दुर्गा पूजा के उपवास में कमजोरी से बचना है तो अपनाएं पोषण और दिनचर्या के ये जरूरी नियम नवरात्रि के नौ दिनों के उपवास में ऊर्जावान बने रहने के लिए तरल पदार्थों का सेवन, पोषक तत्वों से भरपूर फलाहार और पर्याप्त नींद बेहद अहम हैं। शारदीय अथवा चैत्र नवरात्रि का समय मां दुर्गा की उपासना, मानसिक एकाग्रता और आत्मशुद्धि का पावन पर्व माना जाता है। पूरे नौ दिनों तक चलने वाले इस अनुष्ठान में देश भर के लाखों श्रद्धालु श्रद्धाभाव से व्रत का संकल्प लेते हैं। लंबे समय तक सामान्य अन्न त्यागने और उपवास करने से शरीर की सामान्य जैविक घड़ी और पाचन क्रिया में अचानक बदलाव आता है। अगर इस दौरान खानपान और दिनचर्या के प्रति सावधानी न बरती जाए, तो शरीर में सुस्ती, कमजोरी और निर्जलीकरण की समस्या पैदा हो सकती है। धार्मिक नियमों का सम्मान करते हुए सही पोषण चुनने से आध्यात्मिक शांति और शारीरिक तंदुरुस्ती दोनों एक साथ हासिल की जा सकती हैं। भरपूर तरल पदार्थों से बनाए रखें शरीर की नमी उपवास की अवधि में सबसे पहली प्राथमिकता शरीर को निर्जलीकरण से बचाना होना चाहिए। लंबे अंतराल तक भोजन न करने पर अक्सर लोग पानी पीना भी भूल जाते हैं, जिससे सिरदर्द और चक्कर आने जैसी दिक्कतें शुरू हो जाती हैं। दिनभर नियमित अंतराल पर सादा पानी पीते रहना बेहद अनिवार्य है। यदि आपके व्रत के नियम और व्यक्तिगत परंपराएं छूट देती हैं, तो सादे पानी के अलावा नारियल पानी, ताजी छाछ और नींबू पानी को भी अपनी दिनचर्या में जोड़ें। ये प्राकृतिक पेय शरीर में जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स की भरपाई करते हैं, मांसपेशियों की कार्यक्षमता बनाए रखते हैं और दिनभर ताजगी का अहसास कराते हैं। आलू और तली चीजों के बजाय पोषक विकल्पों का चयन व्रत के दौरान अधिकांश लोग सिर्फ उबले या तले हुए आलू पर निर्भर हो जाते हैं, जो पोषण के लिहाज से अधूरा भोजन है। इसके स्थान पर संतुलित थाली तैयार करने के लिए कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा, साबूदाना और भुना हुआ मखाना भोजन में शामिल करना चाहिए। इन पारंपरिक अनाजों और बीजों में प्रचुर मात्रा में जटिल कार्बोहाइड्रेट्स और मिनरल्स होते हैं। इनके साथ ताजा दही और सीमित मात्रा में सूखे मेवे जैसे बादाम और अखरोट खाने से शरीर को लगातार ऊर्जा मिलती रहती है और आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी भी नहीं होती। फलों का नियमित सेवन पाचन को रखेगा दुरुस्त फलाहार को व्रत का अनिवार्य हिस्सा बनाना स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से अत्यंत लाभकारी है। अपनी दैनिक खुराक में केला, सेब, अनार, पपीता और अमरूद जैसे ताजे मौसमी फल जरूर शामिल करें। इन फलों से शरीर को प्रचुर मात्रा में विटामिन, खनिज लवण और प्राकृतिक फाइबर प्राप्त होते हैं। फाइबर की मौजूदगी से पाचन तंत्र सुचारु रूप से काम करता है, कब्ज की शिकायत नहीं होती और रक्त में ऊर्जा का प्रवाह पूरे दिन एक समान बना रहता है। तले-भुने और भारी पकवानों से बनाएं दूरी उपवास