घर में बेकार पड़े डिब्बों और बाल्टियों से बनाएं खूबसूरत प्लांटर, पेंट और जूट से मिलेगा नया रूप बाजार से महंगे गमले खरीदने के बजाय घर में मौजूद पुराने प्लास्टिक कंटेनर, पेंट की बाल्टी या स्टील के डिब्बों को सजाकर पौधे लगाने लायक बनाया जा सकता है। सही पेंट, जूट की रस्सी और ड्रेनेज व्यवस्था के साथ इन्हें आकर्षक रूप देना बेहद आसान है। घर में हरियाली जोड़ने और पौधे लगाने की चाह रखने वाले लोगों का ध्यान सबसे पहले सुंदर गमलों पर जाता है। बाजार में तरह-तरह के डिजाइनर और फैंसी प्लांटर उपलब्ध तो रहते हैं, लेकिन कई पौधे होने की स्थिति में इन सबको खरीदना काफी खर्चीला साबित हो सकता है। ऐसे में घर में बेकार पड़ी रोजमर्रा की चीजों को दोबारा इस्तेमाल में लाकर बेहद शानदार गमले तैयार किए जा सकते हैं। थोड़ी सी रचनात्मकता, सही रंगों के चुनाव और साधारण सजावट की मदद से कोई भी साधारण डिब्बा एक आकर्षक प्लांटर का रूप ले सकता है। इन घरेलू चीजों को दोबारा इस्तेमाल कर बनाएं प्लांटर घर में मौजूद कई ऐसी चीजें होती हैं जिन्हें फेंकने के बजाय पौधे लगाने के काम में लाया जा सकता है। पुरानी प्लास्टिक की बाल्टी, पेंट के छोटे खाली डिब्बे, किनारे से चटका हुआ मग, स्टील का पुराना बर्तन या कोई भी मजबूत कंटेनर इस काम के लिए बिल्कुल उपयुक्त साबित होता है। किसी भी वस्तु को चुनने से पहले यह जरूर परख लें कि वह पूरी तरह साफ हो और मिट्टी व पौधे का वजन उठाने लायक मजबूत हो। रसोई में बेकार पड़े डिब्बे भी छोटे आकार के सजावटी पौधों के लिए बेहतरीन विकल्प बनते हैं, बस उनमें पानी की निकासी का सही प्रबंध होना चाहिए। रंगों के सही चुनाव से पुराने बर्तनों को दें नया लुक किसी भी कंटेनर को नया रूप देने के लिए सबसे पहले उसे अच्छी तरह धोकर सुखा लेना चाहिए। सूखी सतह पर ऐसा पेंट लगाएं जो बर्तन की सामग्री पर टिका रहे और जल्दी न छूटे। सफेद, हल्का धूसर (ग्रे), ऑफ-व्हाइट या मिट्टी जैसा भूरा रंग इस्तेमाल करने से कंटेनर को एक सादा और सुरुचिपूर्ण रूप मिलता है। सादे बेस कलर के ऊपर पतली धारियां, छोटे ज्योमेट्रिक आकार या हल्के डॉट्स बनाकर भी डिजाइन तैयार किया जा सकता है। सजावट को बहुत भारी या उलझा हुआ बनाने के बजाय हल्का और व्यवस्थित रखना बेहतर होता है, ताकि वह घर के अन्य कोनों और सजावट से आसानी से मेल खा सके। जूट की रस्सी और कपड़े के टुकड़ों से करें सजावट यदि पेंटिंग करने में रुचि न हो, तो जूट की मोटी रस्सी की मदद से भी कंटेनर को सजाया जा सकता है। डिब्बे के बाहरी हिस्से पर गोंद लगाकर जूट की रस्सी को क्रमबद्ध तरीके से लपेटते जाएं। डिब्बे के ऊपरी घेरे पर अतिरिक्त रस्सी लपेटने से उसकी बनावट अधिक साफ और सुंदर नजर आती है। जूट की यह बनावट बालकनी या खिड़की के पास रखे पौधों के साथ प्राकृतिक रूप से जंचती है। इसके अतिरिक्त घर में बचे हुए साफ कपड़े को कंटेनर के बाहर चिपकाकर उस पर कोई लेस या साधारण किनारी लगाई जा सकती है। बस इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि कपड़ा अंदर की गीली मिट्टी और पानी के सीधे संपर्क में न आए। पौधे के आकार और पानी की निकासी का रखें पूरा ध्यान प्लांटर तैयार करते समय केवल उसकी बाहरी सुंदरता पर ध्यान देना काफी नहीं होता, बल्कि पौधे की जड़ों के फैलाव के लिए पर्याप्त जगह होना भी अनिवार्य है। छोटे और सजावटी पौधों के लिए छोटे डिब्बे उपयुक्त रहते हैं, लेकिन बड़े आकार के पौधे को बहुत छोटे कंटेनर में लगाने से उसकी प्राकृतिक बढ़वार रुक सकती है। इसके साथ ही सबसे जरूरी पहलू पानी की समुचित निकासी का है। कंटेनर के तले में उचित ड्रेनेज होल जरूर बनाएं, जिससे सिंचाई का अतिरिक्त पानी आसानी से बाहर निकल