घर की बगिया में अपराजिता पर नहीं खिल रहे फूल तो आजमाएं ये आसान घरेलू नुस्खे, कलियों से लद जाएगी बेल सही गमले, उपजाऊ मिट्टी के मिश्रण और घरेलू जैविक पोषण की मदद से अपराजिता की बेल में ढेरों नीले, सफेद और बैंगनी फूल खिलाए जा सकते हैं। घर के आंगन या बालकनी में हरी भरी बेलों पर खिले रंग बिरंगे फूल वातावरण को ताजगी और सुकून से भर देते हैं। भारतीय परंपरा और बागवानी में पारिजात, मधुकामिनी और अपराजिता को अत्यंत पूजनीय माना गया है, जिनके संदर्भ में मान्यता है कि ये सीधे स्वर्गलोक से पृथ्वी पर आए हैं। अपराजिता का पौधा केवल अपने आकर्षण के लिए ही नहीं जाना जाता, बल्कि इसे विजय, पारिवारिक शांति और खुशहाली का प्रतीक भी माना जाता है। वास्तु और गृह सज्जा के नियमों के अनुसार इस पवित्र बेल को हमेशा पूर्व अथवा उत्तर पूर्व दिशा में स्थापित करना शुभ फलदायी रहता है। वानस्पतिक और पारंपरिक पहचान के तौर पर इसे शंखपुष्पी, बटरफ्लाई पी फ्लावर, विष्णुकांता, गौकर्णी और नीलकंठा जैसे नामों से पुकारा जाता है। आमतौर पर जून से नवंबर के महीनों में यह बेल अपने सबसे खूबसूरत रूप में होती है और इस दौरान अनगिनत फूल खिलते हैं। कई बार उचित देखरेख के अभाव में लोग शिकायत करते हैं कि उनकी बेल पर फूल नहीं आ रहे हैं, जिसके समाधान के लिए कुछ बुनियादी बागवानी नियमों और घरेलू पोषण को समझना आवश्यक है। रंगों की छटा और उपयोगी विशेषताएं अपराजिता के फूलों में कोई महक या खुशबू नहीं पाई जाती, परंतु अपनी मनमोहक बनावट और गहरे नीले, सफेद तथा बैंगनी रंगों के कारण ये हर किसी का ध्यान खींच लेते हैं। ये पुष्प घर की शोभा बढ़ाने के साथ साथ औषधीय गुणों और धार्मिक अनुष्ठानों में विशेष स्थान रखते हैं। भगवान की पूजा अर्चना में अर्पित किए जाने के अलावा सेहत के प्रति जागरूक लोग इन फूलों का उपयोग प्राकृतिक ब्लू टी तैयार करने में भी करते हैं। अक्सर देखा जाता है कि जब बागवानी प्रेमी नर्सरी से नया पौधा लाकर गमले में लगाते हैं, तो कुछ समय बाद पौधे की बढ़वार रुक जाती है और कलियां आना बंद हो जाती हैं। इस निराशाजनक स्थिति का सबसे बड़ा कारण अनुपयुक्त गमले का चयन और पौधों की बुनियादी जैविक आवश्यकताओं की अनदेखी करना होता है। गमले का आकार और मिट्टी का आदर्श मिश्रण अपराजिता एक तेजी से फैलने वाली बेल है, इसलिए इसे पनपने के लिए पर्याप्त जगह की दरकार होती है। इस पौधे को रोपने के लिए न्यूनतम 12×12 इंच माप का गमला चुनना चाहिए। यदि आप 15 इंच का बड़ा गमला उपयोग में ला रहे हैं, तो उसमें दो पौधे एक साथ लगाना अधिक फलदायी रहता है। गमले की तली में ड्रेनेज होल होना अनिवार्य है ताकि सिंचाई का अतिरिक्त पानी सुगमता से बाहर निकल सके और जड़ों के सड़ने का जोखिम न रहे। इस बेल के स्वस्थ विकास के लिए वेल ड्रेन मिट्टी यानी पानी को ठहरने न देने वाली भुरभुरी मिट्टी की आवश्यकता होती है। यदि आप पुराने गमले से निकाली गई मिट्टी काम में ले रहे हैं, तो उसे उपयोग से पूर्व दो से तीन दिनों तक तेज धूप में सुखाएं ताकि सभी हानिकारक जीवाणु नष्ट हो जाएं। यदि नई मिट्टी बना रहे हैं, तो 40 प्रतिशत नई मिट्टी लेकर उसमें 20 प्रतिशत कोकोपीट और 30 से 40 प्रतिशत वर्मी कंपोस्ट अथवा गोबर की सड़ी खाद अच्छी तरह मिला लें। इस तैयार मिश्रण में थोड़ा सा कैल्शियम पाउडर और थोड़ी सी नीम खली अवश्य शामिल करें। नीम खली के प्रयोग से पत्तों में प्राकृतिक चमक आती है और जड़ों को फफूंद अथवा फंगस के