# घर की छत पर गमले में ऐसे उगाएं चीकू का पौधा, अनगिनत फलों से लद जाएगी शाखाएं

> चीकू का पौधा घर के गमले में आसानी से उगाया जा सकता है। सही वैरायटी, खाद और देखभाल के जरिए बंपर पैदावार और ढेरों मीठे फल पाए जा सकते हैं।

**Type:** article · **Category:** जीवनशैली · **Published:** 2026-09-01 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/lifestyle/ghar-ki-chhat-par-gamle-mein-aise-ugaye-chiku-ka-poudha-25724 · **Language:** Hindi
**Tags:** चीकू की खेती, घरेलू बागवानी, गमले में पौधे, सपोटा की देखभाल, बागवानी टिप्स

चीकू सेहत के लिए बहुत गुणकारी फल माना जाता है क्योंकि इसमें भरपूर मात्रा में फाइबर पाया जाता है जो पेट को बिल्कुल साफ रखता है और कब्ज की समस्या को दूर करने में मदद करता है। इसके सेवन से शरीर को नेचुरल शुगर और कार्बोहाइड्रेट मिलते हैं जो दिनभर की थकान को आसानी से मिटा देते हैं। चीकू में आयरन और फोलेट जैसे पोषक तत्व भी प्रचुर मात्रा में होते हैं जो शरीर में हीमोग्लोबिन के स्तर को तेजी से बढ़ाते हैं। इसके अलावा इसमें मौजूद कैल्शियम, फास्फोरस और आयरन हड्डियों को अंदर से मजबूत बनाने का काम करते हैं। इस पौधे को अपने घर पर गमले में उगाना काफी आसान है और सही जानकारी होने पर आप आसानी से ढेरों फल प्राप्त कर सकते हैं। पौधे को नर्सरी से लाना बेहतर होता है या बीज से उगाना चाहिए, गमले का साइज क्या होना चाहिए और कौन सी खाद का इस्तेमाल करना चाहिए, इन सभी बातों की पूरी जानकारी होना बहुत जरूरी है।

## सही वैरायटी और गमले का चुनाव
अगर आप अपने घर के गमले में चीकू उगाने की सोच रहे हैं तो हमेशा नर्सरी से किसी अच्छी और उन्नत वैरायटी का पौधा खरीदकर लाना चाहिए। बाजार में कालीपत्ती, क्रिकेट बॉल, पीकेएम-1 (PKM-1), पीलीपाटी और थाई लॉन्ग चीकू जैसी बेहतरीन वैरायटी उपलब्ध होती हैं। इनमें पीकेएम-1 (PKM-1) वैरायटी को सबसे उत्तम माना गया है क्योंकि यह बहुत जल्दी फल देना शुरू कर देती है और कम समय में ही बंपर पैदावार देने के लिए जानी जाती है। इसके अलावा कालीपत्ती और थाई चीकू की वैरायटी भी गमले के वातावरण के लिए बेहद उपयुक्त मानी जाती हैं। आप चाहें तो बीज से भी पौधे तैयार कर सकते हैं लेकिन ऐसा करने पर उनमें फल आने में करीब 5 से 6 साल लंबा समय लग सकता है। इसके विपरीत नर्सरी के पौधे ग्राफ्टेड होते हैं जो बहुत जल्दी तैयार हो जाते हैं और कम समय में ही फल देने लगते हैं। पौधे को लगाने के लिए गमले का साइज हमेशा 18 से 24 इंची के बीच होना चाहिए।