सके। जल निकासी का रास्ता न होने पर पानी अंदर ही जमा रहता है, जिससे मिट्टी हर वक्त अत्यधिक गीली बनी रहती है और पौधे को नुकसान पहुंच सकता है। सही जगह सजाकर बढ़ाएं पूरे घर की सुंदरता तैयार किए गए गमलों का आकर्षण इस बात पर भी निर्भर करता है कि उन्हें घर में किस तरह व्यवस्थित किया गया है। एक ही रंग या एक जैसी बनावट वाले दो-तीन गमलों को खिड़की के पास कतार में रखने से सुंदर दृश्य बनता है। बालकनी में अलग-अलग ऊंचाई वाले प्लांटर्स को एक छोटे स्टैंड पर सजाने से पौधों का एक व्यवस्थित कोना तैयार हो जाता है, जो देखने में काफी आकर्षक लगता है। इसका आप पर असर घर के पुराने डिब्बों को प्लांटर में बदलकर पैसे बचाए जा सकते हैं और घर की सुंदरता बढ़ाई जा सकती है। • पैसे की बचत: बाजार से महंगे गमले खरीदने का खर्च बचता है। बेकार बाल्टियों और रसोई के डिब्बों का दोबारा इस्तेमाल कर बिना किसी बड़े खर्च के बगीचा तैयार किया जा सकता है। • घर की सजावट: खिड़कियों और बालकनी को मनचाहा आकर्षक रूप दिया जा सकता है। साधारण पेंट और जूट की मदद से घर के कोनों को प्राकृतिक और व्यवस्थित बनाया जा सकता है। • पौधों की सुरक्षा: ड्रेनेज होल बनाने से पौधों की जड़ें सुरक्षित रहती हैं। अतिरिक्त पानी बाहर निकलने से मिट्टी ज्यादा गीली नहीं रहती और पौधे स्वस्थ बढ़ते हैं। • पर्यावरण अनुकूल आदत: प्लास्टिक और धातु के बर्तनों को कचरे में फेंकने से बचाव होता है। बेकार सामान को दोबारा काम में लाकर कचरा कम करने में मदद मिलती है। ऐसा क्यों हुआ घर में मौजूद बेकार डिब्बों को प्लांटर का रूप इसलिए दिया जाता है क्योंकि यह बागवानी के खर्च को घटाता है और घर की सजावट को बढ़ाता है। • महंगे गमलों का विकल्प: बाजार में मिलने वाले डिजाइनर गमले अक्सर काफी महंगे होते हैं। कई सारे पौधे लगाने पर यह खर्च काफी बढ़ जाता है, जिससे घरेलू विकल्प उपयोगी बनते हैं। • सामान का दोबारा उपयोग: रसोई और घर में प्लास्टिक व धातु के कई मजबूत डिब्बे बेकार पड़े रहते हैं। उन्हें फेंकने के बजाय साफ करके काम में लाने से उपयोगी वस्तु तैयार हो जाती है। • सजावट की स्वतंत्रता: रेडीमेड गमलों के मुकाबले घर पर बने प्लांटर को अपनी पसंद के रंग और जूट से सजाया जा सकता है। इससे वे घर के अन्य कमरों और फर्नीचर से आसानी से मेल खा जाते हैं। सवाल-जवाब 1. घर की किन चीजों को प्लांटर बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है? पुरानी प्लास्टिक की बाल्टी, पेंट के छोटे डिब्बे, चटके हुए मग, पुराने स्टील के डिब्बे या किसी भी मजबूत कंटेनर को इस्तेमाल किया जा सकता है। 2. प्लांटर पर पेंट करने के लिए कौन से रंग सबसे उपयुक्त रहते हैं? सफेद, ऑफ-व्हाइट, हल्का ग्रे और मिट्टी जैसा भूरा रंग प्लांटर को सादा और प्रीमियम लुक देने के लिए अच्छे विकल्प हैं। 3. जूट की रस्सी से प्लांटर कैसे सजाया जाता है? कंटेनर के बाहरी हिस्से पर जूट की मोटी रस्सी को क्रमबद्ध तरीके से चिपकाकर लपेटा जाता है और ऊपर की किनारी पर अतिरिक्त घेरा दिया जाता है। 4. घर में बने प्लांटर में ड्रेनेज होल बनाना क्यों जरूरी है? निचले हिस्से में निकासी छेद होने से अतिरिक्त पानी बाहर निकल जाता है और मिट्टी अत्यधिक गीली रहने से बचती है, जिससे पौधे सुरक्षित रहते हैं। 5. कपड़े से सजावट करते समय किस बात का ध्यान रखना चाहिए? सजावट के लिए इस्तेमाल होने वाले कपड़े को अंदर की गीली मिट्टी और सीधे पानी के संपर्क से दूर रखना जरूरी है। https://trendkia.com/lifestyle/ghara-men-bekara-pare-dibbon-aura-baltiyon-se-banaen-khubasurata-plantara-paint-aura-jute-se-milega-naya-rupa-43297 TrendKia — Har trend, sabse pehle.