# गर्म इलाकों में छत या बालकनी के गमले में ऐसे उगाएं मीठे सेब, जानिए सही किस्म और खाद

> हरमन-99, अन्ना और डोरसेट गोल्डन जैसी किस्मों के ग्राफ्टेड पौधों को गमले में लगाकर गर्म मैदानी इलाकों में भी सेब की भरपूर पैदावार ली जा सकती है। सही मिट्टी, रूट प्रूनिंग और प्रोम जैसी जैविक खाद डालने से गमले में लगे पेड़ पर शानदार फल आते हैं।

**Type:** article · **Category:** जीवनशैली · **Published:** 2026-09-19 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/lifestyle/garma-ilakon-men-chhata-ya-balakani-ke-gamale-men-aise-ugaen-mithe-seba-janie-sahi-kisma-aura-khada-34919 · **Language:** Hindi
**Tags:** सेब की बागवानी, गमले में सेब, हरमन 99 सेब, किचन गार्डनिंग, जैविक खाद, छत पर बागवानी, प्रोम खाद

सेब को आमतौर पर ठंडे पहाड़ी इलाकों की फसल माना जाता रहा है, लेकिन अब गर्म मैदानी क्षेत्रों में भी इसे छत या बालकनी के गमले में आसानी से उगाया जा रहा है। पोषण की दृष्टि से सेब में प्रचुर मात्रा में डाइटरी फाइबर और पेक्टिन पाया जाता है, जो पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने के साथ कब्ज और गैस की परेशानी को दूर करने में मदद करता है। इसमें मौजूद विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं। कम कैलोरी और ज्यादा फाइबर होने के कारण यह वजन संतुलित रखने में मददगार है, जबकि इसमें पाए जाने वाले पॉलीफेनॉल्स इंसुलिन के स्तर को नियंत्रित कर टाइप-2 डायबिटीज के खतरे को घटाते हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान जैसे गर्म राज्यों में भी अब बागवानी प्रेमी गमलों और ग्रो बैग्स में सेब के पौधे तैयार कर रहे हैं। सही किस्म के चयन, गमले के आकार और उचित पोषण की मदद से घरेलू स्तर पर भी सेब की बंपर पैदावार हासिल की जा सकती है।

## गर्म मैदानी राज्यों के लिए सबसे मुफीद किस्में और रोपाई का समय
घर में गमले के भीतर सेब का पौधा लगाते समय कभी भी बीज से शुरुआत नहीं करनी चाहिए, क्योंकि बीज से तैयार पौधे फल देने में बहुत लंबा समय लेते हैं और उनमें पैदावार की गारंटी नहीं होती। हमेशा किसी प्रमाणित नर्सरी से अच्छी किस्म का ग्राफ्टेड पौधा ही चुनना चाहिए, क्योंकि ग्राफ्टेड पौधों में तीन साल के भीतर फल लगना शुरू हो जाता है। उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान जैसे मैदानी और गर्म मौसम वाले राज्यों के लिए हरमन-99, अन्ना और डोरसेट गोल्डन किस्में सबसे ज्यादा उपयुक्त और उन्नत मानी गई हैं। इनमें से हरमन-99 किस्म गर्म इलाकों में सबसे लोकप्रिय है, जिसका पेटेंट हरिमन शर्मा के नाम पर दर्ज है। यह पौधा नर्सरी के अलावा ऑनलाइन माध्यम से भी आसानी से मिल जाता है और आमतौर पर इसकी कीमत लगभग 235 रुपये होती है। इस पौधे को लगाने के लिए जून और जुलाई का समय, गर्मी का मौसम, सितंबर और अक्टूबर या फिर नवंबर का महीना सबसे सही माना जाता है।

