घर बनाते वक्त इन वास्तु और आर्किटेक्चरल टिप्स से बचाएं लाखों रुपये, बिजली का बिल भी होगा कम घर निर्माण के दौरान सही दिशा, खिड़कियों की योजना और रैट ट्रैप बॉन्ड तकनीक अपनाने से शुरुआती लागत और बिजली के बिल में भारी बचत की जा सकती है। आर्किटेक्ट ईशान कुमार गर्ग ने इसके कई महत्वपूर्ण उपाय बताए हैं। अपने खुद के आशियाने का निर्माण करना हर इंसान का एक बहुत बड़ा सपना होता है, लेकिन आज के समय में लगातार बढ़ती महंगाई के बीच घर बनाना एक कठिन चुनौती बनता जा रहा है। यदि निर्माण कार्य को एक विशेष और समझदारी भरी प्लानिंग के तहत आगे बढ़ाया जाए, तो यह न केवल आपके शुरुआती खर्चों को काफी हद तक नियंत्रित करता है, बल्कि आने वाले समय में आपके लिए पैसों की बचत करने का एक बेहतरीन जरिया भी साबित हो सकता है। इसी महत्वपूर्ण विषय को ध्यान में रखते हुए आर्किटेक्ट ईशान कुमार गर्ग ने घर निर्माण से जुड़े कई उपयोगी और खास टिप्स साझा किए हैं, जिन्हें अपनाकर आप निर्माण लागत में बड़ी कटौती कर सकते हैं। समय, दिशा और स्थानीय वातावरण का रखें पूरा ध्यान आर्किटेक्ट ईशान कुमार गर्ग के अनुसार, मकान बनवाते समय सबसे ज्यादा ध्यान दिशा और आसपास के वातावरण पर दिया जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आम तौर पर लोगों की सबसे बड़ी भूल यही होती है कि वे निर्माण के दौरान इन बुनियादी बातों को पूरी तरह नजरअंदाज कर देते हैं। इसी लापरवाही के कारण जहां एक तरफ शुरुआती दौर में ही उनका बजट बिगड़ जाता है, वहीं घर बनने के बाद भी उनका मासिक खर्च लगातार बना रहता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि सही प्लानिंग न होने पर घरों में कृत्रिम रोशनी और बिजली का अत्यधिक उपयोग करना पड़ता है, जिससे बिजली के बिल का बोझ आजीवन बना रहता है। इसीलिए मकान का नक्शा तैयार करते समय स्थानीय जलवायु यानी लोकल क्लाइमेट को किसी भी कीमत पर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। वातावरण की स्थिति को भली-भांति समझकर यह देखना बेहद जरूरी होता है कि सूरज की किरणें घर के किस हिस्से से अंदर प्रवेश करेंगी और हवा का रुख किस तरफ रहेगा। कमरों और बालकनी की सही दिशा तय करने के उपाय उन्होंने विस्तार से समझाया कि घर की प्लानिंग करते समय उत्तर दिशा में प्राकृतिक रोशनी यानी नेचुरल लाइट पाने के लिए बड़ी खिड़कियां रखी जा सकती हैं और जरूरत के मुताबिक लिविंग एरिया भी इसी दिशा में बनाया जा सकता है। इसके अलावा, सुबह की ताजी और स्वास्थ्यवर्धक धूप के लिए पूर्व दिशा में बेडरूम या बालकनी का होना बहुत फायदेमंद रहता है। वहीं दूसरी ओर, पश्चिम दिशा में उन कमरों को जगह दी जानी चाहिए जिनका उपयोग दिनभर में कम होता है, या फिर इस तरफ सीढ़ियां और स्टोर रूम बनाए जा सकते हैं, ताकि रहने वाले मुख्य कमरों पर शाम के वक्त पड़ने वाली तेज और चिलचिलाती धूप का असर काफी हद तक कम हो सके। इसके साथ ही, दक्षिण और पश्चिम दिशा की दीवारों पर खिड़कियों की छाया, इंसुलेशन यानी ऊष्मीय अवरोध और गर्मी से बचाव के उपायों पर विशेष रूप से ध्यान देने की जरूरत होती है। बिजली की खपत घटाने और लागत में कटौती का गणित खर्चों के विश्लेषण को लेकर उन्होंने बताया कि आमतौर पर यह देखा जाता है कि घरों में बल्ब, ट्यूबलाइट, पंखे और अन्य बिजली के उपकरणों की वजह से