गमले में उगे अनार का पौधा होगा फलों से लबालब, जानिए मिट्टी तैयार करने से लेकर फूल झड़ने से रोकने के असरदार उपाय घर की छत या बालकनी में गमले के अंदर अनार उगाने का सही तरीका, मिट्टी का संतुलन, जैविक खाद का मिश्रण और फूलों को झड़ने से बचाने वाले स्पेशल स्प्रे का पूरा गाइड। घर के आंगन, बालकनी या छत पर ताजे और रसीले फल उगाना हर गार्डनिंग प्रेमी की चाहत होती है। आम, अमरूद और नींबू की तरह अनार भी भारतीय घरों में खूब पसंद किया जाने वाला फलदार पौधा है। अनार न केवल बेहद स्वादिष्ट और पौष्टिक होता है, बल्कि सही देखभाल मिले तो यह छोटे गमले में भी गुच्छों में फल दे सकता है। अगर आप अपने घर में अनार का पौधा लगाने का मन बना रहे हैं, तो इसके लिए मानसून यानी जुलाई से सितंबर का महीना या फिर वसंत ऋतु यानी फरवरी से मार्च का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस दौरान वातावरण का तापमान पौधे की तेजी से बढ़वार और जड़ों के फैलाव के अनुकूल होता है। हालांकि, अक्सर लोगों की शिकायत होती है कि उनके पौधे में फूल तो आते हैं पर वे फल बनने से पहले ही गिर जाते हैं या पौधा बढ़ता ही नहीं है। सही किस्म के चयन से लेकर घर पर तैयार किए जाने वाले खास स्प्रे तक, यहाँ जानिए अनार के पौधे से भरपूर पैदावार लेने की पूरी प्रक्रिया। पौधे का चुनाव और गमले का सही आकार अनार का पौधा लगाते समय सबसे पहली और महत्वपूर्ण बात यह है कि कभी भी बीज से तैयार पौधा न लगाएं। बीज से उगे पौधे में फल आने में सालों लग जाते हैं और इस बात की भी कोई गारंटी नहीं होती कि उसमें अच्छे फल आएंगे या नहीं। इसके बजाय हमेशा किसी प्रमाणित नर्सरी से कलम यानी ग्राफ्टेड पौधा ही खरीदें। ग्राफ्टेड पौधे छोटे कद के होने के बावजूद बहुत जल्दी और बहुतायत में फल देना शुरू कर देते हैं। अगर किस्मों की बात करें, तो घरेलू गार्डनिंग के लिए सोलापुर लाल, सुपर भगवा, भगवा सिंदूरी, कंधारी और गणेश जैसी किस्में सबसे बेहतरीन मानी जाती हैं। अनार की मजबूत जड़ों के विकास के लिए कम से कम 16 इंच का गमला या ग्रो बैग चुनें। गमले की तली में 2 से 3 निकास छिद्र जरूर बनाएं ताकि सिंचाई का अतिरिक्त पानी आसानी से बाहर निकल सके और जड़ें सड़ने से बची रहें। मिट्टी का उपजाऊ मिश्रण और पोषण प्रबंधन अनार के पौधे की अच्छी ग्रोथ के लिए उसकी मिट्टी का पोषक तत्वों से भरपूर होना बेहद जरूरी है। पॉटिंग मिक्स तैयार करते समय 50% सामान्य बगीचे की मिट्टी, 30% अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मीकम्पोस्ट और 20% महीन रेत या बालू को आपस में मिला लें। इस मिट्टी को पोषण से समृद्ध बनाने और नाइट्रोजन, फॉस्फोरस तथा पोटेशियम (NPK) की पूर्ति के लिए इसमें कुछ विशेष प्राकृतिक चीजें मिलाएं। इस मिश्रण में 300 ग्राम नीम की खली, 200 ग्राम सरसों की खली, 500 ग्राम मार्बल स्टोन डस्ट या कैल्शियम पाउडर और ट्राइकोडर्मा संजीवनी मिलाएं। ट्राइकोडर्मा एक बेहतरीन जैविक फंगीसाइड का काम करता है जो जड़ों को फफूंद जनित रोगों से सुरक्षा देता है। इस तैयार पॉटिंग मिक्स को गमले में भरकर पौधे को रोपें और पहली बार में अच्छी तरह गहराई तक पानी दें। कटाई-छंटाई और नियमित रखरखाव अनार के पौधे की देखभाल के लिए हर महीने गमले की हल्की निराई-गुड़ाई करना और उसमें खाद डालना बहुत जरूरी है। ग्राफ्टेड पौधों की खासियत होती है कि वे तेजी से बढ़ते हैं, लेकिन उनके मुख्य तने के निचले हिस्से से कई अनचाही