# घर पर पौष्टिक मल्टीग्रेन आटा तैयार करने की आसान विधि और इसके स्वास्थ्य लाभ

> गेहूं के साधारण आटे की जगह घर पर जौ, बाजरा, रागी और चने का सही मिश्रण मिलाकर पोषक तत्वों से भरपूर मल्टीग्रेन आटा तैयार किया जा सकता है।

**Type:** article · **Category:** जीवनशैली · **Published:** 2026-10-03 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/lifestyle/ghara-para-paushtika-multigrain-flour-taiyara-karane-ki-asana-vidhi-aura-isake-svasthya-labha-42318 · **Language:** Hindi
**Tags:** मल्टीग्रेन आटा, घरेलू नुस्खे, स्वस्थ आहार, पाचन स्वास्थ्य, वजन नियंत्रण, पोषण

दैनिक खानपान में सेहत को प्राथमिकता देने वाले लोगों के बीच अब पारंपरिक गेहूं के आटे के स्थान पर मल्टीग्रेन आटे का चलन तेजी से बढ़ रहा है। अलग-अलग प्रकार के साबुत अनाजों और दालों के उचित मेल से बना यह आटा शरीर को एक साथ कार्बोहाइड्रेट, उच्च प्रोटीन, डायटरी फाइबर, आवश्यक विटामिन्स और मिनरल्स की भरपूर खुराक प्रदान करता है। इसके नियमित सेवन से पाचन क्रिया सुचारू रहती है, पेट अधिक समय तक भरा महसूस होता है और दैनिक आहार को संतुलित पोषण मिलता है।

## मल्टीग्रेन आटा बनाने के लिए आवश्यक सामग्री और अनुपात
घर पर यह पौष्टिक आटा तैयार करने के लिए आप मुख्य अनाजों और दालों का चयन कर सकते हैं। इसमें मुख्य रूप से गेहूं के साथ जौ, बाजरा, ज्वार, मक्का, चना, सोयाबीन, रागी और अलसी के बीजों को शामिल किया जाता है। व्यक्तिगत स्वाद, पोषण संबंधी प्राथमिकताओं और घरेलू जरूरतों के अनुसार इन सामग्रियों के अनुपात में थोड़ा बदलाव भी किया जा सकता है।

## तैयारी और नमी दूर करने का शुरुआती चरण
आटा तैयार करने की प्रक्रिया में साफ-सफाई सबसे अहम कदम है। इस्तेमाल किए जाने वाले सभी अनाजों और दालों को भली-भांति बीनकर साफ कर लें, जिससे उनमें मौजूद कंकड़, धूल और अन्य बाहरी अशुद्धियां पूरी तरह अलग हो जाएं। इसके तुरंत बाद, सभी दानों को लगभग 2 से 3 घंटे के लिए तेज धूप में फैलाकर सुखाना चाहिए। धूप में रखने से दानों के भीतर मौजूद प्राकृतिक नमी पूरी तरह समाप्त हो जाती है, जिससे आटा लंबे समय तक सुरक्षित रहता है।

## अनाजों की हल्की भुनाई और पीसने का तरीका
नमी सूख जाने के बाद जौ, बाजरा, ज्वार, मक्का, चना और सोयाबीन को एक-एक करके धीमी आंच पर हल्का भून लें। अनाजों को धीमी आंच पर सेकने से उनका स्वाद निखर जाता है और आटे की शेल्फ लाइफ भी काफी बढ़ जाती है। भूनते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि अनाज जलने या अधिक गहरे न हों, क्योंकि जरूरत से ज्यादा पकाने से उनके संवेदनशील पोषक तत्व नष्ट हो सकते हैं। भुनी हुई सभी सामग्रियों को सामान्य तापमान पर पूरी तरह ठंडा होने दें।

ठंडा होने के पश्चात भुने हुए अनाजों में गेहूं, रागी और अलसी के बीजों को अच्छी तरह मिला लें। जब सारा मिश्रण एकसार हो जाए, तो इसे स्थानीय आटा चक्की पर ले जाकर बारीक पिसवा लें। यदि कम मात्रा में आटा बनाना हो, तो घर में मौजूद शक्तिशाली ग्राइंडर का उपयोग करके भी इसे पीसा जा सकता है। पिसाई के बाद आटे को किसी बड़े बर्तन में उलटकर दोबारा हाथ से अच्छी तरह मिला लें, ताकि हर अनाज का सत्त पूरे मिश्रण में समान रूप से बंट जाए। अंत में इसे हवा बंद डिब्बे में सुरक्षित रखकर किसी ठंडी और सूखी जगह पर स्टोर करें।

## स्वास्थ्य के लिए मल्टीग्रेन आटे के प्रमुख फायदे
यह मिश्रित आटा फाइबर का उत्कृष्ट भंडार माना जाता है, जो आंतों की सक्रियता बढ़ाकर कब्ज जैसी पाचन समस्याओं से राहत दिलाने में मददगार साबित होता है। विभिन्न अनाजों का संयोजन शरीर को लंबे समय तक कार्यशील ऊर्जा प्रदान करता है। पोषण तत्वों की दृष्टि से रागी और बाजरा हड्डियों की मजबूती के लिए कैल्शियम के प्रमुख स्रोत हैं, जबकि चना और सोयाबीन भोजन में प्रोटीन की मात्रा को काफी बढ़ा देते हैं।