बिजली का बिल काफी ज्यादा आता है। ऐसे में यदि सही दिशा को ध्यान में रखकर खिड़कियां लगाई जाएं और दिनभर प्राकृतिक रोशनी का अधिकतम उपयोग किया जाए, तो दिन के वक्त घरों में लाइट जलाने की जरूरत काफी कम हो जाती है। इसके अलावा, सूरज की सीधी और तेज धूप को नियंत्रित करने से कमरों का तापमान संतुलित रहता है, जिससे एयर कंडीशनर यानी एसी का इस्तेमाल भी अपने आप घट जाता है। यदि अनुमानित लागत के लिहाज से बात की जाए, तो यदि किसी पूरे मकान को बनाने में कुल 20,00,000 रुपये की लागत आ रही है, तो इन छोटी-छोटी लेकिन बेहद महत्वपूर्ण बचतों के माध्यम से आसानी से लगभग 3,00,000 रुपये तक बचाए जा सकते हैं। खिड़कियों और शीशों की वैज्ञानिक योजना उन्होंने आगे बताया कि सूर्य के प्रकाश की दिशा और स्थिति के अनुसार ही घर के भीतर खिड़कियां और शीशे लगवाने का निर्णय लिया जाना चाहिए। यदि मकान का पूरा ढांचा प्रकृति और स्थानीय पर्यावरण के पूरी तरह अनुकूल तैयार किया जाए, तो यह घर में रहने वाले सभी सदस्यों के लिए बेहद लाभदायक साबित होता है। इस तरह की स्मार्ट प्लानिंग की बदौलत गर्मियों के मौसम में एसी, कूलर या बिजली के पंखों पर निर्भरता कम हो जाती है, जिससे तात्कालिक निर्माण खर्च तो बचता ही है, साथ ही भविष्य के लिए भी लगातार बचत होती चली जाती है। रैट ट्रैप बॉन्ड तकनीक और आधुनिक निर्माण के तरीके चर्चा के दौरान उन्होंने एक बेहद प्रभावी तकनीक का जिक्र करते हुए बताया कि आजकल निर्माण कार्य में रैट ट्रैप बॉन्ड तकनीक का इस्तेमाल भी काफी तेजी से बढ़ रहा है। इस आधुनिक तकनीक के जरिए 9 इंच मोटी दीवारों के भीतर भी कैविटी यानी एक छोटा हवा का गैप तैयार किया जाता है, जिसके कारण जहां एक तरफ चिनाई में मसाले की खपत बहुत कम होती है, वहीं दूसरी तरफ दीवारों के भीतर हवा का प्राकृतिक संचार भी लगातार बना रहता है। इस विशेषता की वजह से भीषण गर्मी के मौसम में भी घर के अंदर का वातावरण काफी ठंडा और आरामदायक रहता है। इसके अलावा, मकान की छत पर व्हाइट कोटिंग या सफेद पुट्टी का इस्तेमाल किया जा सकता है, जो सूरज की रोशनी को परावर्तित करती है और छत के तापमान को नियंत्रित रखती है, जिससे अन्य कई तरह के खर्चों से भी राहत मिलती है। सटीक नक्शे और प्लानिंग का महत्व अंत में उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि मकान बनवाने से पहले हमेशा एक सटीक और त्रुटिहीन नक्शा तैयार करवाना चाहिए, जिसके आधार पर आप हर छोटी-बड़ी चीज का सही आकलन कर सकें कि आपका कुल कितना खर्च होने वाला है। निर्माण के दौरान की जाने वाली ये छोटी-छोटी सावधानियां और बचत अंत में आपके लिए एक बहुत बड़ी वित्तीय राहत साबित होती हैं। यदि आप सभी लोग भी घर बनवाते समय इन तमाम बातों का विशेष रूप से ध्यान रखेंगे, तो निश्चित रूप से निर्माण लागत में भारी कमी ला सकते हैं और भविष्य के लिए एक मजबूत आर्थिक बचत कर सकते हैं। इसका आप पर असर घर के निर्माण के दौरान सही दिशा और ऊर्जा-कुशल तकनीकों को अपनाने से आपको शुरुआती बजट और आजीवन आने वाले बिजली के बिल में भारी राहत मिलती है। • भारत में: देश भर में घर बनवाने वाले आम नागरिकों के लिए सही आर्किटेक्चरल प्लानिंग निर्माण लागत को लाखों रुपये तक कम कर सकती है। इस प्रकार की वैज्ञानिक डिजाइन से एयर कंडीशनर और पंखों का उपयोग घटकर मासिक