संक्रमण से सुरक्षा मिलती है। फूलों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए मिट्टी में 200 ग्राम सीजन फ्लावर फूड मिलाना लाभकारी सिद्ध होता है। ध्यान देने योग्य बात यह है कि इस औषधीय पौधे में कभी भी बोन मील या रासायनिक खादों का प्रयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि केमिकल फर्टिलाइजर डालने से इसके प्राकृतिक औषधीय गुणों में कमी आ जाती है। तापमान, धूप और मौसमी बदलावों से सुरक्षा अपराजिता मुख्य रूप से गर्म मौसम को पसंद करने वाला पौधा है, जो 15 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच सबसे तेजी से वृद्धि करता है। इस बेल को भरपूर फूल देने के लिए प्रतिदिन कम से कम 5 घंटे की सीधी धूप की आवश्यकता होती है, क्योंकि धूप की कमी से कलियां बनना बंद हो जाती हैं। चूंकि यह एक लता रूपी बेल है और इसकी जड़ें बहुत तेजी से फैलती हैं, इसलिए इसे ऊपर चढ़ने के लिए जाली अथवा नेट के सहारे की जरूरत पड़ती है। सर्दियों के आगमन पर तापमान में गिरावट आते ही यह पौधा डोरमेंसी यानी सुप्तावस्था में चला जाता है, जिस दौरान इसकी पत्तियां पीली पड़कर झड़ने लगती हैं। कड़ाके की ठंड और पाले से पौधे को बचाने के लिए रात के समय इसे सूती कपड़े से ढकें अथवा गमले की मिट्टी की ऊपरी सतह पर भूसा बिछाकर मल्चिंग करें। ठंड का मौसम समाप्त होने पर फरवरी माह में बेल की हार्ड प्रूनिंग यानी गहरी छंटाई कर दें और सूखी टहनियों को काटकर अलग कर दें। ठीक इसी प्रकार जून महीने की भीषण लू और झुलसाने वाली गर्मी से भी पौधे की रक्षा करें। समय समय पर पौधे की गुड़ाई करते रहने और हल्की कटाई छंटाई करने से बेल घनी होती है। यदि कभी पत्तों पर छोटी छोटी इल्लियों अथवा कीटों का प्रकोप दिखे, तो तुरंत नीम ऑयल का पानी में घोल बनाकर स्प्रे कर देना चाहिए। घरेलू पोषण और कलियां बढ़ाने के अचूक नुस्खे यदि आपकी बेल घनी और हरी भरी हो चुकी है लेकिन फूल नहीं आ रहे हैं, तो रासायनिक विकल्पों के बजाय प्राकृतिक घरेलू खादों का रुख करना चाहिए। जब पौधा स्वस्थ विकास कर रहा हो, तो वर्मी कंपोस्ट की मात्रा कम करके पीली सरसों और आलू के छिलकों का तरल टॉनिक तैयार किया जा सकता है। इसके लिए मिक्सर ग्राइंडर में पीली सरसों को बारीक पीस लें। साथ ही आलू के सूखे छिलकों को पीसकर पाउडर बना लें। यदि सूखे छिलके उपलब्ध न हों, तो ताजा आलू को ही मिक्सर ग्राइंडर में अच्छी तरह पीस लें। इस पिसे हुए आलू के पेस्ट को पानी में मिलाएं और उसमें दो से तीन चम्मच पीली सरसों का पाउडर डालकर घोल लें। इस मिश्रण को रात भर भीगने के लिए छोड़ दें और अगली सुबह छानकर गमले की मिट्टी में डालें। यह मिश्रण मिट्टी में पोषक तत्वों को सक्रिय कर अनगिनत फूल लाने में मदद करता है। इस टॉनिक को बनाने का दूसरा सरल तरीका यह है कि पीली सरसों और साबुत आलू को एक साथ मिक्सर ग्राइंडर में बारीक पीस लें। इस तैयार पेस्ट को पानी में अच्छी तरह घोलकर पूरे 24 घंटे के लिए रख दें। 