घर के दरवाजे पर उगाई परवल की बेल, दरभंगा का यह परिवार 6 महीने से नहीं गया सब्जी बाजार दरभंगा के नवीन कुमार पांडे ने आंगन की खाली जमीन पर बिना किसी रासायनिक खाद के परवल की बेल लगाई, और अब 10 लोगों का उनका पूरा परिवार बीते छह महीने से रोज ताजी, शुद्ध परवल खा रहा है। दरभंगा जिले के रहने वाले नवीन कुमार पांडे के घर का दरवाजा अब किसी छोटे खेत से कम नहीं लगता। यहां लगी परवल की हरी बेल ने उनके परिवार की रसोई की पूरी तस्वीर बदल दी है। बीते छह महीने से उनके घर में परवल खरीदने के लिए कोई बाजार नहीं गया, क्योंकि हर सुबह ताजी सब्जी उनके अपने आंगन में ही तैयार मिलती है। एक दोस्त के घर से शुरू हुई कहानी नवीन बताते हैं कि उनके इलाके में मनोरथा गांव की तरफ परवल की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। एक दिन वे अपने एक दोस्त के यहां पहुंचे तो वहां लहलहाती परवल की लताएं देखकर उनका मन ललचा गया। दोस्त ने उन्हें भी कुछ बेलें दे दीं। तभी नवीन के मन में सवाल उठा कि जब मनोरथा की जमीन पर इतनी अच्छी परवल हो सकती है, तो उनके अपने दरवाजे पर पड़ी खाली जमीन पर क्यों नहीं। न केमिकल, न रासायनिक खाद घर लौटकर उन्होंने वही बेलें अपनी खाली जमीन में गाड़ दीं। खास बात यह रही कि उन्होंने इसमें किसी तरह की रासायनिक खाद का इस्तेमाल नहीं किया। सिर्फ गोबर की खाद और घर में इस्तेमाल होने वाले पानी के सहारे बेल को पाला। नतीजा देखकर खुद उनका परिवार हैरान रह गया। बेल इतनी फलने-फूलने लगी कि 10 लोगों का उनका पूरा परिवार बीते छह महीने से रोज ताजी परवल तोड़कर खा रहा है। तरीका भी बेहद आसान है, सुबह उठते ही दरवाजे से हरी परवल तोड़ी, धोई और सीधे रसोई में भेज दी। बाजार के चक्कर अपने आप खत्म हो गए। शुद्धता ही सबसे बड़ी वजह नवीन पांडे इस बात पर सबसे ज्यादा जोर देते हैं कि उनकी परवल पूरी तरह बिना खाद और बिना दवा की है। उनके शब्दों में, “ये पूरी तरह बिना खाद की परवल है। मार्केट वाली परवल में दवा और केमिकल का डर लगा रहता है, जो सेहत पर बुरा असर डालता है। पर घर की परवल एकदम शुद्ध है, इसलिए बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सब खाते हैं।” यही भरोसा है जिसकी वजह से परिवार का हर सदस्य बेझिझक इसे खाता है। सेहत के लिहाज से भी फायदेमंद परवल वैसे भी सेहत के लिहाज से कमाल की सब्जी मानी जाती है। यह आयरन, विटामिन और फाइबर से भरपूर होती है। शुगर के मरीजों के लिए इसे फायदेमंद बताया जाता है और गर्मियों में यह शरीर को ठंडक भी देती है। अब नवीन के घर में रोजाना परवल की भुजिया, भरवा परवल, चटनी और सब्जी बनती है। इससे जहां खाने का स्वाद बढ़ गया है, वहीं बाजार पर होने वाला खर्च भी बच गया है। थोड़ी जगह, थोड़ी मेहनत और आत्मनिर्भरता नवीन का मानना है कि थोड़ी सी जगह और थोड़ी मेहनत से कोई भी अपने घर में सब्जी उगा सकता है। परवल की बेल की खूबी यह है कि एक बार ठीक से लग जाए तो महीनों तक लगातार फल देती रहती है। दरभंगा के इस परिवार ने यह साबित कर दिया कि जरूरत पड़ने पर इंसान सिर्फ जुगाड़ ही नहीं निकालता, बल्कि सेहत और बचत दोनों का रास्ता भी खोज लेता है। आंगन में लगी यह परवल की बेल अब उनके लिए केवल एक सब्जी नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर होने की पहचान बन चुकी है। इसका आप पर असर आपके लिए इसका क्या मतलब है: • भारत में: घर के आंगन या खाली जमीन पर गोबर की खाद से परवल जैसी बेल वाली सब्जी उगाकर आप केमिकल मुक्त, ताजी सब्जी पा सकते हैं और बाजार का खर्च बचा सकते हैं। • दरभंगा में: जिन घरों के पास थोड़ी खाली जमीन है, वे इस आसान तरीके को अपनाकर महीनों तक शुद्ध परवल की लगातार पैदावार ले सकते हैं। सवाल-जवाब 1. नवीन कुमार पांडे ने परवल उगाने के लिए किस खाद का इस्तेमाल किया? उन्होंने किसी भी रासायनिक खाद का इस्तेमाल नहीं किया, सिर्फ गोबर की खाद और घर के पानी से बेल को पाला। 2. उनका परिवार कितने समय से घर की परवल खा रहा है? नवीन का 10 लोगों का पूरा परिवार बीते छह महीने से रोज ताजी परवल तोड़कर खा रहा है। 3. उन्हें परवल की बेलें कहां से मिलीं? मनोरथा गांव की तरफ परवल की खेती बड़े पैमाने पर होती है, और एक दोस्त के यहां जाने पर दोस्त ने उन्हें कुछ बेलें दे दीं। 4. परवल सेहत के लिए कैसे फायदेमंद है? परवल आयरन, विटामिन और फाइबर से भरपूर होती है, शुगर के मरीजों के लिए फायदेमंद मानी जाती है और गर्मियों में शरीर को ठंडक देती है। https://trendkia.com/lifestyle/ghara-ke-daravaje-para-ugai-paravala-ki-bela-darabhnga-ka-yaha-parivara-6-mahine-1214 TrendKia — Har trend, sabse pehle.