनुपात में मिलाया जाता है, तो यह एक गाढ़ा हर्बल लेप बन जाता है। पेस्ट बनाने और लगाने की सही विधि इस घरेलू नुस्खे को तैयार करने की प्रक्रिया रात से ही शुरू हो जाती है। इसके लिए पीली सरसों और मेथी के दानों को रातभर के लिए पानी में भिगोकर रख दिया जाता है, जिससे वे पूरी तरह फूलकर मुलायम हो जाएं। अगली सुबह भीगे हुए मेथी और सरसों के दानों से पानी अलग करके उन्हें गाय के दूध के साथ मिक्सर में डालकर अच्छी तरह बारीक पीस लिया जाता है। इस तरह एक चिकना और गाढ़ा पेस्ट बनकर तैयार हो जाता है। तैयार लेप को चेहरे, गर्दन या शरीर के उन हिस्सों पर लगाया जाता है जहां अनचाहे बाल या रूखापन अधिक हो। इसे त्वचा पर लगाकर कुछ समय के लिए छोड़ दिया जाता है ताकि मिश्रण के पोषक तत्व त्वचा पर असर कर सकें। जब पेस्ट हल्का सूखने लगे, तब इसे सादे पानी से धोकर साफ कर लिया जाता है। उपयोग की आवृत्ति और किए जाने वाले दावे इस देसी लेप के नियमित उपयोग को लेकर बताया जाता है कि इसे महीने में चार से पांच बार आजमाया जा सकता है। ऐसा माना जाता है कि गाय का दूध त्वचा को नमी और पोषण देकर प्राकृतिक चमक पैदा करता है, जबकि मेथी और सरसों का संयोजन त्वचा को गहराई से साफ करता है। इसके लगातार प्रयोग से चेहरे की रंगत में सुधार होने और अतिरिक्त बालों की विकास दर धीरे-धीरे कम होने की बात कही जाती है। सावधानी और त्वचा विशेषज्ञों की राय घरेलू नुस्खों का असर हर व्यक्ति की त्वचा की बनावट पर निर्भर करता है। यह समझना बेहद आवश्यक है कि इस तरह के देसी लेप से चेहरे के बालों के स्थायी रूप से खत्म होने की कोई वैज्ञानिक गारंटी नहीं होती है। प्राकृतिक सामग्री होने के बावजूद कुछ लोगों की त्वचा पर सरसों या मेथी से जलन या एलर्जी की समस्या हो सकती है। इसलिए इस पेस्ट को पूरे चेहरे पर लगाने से पहले त्वचा के किसी छोटे हिस्से पर पैच टेस्ट करना अनिवार्य है। विशेष रूप से संवेदनशील त्वचा वाले व्यक्तियों को किसी भी तरह का घरेलू प्रयोग शुरू करने से पहले स्किन एक्सपर्ट या डर्मेटोलॉजिस्ट से परामर्श जरूर लेना चाहिए। इसका आप पर असर इस घरेलू नुस्खे को अपनाने से महंगे ब्यूटी पार्लर के फेरों और केमिकल उत्पादों के खर्च में उल्लेखनीय कमी आ सकती है। • पार्लर के खर्च पर बचत: थ्रेडिंग और फेशियल के लिए हर महीने या दो महीने में सैलून जाने की मजबूरी घट सकती है। इससे जेब पर पड़ने वाला नियमित आर्थिक बोझ कम होगा। • केमिकल से त्वचा की सुरक्षा: बाजार के ब्लीच और हेयर रिमूवल क्रीम के दुष्प्रभावों से बचा जा सकता है। संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को एलर्जी के जोखिम से राहत मिलेगी। • इस्तेमाल का तय समय: इस नुस्खे को महीने में केवल चार से पांच बार ही लगाने की सलाह दी गई है। इसे रातभर भिगोने के बाद अगली सुबह ताजा पीसकर लगाना होता है। • पैच टेस्ट की अनिवार्यता: चेहरे पर लगाने से पहले हाथ या गर्दन के छोटे हिस्से पर परीक्षण करना आवश्यक है। किसी भी तरह की जलन या लालिमा दिखने पर प्रयोग तुरंत रोक देना चाहिए। ऐसा क्यों हुआ अक्सर पार्लर में थ्रेडिंग कराने में होने वाले दर्द, महंगे बिल और कॉस्मेटिक उत्पादों में मौजूद तेज रसायनों की वजह से लोग प्राकृतिक विकल्पों की तलाश करते हैं। पारंपरिक भारतीय रसोई में इस्तेमाल होने वाले अवयव त्वचा को पोषण देने के लिए लंबे समय से जाने जाते हैं। • केमिकल और खर्च से बचाव की जरूरत: पार्लर के ट्रीटमेंट में बार-बार पैसे खर्च होते हैं और कई कॉस्मेटिक्स में सिंथेटिक तत्व होते हैं। इनसे बचने के लिए घरेलू सामग्रियों का उपयोग एक सुरक्षित और किफायती विकल्प माना जाता है। • पारंपरिक अवयवों के प्राकृतिक गुण: गाय के दूध को नमी प्रदान करने और त्वचा की रंगत सुधारने के लिए उपयोगी माना जाता है। वहीं मेथी और पीली सरसों के मिश्रण का उबटन की तरह इस्तेमाल प्राचीन सौंदर्य परंपराओं का हिस्सा रहा है। • वैज्ञानिक पुष्टि का अभाव: त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार इस लेप से फेशियल हेयर पूरी तरह हमेशा के लिए समाप्त होने का कोई प्रामाणिक चिकित्सकीय आधार नहीं है। इसलिए संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को विशेषज्ञ की राय लेने की हिदायत दी जाती है। सवाल-जवाब 1. इस घरेलू पेस्ट को तैयार करने के लिए कौन सी सामग्री चाहिए? इस नुस्खे के लिए गाय का दूध, पीली सरसों के दाने और मेथी दाना की जरूरत होती है। 2. मेथी और सरसों को पेस्ट बनाने से पहले कैसे तैयार किया जाता है? मेथी और सरसों को रातभर साफ पानी में भिगोकर रखा जाता है और अगली सुबह दूध के साथ पीसा जाता है। 3. इस लेप को महीने में कितनी बार लगाने की सलाह दी जाती है? इस घरेलू लेप को महीने में चार से पांच बार चेहरे और गर्दन पर इस्तेमाल करने की बात कही गई है। 4. क्या यह लेप चेहरे के अनचाहे बालों को स्थायी रूप से खत्म कर देता है? नहीं, इस नुस्खे से चेहरे के बालों के स्थायी रूप से खत्म होने की कोई वैज्ञानिक गारंटी नहीं है। 5. पेस्ट को चेहरे पर लगाने से पहले क्या सावधानी बरतनी चाहिए? पेस्ट को पूरे चेहरे पर लगाने से पहले पैच टेस्ट करना चाहिए और संवेदनशील त्वचा वालों को डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। https://trendkia.com/lifestyle/dudha-pili-sarason-aura-methi-ke-lepa-se-chehare-ke-anachahe-balon-aura-rngata-para-kya-asara-parata-hai-36790 TrendKia — Har trend, sabse pehle.