घर की छत या बालकनी में ऐसे उगाएं ताजी सब्जियां, बारिश के मौसम में करें ये आसान गार्डनिंग मानसून का मौसम घर पर किचन गार्डन तैयार करने का सबसे बेहतरीन समय होता है। छत या बालकनी में गमलों की मदद से आसानी से ऑर्गेनिक सब्जियां उगाई जा सकती हैं। मानसून का सीजन घर में किचन गार्डन की शुरुआत करने के लिए बेहद अनुकूल माना जाता है। घर की किसी भी खाली छत, बालकनी या छोटी सी जगह का इस्तेमाल करके गमले और ग्रो बैग रखे जा सकते हैं, जिससे आसानी से सब्जियां उगाई जा सकती हैं। इससे न केवल घर के आसपास ताजी हरियाली देखने को मिलती है, बल्कि रोजाना के खाने में इस्तेमाल होने वाली शुद्ध सब्जियां भी घर पर ही मिल जाती हैं। इस तरह की बागवानी से बाजार की सब्जियों पर निर्भरता कम होती है और ताजे फल-सब्जियों का आनंद भी मिलता है। कौन सी सब्जियां उगाना है आसान इस मौसम में पालक, मेथी, गिलकी, धनिया, हरी मिर्च और कई अन्य पत्तेदार सब्जियों को घर पर आसानी से उगाया जा सकता है। इन पौधों को बहुत अधिक जमीन या बड़े स्थान की आवश्यकता नहीं होती है, इसलिए इन्हें छोटे गमलों में भी सफलतापूर्व लगाया जा सकता है। जो लोग बागवानी की शुरुआत कर रहे हैं, उनके लिए ये पौधे सबसे सरल और बेहतर विकल्प साबित होते हैं। इन सब्जियों की देखभाल करना भी ज्यादा कठिन नहीं होता है। बड़े गमलों और पौधों के लिए जरूरी तैयारी यदि छत पर थोड़ी अधिक जगह उपलब्ध है, तो टमाटर, गिलकी, लौकी और हरी मिर्च जैसे पौधे भी आसानी से लगाए जा सकते हैं। इनके लिए ऐसे गमलों या ग्रो बैग का चुनाव करना चाहिए जिनके निचले हिस्से में पानी निकासी के लिए उचित छेद दिए गए हों। विशेष रूप से टमाटर के पौधे को ऊपर की ओर बढ़ने के लिए सहारे की जरूरत पड़ती है, इसलिए समय पर लकड़ी या किसी स्टिक का सहारा देना आवश्यक होता है जिससे पौधा सीधा और मजबूत रहे। छोटी जगह में उगने वाली जड़ी-बूटियां और सब्जियां धनिया, पुदीना, हरी मिर्च और अदरक जैसी रोजमर्रा की जरूरत वाली चीजें बेहद सीमित जगह में भी उगाई जा सकती हैं। धनिया उगाने के लिए हमेशा चौड़े मुंह वाले गमलों का उपयोग करना चाहिए और बीजों को मिट्टी में बहुत हल्की गहराई पर बोना चाहिए। वहीं, पुदीने को हमेशा एक अलग और स्वतंत्र गमले में लगाना ही बेहतर माना जाता है क्योंकि इसकी फैलने की गति काफी तेज होती है। मिट्टी तैयार करने का सही तरीका गमलों को भरते समय सामान्य मिट्टी के साथ अच्छी तरह से सड़ी हुई जैविक खाद या कंपोस्ट को ठीक प्रकार से मिलाना चाहिए। इस्तेमाल की जाने वाली मिट्टी अत्यधिक कठोर नहीं होनी चाहिए, जिससे पौधों की जड़ों तक पर्याप्त मात्रा में हवा और पानी का संचार आसानी से हो सके। इसके अलावा, गमले के अंदर जल निकासी की व्यवस्था को दुरुस्त रखना बेहद जरूरी होता है ताकि पानी कभी रुके नहीं। बुआई और बीजों की उचित दूरी सब्जियों के बीजों को मिट्टी के अंदर आवश्यकतानुसार हल्की गहराई पर ही बोना चाहिए और शुरुआती दिनों में हल्की सिंचाई करनी चाहिए। एक ही स्थान पर बहुत सारे बीज एक साथ डाल देने से पौधों को बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिलती है। जब पौधे थोड़े बड़े आकार के हो जाएं, तो उनकी ग्रोथ को ध्यान में रखते हुए उचित दूरी बना देना फायदेमंद होता है। बारिश के पानी से पौधों का बचाव बरसात के इस मौसम में सबसे महत्वपूर्ण बात यह ध्यान रखनी होती है कि गमलों के अंदर किसी भी स्थिति में पानी जमा न हो। लगातार बारिश होने की स्थिति में अतिरिक्त पानी को तुरंत बाहर निकल