## गमले का साइज और पोषक तत्वों से भरपूर पॉटिंग मिक्स
सेब का पौधा लगाने के लिए गमले या ग्रो बैग का आकार कम से कम 15×15 इंच होना बेहद जरूरी है। यदि लंबे समय तक पौधे को बिना बार-बार बदले रखना चाहते हैं, तो 24×24 इंच का ग्रो बैग सबसे बेहतरीन विकल्प साबित होता है, जिससे पौधे की जड़ों को फैलने की पूरी जगह मिलती है और बार-बार रिपॉटिंग का झंझट खत्म हो जाता है। मिट्टी तैयार करने के लिए 30 प्रतिशत वर्मीकंपोस्ट, 30 प्रतिशत कोकोपीट अथवा बालू रेत, 30 प्रतिशत बगीचे की सामान्य उपजाऊ मिट्टी और 10 प्रतिशत अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद को आपस में मिला लें। इस मिश्रण में दो मुट्ठी नीम खली और फलदार पौधों के लिए जरूरी ऑर्गेनिक रॉक फॉस्फेट मिलाएं। जब पॉटिंग मिक्स तैयार हो जाए, तो पौधे को लगाने से पहले एक या दो दिन तक आसपास के दूसरे पौधों के साथ छाया में रखें ताकि वह नए वातावरण के अनुकूल हो सके। इसके बाद गमले में लगाते समय यह खास ध्यान रखें कि ग्राफ्टिंग वाला जोड़ हमेशा मिट्टी की सतह से ऊपर रहे। पौधे को गमले में स्थापित करने के तुरंत बाद भरपूर पानी देना चाहिए।

## धूप, सिंचाई और नियमित देखरेख की बुनियादी जरूरतें
सेब के पौधे को अच्छी तरह बढ़ने और फलने-फूलने के लिए रोजाना कम से कम 6 से 8 घंटे की सीधी धूप मिलना जरूरी है। गमले की मिट्टी को सख्त होने से बचाने और जड़ों तक हवा तथा धूप पहुंचाने के लिए हर 20 दिन के अंतराल पर हल्की निराई-गुड़ाई जरूर करें। महीने में एक बार पौधे की थाले में वर्मीकंपोस्ट या पुरानी सड़ी हुई गोबर की खाद देना पौधे के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखता है। जब भी कोई फलदार पौधा ग्रो बैग में लगाया जाता है, तो साल में दो बार जड़ों की छंटाई यानी रूट प्रूनिंग करना अनिवार्य माना गया है। यदि जड़ों की प्रूनिंग समय पर नहीं की जाएगी, तो जड़ें आपस में उलझकर बाउंड हो जाएंगी, जिससे मिट्टी में दिए जाने वाले पोषक तत्व पौधे को नहीं मिल पाएंगे। इसके नतीजे में पौधे की बढ़वार रुक जाएगी, पत्तियां पीली पड़कर झड़ने लगेंगी और पौधे पर फूल व फल नहीं आ पाएंगे। यह रूट प्रूनिंग दिसंबर से जनवरी और जुलाई से अगस्त के महीनों में की जानी चाहिए।

## टहनियों की कटाई-छंटाई और फंगल इन्फेक्शन से सुरक्षा
यूं तो ग्राफ्टेड सेब के पौधे को बहुत अधिक पेचीदा देखभाल की जरूरत नहीं होती, लेकिन नियमित छंटाई के अभाव में कई बार पौधे पर फूल नहीं आते। इसके समाधान के लिए पौधे की सूखी, रोगग्रस्त और आपस में उलझी हुई शाखाओं को काटकर हटा देना चाहिए। छंटाई का सबसे सही समय जनवरी का महीना होता है। जब भी शाखाओं की कटाई करें, तो कटर या प्रूनर को हमेशा 45 डिग्री के कोण पर रखकर तिरछा कट लगाएं। कटाई के तुरंत बाद कटे हुए हिस्से पर हल्दी का गाढ़ा लेप लगा दें, जिससे कटे हुए भाग से किसी भी प्रकार का फंगल या कीट संक्रमण पौधे के भीतर न फैल सके। नियमित छंटाई से पौधे के भीतरी हिस्सों तक पर्याप्त धूप और हवा पहुंचती है, जिससे नई कोपलें और फूल आसानी से निकलते हैं।

## फूलों की संख्या और फलों का आकार बढ़ाने वाली जैविक खाद
गर्म मौसम वाले मैदानी इलाकों में सेब के पौधों पर फूल आने की प्रक्रिया फरवरी के अंत से लेकर अप्रैल के दूसरे सप्ताह तक चलती है। इस समयावधि में पौधे की पोषण संबंधी जरूरतें बढ़ जाती हैं। सूक्ष्म पोषक तत्वों की आपूर्ति के लिए गमले में ऑर्गेनिक सीवीड ग्रेन्यूल्स मिलाए जा सकते हैं। यह सीवीड लिक्विड रूप में भी मिलता है, जिसका पानी में घोल बनाकर पत्तियों और टहनियों पर छिड़काव किया जा सकता है। यह एक बेहतरीन ऑर्गेनिक ग्रोथ प्रमोटर के रूप में काम करता है और शाखाओं पर ज्यादा कलियां लाने में मदद करता है। इसके अलावा पौधे में बंपर फ्लावरिंग और बेहतर आकार के फल पाने के लिए प्रोम यानी फॉस्फेट रिच ऑर्गेनिक मैन्योर का इस्तेमाल सबसे असरदार उपाय है। प्रोम वास्तव में रासायनिक डीएपी खाद का एक पूरी तरह जैविक और सुरक्षित विकल्प है। यह खाद 50 किलोग्राम के बैग में आती है और थोक बाजार में इसकी कीमत 7 रुपये से 10 रुपये प्रति किलोग्राम तक होती है। इसे गमले में डालने से पहले मिट्टी की अच्छी तरह गुड़ाई कर लें और फिर जड़ों के चारों ओर मिट्टी में मिलाकर हल्की सिंचाई कर दें। इससे पौधे को प्रचुर मात्रा में फॉस्फेट मिलता है, जिससे फूल झड़ने की समस्या कम होती है और फलों का आकार तेजी से बड़ा होता है।

## इसका आप पर असर
घर की छत या बालकनी के गमले में हरमन-99 जैसी गर्म मौसम वाली किस्म लगाकर ताजे और रसायन मुक्त सेब उगाए जा सकते हैं।

- **गर्म राज्यों के निवासियों के लिए:** उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान जैसे मैदानी क्षेत्रों में रहने वाले लोग भी अब बिना पहाड़ी मौसम के अपने घर में ताजे सेब पैदा कर सकते हैं। सही ग्राफ्टेड किस्म और 24×24 इंच के ग्रो बैग की मदद से महज तीन साल में फल मिलने शुरू हो जाते हैं।
- **शहरी बागवानों के लिए:** कम जगह में बागवानी का शौक रखने वाले लोग रासायनिक खादों के बिना केवल जैविक पोषक तत्वों से फलदार पेड़ तैयार कर सकते हैं। सीवीड और प्रोम जैसी जैविक खादों के प्रयोग से फलों की गुणवत्ता और संख्या दोनों में सुधार होता है।
- **लागत और बजट:** लगभग 235 रुपये में मिलने वाले पौधे और 7 से 10 रुपये प्रति किलो वाली थोक जैविक खाद से बहुत कम खर्च में घर पर फलदार पौधा स्थापित हो जाता है। यह बाजार से महंगे और रसायनों से पके सेब खरीदने की निर्भरता को घटाता है।
- **पौधों की देखभाल का नियम:** गमले में लगे सेब के पौधे को जीवित और फलदार रखने के लिए साल में दो बार जड़ों की प्रूनिंग और हर 20 दिन में गुड़ाई करना अनिवार्य है। ऐसा नियमित रूप से करने पर पौधे की पत्तियां खराब नहीं होतीं और हर साल बंपर फूल आते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
मैदानी और गर्म इलाकों में सेब के उत्पादन का सफल होना नई जलवायु-अनुकूल किस्मों के विकास और उन्नत जैविक पोषण पद्धतियों के कारण संभव हुआ है।

