घर की मजबूती के लिए पिलर बनवाते समय इन 4 बातों को कभी न करें नजरअंदाज मकान निर्माण में पिलर की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है, और अनुभवी मिस्त्री बैजू कुमार ने इसे मजबूत बनाने के चार अचूक तरीके बताए हैं। इन सावधानियों को बरतकर आप अपने घर को भूकंप और अग्नि जैसी आपदाओं से सुरक्षित रख सकते हैं। मकान की पूरी उम्र और सुरक्षा उसके पिलर की मजबूती पर टिकी होती है। निर्माण कार्य के दौरान पिलर की अहमियत सबसे अधिक हो जाती है, क्योंकि यही घर का भार उठाते हैं। जहानाबाद के घोसी प्रखंड के रहने वाले अनुभवी राज मिस्त्री बैजू कुमार, जिनके पास पिछले 10 वर्षों का निर्माण कार्य का गहरा अनुभव है, बताते हैं कि पिलर ढालते समय कुछ खास बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। इन सुझावों को अपनाकर न केवल आपका घर भूकंप, आग और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षित रहता है, बल्कि यह लंबे समय तक टिकाऊ भी बनता है। आपकी मेहनत की कमाई से बना घर सुरक्षित रहे, इसके लिए इन चार चरणों का पालन करना अनिवार्य है। पिलर की कवरिंग का महत्व पिलर बनाते समय उसकी कवरिंग का खास ख्याल रखना पड़ता है। मिस्त्री के अनुसार, पिलर के चारों तरफ कम से कम डेढ़ इंच की मोटाई में कंक्रीट और मटेरियल की परत होनी चाहिए। यह सुनिश्चित करना बहुत आवश्यक है कि यह दूरी हर तरफ से समान रहे। जब आप सही कवरिंग देते हैं, तो पिलर के अंदर का सरिया बाहर दिखाई नहीं देता। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि यदि कभी घर में आग जैसी कोई दुर्घटना होती है, तो यह कंक्रीट की मोटी परत अंदरुनी सरिये को झुलसने से बचा लेती है, जिससे पिलर को गंभीर नुकसान पहुंचने की संभावना काफी कम हो जाती है। सरियों की कटाई का सही तरीका बहुत से लोग पिलर के सरियों को एक ही लंबाई में काट देते हैं, जो कि एक बड़ी तकनीकी गलती है। बैजू कुमार के अनुसार, सरियों की कटाई कभी भी बराबर नहीं होनी चाहिए। हमेशा एक सरिया बड़ा और दूसरा सरिया छोटा रखा जाना चाहिए। इसके पीछे का वैज्ञानिक तर्क यह है कि भूकंप जैसी स्थितियों में पिलर पर दबाव पड़ता है। यदि सभी सरिये एक ही स्तर पर कटे होंगे, तो पिलर के अचानक झुकने या टेढ़ा होने का खतरा बढ़ जाता है। सरियों की लंबाई में अंतर रखने से पिलर को मजबूती मिलती है और वह दबाव को बेहतर तरीके से झेल पाता है। रिंग की सही सेटिंग पिलर के भीतर सरियों को अपनी जगह पर स्थिर रखने के लिए रिंग का उपयोग किया जाता है। अक्सर निर्माण के दौरान सरिया आपस में चिपक जाते हैं, जो कमजोरी का कारण बनता है। इससे बचने के लिए सभी सरियों को रिंग से मजबूती से बांधना चाहिए। रिंग बांधते समय यह ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है कि वह 180 डिग्री के कोण पर कसी गई हो। सही तरीके से बंधी हुई रिंग पिलर के सरियों को इधर-उधर हिलने नहीं देती और उन्हें अपनी जगह पर जकड़े रखती है, जिससे पिलर की संरचना पूरी तरह से ठोस बनी रहती है। कॉलम स्टार्टर का इस्तेमाल पिलर का बेस जितना मजबूत होगा, पूरी इमारत उतनी ही सुरक्षित रहेगी। इसके लिए निर्माण के दौरान कॉलम स्टार्टर डालना अनिवार्य है। यह स्टार्टर पिलर के शुरुआती आधार को सही आकार और दिशा देने का काम करता है। कॉलम स्टार्टर का उपयोग करने से पिलर के झुकने या टेढ़ा होने की समस्या पूरी तरह खत्म हो जाती है। जब पिलर बिल्कुल सीधा खड़ा होता है, तो वह जमीन से लेकर छत तक के वजन को समान रूप से संभालता है, जिससे घर की मजबूती कई गुना बढ़ जाती है। इसका आप पर असर भारत में: पिलर के निर्माण में इन चार नियमों का पालन करने से घर की भूकंपीय सुरक्षा बढ़ती है, जो देश के भूकंप के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए बहुत जरूरी है। जहानाबाद में: स्थानीय निवासियों को निर्माण कार्य के दौरान इन अनुभवी मिस्त्री द्वारा बताए गए तकनीकी मानकों का सख्ती से पालन करवाना चाहिए ताकि उनकी जमा पूंजी सही निवेश में बदले। सवाल-जवाब 1. पिलर बनाते समय कवरिंग कितनी होनी चाहिए? पिलर के चारों तरफ कम से कम डेढ़ इंच की मोटाई में मटेरियल का कवर होना चाहिए। 2. पिलर के सरियों की कटाई बराबर क्यों नहीं करनी चाहिए? सरियों की कटाई अलग-अलग लंबाई में रखने से भूकंप के दौरान पिलर के टेढ़ा होने का खतरा कम हो जाता है। 3. पिलर की रिंग बांधते समय किस बात का ध्यान रखें? रिंग को हमेशा 180 डिग्री के कोण पर कसना चाहिए ताकि सरिया अपनी जगह से हिले नहीं। 4. कॉलम स्टार्टर का उपयोग क्यों जरूरी है? कॉलम स्टार्टर पिलर को सीधा रखने और उसका आधार मजबूत बनाने में मदद करता है। https://trendkia.com/lifestyle/ghara-ki-majabuti-ke-liye-pilara-banwate-samay-in-4-baaton-ko-kabhi-na-karein-nazaraandaaz-5501 TrendKia — Har trend, sabse pehle.