के नाम पर बाजार में मिलने वाले अत्यधिक तैलीय और तीखे फलाहारी व्यंजनों का सेवन करने से बचना चाहिए। बहुत ज्यादा घी या तेल में बनी पूरियां और पकौड़े खाने से पेट में गैस, खट्टी डकारें, सीने में जलन और अपच की गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं। सात्विक व्रत का वास्तविक उद्देश्य शरीर को हल्का और शुद्ध रखना है, इसलिए कम तेल में तैयार सुपाच्य और सादा भोजन ही सबसे उत्तम विकल्प है। व्यस्त दिनचर्या और दफ्तर के काम के बीच खानपान कामकाजी लोगों को व्रत के दौरान अपने खाने के समय का विशेष ध्यान रखना चाहिए। भोजन के बीच बहुत लंबा खाली समय रखने से अचानक थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है। अपने साथ थोड़े भुने मखाने, सूखे मेवे या कटे हुए फल रखें और थोड़ी-थोड़ी देर में इनका सेवन करते रहें। इस आदत से रक्त में शर्करा का स्तर स्थिर बना रहता है और काम के घंटों के दौरान ऊर्जा का स्तर गिरता नहीं है। पर्याप्त विश्राम और सात से आठ घंटे की नींद खानपान के साथ-साथ शरीर को उचित आराम देना भी उपवास का एक अनिवार्य पहलू है। नींद पूरी न होने की स्थिति में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता घट सकती है और थकान का स्तर दोगुना हो जाता है। उपवास के दिनों में कम से कम 7 से 8 घंटे की गहरी नींद अवश्य लें, जिससे मांसपेशियां खुद को पुनर्जीवित कर सकें। दीर्घकालिक बीमारियों में चिकित्सीय परामर्श जरूरी डायबिटीज, उच्च रक्तचाप या किसी अन्य पुरानी बीमारी से ग्रस्त मरीजों को बिना डॉक्टर की सलाह के उपवास शुरू नहीं करना चाहिए। अपनी दवाओं के समय और खानपान के संयोजन में उचित संशोधन करके ही सुरक्षित रूप से व्रत का पालन किया जाना चाहिए। सही योजना और संयम के साथ उपवास करने से मां दुर्गा की आराधना का यह पर्व स्वास्थ्य और भक्ति दोनों का सुखद अनुभव बन जाता है। इसका आप पर असर नवरात्रि के नौ दिनों के उपवास के दौरान सही खानपान और दिनचर्या अपनाने से शरीर में कमजोरी, डिहाइड्रेशन और एसिडिटी जैसी आम दिक्कतों से पूरी तरह बचा जा सकता है। • दैनिक ऊर्जा स्तर: तले हुए आलू के बजाय कुट्टू, मखाना और फल खाने से पूरे दिन ब्लड शुगर स्थिर रहता है। इससे कामकाजी लोगों को दोपहर या शाम के समय अचानक थकान और चक्कर आने की समस्या नहीं होती। • पाचन स्वास्थ्य: अत्यधिक चिकनाई वाले फलाहारी पकवानों से परहेज करने पर पेट में गैस और अपच की शिकायत नहीं होती। हल्का और फाइबर युक्त भोजन पेट को हल्का रखकर पाचन तंत्र को दुरुस्त बनाए रखता है। • पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स: नियमित पानी के साथ नारियल पानी और छाछ पीने से शरीर में पानी की कमी नहीं होती। यह आदत दिनभर सिरदर्द और सुस्ती को दूर रखकर ताजगी बनाए रखती है। • क्रोनिक बीमारियों वाले मरीज: डायबिटीज और ब्लड प्रेशर से पीड़ित लोगों को डॉक्टर से दवा और डाइट का शेड्यूल तय करवाना चाहिए। समय पर चिकित्सीय सलाह लेने से ब्लड शुगर में अचानक गिरावट जैसे खतरों से बचाव होता है। ऐसा क्यों हुआ उपवास