घर और बाथरूम में कनखजूरों के बढ़ते आतंक को रोकने के पांच असरदार घरेलू तरीके बरसात के दिनों में सीलन और नमी के कारण घरों में कनखजूरों का जमावड़ा बढ़ जाता है। कुछ बुनियादी सावधानियों और घरेलू उपायों की मदद से इनसे पूरी तरह निजात पाई जा सकती है। बरसात के दिनों में अक्सर घरों के भीतर कई तरह के कीड़े-मकोड़े अपना बसेरा बना लेते हैं, जिनमें कनखजूरा सबसे आम और डरावना जीव माना जाता है। यह जीव मुख्य रूप से अंधेरे, ठंडक और सीलन भरे कोनों की तरफ खिंचा चला आता है। घर के जिस भी हिस्से में पानी जमा रहता है, पौधों के इर्द-गिर्द की गीली मिट्टी या फिर खुले नाले और पाइपलाइन इसके पनपने के सबसे मुफीद ठिकाने बन जाते हैं। अगर आपके आवास या आसपास के कमरों में कनखजूरों की मौजूदगी लगातार बढ़ रही है, तो कुछ आसान और व्यावहारिक तौर-तरीकों को अमल में लाकर इस समस्या को पूरी तरह खत्म किया जा सकता है। सीलन और नमी पर नियंत्रण रखना बेहद जरूरी कनखजूरा पूरी तरह से नमी वाले वातावरण पर निर्भर रहता है और सूखी जगहों पर उसका जीवित रहना मुश्किल होता है। इसलिए घर के उन सभी हिस्सों की लगातार निगरानी करें जहां पानी रुकने की संभावना होती है। उदाहरण के लिए आलू या अन्य सब्जियां रखने के स्टोरेज एरिया में धुलाई के बाद पानी न ठहरने दें। कमरों और बाथरूम में हवा का बेहतर बहाव बनाए रखने के लिए खिड़कियां खुली रखें और एग्जॉस्ट फैन का नियमित इस्तेमाल करें। जब घर के भीतर का वातावरण सूखा और हवादार रहेगा, तो कनखजूरों के छिपने और अंडे देने की संभावनाएं खुद-ब-खुद समाप्त हो जाएंगी। नालियों की सुरक्षा और नियमित सफाई घर के भीतर कनखजूरों का सबसे प्रमुख प्रवेश द्वार बाथरूम और रसोई की नालियां होती हैं। इन पाइपों के जरिए वे आसानी से रेंगते हुए कमरों के अंदर दाखिल हो जाते हैं। इससे बचने के लिए सभी खुली नालियों पर सटीक नाप के ढक्कन या बारीक लोहे व प्लास्टिक की जालियां लगानी चाहिए। इसके अतिरिक्त नालियों के भीतर जैविक कचरा, बाल और गंदगी को जमा न होने दें। पाइपों की समय-समय पर गहरी सफाई करते रहने से न केवल बदबू दूर होती है बल्कि कीटों को पनपने का आधार भी नहीं मिलता। दीवारों और पाइपों के आसपास की दरारों को भरें घर की पुरानी दीवारों, फर्श की टाइलों के जोड़ या फिर प्लंबिंग पाइप के प्रवेश स्थानों पर अक्सर बारीक छेद और दरारें रह जाती हैं। कनखजूरों का चपटा शरीर इन संकरे छेदों में छिपने और वहां से घर के अंदर आने के लिए बहुत मुफीद होता है। ऐसे सभी संभावित रास्तों का बारीकी से मुआयना करें और अच्छी गुणवत्ता वाले सीलेंट या ग्राउट मिश्रण से उन्हें पूरी तरह बंद कर दें। खासतौर पर उन जोड़ों की जांच जरूरी है जहां से पानी के मुख्य पाइप दीवार को भेदकर घर के भीतर आते हैं। बेकार पड़े कबाड़ और गीली वस्तुओं को तुरंत हटाएं मकान के कोने में पड़ा अनुपयोगी सामान, मलबे के ढेर, नारियल के सूखे-गीले छिलके या पुरानी लकड़ी के तख्ते कीड़े-मकोड़ों की सबसे पसंदीदा शरणगाह होते हैं। किसी भी स्टोरेज क्षेत्र में फालतू वस्तुओं का ढेर न लगने दें। अगर कोई भी वस्तु सीलन सोख चुकी है, तो उसे तत्काल बाहर निकालकर धूप में सुखाएं या घर से हटा दें। जब छिपने के ये प्राकृतिक ठिकाने ही नहीं बचेंगे, तो कीटों की संख्या में अपने आप भारी गिरावट दर्ज होगी। नीम के पत्तों के पानी से नियमित पोछा लगाएं प्राकृतिक एंटीबैक्टीरियल गुणों से भरपूर नीम के पत्ते कीटों को दूर रखने में बेहद कारगर माने जाते हैं। ताजी नीम की पत्तियों को पानी में अच्छी तरह भिगोकर या उबालकर एक तरल घोल तैयार कर लें। इस पानी का इस्तेमाल फर्श