घर से बाहर रहने पर भी नहीं सूखेंगे गमले, पौधों को हरा-भरा रखने में मददगार है यह खास तकनीक दफ्तर की व्यस्तता या छुट्टियों के दौरान पौधों को पानी न मिल पाने की चिंता खत्म करने के लिए सेल्फ-वाटरिंग तकनीक उपयोगी साबित हो रही है। इसमें लगे टैंक की मदद से इंडोर पौधे लंबे समय तक जरूरी नमी पाते रहते हैं। घर के कमरों या बालकनी को हरे-भरे पौधों से सजाना हर किसी को पसंद होता है, लेकिन कामकाजी जिंदगी की भागदौड़ में उनकी नियमित देखभाल करना कई बार एक बड़ी चुनौती बन जाता है। सुबह दफ्तर निकलने की जल्दी और शाम को लौटने की थकान के बीच पौधों को सही वक्त पर पानी देना अक्सर छूट जाता है। ऐसे में पौधों की पत्तियां मुरझाने लगती हैं और धीरे-धीरे वे सूख जाते हैं। इस परेशानी से निपटने के लिए आधुनिक बागवानी में एक खास तकनीक काफी लोकप्रिय हो रही है, जिसमें पानी देने की व्यवस्था अपने आप संचालित होती है। इस व्यवस्था के जरिए गमले के भीतर ही पानी का एक अलग भंडार बना दिया जाता है, जिससे पौधे खुद-ब-खुद अपनी जरूरत के अनुसार नमी सोखते रहते हैं। व्यस्त दिनचर्या में पौधों की देखभाल का आसान समाधान आजकल की तेज रफ्तार जिंदगी में बागवानी का शौक रखने वाले लोग अक्सर समय की कमी से जूझते हैं। कृषि एवं बागवानी विशेषज्ञ सैफ खान का कहना है कि जिन लोगों के पास पौधों की रोजाना देखभाल के लिए पर्याप्त वक्त नहीं होता, उनके लिए यह तकनीक बेहद कारगर उपाय है। कई बार लोग कई दिनों के लिए शहर से बाहर चले जाते हैं या पेशेवर दौरों पर रहते हैं। ऐसी स्थिति में पड़ोसियों या किसी अन्य व्यक्ति पर पौधों की देखभाल के लिए निर्भर रहना पड़ता है। इस व्यवस्था के आने से पौधों के सूखने का जोखिम लगभग खत्म हो जाता है, क्योंकि पौधे को बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप के नियमित रूप से तरल खुराक मिलती रहती है। कैसे काम करता है नीचे बना यह खास जल भंडार इस तरह के गमलों की बनावट पारंपरिक गमलों से काफी अलग और वैज्ञानिक होती है। गमले के निचले हिस्से में पानी इकट्ठा रखने के लिए एक छोटा टैंक यानी रिजरवायर दिया जाता है। इस टैंक में भरा हुआ पानी सीधे मिट्टी को दलदली नहीं बनाता, बल्कि एक खास कॉटन की डोरी या पौधे की विकसित जड़ों के संपर्क से धीरे-धीरे ऊपर की तरफ चढ़ता है। पौधा अपनी प्यास और मौसम की मांग के हिसाब से ही इस नमी को ग्रहण करता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि मिट्टी में हर वक्त संतुलित नमी बनी रहती है और गमले में ऊपर से रोज-रोज बाल्टी या लोटे से पानी डालने की जरूरत पूरी तरह खत्म हो जाती है। हफ्ते में सिर्फ एक या दो बार जांच करना ही पर्याप्त इन गमलों का इस्तेमाल करने पर बागवानी का काम बेहद सरल हो जाता है। इसमें रोज पानी डालने की जगह केवल हफ्ते में एक या दो बार निचले टैंक को देखना होता है। टैंक का पानी कितने दिनों में खत्म होगा, यह कई बातों पर निर्भर करता है। गमले का आकार कितना बड़ा है, पौधा कितना पानी सोखता है और मौजूदा मौसम कितना गर्म या सूखा है, इसी आधार पर पानी का खर्च तय होता है। इसलिए समय-समय पर इस जल भंडार की जांच कर लेना जरूरी रहता है ताकि जरूरत पड़ने पर उसमें दोबारा पानी भरा जा सके। लंबे समय के लिए बाहर जाने वाले लोगों के लिए यह सुविधा बेहद राहत भरी साबित होती है। किन इंडोर पौधों के लिए सबसे मुफीद है यह विकल्प यह तकनीक खासतौर पर उन इंडोर