के दौरान आहार के स्वरूप और समय में होने वाला अचानक बदलाव शरीर के चयापचय और ऊर्जा आपूर्ति प्रणाली को गहराई से प्रभावित करता है। • कार्बोहाइड्रेट का अचानक घटना: नियमित अनाज बंद होने पर शरीर अचानक ऊर्जा के लिए त्वरित स्रोतों पर निर्भर हो जाता है। अगर स्वस्थ जटिल कार्बोहाइड्रेट्स न लिए जाएं, तो ऊर्जा स्तर में तीव्र गिरावट आती है। • अत्यधिक तैलीय खानपान: व्रत में कई लोग दिनभर भूखे रहकर शाम को तली पूरियां या पकौड़े खा लेते हैं। खाली पेट अत्यधिक वसा जाने से पित्त और एसिडिटी की समस्या अचानक भड़क उठती है। • तरल पदार्थों की अनदेखी: भोजन न करने की स्थिति में लोग अक्सर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी भूल जाते हैं। शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बिगड़ने से सिरदर्द, कमजोरी और मांसपेशियों में ऐंठन होने लगती है। • नींद में कमी का प्रभाव: धार्मिक कार्यक्रमों और पूजा-पाठ के चलते दिनचर्या बिगड़ने से नींद अधूरी रह जाती है। कम नींद से कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ता है, जो शारीरिक थकान को और गंभीर बना देता है। सवाल-जवाब 1. नवरात्रि के उपवास में कमजोरी से बचने के लिए क्या पीना चाहिए? दिनभर पर्याप्त सादे पानी के अलावा नारियल पानी, ताजी छाछ और नींबू पानी पीना चाहिए ताकि शरीर में जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स बने रहें। 2. व्रत के दौरान किन पारंपरिक अनाजों और बीजों को भोजन में शामिल करना चाहिए? आहार में कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा, साबूदाना, भुना हुआ मखाना, दही और सूखे मेवे शामिल करने से भरपूर ऊर्जा मिलती है। 3. पाचन क्रिया को स्वस्थ रखने के लिए कौन से फल सबसे अच्छे माने जाते हैं? केला, सेब, अनार, पपीता और अमरूद खाने से शरीर को विटामिन, मिनरल और फाइबर मिलते हैं, जिससे पाचन ठीक रहता है। 4. उपवास के समय तली-भुनी चीजों से परहेज क्यों करना चाहिए? अत्यधिक तेल और मसालों से बने पकवान खाने से पेट में गैस, अपच, खट्टी डकारें और सीने में जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। 5. कामकाजी लोगों को व्रत के दौरान खानपान का ध्यान कैसे रखना चाहिए? लंबे समय तक भूखे रहने के बजाय थोड़े-थोड़े अंतराल पर मखाना, सूखे मेवे या फल खाते रहना चाहिए ताकि ब्लड शुगर संतुलित रहे। 6. व्रत रखने वालों के लिए प्रतिदिन कितने घंटे की नींद लेना जरूरी है? शरीर की मांसपेशियों को आराम देने और कमजोरी से बचने के लिए हर रात कम से कम 7 से 8 घंटे की नींद जरूर लेनी चाहिए। 7. डायबिटीज या बीपी के मरीजों को व्रत रखने से पहले क्या सावधानी बरतनी चाहिए? क्रोनिक बीमारियों से जूझ रहे लोगों को उपवास शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लेकर दवाओं और डाइट का तालमेल बनाना चाहिए। https://trendkia.com/lifestyle/durga-puja-ke-upwas-mein-kamzori-se-bachna-hai-to-apnayein-poshan-aur-dincharya-ke-ye-zaroori-niyam-45814 TrendKia — Har trend, sabse pehle.