इसके अलावा मिश्रण में शामिल अलसी के बीज शरीर को ओमेगा-3 फैटी एसिड की जरूरी मात्रा उपलब्ध कराते हैं, जिसे हृदय स्वास्थ्य को दुरुस्त रखने के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है। फाइबर और प्रोटीन का यह संपूर्ण संतुलन भोजन के बाद पेट को देर तक तृप्त रखता है, जिससे बार-बार भूख लगने की समस्या नहीं होती और वजन नियंत्रण में सीधा सहयोग मिलता है।

## रोटियां बनाते समय ध्यान रखने योग्य जरूरी बातें
मल्टीग्रेन आटे की रोटियां तैयार करते समय पानी का उपयोग ध्यानपूर्वक करना चाहिए। साधारण गेहूं के आटे की तुलना में यह आटा अधिक पानी सोखता है, इसलिए आटा गूंथते वक्त पानी एक साथ डालने के बजाय धीरे-धीरे आवश्यकतानुसार ही मिलाएं। इसके साथ ही, यदि परिवार के किसी सदस्य को मिश्रण में शामिल किसी विशेष अनाज या दाल से एलर्जी या असुविधा हो, तो उस सामग्री को नुस्खे से पूरी तरह हटाया भी जा सकता है।

## इसका आप पर असर
घर पर तैयार किया गया मल्टीग्रेन आटा दैनिक पोषण स्तर में सीधा सुधार लाकर पाचन और वजन प्रबंधन में सहायता करता है।

- **दैनिक पोषण:** साधारण आटे की जगह इसका इस्तेमाल करने से भोजन में प्रोटीन, कैल्शियम और फाइबर की मात्रा बढ़ जाती है। इससे शरीर को दिनभर के लिए संतुलित ऊर्जा मिलती है और बार-बार अस्वस्थ स्नैक्स खाने की इच्छा कम होती है।
- **किचन की तैयारी:** आटा गूंथते समय पानी की मात्रा पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होगी। साधारण आटे की तुलना में यह अधिक पानी सोखता है, इसलिए आटा तैयार करते समय पानी को धीरे-धीरे डालना चाहिए।
- **एलर्जी से बचाव:** किसी खास अनाज से एलर्जी होने पर उसे नुस्खे से तुरंत बाहर किया जा सकता है। इससे परिवार की व्यक्तिगत स्वास्थ्य जरूरतों के अनुसार पूरी तरह सुरक्षित रोटी बनाई जा सकती है।
- **भंडारण और ताजगी:** धूप में सुखाने और धीमी आंच पर भूनने से यह आटा कई हफ्तों तक खराब नहीं होता। इसे हमेशा एयरटाइट कंटेनर में रखकर नमी से बचाना चाहिए ताकि इसकी गुणवत्ता बनी रहे।

## ऐसा क्यों हुआ
आधुनिक जीवनशैली में बढ़ते स्वास्थ्य जोखिमों और पाचन से जुड़ी समस्याओं के कारण लोग पोषक तत्वों से भरपूर संपूर्ण आहार की ओर लौट रहे हैं।

- **पोषण की कमी दूर करना:** पारंपरिक सादा गेहूं का आटा केवल सीमित पोषक तत्व प्रदान करता है। विभिन्न अनाजों और दालों का मेल प्रोटीन, कैल्शियम और ओमेगा-3 जैसे आवश्यक तत्वों की दैनिक कमी को पूरा करता है।
- **पाचन और वजन संबंधी कारण:** कम फाइबर वाले आहार से कब्ज और अत्यधिक भूख लगने जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। अनाजों में मौजूद प्रचुर रेशा पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने और पेट को देर तक भरा रखने के लिए आवश्यक माना जाता है।
- **भंडारण और संरक्षण की जरूरत:** अनाजों को धूप में सुखाने और भूनने की प्रक्रिया उनकी प्राकृतिक नमी को पूरी तरह समाप्त कर देती है। नमी हटने से आटा लंबे समय तक कीड़ों और फफूंद से सुरक्षित बना रहता है।

## सवाल-जवाब

### 1. मल्टीग्रेन आटा बनाने के लिए अनाजों को धूप में सुखाना क्यों जरूरी है?
अनाजों को 2 से 3 घंटे धूप में सुखाने से उनकी सारी आंतरिक नमी निकल जाती है, जिससे आटा लंबे समय तक सुरक्षित रहता है और खराब नहीं होता।

### 2. अनाजों को धीमी आंच पर हल्का भूनने का क्या फायदा होता है?
हल्की भुनाई से अनाजों का स्वाद बेहतर हो जाता है और आटे की शेल्फ लाइफ बढ़ जाती है, हालांकि पोषक तत्व सुरक्षित रखने के लिए इन्हें अधिक नहीं भूनना चाहिए।

### 3. मल्टीग्रेन आटे में कैल्शियम और प्रोटीन के मुख्य स्रोत कौन से हैं?
मिश्रण में मौजूद रागी और बाजरा कैल्शियम के बेहतरीन स्रोत हैं, जबकि चना और सोयाबीन प्रोटीन की प्रचुर मात्रा प्रदान करते हैं।

### 4. मल्टीग्रेन आटे की रोटी बनाते समय क्या सावधानी रखनी चाहिए?
यह आटा साधारण गेहूं के आटे की तुलना में अधिक पानी सोखता है, इसलिए आटा गूंथते समय पानी धीरे-धीरे और आवश्यकतानुसार ही डालना चाहिए।

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