घर पर गमले में आसानी से लगाएं तेजपत्ता, ₹200 की एकमुश्त लागत से सालों-साल मिलेगा ताजा मसाला किचन गार्डनिंग के शौकीन लोग अब बालकनी या छत पर बड़े गमले में तेजपत्ते का पौधा लगाकर जिंदगीभर घर का ताजा और शुद्ध मसाला हासिल कर सकते हैं। घर की छत या बालकनी पर अपनी पसंद की जड़ी-बूटियां, सब्जियां और मसाले उगाना बागवानी पसंद करने वालों के लिए न केवल एक सुकून देने वाला काम है, बल्कि यह रसोई को शुद्ध स्वाद भी देता है। भारतीय खानपान में तेजपत्ता एक बेहद खास मसाला माना जाता है, जिसका इस्तेमाल खुशबूदार कड़क चाय से लेकर तमाम तरह के स्वादिष्ट व्यंजनों का स्वाद निखारने में रोजाना होता है। अगर थोड़ी समझदारी से काम लिया जाए, तो बाजार से बार-बार तेजपत्ता खरीदने का झंझट हमेशा के लिए खत्म किया जा सकता है। घर पर ही एक साधारण गमले में इस पौधे को स्थापित करके जिंदगीभर शुद्ध और ताजा पत्तियों की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकती है। पौधे का चुनाव और शुरुआती लागत घर में तेजपत्ता लगाने की प्रक्रिया बेहद सीधी और किफायती है। अपने घर के बगीचे में सैकड़ों किस्मों के पेड़-पौधे संभाल रहीं अनुभवी गार्डनर आराधना देवी के अनुसार, इस पौधे को तैयार करने के लिए किसी बहुत बड़े खेत या जमीन की मजबूरी नहीं होती। इसे किसी भी बड़े आकार के गमले में बहुत सरलता से रोपा जा सकता है। इसके लिए सबसे पहले पास की किसी स्थानीय नर्सरी से एक बिल्कुल स्वस्थ पौधा चुनकर लाना होता है। नर्सरी से यह पौधा लेने में शुरुआत में करीब 200 रुपये का मामूली खर्च आता है। यह एकमुश्त निवेश भविष्य में बाजार से पैकेटबंद मसाले खरीदने पर होने वाले नियमित खर्च को पूरी तरह रोक देता है। गमले और खुली जमीन में पौधे का फैलाव शुरुआत में लाया गया यह छोटा सा पौधा समय के साथ तेजी से पनपता है। बड़े आकार के गमले में लगाने पर यह पौधा समय के साथ मजबूत होकर लगभग 10 से 15 फीट की ऊंचाई तक पहुंच जाता है। वहीं जिन घरों में आंगन या पीछे कच्ची जमीन उपलब्ध है, वे इसे सीधे मिट्टी में भी रोप सकते हैं। जमीन पर रोपने पर यह पौधा और भी तेजी से बढ़ता है और करीब 20 फीट तक की ऊंचाई हासिल कर सकता है। रोपाई के दो से तीन साल के भीतर यह एक घने पेड़ की शक्ल ले लेता है, जिसमें से अनगिनत शाखाएं फूट पड़ती हैं और प्रचुर मात्रा में पत्तियां मिलने लगती हैं। साप्ताहिक देखरेख और छंटाई का तरीका तेजपत्ते के पेड़ की देखभाल करना बेहद सुगम है और इसमें किसी विशेष मशक्कत की दरकार नहीं होती। हफ्ते में कम से कम एक बार पौधे का मुआयना करना पर्याप्त रहता है। इस दौरान जो पत्तियां सूखने लगें, उनकी नियमित रूप से कटिंग करते रहना चाहिए। पौधे की छंटाई से अलग की गई इन सूखी पत्तियों को फेंकने की जरूरत नहीं होती, बल्कि इन्हें सुखाकर सीधे सब्जी, दाल या कड़क चाय में उपयोग में लाया जा सकता है। इस प्रकार कटाई के दौरान भी मसाले की कोई बर्बादी नहीं होती। प्राकृतिक खाद और मिट्टी की उपजाऊ शक्ति पौधे को पोषण देने के लिए किसी भी तरह के महंगे रासायनिक उर्वरक या केमिकल युक्त दवाओं की बिल्कुल आवश्यकता नहीं होती है। महीने में एक बार पौधे की जड़ के आसपास की मिट्टी की हल्की गुड़ाई करके उसे उलट-पुलट देना चाहिए, ताकि हवा का संचार बना रहे। आवश्यकता महसूस होने पर उसमें थोड़ी ताजी और उपजाऊ मिट्टी ऊपर से मिलाई जा सकती है। इसके अलावा जड़ों में नियमित रूप से नमी के अनुसार पानी देते रहना जरूरी है। पोषण के लिए पूरी तरह प्राकृतिक और घरेलू नुस्खे सबसे कारगर साबित होते हैं। खाद के तौर पर केवल सूखी गोबर की खाद का इस्तेमाल किया जा सकता है, जो मिट्टी को भरपूर पोषण देती है। इसके अलावा रसोई से निकलने वाले हरी सब्जियों और फलों के छिलकों को पानी