गमले में सूखते गेंदे के पौधे को फिर से हरा-भरा बनाने के छह आसान तरीके अगर आपके गमले में लगा गेंदे का पौधा मुरझाने लगा है और कलियां झड़ने लगी हैं, तो सही धूप, संतुलित सिंचाई, खाद और सूखी कलियों की छंटाई से उसे दोबारा लहलहाया जा सकता है। मौसम बदलने पर अक्सर बालकनी या बगीचे के गमलों में लगे गेंदे के पौधे सूखने लगते हैं। जब पत्तियां पीली पड़ जाएं, टहनियां झुकने लगें या कलियां खिलने से पहले ही गिरने लगें, तो यह साफ संकेत होता है कि पौधे की बुनियादी जरूरतें पूरी नहीं हो पा रही हैं। ऐसे समय में थोड़ी सी समझदारी और सही देखभाल से मुरझा रहे पौधे को पूरी तरह नया जीवन दिया जा सकता है। सिंचाई का सही तरीका और मिट्टी की जांच मौसम के उतार-चढ़ाव में गेंदे को सबसे ज्यादा नुकसान जरूरत से ज्यादा पानी देने की वजह से होता है। अगर आप नियमित तौर पर बिना जरूरत के गमले में पानी डालते रहेंगे, तो मिट्टी में नमी बढ़ जाएगी और जड़ें गलने लगेंगी। पानी देने से पहले हमेशा उंगली डालकर मिट्टी की ऊपरी सतह की जांच करें। जब मिट्टी की ऊपरी परत छूने पर पूरी तरह सूखी महसूस हो, तभी गमले में पानी डालें। इससे जड़ों तक हवा पहुंचती रहती है और फंगस या सड़न की समस्या पैदा नहीं होती। धूप की जरूरत और गमले की सही जगह गेंदे के स्वस्थ विकास और भरपूर कलियों के लिए पर्याप्त धूप मिलना बेहद जरूरी होता है। इस पौधे को हर दिन कम से कम 4 से 5 घंटे की सीधी धूप की जरूरत होती है। यदि आपका गमला किसी ऐसी छांव वाली जगह या बालकनी के कोने में रखा है जहां धूप नहीं पहुंचती, तो पौधे की पत्तियां पीली होने लगेंगी और विकास रुक जाएगा। गमले को फौरन उठाकर किसी खुली छत या सीधी रोशनी वाली जगह पर रख दें ताकि पौधे को रोज जरूरी धूप मिलती रहे। संतुलित पोषण, जैविक खाद और कम्पोस्ट गेंदे के पौधे को अच्छी तरह बढ़ने और नई शाखाएं निकालने के लिए नियमित पोषण की जरूरत होती है। हर महीने में एक बार गमले की मिट्टी में अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या जैविक खाद जरूर मिलाएं। इसके अतिरिक्त सरसों की खली का पतला घोल बनाकर डालना या कम्पोस्ट का इस्तेमाल करना भी फायदेमंद रहता है। यह संतुलित खाद पौधे को जरूरी तत्व देती है, जिससे उसमें तेजी से नई कोंपलें फूटती हैं और बड़े आकार के फूल खिलते हैं। डेडहेडिंग यानी सूखे फूलों की छंटाई गेंदे को लंबे समय तक हरा-भरा और फूलों से लदा रखने के लिए पुराने फूलों को हटाना बहुत जरूरी होता है। पौधे पर जब फूल सूखने लगें, तो उन्हें कैंची या हाथ से तोड़कर अलग कर दें। इस प्रक्रिया को डेडहेडिंग कहा जाता है। सूखे फूल लगे रहने से पौधा अपनी पूरी ऊर्जा बीज बनाने में खर्च करने लगता है। सूखे फूलों को हटाते ही पौधे की सारी ताकत नई शाखाएं विकसित करने और नई कलियां बनाने में लगने लगती है। कीटों से बचाव और नीम तेल का छिड़काव तापमान और नमी में बदलाव के साथ ही गेंदे के पौधे पर एफिड्स और छोटे कीड़ों का हमला तेजी से होता है। यह कीट आमतौर पर पत्तियों के नीचे और नई कोमल शाखाओं का रस चूसते हैं, जिससे पत्तियां मुड़ने लगती हैं। नियमित रूप से पत्तियों के निचले हिस्से और नई कोंपलों को देखते रहें। संक्रमण के शुरुआती लक्षण दिखते ही नीम के तेल से बने स्प्रे का छिड़काव करें। यह छिड़काव हमेशा उत्पाद पर लिखे निर्देशों के अनुसार सही मात्रा में ही करना चाहिए। मौसम के उतार-चढ़ाव से पौधों का बचाव लगातार छाए बादल, मूसलाधार बारिश, तेज धूप या तापमान में अचानक बदलाव पौधे को तनाव में डाल देता है। भारी