## पौधा लगाने का सही समय और मिट्टी तैयार करने की विधि
चीकू या सपोटा के पौधे को गमले में स्थापित करने के लिए सबसे बेहतरीन सीजन फरवरी से मार्च और जुलाई से अक्टूबर का महीना माना जाता है। इस उपयुक्त समय पर पौधा लगाने से उसकी ग्रोथ बहुत तेजी से होती है। जब भी आप किसी पौधे को नए गमले में लगाएं तो उसकी जड़ों के आसपास की थोड़ी सी मिट्टी हल्के हाथों से जरूर हटा दें ताकि नए गमले की मिट्टी में जड़ें बहुत जल्दी फैल सकें। इसके अलावा यदि पौधे पर पहले से कोई छोटा फल लगा हुआ है तो उसे तुरंत हटा देना चाहिए ताकि पौधे की पूरी ताकत उसकी नई ग्रोथ में लगे। चीकू के पौधे के लिए मिट्टी तैयार करते समय बाग-बगीचे की सामान्य मिट्टी में 20 प्रतिशत वर्मी कंपोस्ट या अच्छी तरह सड़ा हुआ गोबर का खाद, 15 प्रतिशत रेत या बालू या कोकोपीट, थोड़ी सी नीम खली और 500 ग्राम कैल्शियम पाउडर को आपस में अच्छी तरह मिला लें। पौधा लगाने के बाद उसमें पर्याप्त मात्रा में पानी जरूर डालें और यह हमेशा ध्यान रखें कि गमले की तली में ड्रेनेज होल जरूर होना चाहिए ताकि अतिरिक्त पानी आसानी से बाहर निकल सके।

चीकू के स्वस्थ विकास के लिए पौधे को रोजाना कम से कम 6 से 8 घंटे की धूप मिलना बेहद जरूरी है। इस पौधे को वैसे तो बहुत ज्यादा देखरेख की जरूरत नहीं होती है लेकिन समय-समय पर इसकी निराई और गुड़ाई करते रहना चाहिए। आपको हर महीने चक्रीय क्रम में खाद देनी चाहिए ताकि पौधे को सभी प्रकार के पोषक तत्व मिलते रहें। अगर आप एक महीने वर्मी कंपोस्ट डालते हैं तो अगले महीने किसी अन्य जैविक खाद का प्रयोग करें। पौधे की ग्राफ्टिंग वाले हिस्से के नीचे यदि कोई नई शाखा निकलती दिखाई दे तो उसे तुरंत काटकर अलग कर देना चाहिए। खाद देने से पहले हमेशा मिट्टी की अच्छी तरह गुड़ाई करें और खाद डालने के तुरंत बाद पौधे में पानी अवश्य डालें। सही तरीके से देखभाल करने पर ग्राफ्टेड पौधों में मात्र 2 साल के भीतर ही फल आने शुरू हो जाते हैं।

## फूल झड़ने की समस्या का समाधान और पोषक तत्व
कई बार ऐसा देखने को मिलता है कि चीकू के पौधे में फूल आते ही नहीं हैं या फिर अगर फूल आ भी जाते हैं तो वे बहुत जल्दी झड़ जाते हैं और फल में परिवर्तित नहीं हो पाते हैं। यदि आपके पौधे के साथ भी यही समस्या आ रही है तो आप केले और आलू के छिलकों को अच्छी तरह सुखाकर उनका पाउडर बना लें और तीन-चार चम्मच यह पाउडर हर 15 दिन के अंतराल पर गमले की मिट्टी में डालें। कई बार मिट्टी में बोरोन की कमी होने के कारण भी पौधे के फूल और फल समय से पहले झड़ने लगते हैं और फल फटने भी लगते हैं। इस समस्या से निपटने के लिए मूंगफली के छिलकों का पाउडर बनाकर गमले में डालना बहुत फायदेमंद होता है जिससे पौधों में दोबारा फूल आने लगते हैं और फलों का आकार भी बड़ा होने लगता है। यदि पौधों में फूल कम आ रहे हैं तो 50 ग्राम गुड़ में आधा ग्राम चूना मिलाकर उसे रातभर के लिए दो लीटर पानी में भिगोकर रख दें और लगातार दो-तीन दिन तक इस पानी को पौधे में डालें। इससे बोरोन, कैल्शियम और आयरन की सभी कमियां दूर हो जाती हैं और बंपर फूल आने लगते हैं.