पौधों के लिए बहुत उपयुक्त मानी जाती है जिन्हें बहुत ज्यादा रखरखाव की जरूरत नहीं होती। घर के अंदर रखे जाने वाले स्नेक प्लांट, मनी प्लांट, जेड प्लांट, पीस लिली और स्पाइडर प्लांट जैसे पौधे इन गमलों में बेहद आसानी से पनपते हैं। कृषि एवं बागवानी विशेषज्ञ सैफ खान के अनुसार, जो लोग हरियाली से प्रेम करते हैं लेकिन समय न होने की वजह से पौधे लगाने से कतराते थे, उनके लिए यह तरीका समय बचाने और पौधों को स्वस्थ रखने का सबसे बेहतर जरिया बनकर उभरा है। इसका आप पर असर यह बागवानी तकनीक कामकाजी लोगों को बिना अतिरिक्त समय खर्च किए अपने घर में हरियाली बनाए रखने में मदद करती है। • समय की बचत: रोजाना सुबह-शाम पौधों में पानी डालने का झंझट पूरी तरह खत्म हो जाता है। आपको हफ्ते में सिर्फ एक या दो बार ही गमले के वाटर टैंक की जांच करनी होगी। • यात्रा के दौरान राहत: छुट्टियों या दफ्तर के काम से बाहर जाने पर पौधे सूखने का डर नहीं रहता। नीचे बने रिजरवायर से पौधे कई दिनों तक अपनी जरूरत के हिसाब से नमी लेते रहते हैं। • पौधों की बेहतर सेहत: जड़ों को जरूरत से ज्यादा या कम पानी मिलने की समस्या नहीं होती। संतुलित नमी मिलने से मनी प्लांट और स्नेक प्लांट जैसे पौधे लंबे समय तक स्वस्थ रहते हैं। • आसान रखरखाव: बागवानी का शौक रखने वाले व्यस्त लोग बिना किसी अतिरिक्त खर्च या माली की मदद के इन गमलों का उपयोग कर सकते हैं। यह तरीका नए बागवानों के लिए पौधे संभालना आसान बना देता है। ऐसा क्यों हुआ शहरी जीवन में बढ़ती व्यस्तता और लगातार यात्राओं के कारण पौधों को नियमित पानी न मिल पाना ही इस तकनीक के लोकप्रिय होने का मुख्य कारण है। • दफ्तर और यात्रा की व्यस्तता: कामकाजी पेशेवरों के पास सुबह के समय पौधों की देखभाल के लिए पर्याप्त समय नहीं बचता। समय पर पानी न मिलने के कारण महंगे इंडोर पौधे अक्सर सूख जाते हैं। • असंतुलित पानी की समस्या: पारंपरिक गमलों में कई बार जरूरत से ज्यादा या कम पानी डल जाता है जिससे पौधे खराब होते हैं। नीचे बने रिजरवायर और कॉटन डोरी की मदद से मिट्टी में हमेशा संतुलित नमी बनी रहती है। • तकनीक का प्रसार: कम देखरेख वाले इंडोर पौधों को आधुनिक जल भंडारण वाले गमलों के साथ जोड़कर बागवानी को सुगम बनाया गया है। इससे लोग बिना किसी चिंता के लंबे समय तक घर से बाहर रह पाते हैं। सवाल-जवाब 1. सेल्फ-वाटरिंग पॉट किस तरह काम करते हैं? इन गमलों के निचले हिस्से में पानी का रिजरवायर होता है, जहां से कॉटन की डोरी या जड़ों के जरिए पौधा जरूरत के मुताबिक नमी खींचता रहता है। 2. इन गमलों में पानी कितनी बार चेक करना पड़ता है? इनमें रोज पानी डालने की आवश्यकता नहीं होती, हफ्ते में केवल एक या दो बार रिजरवायर के पानी के स्तर की जांच करना पर्याप्त रहता है। 3. इस तकनीक के लिए कौन से इंडोर पौधे सबसे सही हैं? स्नेक प्लांट, मनी प्लांट, जेड प्लांट, पीस लिली और स्पाइडर प्लांट जैसे पौधे इन गमलों में बेहद आसानी से लगाए जा सकते हैं। 4. क्या शहर से बाहर जाने पर भी पौधे सुरक्षित रहते हैं? हां, रिजरवायर में पर्याप्त पानी होने पर पौधे बिना किसी की मौजूदगी के कई दिनों तक हरे-भरे बने रहते हैं। https://trendkia.com/lifestyle/ghara-se-bahara-rahane-para-bhi-nahin-sukhenge-gamale-paudhon-ko-hara-bhara-rakhane-men-madadagara-hai-yaha-khasa-takanika-43918 TrendKia — Har trend, sabse pehle.