ग्लासगो से आयरनमैन तक, मिलिंद सोमन के 61 साल के जीवन और फिटनेस का शानदार सफर मॉडल और अभिनेता मिलिंद सोमन 61 साल के होकर भी कठिन मैराथन दौड़ पूरी कर रहे हैं। तैराकी में रजत पदक से लेकर आयरनमैन तक उनका सफर युवाओं को प्रेरित करता है। स्कॉटलैंड के ग्लासगो में 4 नवंबर 1965 को जन्मे मिलिंद सोमन आज 61 वर्ष पूरे कर चुके हैं, लेकिन उनकी शारीरिक ऊर्जा और अनुशासन किसी युवा एथलीट से कम नहीं नजर आता। सात वर्ष की उम्र में जब उनका परिवार मुंबई पहुंचा, तब शायद किसी ने नहीं सोचा था कि यह बालक आगे चलकर भारतीय मॉडलिंग और फिटनेस की दुनिया की पहचान बनेगा। स्कूल की शुरुआती पढ़ाई डॉ. एंटोनियो डा सिल्वा हाई स्कूल और जूनियर कॉलेज ऑफ कॉमर्स से पूरी करने के बाद उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा भी किया। पढ़ाई के उस दौर में ही उनका रुझान फैशन और विज्ञापन की दुनिया की ओर मुड़ चुका था, जहां जल्द ही उनके रूप और व्यक्तित्व ने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। संगीत वीडियो से लेकर अभिनय की दुनिया तक साल 1995 में जब अलीशा चिनॉय का पॉप संगीत वीडियो ‘मेड इन इंडिया’ प्रसारित हुआ, तो मिलिंद का चेहरा पूरे देश में घर-घर लोकप्रिय हो गया। लगभग 31 साल पहले आए इस गाने ने उनके करियर को जबरदस्त ऊंचाई दी। इसके बाद उन्होंने छोटे पर्दे का रुख किया, जहां ‘कैप्टन व्योम’ और ‘सी हॉक्स’ जैसे धारावाहिकों में उनके किरदारों को दर्शकों ने खूब सराहा। अभिनय का यह दायरा सिर्फ टेलीविजन तक सीमित नहीं रहा। विभिन्न भाषाओं की लगभग 40 फिल्मों में उन्होंने काम किया, जिनमें ’16 दिसंबर’, ‘भेजा फ्राई’, ‘नक्षत्र’ और ‘बाजीराव मस्तानी’ जैसी फिल्में दर्शकों के जेहन में आज भी ताजा हैं। पर्दे पर विभिन्न भूमिकाएं निभाने के बावजूद उनका मुख्य रुझान हमेशा खेलकूद और सेहत की तरफ बना रहा। बचपन की तैराकी और अंतरराष्ट्रीय रजत पदक अभिनय और ग्लैमर की चकाचौंध के पीछे मिलिंद का एक मजबूत खिलाड़ी हमेशा सक्रिय रहा। उन्होंने मात्र छह साल की आयु में तैराकी सीखना शुरू कर दिया था। पानी में घंटों बिताने के इसी अभ्यास ने उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। वर्ष 1984 में नेपाल के काठमांडू में जब पहले दक्षिण एशियाई खेल आयोजित हुए, तब मिलिंद ने तैराकी स्पर्धा में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। उस अंतरराष्ट्रीय मंच पर उन्होंने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए देश के लिए सिल्वर मेडल जीता था। यह पदक इस बात का प्रमाण था कि उनका फिटनेस प्रेम किसी शौक के तहत नहीं, बल्कि पेशेवर खेल की कड़ी मेहनत से उपजा था। आयरनमैन का खिताब और रिकॉर्डतोड़ दौड़ दौड़ और सहनशक्ति के क्षेत्र में मिलिंद सोमन ने कई असाधारण पड़ाव पार किए हैं। साल 2015 में उन्होंने दुनिया की सबसे कठिन मानी जाने वाली ट्रायथलॉन प्रतियोगिताओं में से एक, आयरनमैन चैलेंज में भाग लिया। इस बेहद थका देने वाले मुकाबले को उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में 15 घंटे और 19 मिनट के भीतर सफलतापूर्वक पूरा कर दिखाया। इसके अतिरिक्त, लगातार 30 दिनों में 1,500 किलोमीटर की लंबी दूरी तय करने का अनोखा कारनामा करने पर उनका नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया। वर्ष 2016 में उन्होंने जर्मनी में आयोजित प्रसिद्ध बर्लिन मैराथन में हिस्सा लिया, जहां 42.2 किलोमीटर की निर्धारित दूरी को 4 घंटे और 32 मिनट में पूरा करके अपनी मजबूत शारीरिक क्षमता का परिचय दिया। रोजमर्रा का अनुशासन और सेहत का संदेश बढ़ती उम्र के साथ सामान्यतः लोग शारीरिक गतिविधियों से पीछे हटने लगते हैं, किंतु मिलिंद रोजाना दौड़ने और कसरत करने के लिए समय निकालते हैं। भारत और विदेशों में होने वाली लंबी दौड़ प्रतियोगिताओं में वे नियमित रूप से शामिल होते हैं। उनका जीवन यह साबित करता है कि बुढ़ापे का असर शरीर पर हावी होने से रोकने के लिए इच्छाशक्ति और दैनिक निरंतरता सबसे बड़ा साधन है। आज वे सिर्फ एक सफल मॉडल या अभिनेता के रूप में नहीं, बल्कि लाखों