# घर पर सहजन उगाकर पाएं भरपूर फलियां, जानिए बुवाई का सही महीना और देखभाल के आसान नियम

> मोरिंगा यानी सहजन की अच्छी पैदावार के लिए सही मौसम, उपयुक्त मिट्टी और समय पर छंटाई जरूरी है। जानिए घर के बगीचे या गमले में मोरिंगा उगाने के वैज्ञानिक तरीके।

**Type:** article · **Category:** जीवनशैली · **Published:** 2026-09-19 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/lifestyle/ghara-para-sahajana-ugakara-paen-bharapura-phaliyan-janie-buvai-ka-sahi-mahina-aura-dekhabhala-ke-asana-niyama-34733 · **Language:** Hindi
**Tags:** सहजन, मोरिंगा, बागवानी, किचन गार्डन, पौधों की देखभाल, गमले में खेती

घर के आंगन या बगीचे में मोरिंगा यानी सहजन का पेड़ लगाना पोषण और हरियाली दोनों लिहाज से बेहद फायदेमंद साबित होता है। इस पौधे की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह तेज धूप और गर्म मौसम में बहुत तेजी से फलता-फूलता है। अगर आप चाहते हैं कि आपके पेड़ पर फलियां लदकर आएं, तो केवल पौधा लगा देना ही पर्याप्त नहीं है। इसके लिए मौसम का सही चुनाव, जमीन की तैयारी, जल निकासी का उचित प्रबंध, संतुलित खाद और समय पर डालियों की छंटाई जैसे बुनियादी पहलुओं को समझना बेहद आवश्यक है।

## मोरिंगा लगाने के लिए सबसे मुफीद मौसम
सहजन की बुवाई का समय स्थानीय जलवायु और फूलों के चक्र पर गहराई से निर्भर करता है। तमिलनाडु एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी के दिशानिर्देशों के मुताबिक, जुलाई से लेकर अक्टूबर तक का समय मोरिंगा लगाने के लिए सबसे उपयुक्त माना गया है। वहीं कुछ विशेष भौगोलिक क्षेत्रों में किसान इसकी रोपाई जून के महीने में भी शुरू कर देते हैं।

उत्तर भारत के मैदानी भागों में मौसम का मिजाज देखकर ही पौधे की रोपाई करनी चाहिए, जहां स्थानीय तापमान और बारिश के दिनों का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। रोपाई करते समय ऐसे निचले स्थानों से बिल्कुल बचना चाहिए जहां बारिश या सिंचाई का पानी ठहरता हो। जलभराव की स्थिति सहजन की कोमल जड़ों को सड़ा सकती है, जिससे पूरा पौधा सूखने की कगार पर पहुंच जाता है।

## मिट्टी की तैयारी और पीएच का सही संतुलन
सहजन का पौधा विभिन्न प्रकार की जमीनों में अपनी जड़ें जमाने में सक्षम होता है, लेकिन बेहतर बढ़वार के लिए रेतीली बलुई-दोमट मिट्टी को सबसे उत्तम श्रेणी में रखा जाता है। तमिलनाडु एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक आंकड़ों के अनुसार, यह पौधा 6.5 से लेकर 8 पीएच मान वाली मिट्टी में सबसे शानदार विकास दर्शाता है।

जमीन तैयार करते समय सामान्य मिट्टी में अच्छी तरह से सड़ी हुई गोबर की खाद या जैविक कंपोस्ट मिलाना मिट्टी की संरचना को सुधार देता है। इससे जमीन की उर्वरता बढ़ती है और अतिरिक्त पानी आसानी से रिसकर नीचे निकल जाता है, जिससे पौधे की जड़ों को सांस लेने में रुकावट नहीं आती।

## बीज बोने की सही गहराई और गमले में उगाने का तरीका
सहजन उगाने के लिए स्वस्थ और उत्तम गुणवत्ता वाले बीजों का चयन पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। बीजों को जमीन में लगभग 2.5 से 3 इंच की गहराई में दबाना सबसे सही रहता है। वैज्ञानिक पद्धति से खेतों में खेती करने के दौरान एक गड्ढे के भीतर दो से तीन बीज डालने की संस्तुति की जाती है, ताकि अंकुरण की सफलता के आधार पर बाद में स्वस्थ पौधे को रखकर अतिरिक्त पौधों का प्रबंधन किया जा सके।

यदि आप इसे किसी गमले या कंटेनर में छत पर उगा रहे हैं, तो बड़े आकार के गमले का चयन करें ताकि जड़ों के फैलाव के लिए पर्याप्त जगह मिल सके। साथ ही, गमले के तलवे में पानी की निकासी वाले छिद्र खुले और साफ होने चाहिए। मोरिंगा को रोजाना भरपूर और सीधी धूप मिलना अनिवार्य है, इसलिए गमले को हमेशा खुली छत या धूप वाली बालकनी में ही रखें।

## शुरुआती पोषण, पिंचिंग और पानी देने का नियम
जब पौधा अपनी शुरुआती अवस्था में बढ़ रहा हो, तब जरूरत के हिसाब से संतुलित जैविक खाद देनी चाहिए। पौधे के थोड़ा बड़ा और स्थिर हो जाने के बाद उसके मुख्य तने की ऊपरी कली यानी शीर्ष टहनी की छंटाई करना बहुत लाभदायक होता है। तमिलनाडु एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी का सुझाव है कि मुख्य तने की ऊपरी टहनी को समय पर पिंच करने से पौधे का सीधा बढ़ना रुकता है और अगल-बगल से नई शाखाएं फूटती हैं। जितनी अधिक शाखाएं विकसित होंगी, आगे चलकर फूलों और फलियों की संख्या भी उतनी ही ज्यादा मिलेगी। इसके साथ ही मिट्टी में नमी का नियमित आकलन करते रहें और केवल आवश्यकता पड़ने पर ही पानी दें, क्योंकि जरूरत से ज्यादा सिंचाई पौधे को भारी नुकसान पहुंचाती है।