में भिगोकर कुछ समय के लिए गलाया जा सकता है। यह छिलकों वाला पोषक पानी नियमित अंतराल पर पौधे की जड़ों में डालने से मिट्टी की उर्वरता स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है। सही पानी, प्राकृतिक पोषण और हल्की छंटाई मिलने पर दो से तीन साल के भीतर यह पौधा एक बड़ा वृक्ष बन जाता है, जिससे जीवनभर शुद्ध और प्राकृतिक तेजपत्ता घर में ही मुफ्त मिलता रहता है। इसका आप पर असर घर पर तेजपत्ता उगाने से रसोई के मसालों का मासिक बजट घटता है और भोजन के लिए कीटनाशक मुक्त शुद्ध पत्तियां उपलब्ध होती हैं। • बजट की बचत: नर्सरी से मात्र 200 रुपये का पौधा लाने के बाद बाजार से बार-बार तेजपत्ता खरीदने का खर्च खत्म हो जाता है। यह पौधा दो से तीन साल में बड़ा होकर जीवनभर पर्याप्त मसाला उपलब्ध कराता रहता है। • रासायनिक खाद से मुक्ति: महंगे केमिकल फर्टिलाइजर की जगह केवल सूखी गोबर की खाद और रसोई के गीले कचरे का उपयोग होता है। इससे घर में तैयार होने वाला मसाला पूरी तरह से आर्गेनिक और सेहत के लिए सुरक्षित रहता है। • सीमित जगह में हरियाली: बालकनी या छत पर बड़े गमले में भी 10 से 15 फीट का पौधा तैयार किया जा सकता है। जिनके पास जमीन नहीं है, वे भी बिना अतिरिक्त स्थान घेरे गमले में आसानी से मसाले की आपूर्ति कर सकते हैं। • किचन वेस्ट का सही उपयोग: सब्जियों के छिलकों को पानी में गलाकर तैयार किया गया तरल पोषक तत्व पौधों की जड़ों में काम आ जाता है। इससे घर के जैविक कचरे का प्राकृतिक निपटारा भी अपने आप हो जाता है। ऐसा क्यों हुआ बाजार में बिकने वाले मसालों में बढ़ती मिलावट और ताजे आर्गेनिक मसालों की मांग के चलते लोग अब बालकनी में मसाले उगाने की आसान विधियां अपना रहे हैं। • न्यूनतम लागत और आसान रखरखाव: तेजपत्ते का पौधा बेहद कठोर प्रकृति का होता है और इसमें किसी विशेष उपकरण या जटिल देखभाल की आवश्यकता नहीं पड़ती। मात्र 200 रुपये की शुरुआती लागत में यह पौधा बिना महंगे केमिकल के सामान्य गोबर खाद पर भी सालों-साल पनपता रहता है। • गमलों में अनुकूलन क्षमता: आधुनिक शहरी घरों में जमीन की कमी के बावजूद यह पौधा बड़े कंटेनरों में 10 से 15 फीट तक बढ़ जाता है। इसकी इसी खूबी के कारण छत और बालकनी में बागवानी करने वाले इसे आसानी से लगा लेते हैं। • घरेलू कचरे से पोषण: रासायनिक खादों की अनुपलब्धता या महंगे दामों के विकल्प के तौर पर रसोई के छिलकों का पानी और गोबर खाद इसके लिए पूरी तरह पर्याप्त साबित होते हैं। प्राकृतिक पोषण की यह सरलता लोगों को इसे घर पर रोपने के लिए प्रेरित करती है। सवाल-जवाब 1. तेजपत्ते का नया पौधा खरीदने में कितना खर्च आता है? नर्सरी से तेजपत्ते का एक स्वस्थ पौधा खरीदने में लगभग 200 रुपये की शुरुआती लागत आती है। 2. गमले और खुली जमीन में यह पौधा कितना बड़ा हो सकता है? बड़े गमले में यह पौधा 10 से 15 फीट तक और खुली जमीन पर लगाने पर करीब 20 फीट की ऊंचाई तक पहुंच सकता है। 3. पौधे को कितने समय बाद एक बड़ा पेड़ बनने का समय लगता है? उचित देखरेख मिलने पर यह पौधा दो से तीन साल में कई शाखाओं वाला एक बड़ा पेड़ बन जाता है। 4. तेजपत्ते के पौधे को किस प्रकार की खाद देनी चाहिए? इसके लिए किसी रासायनिक खाद की जरूरत नहीं होती, केवल सूखी गोबर की खाद और पानी में गले सब्जी के छिलकों का पोषक पानी पर्याप्त है। 5. छंटाई के दौरान निकली सूखी पत्तियों का क्या करना चाहिए? छंटाई से अलग की गई सूखी पत्तियों को फेंकने के बजाय सीधे सब्जी या कड़क चाय में उपयोग किया जा सकता है। https://trendkia.com/lifestyle/ghara-para-gamale-men-asani-se-lagaen-tejapatta-200-ki-ekamushta-lagata-se-salon-sala-milega-taja-masala-47627 TrendKia — Har trend, sabse pehle.