बिजली बिल में सीधी बचत कराता है। • लागत बचत: यदि किसी मकान के निर्माण की कुल अनुमानित लागत 20,00,000 रुपये है, तो छोटी-छोटी दिशात्मक और ढांचागत बचतों के माध्यम से लगभग 3,00,000 रुपये तक बचाए जा सकते हैं। • तापमान नियंत्रण: रैट ट्रैप बॉन्ड जैसी आधुनिक तकनीकों और छत पर व्हाइट कोटिंग का उपयोग करने से भीषण गर्मियों में भी घर का अंदरूनी तापमान प्राकृतिक रूप से ठंडा रहता है। • प्राकृतिक रोशनी: उत्तर और पूर्व दिशा में खिड़कियां तथा बालकनी रखने से दिन के समय कृत्रिम रोशनी की आवश्यकता न्यूनतम हो जाती है, जिससे ऊर्जा की खपत कम होती है। • भविष्य की योजना: घर की सही ब्लूप्रिंट और लेआउट प्लानिंग तात्कालिक खर्चों को रोकने के साथ-साथ भविष्य के अनियोजित रखरखाव खर्चों से भी बचाती है। ऐसा क्यों हुआ घर बनाते समय सही प्लानिंग और दिशाओं का ध्यान न रखने के कारण निर्माण लागत और बिजली के बिल में लगातार वृद्धि होती है। पारंपरिक और आधुनिक इंजीनियरिंग तरीकों का सही मेल न होना इन आर्थिक हानियों का मुख्य कारण बनता है। • दिशाओं की अनदेखी: निर्माण के दौरान सूर्य की रोशनी और स्थानीय जलवायु को नजरअंदाज करने से घरों के भीतर गर्मी और अंधेरा बढ़ता है, जिससे कृत्रिम उपकरणों की जरूरत बढ़ जाती है। • अत्यधिक ऊर्जा खपत: खिड़कियों की गलत स्थिति और प्राकृतिक रोशनी का उपयोग न करने से दिन में भी लाइट और एसी का भारी इस्तेमाल करना पड़ता है। • तकनीकी समाधान: रैट ट्रैप बॉन्ड जैसी तकनीकों और कैविटी दीवारों का उपयोग करने से न केवल चिनाई का मसाला कम लगता है, बल्कि हवा का संचार भी बेहतर होता है जो तापमान को नियंत्रित रखता है। • लागत का आकलन: बिना सटीक नक्शे और योजना के काम शुरू करने से शुरुआती और दीर्घकालिक दोनों खर्चों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हो जाती है। सवाल-जवाब 1. घर बनवाते समय किस आर्किटेक्ट से बातचीत की गई है? इस संबंध में आर्किटेक्ट ईशान कुमार गर्ग से खास बातचीत की गई है। 2. घर बनाते समय किन मुख्य बातों का ध्यान रखना चाहिए? मकान बनवाते समय स्थानीय वातावरण, सूर्य की रोशनी की स्थिति और सही दिशा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। 3. उत्तर दिशा में क्या बनवाना चाहिए? प्राकृतिक रोशनी के लिए उत्तर दिशा में खिड़कियां और जरूरत के अनुसार लिविंग एरिया रखा जा सकता है। 4. पूर्व दिशा में कौन से हिस्से होने चाहिए? सुबह की ताजी धूप के लिए पूर्व दिशा में बेडरूम या बालकनी होनी चाहिए। 5. पश्चिम दिशा का उपयोग कैसे करना चाहिए? पश्चिम दिशा में कम उपयोग वाले कमरे, सीढ़ियां या स्टोर रूम बनाए जाने चाहिए। 6. कितने पैसों की बचत की जा सकती है? 20 लाख रुपये की कुल लागत वाले घर में छोटी-छोटी बचत के माध्यम से लगभग 3,00,000 रुपये बचाए जा सकते हैं। 7. रैट ट्रैप बॉन्ड तकनीक क्या है? इस तकनीक के जरिए 9 इंच की दीवारों में कैविटी या गैप बनाया जाता है, जिससे मसाला कम लगता है और हवा का संचार रहता है। 8. छत का तापमान नियंत्रित करने के लिए क्या करना चाहिए? छत पर व्हाइट कोटिंग या पुट्टी का उपयोग करके इसके तापमान को नियंत्रित रखा जा सकता है। https://trendkia.com/lifestyle/ghar-banate-waqt-in-vastu-aur-architecture-tips-se-bachaye-lakhon-rupees-50718 TrendKia — Har trend, sabse pehle.