पर पोछा लगाने और कोनों की धुलाई के लिए करें। हालांकि केवल यह उपाय कनखजूरों को एक झटके में पूरी तरह नष्ट नहीं कर सकता, लेकिन घर की बुनियादी स्वच्छता, जलभराव की रोकथाम और नियमित देखरेख के साथ मिलकर यह एक असरदार ढाल की तरह काम करता है। इसका आप पर असर घर के कोनों में नमी नियंत्रण और उचित सफाई अपनाने से कीड़े-मकोड़ों से होने वाले जोखिम और अचानक काटने की आशंका से बचाव संभव होता है। • दैनिक स्वच्छता: नियमित नालियों की जाली और सीलेंट लगाने से अचानक बाथरूम में निकलने वाले जहरीले कीटों से परिवार की सुरक्षा बढ़ती है। इसके लिए किसी महंगे केमिकल पर खर्च किए बिना साधारण रखरखाव से ही काम चल जाता है। • घर की सुरक्षा: सीलन खत्म होने और कबाड़ हटाने से मकान की दीवारों की उम्र सुधरती है और फंगस की समस्या भी नहीं फैलती। इस प्रक्रिया को अपनाने से कपड़ों और बर्तनों के खराब होने का खतरा काफी घट जाता है। • बजट पर असर: भारी पेस्ट कंट्रोल सेवाओं के खर्च की जगह घरेलू नीम के पानी और जाली के छोटे प्रयोग से पैसों की सीधी बचत होती है। यह तरीका बच्चों और पालतू जानवरों के स्वास्थ्य के लिहाज से भी सुरक्षित साबित होता है। • बरसाती सावधानी: बारिश के महीनों में नियमित वेंटिलेशन से कमरों के अंदर की हवा तरोताजा बनी रहती है और बदबू खत्म होती है। रोज एग्जॉस्ट फैन चलाने से बिजली की बहुत कम लागत में स्थायी सूखापन हासिल किया जा सकता है। ऐसा क्यों हुआ बरसात के मौसम में बाहरी जमीन अत्यधिक तरबतर हो जाती है, जिससे जमीन के नीचे रहने वाले कनखजूरे सूखी और सुरक्षित जगहों की तलाश में इंसानी बस्तियों का रुख करते हैं। • नमी और अंधेरे का आकर्षण: कनखजूरों का प्राकृतिक आवास सीलन भरी जगहों पर निर्भर करता है क्योंकि उनकी शारीरिक संरचना अत्यधिक सूखेपन को सहन नहीं कर पाती। बाथरूम, बेसमेंट और पाइपों के पास पानी का जमाव उनके लिए सबसे अनुकूल माहौल तैयार करता है। • खुले रास्तों की मौजूदगी: जल निकासी के अनकवर्ड पाइप और दीवारों के पास छूटी बारीक दरारें इन कीटों को सीधे कमरों के भीतर प्रवेश दिलाती हैं। कचरा जमा रहने पर नालियों में भोजन के रूप में अन्य सूक्ष्म कीट भी मिल जाते हैं जो इन्हें आकर्षित करते हैं। • सामान के ढेरों में प्राकृतिक पनाह: पुराने बक्से, गीली लकड़ियां या नारियल के छिलके हवा से बचकर छिपने के लिए आदर्श अंधकारमय ठिकाना बनाते हैं। जब तक ऐसे कबाड़ और जलभराव के स्रोतों को हटाया नहीं जाता, कीटों का आना-जाना बना रहता है। सवाल-जवाब 1. कनखजूरे मुख्य रूप से घर के किन स्थानों पर दिखाई देते हैं? ये मुख्य रूप से अंधेरी और सीलन भरी जगहों जैसे बाथरूम, नालियों के मुहाने, गीले पौधों के आसपास और सब्जी भंडारण क्षेत्रों में पाए जाते हैं। 2. कनखजूरों को नालियों के रास्ते अंदर आने से कैसे रोका जाए? सभी खुली नालियों पर सटीक नाप के ढक्कन या बारीक जालियां लगाएं और पाइपों में जमा कचरे की नियमित सफाई करते रहें। 3. दीवारों की दरारों को भरना क्यों आवश्यक है? दीवारों और पाइपों के आसपास की संकरी दरारें कनखजूरों के छिपने और घर में घुसने का रास्ता बनती हैं, जिन्हें सीलेंट या ग्राउट से बंद करना जरूरी है। 4. नीम की पत्तियों का पानी इस समस्या में किस प्रकार सहायता करता है? नीम की पत्तियों को पानी में भिगोकर तैयार किए गए घोल से पोछा लगाने पर कीटों को प्राकृतिक रूप से दूर रखने में मदद मिलती है। https://trendkia.com/lifestyle/ghara-aura-batharuma-men-kanakhajuron-ke-barhate-atnka-ko-rokane-ke-pancha-asaradara-gharelu-tarike-34913 TrendKia — Har trend, sabse pehle.