## किस्मों के हिसाब से फलियां आने का समय
सहजन के पेड़ पर फलियां कब लगेंगी, यह पेड़ की देखभाल के अलावा उसकी चुनी गई किस्म और उस क्षेत्र के मौसम पर निर्भर करता है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के शोध के अनुसार, सहजन की भिन्न-भिन्न किस्मों में फूल आने और फलियों के तैयार होने की अवधि एक जैसी नहीं होती। मिसाल के तौर पर, थार हर्ष और थार तेजस जैसी उन्नत किस्मों की फलियां अलग-अलग समयावधि में पककर तैयार होती हैं, इसलिए किस्म की विशेषताओं को जानकर की गई बागवानी हमेशा बेहतर परिणाम देती है।

## इसका आप पर असर
घर के बगीचे में सहजन का पौधा सही तरीके से लगाने से ताजी और पौष्टिक फलियों की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित होती है।

- **पौधरोपण का समय:** जुलाई से अक्टूबर के बीच बीज बोने पर पौधों को अनुकूल तापमान मिलता है। इससे पौधे की जड़ें मजबूत होती हैं और शुरुआती विकास में रुकावट नहीं आती।
- **मिट्टी की जांच:** 6.5 से 8 pH वाली बलुई-दोमट मिट्टी का चुनाव करने से जड़ों का सड़ना रुकता है। जलनिकासी बेहतर रहने से पौधे में कीट और फफूंद का खतरा कम रहता है।
- **छंटाई से फायदा:** मुख्य तने की ऊपरी कली की पिंचिंग करने से अगल-बगल की शाखाएं तेजी से बढ़ती हैं। इससे सीमित जगह में भी पेड़ पर अधिक फूल और फलियां आती हैं।
- **गमले में सावधानी:** गमले के नीचे निकासी छेद खुला रखने से जलभराव से बचाव होता है। इससे बालकनी या छत पर बागवानी करने वालों का पौधा असमय खराब नहीं होता।

## ऐसा क्यों हुआ
सहजन के पौधे के अच्छे विकास और भरपूर फलियों के लिए विशिष्ट जलवायु और वैज्ञानिक बागवानी विधियों की आवश्यकता होती है। यह पौधा मूल रूप से गर्म जलवायु का है और गलत परिस्थितियों में इसकी पैदावार प्रभावित हो जाती है।

- **जलवायु की आवश्यकता:** सहजन गर्म मौसम और भरपूर धूप में ही प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया तेजी से कर पाता है। धूप की कमी होने पर पौधा कमजोर रह जाता है और फलियां नहीं बन पाती हैं।
- **जलभराव से संवेदनशीलता:** पौधे की जड़ें अधिक पानी और ठहराव को सहन नहीं कर पाती हैं। इसी कारण रेतीली बलुई-दोमट मिट्टी और ऊंचे स्थान की सिफारिश की जाती है ताकि पानी रुके नहीं।
- **शीर्ष कली की छंटाई:** यदि मुख्य तना लगातार सीधा बढ़ता रहे तो पौधा लंबा होकर कमजोर रह जाता है। ऊपरी सिरे की पिंचिंग करने से पार्श्व शाखाओं का विकास प्रेरित होता है।
- **किस्मों की विविधता:** भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अनुसार अलग-अलग किस्मों जैसे थार हर्ष और थार तेजस के पकने की अवधि अलग होती है। किस्म के प्राकृतिक चक्र के कारण ही फलियां बनने का समय अलग-अलग होता है।

## सवाल-जवाब

### 1. मोरिंगा या सहजन लगाने का सबसे सही महीना कौन सा है?
तमिलनाडु एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी के अनुसार सहजन लगाने का सबसे उपयुक्त समय जुलाई से अक्टूबर तक होता है, हालांकि कुछ क्षेत्रों में इसे जून में भी लगाया जाता है।

### 2. सहजन के पौधे के लिए किस प्रकार की मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है?
अच्छी जल निकासी वाली बलुई-दोमट मिट्टी सबसे बढ़िया मानी जाती है, जिसका pH मान 6.5 से 8 के बीच होना चाहिए।

### 3. सहजन के बीजों को जमीन में कितनी गहराई पर बोना चाहिए?
बीजों को लगभग 2.5 से 3 इंच की गहराई पर बोया जाना चाहिए। एक गड्ढे में दो से तीन बीज डालना वैज्ञानिक रूप से सही माना जाता है।

### 4. सहजन के पेड़ की पिंचिंग या ऊपरी कली की छंटाई क्यों की जाती है?
मुख्य तने के ऊपरी सिरे की छंटाई करने से पौधे की बगल वाली शाखाएं अधिक निकलती हैं, जिससे आगे चलकर ज्यादा फलियां आती हैं।

### 5. क्या थार हर्ष और थार तेजस किस्मों की फलियां एक ही समय में पकती हैं?
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अनुसार सहजन की अलग-अलग किस्मों में फलने का समय भिन्न होता है, इसलिए थार हर्ष और थार तेजस की फलियां अलग-अलग समय पर पकती हैं।

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