लोगों के लिए एक स्वस्थ जीवनशैली के प्रतीक बनकर सामने आते हैं। इसका आप पर असर यह जीवन यात्रा साबित करती है कि उम्र बढ़ने के बावजूद नियमित शारीरिक कसरत से लंबे समय तक सक्रिय रहा जा सकता है। • दैनिक व्यायाम की आदत: बढ़ती उम्र में भी रोजाना हल्की दौड़ या कसरत शरीर को चुस्त बनाए रखती है। पाठकों को अपने रोजमर्रा के कार्यक्रम में आधा घंटा व्यायाम के लिए जरूर निकालना चाहिए। • शुरुआती उम्र में खेलकूद: बचपन में सीखी गई तैराकी या मैदानी खेल ताउम्र शारीरिक आधार को मजबूत रखते हैं। बच्चों को शुरुआती उम्र से ही किसी एक खेल गतिविधि से जोड़ना फायदेमंद होता है। • बड़ी चुनौतियों की तैयारी: मैराथन या लंबी दौड़ जैसी गतिविधियों में भाग लेने के लिए लगातार अभ्यास जरूरी होता है। अपनी शारीरिक क्षमता को धीरे-धीरे बढ़ाकर नए लक्ष्य तय किए जा सकते हैं। • उम्र की सीमाओं से मुक्ति: 60 वर्ष पार करने के बाद भी मजबूत इरादे से कठिन शारीरिक चुनौतियां पार की जा सकती हैं। स्वास्थ्य को लेकर की गई मेहनत किसी भी उम्र में सकारात्मक नतीजे देती है। ऐसा क्यों हुआ मिलिंद सोमन की असाधारण शारीरिक क्षमता और फिटनेस के पीछे बचपन का कड़ा अनुशासन और खेलों के प्रति उनका अटूट समर्पण है। • बचपन का खेल प्रशिक्षण: छह साल की उम्र से तैराकी करने के कारण उनकी शारीरिक सहनशक्ति बहुत कम उम्र में ही विकसित हो गई थी। इसी अभ्यास ने 1984 के दक्षिण एशियाई खेलों में भारत के लिए रजत पदक जीतने का आधार तैयार किया। • इंजीनियरिंग से ग्लैमर और खेल का संतुलन: इंजीनियरिंग की पढ़ाई और मॉडलिंग में व्यस्त होने के बाद भी उन्होंने अपने खेल और फिटनेस के अभ्यास को कभी टूटने नहीं दिया। करियर के विभिन्न पड़ावों में भी वे अपनी शारीरिक सक्रियता को प्राथमिकता देते रहे। • कठिन लक्ष्यों का चयन: उन्होंने 2015 में 15 घंटे 19 मिनट में आयरनमैन पूरा करने और 30 दिनों में 1,500 किलोमीटर दौड़ने जैसे बड़े लक्ष्य खुद चुने। इन रिकॉर्ड्स और 2016 की बर्लिन मैराथन में 42.2 किलोमीटर की दूरी नापने के संकल्प ने उनकी फिटनेस को हमेशा चर्चा में बनाए रखा। सवाल-जवाब 1. मिलिंद सोमन का जन्म कब और कहां हुआ था? उनका जन्म 4 नवंबर 1965 को स्कॉटलैंड के ग्लासगो में हुआ था। 2. मिलिंद सोमन ने तैराकी में भारत के लिए कौन सा पदक जीता था? उन्होंने साल 1984 में काठमांडू में हुए पहले दक्षिण एशियाई खेलों में रजत पदक जीता था। 3. मिलिंद सोमन को मॉडलिंग और संगीत जगत में सबसे बड़ी पहचान किससे मिली? उन्हें 1995 में आए अलीशा चिनॉय के प्रसिद्ध संगीत वीडियो ‘मेड इन इंडिया’ से देशव्यापी लोकप्रियता मिली। 4. मिलिंद सोमन ने आयरनमैन प्रतियोगिता कितने समय में पूरी की थी? साल 2015 में उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में 15 घंटे और 19 मिनट में यह चुनौती पूरी की थी। 5. लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में मिलिंद सोमन का नाम क्यों दर्ज हुआ था? उन्होंने लगातार 30 दिनों की अवधि में 1,500 किलोमीटर दौड़ने का असाधारण रिकॉर्ड बनाया था। 6. बर्लिन मैराथन 2016 में मिलिंद सोमन का प्रदर्शन कैसा रहा था? उन्होंने 42.2 किलोमीटर की दूरी को 4 घंटे और 32 मिनट में पूरा किया था। प्रेरणा और सबक मिलिंद सोमन की जीवन यात्रा दर्शाती है कि शारीरिक फिटनेस और सफलता किसी भी उम्र में मजबूत इच्छाशक्ति से हासिल की जा सकती है। • निरंतरता ही असली पूंजी: दिनचर्या में हर रोज थोड़ा समय व्यायाम को देना लंबे समय में बड़ी उपलब्धियां दिलाता है। • उम्र को सीमा न मानना: साठ साल के बाद भी बड़े शारीरिक लक्ष्य निर्धारित करके उन्हें पूरा किया जा सकता है। • शुरुआती अभ्यास का महत्व: बचपन में अपनाई गई अच्छी आदतें और खेल पूरे जीवन में सेहत का सहारा बनते हैं। • रुचि और काम में सामंजस्य: पेशेवर व्यस्तताओं के बीच भी अपने स्वास्थ्य और पसंदीदा खेल के लिए समय निकालना संभव है। https://trendkia.com/lifestyle/glasgow-se-ironman-taka-milind-soman-ke-61-sala-ke-jivana-aura-phitanesa-ka-shanadara-saphara-56036 TrendKia — Har trend, sabse pehle.