बारिश के दिनों में गमलों को ऐसी सुरक्षित जगह रखें जहां जलभराव की स्थिति न बने और अतिरिक्त पानी तुरंत बाहर निकल जाए। बारिश थमने के बाद जब तेज धूप निकले, तो पौधे को खुली धूप में रखें ताकि मिट्टी सूख सके। इन जरूरी सावधानियों से पौधा फिर से पूरी तरह स्वस्थ हो जाता है। इसका आप पर असर घर के गमलों में फूलदार पौधे उगाने वाले लोगों के लिए यह खबर पौधों को सूखने से बचाने और बिना किसी अतिरिक्त खर्च के उनकी उम्र बढ़ाने के आसान उपाय बताती है। • सिंचाई का संतुलन: अधिक पानी देने से जड़ों के गलने का खतरा तुरंत रुकता है। मिट्टी की ऊपरी सतह सूखने पर ही पानी देकर आप पौधे को फंगस और सड़ांध से बचा सकते हैं। • धूप और स्थान चयन: पौधे को हर दिन 4 से 5 घंटे की सीधी धूप मिलने से कलियों का झड़ना बंद होता है। बालकनी के अंधेरे कोने से निकालकर खुले स्थान पर रखने से पौधा नई पत्तियां निकालने लगता है। • छंटाई और पोषण: सूखे फूलों की नियमित डेडहेडिंग से पौधे की ऊर्जा बीज बनने में नष्ट नहीं होती। महीने में एक बार सड़ी गोबर की खाद या कम्पोस्ट डालने से फूल बड़े और घने आते हैं। • कीट नियंत्रण: नीम तेल के समय पर इस्तेमाल से महंगे रासायनिक कीटनाशकों का खर्च बचता है। शुरुआती अवस्था में ही एफिड्स को रोककर पूरे पौधे को सूखने से बचाया जा सकता है। ऐसा क्यों हुआ मौसम में अचानक होने वाले बदलाव, अनुचित सिंचाई और गलत स्थान चयन के कारण गमले में लगे गेंदे के पौधे सूखने और मुरझाने लगते हैं। • अत्यधिक नमी और जड़ों का गलना: बदलते तापमान में रोजाना पानी देने से गमले में जलभराव हो जाता है। मिट्टी में हवा का प्रवाह रुकने से जड़ें सड़ जाती हैं और पौधा मुरझाने लगता है। • धूप की कमी: गेंदे को उचित प्रकाश संश्लेषण और कलियां बनाने के लिए भरपूर सीधी धूप चाहिए। पर्याप्त धूप न मिलने पर पत्तियां पीली पड़ जाती हैं और फूल झड़ जाते हैं। • बीज निर्माण में ऊर्जा का खर्च: पौधे पर सूखे फूल लगे रहने से वह नई कलियों की जगह बीज बनाने लगता है। नियमित छंटाई न होने से नए फूलों का आना बंद हो जाता है। • तापमान में उतार-चढ़ाव और कीट: नमी और मौसम में बदलाव के कारण एफिड्स जैसे कीट नई पत्तियों का रस चूस लेते हैं। भारी बारिश या अचानक तेज धूप से पौधे पर अत्यधिक तनाव पड़ता है। सवाल-जवाब 1. गेंदे के पौधे को दिन में कितने घंटे धूप की जरूरत होती है? गेंदे के पौधे को रोजाना कम से कम 4 से 5 घंटे की सीधी धूप मिलनी चाहिए ताकि उसमें अच्छी तरह फूल खिल सकें। 2. गमले में पानी कब देना चाहिए? जब गमले की मिट्टी की ऊपरी परत छूने पर सूखी महसूस हो, तभी पानी दें। जरूरत से ज्यादा पानी देने से जड़ें सड़ सकती हैं। 3. डेडहेडिंग क्या है और यह क्यों जरूरी है? सूखे और मुरझाए फूलों को पौधे से तोड़कर हटाना डेडहेडिंग कहलाता है। इससे पौधे की ऊर्जा बीज बनाने की जगह नई कलियां विकसित करने में लगती है। 4. गेंदे के पौधे के लिए कौन सी खाद सबसे अच्छी होती है? महीने में एक बार जैविक खाद या सड़ी हुई गोबर की खाद डालना सबसे अच्छा रहता है। इसके अलावा सरसों की खली का घोल या कम्पोस्ट भी दिया जा सकता है। 5. कीटों और एफिड्स से गेंदे के पौधे को कैसे बचाएं? पत्तियों के नीचे और नई टहनियों की नियमित जांच करें। संक्रमण दिखने पर उत्पाद के निर्देशानुसार नीम तेल के स्प्रे का छिड़काव करें। https://trendkia.com/lifestyle/gamale-men-sukhate-marigold-ke-paudhe-ko-phira-se-hara-bhara-banane-ke-chhaha-asana-tarike-34568 TrendKia — Har trend, sabse pehle.