घर पर अपराजिता की बेल को फूलों से भरने के लिए अपनाएं ये आसान बागवानी तरीके, विशेषज्ञ ने बताए जरूरी नियम कृषि विशेषज्ञ डॉ. रतन कुमार के अनुसार सही धूप, समय पर प्रूनिंग और संतुलित जैविक पोषण से अपराजिता के पौधे में ढेरों फूल पाए जा सकते हैं। घर के आंगन या बालकनी में लगी अपराजिता की बेल जब नीले या सफेद फूलों से लद जाती है, तो बगीचे की सुंदरता कई गुना बढ़ जाती है। कई बार अच्छी हरियाली और पत्तियां होने के बावजूद पौधे में कलियां और फूल बहुत कम आते हैं। कृषि विशेषज्ञ डॉ. रतन कुमार ने अपराजिता के पौधे में लगातार और भरपूर फ्लावरिंग पाने के लिए कई सरल घरेलू और व्यावहारिक उपायों के बारे में बताया है। उनके मुताबिक सही मात्रा में धूप, नियमित छंटाई, सही सिंचाई और घर में तैयार जैविक खाद का संतुलित इस्तेमाल इस बेल को सेहतमंद रखने की मुख्य कुंजी है। रोजाना धूप की जरूरत और सही स्थान का चुनाव अपराजिता के पौधे के लिए प्रकाश सबसे बुनियादी जरूरत है। पौधे को ऐसे स्थान पर रखना चाहिए जहां उसे प्रतिदिन लगभग 5 से 6 घंटे की सीधी धूप मिल सके। यदि गमले को अत्यधिक छायादार स्थान पर रख दिया जाए, तो पौधा पत्तियों और शाखाओं के स्तर पर तेजी से बढ़ सकता है, किंतु उसमें फूल आने की दर काफी घट जाती है। धूप की कमी होने पर पौधा केवल पत्तियों के फैलाव में ऊर्जा खर्च करता है, जिससे कलियां बनना रुक जाता है। शाखाओं की छंटाई और सूखी टहनियों की सफाई बेलदार पौधों के विकास में प्रूनिंग की प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। करीब 15 से 20 दिनों के अंतराल पर पौधे का निरीक्षण करना चाहिए और उसमें मौजूद पुरानी, सूखी अथवा अनावश्यक टहनियों को काट देना चाहिए। अवांछित शाखाओं को हटाने से पौधे की अतिरिक्त ऊर्जा बचती है और नई कोपलों के फूटने का मार्ग प्रशस्त होता है। नई टहनियां आने से आगे चलकर अधिक संख्या में कलियां खिलती हैं। इसके साथ ही मुरझा चुके फूलों को भी तुरंत हटाते रहना चाहिए, क्योंकि सूखे फूल लगे रहने से बीज बनने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है और पौधा कमजोर पड़ने लगता है। सूखी पत्तियों और कमजोर हिस्सों को साफ रखने से नई कलियों का विकास तेज होता है। मिट्टी का पोषण और घरेलू जैविक खाद का इस्तेमाल गमले की सीमित मिट्टी में पर्याप्त पोषक तत्वों का होना पौधों के स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य है। महीने में एक बार मिट्टी में सीमित मात्रा में वर्मीकम्पोस्ट अथवा अच्छी तरह से सड़ी हुई गोबर की खाद मिलानी चाहिए। इसके अतिरिक्त केले के छिलकों से तैयार की गई घरेलू खाद का भी नियंत्रित मात्रा में प्रयोग किया जा सकता है, जो पौधे को प्राकृतिक रूप से पोषण देती है और पौधों पर काफी सकारात्मक असर डालती है। लकड़ी की राख और फिटकरी के पानी का संतुलित प्रयोग बागवानी के दौरान कई घरेलू पदार्थों का उपयोग किया जाता है, किंतु उनकी मात्रा पर ध्यान देना आवश्यक है। लकड़ी की साफ राख में पोटैशियम और अन्य जरूरी खनिज पाए जाते हैं, जिसे थोड़ी मात्रा में गमले की मिट्टी में मिलाया जा सकता है। हालांकि अधिक मात्रा में राख डालने से मिट्टी का pH स्तर असंतुलित हो सकता है, इसलिए इसका उपयोग बहुत सीमित रखना चाहिए। इसी प्रकार कुछ लोग फिटकरी के पानी का छिड़काव या प्रयोग करते हैं, परंतु फिटकरी की अधिकता मिट्टी और पौधे दोनों को नुकसान पहुंचा सकती है। नियमित बागवानी में भारी रसायनों के बजाय अच्छी गुणवत्ता वाली मिट्टी और जैविक खाद को प्राथमिकता देना सबसे सुरक्षित तरीका है। पानी देने का सही नियम और जल निकासी अपराजिता की जड़ों को हल्की नमी पसंद होती है, लेकिन गमले में पानी का ठहराव पौधे को सड़ा सकता है। जब गमले की ऊपरी मिट्टी सूखी नजर आए, तभी उसमें पानी देना चाहिए। गमले की मिट्टी को लगातार गीला या दलदली बिल्कुल न रहने दें। इसके लिए गमले की तली में पर्याप्त ड्रेनेज छेद होने