जाने देना चाहिए और जरूरत से ज्यादा पानी देने से बचना चाहिए। यदि गमले में पानी भरा रहता है, तो इससे पौधों की जड़ें सड़ने लगती हैं और तरह-तरह की बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है। धूप, देखभाल और कीट नियंत्रण सब्जियों के इन पौधों को हमेशा ऐसी खुली जगह पर रखना चाहिए जहाँ इन्हें पर्याप्त मात्रा में प्राकृतिक रोशनी मिल सके। पौधों की समय-समय पर छंटाई करें और सूखी पत्तियों को हटाते रहें। यदि पत्तियों पर किसी प्रकार के कीट या बीमारी के लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत उचित कदम उठाएं। समय-समय पर जैविक खाद का इस्तेमाल करके पौधों के विकास को बेहतर बनाए रखा जा सकता है। किचन गार्डन से होने वाले फायदे अपनी छत या बालकनी में छोटा सा किचन गार्डन तैयार करने से घर में काम आने वाली कई सब्जियां खुद ही उगाई जा सकती हैं। इससे बाजार से बार-बार थोड़ी मात्रा में सब्जियां खरीदने में लगने वाले पैसों की बचत होती है। इसके अलावा, अपने ही हाथों से उगाई गई एकदम ताजी और केमिकल-फ्री सब्जियों का स्वाद और सेहत दोनों के लिए बेहद लाभदायक होता है। इसका आप पर असर घर पर किचन गार्डन तैयार करने से घरेलू बजट पर सकारात्मक असर पड़ता है और बाजार की महंगी सब्जियों पर होने वाला खर्च कम होता है। • across india: देश भर में मानसून के दौरान घर पर ताजी सब्जियां उगाने से घरेलू खर्च में बचत होती है और लोगों को मिलावट-मुक्त ऑर्गेनिक आहार मिलता है। • घरेलू बचत: घर की छत या बालकनी में पालक, धनिया और मिर्च जैसी सब्जियां उगाने से रोजमर्रा की सब्जी खरीदारी का खर्च काफी हद तक घट जाता है। ऐसा क्यों हुआ मानसून के मौसम में नमी की प्रचुरता और तापमान में गिरावट पौधों के प्राकृतिक विकास के लिए सबसे अनुकूल परिस्थितियां तैयार करती है। • अनुकूल वातावरण: बारिश के मौसम में हवा में नमी अधिक होने और मिट्टी में लगातार पोषण मिलने से बीजों का अंकुरण तेजी से होता है। • कम लागत का विकल्प: खाली पड़ी छतों और बालकनी का सही इस्तेमाल करके बिना किसी भारी निवेश के घर पर हरी सब्जियां उगाने का मौका मिलता है। • जल प्रबंधन की जरूरत: इस सीजन में पौधे तेजी से बढ़ते हैं लेकिन अत्यधिक बारिश के कारण जलभराव का खतरा रहता है, जिसे रोकने के लिए उचित जल निकासी जरूरी है। सवाल-जवाब 1. मानसून में कौन सी सब्जियां आसानी से उगाई जा सकती हैं? मानसून के मौसम में पालक, मेथी, गिलकी, धनिया, हरी मिर्च और कई अन्य पत्तेदार सब्जियां आसानी से उगाई जा सकती हैं। 2. टमाटर के पौधे को सहारा देने के लिए क्या करना चाहिए? टमाटर के पौधे को बढ़ने के लिए लकड़ी या स्टिक का सहारा देना चाहिए ताकि पौधा सीधा और मजबूत रह सके। 3. पुदीना लगाने के लिए किस प्रकार के गमले का इस्तेमाल करना चाहिए? पुदीने को हमेशा एक अलग गमले में लगाना बेहतर रहता है क्योंकि यह बहुत तेजी से फैलता है। 4. गमले की मिट्टी तैयार करते समय किन चीजों को मिलाना चाहिए? गमले की मिट्टी तैयार करते समय सामान्य मिट्टी के साथ अच्छी तरह सड़ी हुई जैविक खाद या कंपोस्ट मिलाना चाहिए। 5. बारिश के मौसम में पौधों को किस मुख्य समस्या से बचाना चाहिए? बारिश के मौसम में गमलों में पानी जमा होने से बचाना चाहिए ताकि जड़ों में सड़न और बीमारियों का खतरा न बढ़े। https://trendkia.com/lifestyle/ghara-ki-chhata-ya-balakani-men-aise-ugaen-taji-sabjiyan-barisha-ke-mausama-men-karen-ye-asana-gardaninga-24396 TrendKia — Har trend, sabse pehle.