छोटी शाखाएं निकलने लगती हैं। इन निचली शाखाओं को तुरंत छांटकर हटा दें। अनार का पौधा अत्यधिक झाड़ीदार नहीं होना चाहिए, क्योंकि अगर पौधे की ऊर्जा निचली शाखाओं में खत्म होगी तो फल कम आएंगे। पौधे के ऊपरी हिस्से में जितनी ज्यादा स्वस्थ शाखाएं निकलेंगी, उतने ही अधिक फूल खिलेंगे। अनार को आयरन और कैल्शियम की अत्यधिक आवश्यकता होती है। इसके लिए साल में दो बार मिट्टी में स्टोन पाउडर, नीम खली और जैविक आयरन का प्रयोग करें। आप बाजार से फ्रूटिंग प्लांट मिक्स भी ला सकते हैं जिसमें जस्ता, लोहा और फॉस्फोरस जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व मौजूद होते हैं। बड़े गमले के लिए साल में एक बार लगभग एक किलोग्राम संतुलित खाद देना पर्याप्त होता है। फूल झड़ने की समस्या और परागण बढ़ाने का घरेलू नुस्खा गार्डनर्स के सामने सबसे बड़ी चुनौती अनार के फूलों का झड़ना होती है। दरअसल, अनार के पौधे में तीन प्रकार के फूल आते हैं—नर फूल, मादा फूल और द्विलिंगी फूल। इसमें से नर फूल स्वाभाविक रूप से खिलने के बाद झड़ जाते हैं और केवल मादा या द्विलिंगी फूल ही फल में बदलते हैं। इसके अलावा, सही ढंग से परागण यानी पॉलिनेशन न होना भी फूल गिरने का मुख्य कारण है। यदि आपकी बालकनी या छत पर अन्य फूल वाले पौधे मौजूद नहीं हैं, तो तितलियां और मधुमक्खियां वहां नहीं आतीं, जिससे परागण नहीं हो पाता। इस समस्या को दूर करने के लिए आप घर पर ही एक खास जैविक स्प्रे तैयार कर सकते हैं। इसके लिए 5 Liter पानी लें और उसमें 50 Gram गुड़, 50 mL दही, 5 Gram दालचीनी पाउडर तथा 2 mL शहद अच्छी तरह मिला लें। इस घोल को 4 से 5 दिनों के लिए किसी छायादार जगह पर रख दें। इसके बाद घोल को छानकर स्प्रे बोतल में भरें और पौधे पर छिड़काव करें। यह स्प्रे मित्र कीटों को आकर्षित करता है और परागण की गति बढ़ाकर भरपूर फल सेट करने में मदद करता है। फरवरी और मार्च के लिए विशेष उर्वरक खुराक वसन्त ऋतु का आगमन यानी फरवरी और मार्च का समय अनार के पौधे के लिए नया जीवन लेकर आता है। इस मौसम में पौधे में नई कलियां और फूल बनने शुरू होते हैं। इस समय पौधे को अतिरिक्त ऊर्जा देने के लिए एक विशेष खाद मिश्रण तैयार करें। सबसे पहले गमले की मिट्टी की गहराई से गुड़ाई कर लें और उसे 1 से 2 दिनों के लिए धूप लगने के लिए छोड़ दें। इसके बाद 100 Gram सरसों की खली, 50 Gram बायोजाइम या सीवीड फर्टिलाइजर, 50 Gram नीम की खली और 50 Gram कैल्शियम नाइट्रेट को आपस में मिला लें। इस तैयार खाद को गमले की परिधि के आसपास डालें, ऊपर से मिट्टी की एक पतली परत चढ़ाएं और फिर अच्छी तरह पानी दें। यह खुराक पौधे को पूरे सीजन भर फल देने के लिए तैयार करती है। सुहागा फर्टिलाइजर और जड़ों की संपूर्ण सुरक्षा अनार के फलों का आकार बढ़ाने और उन्हें फटने या झड़ने से बचाने के लिए बोरोन तत्व की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसकी कमी को पूरा करने के लिए पौधे की जड़ों में लगभग 10 Gram सुहागा (बोरेक्स) फर्टिलाइजर डालें। अगर आप चाहें तो 1 Liter पानी में 0.5 Gram बोरेक्स पाउडर घोलकर पत्तियों पर स्प्रे भी कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, जड़ों को पूरी तरह स्वस्थ रखने के लिए गमले में 2 से 3 चम्मच ट्राइकोडर्मा संजीवनी, एक मुट्ठी नेमेटोफ्री, 2 से 3 मुट्ठी जैविक कार्बन और फ्रूटिंग प्लांट मिक्स मिलाएं। यह समन्वित पोषण जड़ों के विकास को गति देता है, मिट्टी