- **उन्नत किस्मों का विकास:** पारंपरिक सेब की किस्मों को फल देने के लिए सैकड़ों घंटों के बर्फीले मौसम की जरूरत होती थी, जिससे वे गर्म मैदानी इलाकों में नहीं पनप सकती थीं। हरिमन शर्मा द्वारा विकसित हरमन-99, अन्ना और डोरसेट गोल्डन जैसी विशेष किस्मों को कम ठंडक और अत्यधिक गर्मी सहने के अनुकूल तैयार किया गया है।
- **जैविक पोषण और फॉस्फेट का संतुलन:** गमलों में सीमित मिट्टी होने के कारण पौधों को पर्याप्त फॉस्फोरस नहीं मिल पाता था, जिससे फूल झड़ जाते थे। रॉक फॉस्फेट, नीम खली और प्रोम जैसी जैविक खादों ने रासायनिक डीएपी के सुरक्षित विकल्प के रूप में जड़ों को मजबूती और कलियों को पोषण दिया है।
- **वैज्ञानिक कटाई-छंटाई की तकनीक:** गमलों में जड़ों और शाखाओं की सही समय पर छंटाई न होने से पौधों की बढ़वार रुक जाती थी। साल में दो बार रूट प्रूनिंग और जनवरी में तिरछी शाखा प्रूनिंग पर हल्दी का लेप लगाने से फंगल संक्रमण का खतरा खत्म हुआ है।

## सवाल-जवाब

### 1. गर्म मैदानी इलाकों के लिए सेब की कौन सी किस्में सबसे अच्छी हैं?
गर्म और मैदानी क्षेत्रों के लिए हरमन-99, अन्ना और डोरसेट गोल्डन सबसे बेहतरीन किस्में मानी जाती हैं, जिनमें हरमन-99 उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान में सबसे लोकप्रिय है।

### 2. गमले में सेब लगाने के लिए किस साइज का गमला या ग्रो बैग चाहिए?
सेब के पौधे के लिए कम से कम 15×15 इंच का गमला होना चाहिए, जबकि बार-बार रिपॉटिंग से बचने के लिए 24×24 इंच का ग्रो बैग सबसे अच्छा रहता है।

### 3. ग्राफ्टेड सेब के पौधे में कितने समय बाद फल आने लगते हैं?
नर्सरी से लाए गए अच्छी वैरायटी के ग्राफ्टेड सेब के पौधे में रोपाई के तीन साल के भीतर फल आना शुरू हो जाता है।

### 4. सेब के पौधे की रूट प्रूनिंग किस महीने में करनी चाहिए?
ग्रो बैग या गमले में लगे सेब के पौधे की जड़ों की छंटाई साल में दो बार, यानी दिसंबर-जनवरी और जुलाई-अगस्त के महीनों में करनी चाहिए।

### 5. फूलों की संख्या बढ़ाने के लिए कौन सी जैविक खाद डालनी चाहिए?
पौधे में अधिक फूल लाने और फलों का आकार बढ़ाने के लिए सीवीड ग्रेन्यूल्स या लिक्विड और फॉस्फेट रिच ऑर्गेनिक मैन्योर यानी प्रोम का इस्तेमाल करना चाहिए।

### 6. सेब की टहनियों की छंटाई करते समय क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
टहनियों को हमेशा 45 डिग्री के कोण पर तिरछा काटना चाहिए और कटाई के तुरंत बाद फंगल संक्रमण से बचाव के लिए कटे हिस्से पर हल्दी का लेप लगाना चाहिए।

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