## पैदावार बढ़ाने के खास उपाय और फलों की तुड़ाई
चीकू के पौधे से बंपर और बेहतरीन पैदावार लेने के लिए आप महीने में एक बार एक मुट्ठी जैविक पोटाश या रॉक फॉस्फेट का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा 10 मिलीलीटर सीवीड लिक्विड को 1 लीटर पानी में अच्छी तरह मिलाकर महीने में एक बार पौधे की जड़ों में डालने या उसके ऊपर स्प्रे करने से गजब का फायदा मिलता है। इस उपाय से फलों का आकार तेजी से बढ़ता है, फलों में प्राकृतिक मिठास बहुत ज्यादा बढ़ जाती है और कुल पैदावार में भी काफी इजाफा होता है। आप चाहें तो पौधे में सरसों की खली का भी प्रयोग कर सकते हैं क्योंकि इससे पौधे को बहुत जबरदस्त ग्रोथ मिलती है और उस पर अनगिनत फल-फूल आते हैं।

पौधे की नाइट्रोजन की कमी को दूर करने के लिए आप ताजी इस्तेमाल की हुई चाय की पत्ती का भी उपयोग कर सकते हैं। इसके अलावा कॉफी पाउडर को भी गमले की मिट्टी में मिलाया जा सकता है जो पौधे के लिए फायदेमंद होता है। पौधों में बंपर फल और फूल लाने के लिए बायोजाइम फर्टिलाइजर और सागरिका जैविक फर्टिलाइजर का इस्तेमाल बेहद असरकारी साबित होता है। चीकू के पौधे में जब फल लगते हैं तो उनके पूरी तरह मैच्योर होने में लगभग 4 महीने का समय लग जाता है। यदि मार्च के महीने में पौधे पर फल आते हैं तो वे मई तक पूरी तरह पककर तैयार हो जाते हैं। जब आप फलों को पौधे से तोड़ लें तो उन्हें तुरंत खाने की बजाय किसी साफ कागज में लपेटकर 7 से 8 दिनों के लिए रख दें, तभी वे फल अच्छी तरह पककर खाने योग्य तैयार होंगे।

## इसका आप पर असर
चीकू का पौधा घर पर उगाने से न सिर्फ आपको ताजे और रसायनमुक्त फल मिलेंगे, बल्कि यह घरेलू बागवानी को बढ़ावा देने का बेहतरीन माध्यम है।

- **भारत में:** बागवानी के शौकीन लोग अपने घर की छत या बालकनी में गमले लगाकर शुद्ध और ताजे फल प्राप्त कर सकते हैं।
- **घरेलू स्तर पर:** सही देखभाल और जैविक खाद के प्रयोग से बिना किसी बाजार खर्च के घर पर ही बंपर पैदावार हासिल की जा सकती है।

## सवाल-जवाब

### 1. चीकू का पौधा गमले में लगाने का सबसे अच्छा समय कौन सा है?
फरवरी से मार्च और जुलाई से अक्टूबर का महीना चीकू का पौधा लगाने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।

### 2. गमले में चीकू उगाने के लिए गमले का साइज क्या होना चाहिए?
चीकू के पौधे के लिए 18 से 24 इंची का गमला सबसे सही रहता है।

### 3. चीकू के पौधे में फूल क्यों झड़ते हैं?
मिट्टी में बोरोन की कमी होने के कारण चीकू के फूल और फल झड़ने लगते हैं।

### 4. ग्राफ्टेड पौधे में कितने समय बाद फल आने लगते हैं?
नर्सरी से लाए गए ग्राफ्टेड पौधे में 2 साल के भीतर ही फल आने लगते हैं।

### 5. तोड़ने के बाद चीकू के फल कैसे पकाएं?
फलों को पौधे से तोड़ने के बाद उन्हें पेपर में लपेटकर 7 से 8 दिनों के लिए रख देना चाहिए जिससे वे पक जाते हैं।

## प्रेरणा और सबक
चीकू के पौधे की सफल देखभाल से धैर्य और सही समय पर सही कदम उठाने की सीख मिलती है।

- **सही शुरुआत:** किसी भी काम में सफलता के लिए सही वैरायटी और मजबूत नींव का चुनाव सबसे महत्वपूर्ण होता है।
- **नियमित देखभाल:** समय पर पोषण और सही देखरेख करने से पौधे या किसी भी कार्य में बेहतरीन परिणाम मिलते हैं।
- **प्राकृतिक उपाय:** रासायनिक विकल्पों के बजाय प्राकृतिक और जैविक तरीकों का उपयोग लंबे समय तक लाभ देता है।

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