घर के पास खाली जमीन से बचाएं पैसे, आसानी से ऐसे तैयार करें किचन गार्डन सर्दियों के मौसम में घर के आसपास पड़ी थोड़ी सी खाली जमीन का उपयोग करके किचन गार्डन तैयार किया जा सकता है। इससे घरेलू खर्च कम होने के साथ-साथ रसायन मुक्त और ताजी सब्जियां भी मिलती हैं। सर्दियों के मौसम की दस्तक के साथ ही कृषि क्षेत्र में रबी सीजन की शुरुआत हो जाती है। यदि आपके घर के आसपास थोड़ी सी भी जगह खाली पड़ी है, तो थोड़ी सी मेहनत करके आप अपने मासिक घरेलू बजट को काफी हद तक नियंत्रित कर सकते हैं। लगभग 20 गुणा 20 फीट की भूमि पर '7 डे 7 क्यारी' के अनूठे फॉर्मूले को अपनाया जा सकता है, जिसके तहत आप सात अलग-अलग प्रकार की भाजियां उगा सकते हैं। इससे आपको हर एक दिन छोड़कर नियमित अंतराल पर ताजी भाजी मिलती रहती है। इसके अलावा, इसी क्षेत्र में मिर्च, टमाटर, बैंगन और अपनी पसंद की कोई भी बेल वाली सब्जी मचान तैयार करके उगाई जा सकती है। साथ ही, जमीन के अंदर होने वाली फसलें जैसे मूली और गाजर की खेती भी सफलतापर्वक की जा सकती है। किचन गार्डन की शुरुआत और मिट्टी की तैयारी सागर कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक मयंक मेहरा बताते हैं कि जब आप पहली बार किचन गार्डन की स्थापना करते हैं, तो आरंभ में थोड़ी सी शारीरिक मेहनत की आवश्यकता होती है। इसके लिए सबसे पहले मिट्टी की अच्छी तरह से निराई-गुड़ाई की जाती है। इसके बाद उसमें वर्मी कंपोस्ट यानी केंचुआ खाद मिलाकर सुव्यवस्थित क्यारियों का निर्माण किया जाता है और फिर उनमें सब्जियों के बीज या पौधे रोपे जाते हैं। रसोईघर में निकलने वाले सब्जियों के छिलके और अन्य जैविक कचरे को कूड़ेदान में फेंकने के बजाय यदि इस बगीचे में उपयोग किया जाए, तो यह बेहतरीन प्राकृतिक उर्वरक का काम करता है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार की रासायनिक दवा या कीटनाशक का उपयोग करने की आवश्यकता नहीं पड़ती है और आपको पूरी तरह शुद्ध सब्जियां प्राप्त होती हैं। रसोई के मासिक खर्च में सीधी कटौती किचन गार्डन अपनाने वाले परिवारों को आमतौर पर कई तरह के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभ मिलना तय माने जाते हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि परिवार का रोजाना या साप्ताहिक सब्जी खरीदने का खर्च लगभग पूरी तरह से समाप्त हो जाता है। बाजार से मोलभाव करके सब्जियां लाने और उनके बढ़ते दामों की चिंता से मुक्ति मिलने के कारण आपकी जेब पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ काफी कम हो जाता है और घरेलू बजट को संतुलित रखना बहुत आसान हो जाता है। स्वास्थ्य सुधार और दवाइयों के खर्च से राहत इस घरेलू खेती का दूसरा सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण लाभ यह है कि जब आप अपने हाथों से सब्जियां उगाते हैं, तो वे पूरी तरह से केमिकल फ्री होती हैं। इस प्रकार की जैविक और शुद्ध सब्जियों का सेवन करने से हमारे शरीर पर किसी भी तरह का बुरा प्रभाव नहीं पड़ता है। लोगों को दूषित खानपान के कारण होने वाली बीमारियों से बचाव होता है, जिससे उन्हें बार-बार अस्पतालों के चक्कर नहीं काटने पड़ते हैं। अस्पतालों में डॉक्टरों की फीस और दवाइयों पर खर्च होने वाला अतिरिक्त पैसा भी पूरी तरह से बच जाता है। बचत के साथ बेहतर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य किचन गार्डन का तीसरा सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपको रोज-रोज ताजी सब्जी खरीदने के लिए बाजार की दौड़ नहीं लगानी पड़ती है, जिससे कीमती समय की भारी बचत होती है। रोज सब्जी लाने की मानसिक झुंझलाहट और टेंशन से भी हमेशा के लिए छुटकारा मिल जाता है। इसके अलावा, जब आप अपने छोटे से बगीचे में थोड़ा वक्त बिताकर शारीरिक श्रम करते हैं, तो आपकी नेचुरल एक्सरसाइज हो जाती है। इस तरह की शारीरिक गतिविधि से न केवल आपका स्वास्थ्य बेहतर रहता है, बल्कि मानसिक शांति भी मिलती है और आप तरोताजा महसूस करते हैं। इसका आप पर असर घरेलू बजट को नियंत्रित करने और ताजी सब्जियां प्राप्त करने के लिए किचन गार्डन बेहद कारगर साबित हो सकता है। • भारत में: देश भर के शहरी और ग्रामीण इलाकों में जिनके घरों के पास थोड़ी भी जमीन है, वे इस विधि से अपनी रोजमर्रा की खाद्य लागत को काफी हद तक कम कर सकते हैं। इससे आम परिवारों को महंगाई के दौर में सब्जियों पर होने वाले खर्च से बड़ी राहत मिलती है। • सागर में: स्थानीय निवासियों और किसानों के लिए कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों की यह सलाह बिना किसी अतिरिक्त रासायनिक लागत के घर पर ही शुद्ध और पौष्टिक आहार सुनिश्चित करती है। इससे स्थानीय स्तर पर लोगों का समय और पैसा दोनों बचता है। ऐसा क्यों हुआ सर्दियों के मौसम में घरेलू स्तर पर सब्जी उगाने का चलन बढ़ने और इसके पीछे आर्थिक तथा स्वास्थ्य से जुड़े कई ठोस कारण होते हैं। • रबी सीजन की अनुकूलता: सर्दियों की शुरुआत के साथ तापमान में गिरावट आती है, जो कई प्रकार की मौसमी सब्जियों और भाजियों के विकास के लिए सबसे उपयुक्त वातावरण प्रदान करती है। • जैविक कचरे का सदुपयोग: रसोईघर से निकलने वाले जैविक अवशेषों और छिलकों में भरपूर पोषक तत्व होते हैं, जो मिट्टी की उर्वरता को प्राकृतिक रूप से बढ़ाने में मदद करते हैं। • बढ़ता रासायनिक प्रभाव: बाजार में मिलने वाली अधिकांश सब्जियों में अत्यधिक रसायनों और कीटनाशकों का प्रयोग होता है, जिसके कारण लोग अपने स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए खुद उगाने की ओर प्रेरित हो रहे हैं। सवाल-जवाब 1. किचन गार्डन के लिए कितनी जमीन की जरूरत होती है? लगभग 20 गुणा 20 फीट की थोड़ी सी खाली जमीन पर किचन गार्डन आसानी से शुरू किया जा सकता है। 2. 7 डे 7 क्यारी फॉर्मूले से क्या फायदा होता है? इस फॉर्मूले के जरिए आप 7 तरह की भाजियां लगा सकते हैं, जिससे आपको हर एक दिन छोड़कर ताजी भाजी मिलती रहती है। 3. मिट्टी की तैयारी के लिए किस खाद का उपयोग किया जाता है? मिट्टी की निराई-गुड़ाई करने के बाद उसमें वर्मी कंपोस्ट यानी केंचुआ खाद मिलाई जाती है। 4. किचन गार्डन से मुख्य रूप से कौन से फायदे मिलते हैं? इससे सब्जियों का खर्च कम होता है, केमिकल फ्री ताजी सब्जियां मिलती हैं और बाजार जाने के समय की बचत होती है। 5. यह सलाह किस संस्थान के वैज्ञानिक द्वारा दी गई है? यह सलाह सागर कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक मयंक मेहरा द्वारा दी गई है। https://trendkia.com/lifestyle/ghar-ke-paas-khali-zamin-se-bachaye-pase-kitchen-garden-58020 TrendKia — Har trend, sabse pehle.