24 घंटे की इस प्रक्रिया के पश्चात इस घोल को गमले की जड़ों के आसपास डाल दें। इसके अतिरिक्त, घर में इस्तेमाल हो चुकी चाय पत्ती को धोकर अच्छी तरह सुखा लें, फिर उसमें थोड़ी सी हल्दी मिलाकर पौधे की जड़ों में डालने से भी मिट्टी की उर्वरता सुधरती है। पौधे में लगातार फूल आते रहें, इसके लिए खिले हुए फूलों को प्रतिदिन तोड़ते रहना चाहिए। नियमित रूप से फूल तोड़ने से नई कलियां तेजी से फूटती हैं। बेल की संपूर्ण शक्ति और पोषण के लिए गमले में सीवीड ग्रेन्यूल्स डालना भी अत्यंत असरदार साबित होता है। इसका आप पर असर घर में अपराजिता का पौधा लगाने वाले लोग सही देखभाल और घरेलू जैविक खाद अपनाकर बिना किसी खर्च के अपनी बगिया को फूलों से महका सकते हैं। • गमले का चुनाव: पौधे की रोपाई के लिए कम से कम 12×12 इंच या दो पौधों के लिए 15 इंच का गमला ही चुनें। इससे जड़ों को फैलने की पर्याप्त जगह मिलेगी और बेल में फूलों की संख्या तुरंत बढ़ जाएगी। • धूप की व्यवस्था: गमले को ऐसी जगह पर रखें जहां प्रतिदिन न्यूनतम 5 घंटे सीधी धूप आती हो। पर्याप्त रोशनी मिलने से कलियां तेजी से बनेंगी और पौधा कभी मुरझाएगा नहीं। • घरेलू नुस्खा: पीली सरसों और आलू के छिलकों से बना टॉनिक रात भर भिगोकर सुबह मिट्टी में डालें। यह मुफ्त का जैविक पोषण पौधे को रसायनों के नुकसान से बचाते हुए भारी मात्रा में फूल खिलाएगा। • दैनिक तुड़ाई: खिले हुए फूलों को हर रोज शाम या सुबह नियमित रूप से तोड़ते रहें। इससे बेल में लगातार नई कलियां फूटती रहेंगी और पौधा लंबे समय तक खिला रहेगा। ऐसा क्यों हुआ अपराजिता के पौधे में फूल न आने का मुख्य कारण अनुचित गमला, पोषण की कमी और अपर्याप्त धूप होती है। सही परिस्थितियों के अभाव में बेल अपनी ऊर्जा केवल पत्तों के विकास में खर्च कर देती है। • धूप और तापमान की कमी: अपराजिता उष्णकटिबंधीय पौधा है जिसे रोजाना 5 घंटे धूप और 15 से 35 डिग्री का तापमान चाहिए। कम धूप या अत्यधिक ठंड में पौधा निष्क्रिय होकर फूल देना पूरी तरह बंद कर देता है। • जलभराव और खराब मिट्टी: भारी मिट्टी में ड्रेनेज होल न होने से जड़ों के पास पानी ठहर जाता है। इससे जड़ों में फंगस लग जाती है और पौधा कलियां बनाने के बजाय सड़ने लगता है। • पोषक तत्वों का असंतुलन: केवल रासायनिक खाद देने या जैविक खाद की कमी से पौधे को आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व नहीं मिल पाते। पीली सरसों, आलू का टॉनिक और सीजन फ्लावर फूड जैसे प्राकृतिक तत्व ही कलियों को उभारते हैं। सवाल-जवाब 1. अपराजिता के पौधे को किस दिशा में लगाना चाहिए? अपराजिता के पौधे को घर के आंगन या बालकनी में हमेशा पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। 2. अपराजिता के पौधे के लिए कितने बड़े गमले की जरूरत होती है? इस पौधे के लिए कम से कम 12×12 इंच का गमला होना चाहिए, जबकि 15 इंच के गमले में दो पौधे लगाए जा सकते हैं। 3. अपराजिता में फूल खिलने का मुख्य मौसम कौन सा होता है? अपराजिता के फूल मुख्य रूप से जून से नवंबर के महीनों के दौरान सबसे अच्छी तरह और सर्वाधिक मात्रा में खिलते हैं। 4. अपराजिता की बेल को रोजाना कितने घंटे धूप चाहिए? अच्छी बढ़वार और ज्यादा फूल पाने के लिए इस बेल को हर दिन कम से कम 5 घंटे की सीधी धूप मिलनी चाहिए। 5. सर्दियों में अपराजिता के पौधे की देखभाल कैसे करें? सर्दियों में इसे रात को कपड़े से ढकें या गमले में भूसा डालें, फिर ठंड बीतने के बाद फरवरी में इसकी हार्ड प्रूनिंग करें। 6. पौधे में अधिक फूल लाने के लिए कौन सा घरेलू नुस्खा अपनाएं? पीली सरसों और आलू के छिलकों को पीसकर पानी में रात भर भिगोएं और अगली सुबह इस मिश्रण को गमले की मिट्टी में डालें। https://trendkia.com/lifestyle/ghara-ki-bagiya-men-aparajita-para-nahin-khila-rahe-phula-to-ajamaen-ye-asana-gharelu-nuskhe-kaliyon-se-lada-jaegi-bela-34902 TrendKia — Har trend, sabse pehle.