की जलधारण क्षमता बढ़ाता है और यह सुनिश्चित करता है कि अनार का पौधा फूलों और फलों से पूरी तरह लद जाए। इसका आप पर असर यह गार्डनिंग गाइड उन सभी लोगों के लिए बेहद उपयोगी है जो अपने घर की बालकनी या छत पर गमलों में फलदार पौधे उगाने के शौकीन हैं। • भारत में: सही किस्म के चयन और घरेलू नुस्खों से बिना किसी बड़े खर्च के घर पर ही ताजे और केमिकल-मुक्त अनार उगाए जा सकते हैं। • शहरी बागवानों के लिए: 16 इंच के गमले में सही मिट्टी के अनुपात (50% मिट्टी, 30% खाद, 20% रेत) और समय पर कटाई-छंटाई की मदद से कम जगह में भी बंपर पैदावार हासिल की जा सकती है। • फूल झड़ने की रोकथाम: गुड़, दही, दालचीनी और शहद का घरेलू घोल बनाकर स्प्रे करने से परागण तेज होता है और फल न बनने की पुरानी समस्या खत्म होती है। • लागत में बचत: बाजार की महंगी रासायनिक खादों की जगह सरसों की खली, नीम खली और स्टोन पाउडर जैसी सस्ती जैविक चीजों से पौधे को संपूर्ण पोषण मिलता है। ऐसा क्यों हुआ गमले में लगे अनार के पौधे में फूल न आने, फल न बनने और फूल झड़ने के पीछे कई मुख्य प्राकृतिक और पोषक तत्वों से जुड़े कारण होते हैं। • नर फूलों का स्वाभाविक गिरना: अनार के पौधे में तीन तरह के फूल खिलते हैं जिसमें से नर फूल बिना फल दिए गिर जाते हैं, जबकि केवल मादा और द्विलिंगी फूल ही फल बनते हैं। • परागण का अभाव: छतों पर परागण करने वाले कीटों (तितलियों व मधुमक्खियों) की कमी से मादा फूल बिना फर्टिलाइज हुए झड़ने लगते हैं। • पोषक तत्वों की कमी: मिट्टी में बोरोन, कैल्शियम और आयरन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी होने पर पौधा फलों का वजन नहीं संभाल पाता और फूल गिर जाते हैं। • अत्यधिक निचली शाखाएं: पौधे के निचले हिस्से में अनचाही शाखाएं निकलने से पौधे की ऊर्जा बंट जाती है और मुख्य ऊपरी हिस्सों में पर्याप्त फूल नहीं आ पाते। सवाल-जवाब 1. अनार का पौधा लगाने का सबसे अच्छा समय कौन सा होता है? अनार का पौधा लगाने के लिए जुलाई से सितंबर (मानसून) और फरवरी से मार्च (वसंत ऋतु) का समय सबसे बेहतर माना जाता है। 2. गमले में अनार उगाने के लिए कौन सी किस्म सबसे अच्छी होती है? सोलापुर लाल, सुपर भगवा, भगवा सिंदूरी, कंधारी और गणेश जैसी ग्राफ्टेड किस्मों को गमले में उगाने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। 3. अनार का पौधा लगाने के लिए गमले का साइज क्या होना चाहिए? अनार का पौधा लगाने के लिए गमले या ग्रो बैग का साइज कम से कम 16 इंच होना चाहिए और उसमें ड्रेनेज होल होने जरूरी हैं। 4. अनार के फूलों को झड़ने से रोकने के लिए कौन सा स्प्रे करें? 5 लीटर पानी में 50 ग्राम गुड़, 50 एमएल दही, 5 ग्राम दालचीनी पाउडर और 2 एमएल शहद मिलाकर 4-5 दिन रखें और फिर छानकर पौधे पर स्प्रे करें। 5. अनार की मिट्टी तैयार करते समय क्या मिलाना चाहिए? 50% बगीचे की मिट्टी, 30% गोबर खाद/वर्मीकम्पोस्ट, 20% रेत के साथ नीम खली, सरसों खली, स्टोन डस्ट और ट्राइकोडर्मा मिलाएं। 6. सुहागा (बोरेक्स) का उपयोग अनार के पौधे में क्यों किया जाता है? सुहागा पौधे में बोरोन की कमी को पूरा करता है जिससे फूल-फल झड़ना बंद होते हैं और अनार का आकार बढ़ता है। https://trendkia.com/lifestyle/gamale-men-uge-anara-ka-paudha-hoga-phalon-se-labalaba-janie-mitti-taiyara-karane-se-lekara-phula-jharane-se-rokane-ke-asaradara-u-31087 TrendKia — Har trend, sabse pehle.