चाहिए, ताकि अतिरिक्त पानी तुरंत बाहर निकल जाए। उचित जल प्रबंधन से जड़ें स्वस्थ रहती हैं और पौधा पूरे मौसम खिलता रहता है। इसका आप पर असर यह जानकारी घर पर पौधे उगाने वाले और फूलों के शौकीन बागवानों को बिना महंगे रसायनों के बेहतर फूल उगाने में मदद करेगी। • धूप का प्रबंधन: अपने गमले को ऐसे स्थान पर रखें जहां कम से कम 5 से 6 घंटे धूप आए। इससे पौधे की अनावश्यक पत्तियां फैलने के बजाय कलियां बनना शुरू होंगी। • नियमित छंटाई का नियम: हर 15 से 20 दिनों में बेल की सूखी और फालतू टहनियों को काटें। इससे पौधे की ऊर्जा बचेगी और नई टहनियों पर तेजी से फूल खिलेंगे। • घरेलू पोषण का चयन: महीने में एक बार वर्मीकम्पोस्ट या सड़ी गोबर खाद और सीमित मात्रा में केले के छिलकों की खाद डालें। यह मिट्टी की उर्वरता बनाए रखेगा और पौधे को प्राकृतिक पोषण देगा। • सावधानीपूर्वक उपाय: लकड़ी की राख या फिटकरी के पानी का इस्तेमाल बेहद कम मात्रा में करें। अधिक प्रयोग से मिट्टी का pH बिगड़ सकता है और पौधा सूख सकता है। • सिंचाई में संतुलन: केवल ऊपरी मिट्टी सूखने पर ही पानी दें और गमले के छेद खुले रखें। जड़ों में पानी जमा न होने से पौधा सड़ेगा नहीं और लंबे समय तक हरा-भरा रहेगा। ऐसा क्यों हुआ अपराजिता के पौधे में फूल कम आने या रुक जाने के पीछे मुख्य रूप से धूप की कमी, पोषक तत्वों का असंतुलन और पुरानी टहनियों का जमावड़ा होता है। विशेषज्ञ द्वारा बताए गए ये उपाय पौधे की प्राकृतिक वृद्धि चक्र को सक्रिय करने के लिए डिजाइन किए गए हैं। • प्रकाश संश्लेषण और धूप की जरूरत: पौधे को जब भरपूर धूप नहीं मिलती, तो वह फूलों के उत्पादन के लिए जरूरी हार्मोनल प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाता। 5-6 घंटे की धूप पौधे की जैविक घड़ी को फूल खिलाने के लिए प्रेरित करती है। • अनावश्यक शाखाओं द्वारा ऊर्जा का दोहन: पुरानी और सूखी टहनियां पौधे के सीमित पोषक तत्वों को सोखती रहती हैं। 15-20 दिनों में प्रूनिंग करने से नई वानस्पतिक वृद्धि शुरू होती है, जिन पर फूल खिलते हैं। • मिट्टी में खनिजों की कमी: गमले की सीमित मिट्टी से समय के साथ पोटैशियम और नाइट्रोजन घट जाते हैं। गोबर की खाद, वर्मीकम्पोस्ट और केले के छिलकों की खाद मिट्टी के सूक्ष्म पोषक तत्वों को फिर से भर देती है। • जड़ों में अत्यधिक नमी: लगातार गीली मिट्टी में जड़ों को ऑक्सीजन नहीं मिलती, जिससे कलियां झड़ने लगती हैं। सही जल निकासी और हल्की नमी मिट्टी में हवा का प्रवाह बनाए रखती है। सवाल-जवाब 1. अपराजिता के पौधे को रोजाना कितने घंटे धूप में रखना चाहिए? अपराजिता के पौधे को रोजाना लगभग 5 से 6 घंटे की सीधी धूप मिलने वाली जगह पर रखना चाहिए। 2. पौधे की छंटाई कितने दिनों के अंतराल पर करनी चाहिए? पौधे की सूखी और अनावश्यक टहनियों की छंटाई करीब 15 से 20 दिनों में एक बार की जा सकती है। 3. अपराजिता के लिए कौन सी खाद सबसे उपयुक्त मानी गई है? महीने में एक बार वर्मीकम्पोस्ट या सड़ी हुई गोबर की खाद और सीमित मात्रा में केले के छिलकों की खाद डालना फायदेमंद होता है। 4. लकड़ी की राख का प्रयोग करते समय क्या सावधानी रखनी चाहिए? लकड़ी की राख का इस्तेमाल सीमित मात्रा में ही करना चाहिए, क्योंकि ज्यादा राख डालने से मिट्टी का pH स्तर बदल सकता है। 5. अपराजिता के पौधे में पानी कब और कैसे देना चाहिए? मिट्टी की ऊपरी सतह सूखने पर ही पानी दें और गमले में जल निकासी के लिए पर्याप्त छेद जरूर रखें ताकि पानी जमा न हो। 6. फूल मुरझाने के बाद उन्हें हटाना क्यों जरूरी है? मुरझाए फूलों को हटाने से पौधा साफ-सुथरा रहता है और अनुकूल परिस्थितियों में नई फूल कलियों के विकास में मदद मिलती है। https://trendkia.com/lifestyle/ghar-par-aparajita-ki-bel-ko-phoolon-se-bharne-ke-liye-apnayein-ye-aasan-bagwani-tareeqe-dr-ratan-kumar-ne-bataye-zaroori-niyam-41685 TrendKia — Har trend, sabse pehle.