गोंडा की पारंपरिक रसोई से सीखें सिलबट्टे वाली देसी चटनी का पुराना स्वाद कम सामग्री और पारंपरिक सिलबट्टे की पिसाई से तैयार होने वाली यह देसी चटनी रोजमर्रा के खाने का स्वाद कई गुना बढ़ा देती है। भारतीय खानपान की परंपरा में चटनी केवल एक अतिरिक्त व्यंजन नहीं, बल्कि पूरी थाली का स्वाद निखारने वाला सबसे अहम हिस्सा रही है। चाहे दोपहर में साधारण दाल-चावल की थाली हो, ताजी सिकी रोटियां हों या फिर शाम के गर्मागर्म पकौड़े, एक चम्मच चटपटी देसी चटनी हर भोजन का जायका बदल देती है। इस पारंपरिक चटनी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे तैयार करने के लिए न तो किसी महंगी सामग्री की आवश्यकता होती है और न ही घंटों की मेहनत करनी पड़ती है। रसोई में हर वक्त उपलब्ध रहने वाले साधारण साबुत मसालों से ही इसे बेहद आसानी से बनाया जा सकता है। रसोई के बुनियादी मसालों से तैयार होगी चटनी पारंपरिक देहाती स्वाद वाली इस चटनी को बनाने के लिए घर में रखी कुछ बुनियादी चीजों की जरूरत होती है। गृहिणी ममता तिवारी के अनुसार, इस नुस्खे के लिए लहसुन, हरी मिर्च, सूखी लाल मिर्च, नमक, हरा धनिया, साबुत धनिया, जीरा, हींग, सौंफ और मंगरेल जैसी सामग्री जुटाई जाती है। यदि घर में ताजा हरा धनिया मौजूद न हो, तो उसकी जगह साबुत भुने हुए धनिये का इस्तेमाल करके भी पूरा स्वाद पाया जा सकता है। सामग्री के सटीक माप की बात करें तो शुरुआत में 2 से 4 कलियां लहसुन की ली जाती हैं। इसके साथ अपनी पसंद और तीखेपन के अनुसार हरी मिर्च, सूखी लाल मिर्च और स्वादानुसार सादा नमक शामिल किया जाता है। सूखे खड़े मसालों में साबुत धनिया, जीरा, सौंफ, मंगरेल और महज एक चुटकी सूखी हींग ली जाती है। सिलबट्टे पर चढ़ाने से पहले साबुत धनिये और अन्य सूखे मसालों को तवे पर हल्का सा भून लिया जाता है, जिससे मसालों से प्राकृतिक तेल बाहर आता है और चटनी की भीनी खुशबू तथा स्वाद दोनों कई गुना बढ़ जाते हैं। सिलबट्टे की धीमी घिसाई से निकलता है असली जायका ममता तिवारी बताती हैं कि इस पूरी सामग्री को आधुनिक इलेक्ट्रिक मिक्सर में पीसने के बजाय पारंपरिक सिलबट्टे पर धीरे-धीरे पीसना चाहिए। पीसने का सही क्रम यह है कि सबसे पहले लहसुन की कलियां, हरी मिर्च, सूखी लाल मिर्च और नमक को सिलबट्टे पर रखकर महीन किया जाता है। जब यह हिस्सा ठीक से पिस जाए, तब इसके बाद पहले से भुना हुआ साबुत धनिया और बाकी खड़े मसाले डालकर अच्छी तरह घिसाई की जाती है। आवश्यकता के मुताबिक बीच-बीच में हल्का सा पानी छिड़क कर चटनी को मनमुताबिक गाढ़ा या पतला रखा जा सकता है। पत्थर के सिलबट्टे और आधुनिक ब्लेंडर के बीच का अंतर स्पष्ट करते हुए वह समझाती हैं कि बिजली के मिक्सर में तेज गति और गर्मी के कारण मसालों के प्राकृतिक गुण दब जाते हैं। इसके विपरीत, पत्थर के सिलबट्टे पर जब मसाले ठंडे तापमान में धीरे-धीरे रगड़े जाते हैं, तो उनकी सुगंध, प्राकृतिक तेल और बनावट पूरी तरह सुरक्षित रहती है। यही कारण है कि पारंपरिक तरीके से पत्थर पर पीसी गई चटनी का स्वाद इलेक्ट्रिक मिक्सर वाली चटनी के मुकाबले कहीं अधिक गहरा और लाजवाब महसूस होता है। इसलिए घर में जब भी मुमकिन हो, इस चटनी को सिलबट्टे पर ही पीसना चाहिए। दाल-चावल से लेकर बाटी-चोखा तक हर व्यंजन के साथ मेल ममता तिवारी के अनुसार, यह देहाती चटनी हर तरह के देसी भोजन के साथ बेहतरीन तालमेल बनाती है। इसे साधारण दाल-चावल, सादी रोटी, कुरकुरे पराठे, पूर्वांचल के मशहूर चोखा और बाटी के साथ ही भटूरे के साथ भी परोसा जा सकता है। कम खर्च, बेहद सीमित सामग्री और आसान घरेलू तरीके से बनने वाली यह चटनी सादे भोजन को भी एक उत्सव जैसा स्वाद दे देती है। इसका आप पर असर यह पारंपरिक विधि रसोई के रोजमर्रा के बजट और भोजन के स्वाद को बेहतर बनाने में मदद करती है। • सीमित खर्च में स्वाद: यह चटनी घर में मौजूद रोजमर्रा के बुनियादी मसालों से ही बन जाती है। इसके लिए बाजार से कोई महंगा पैकेटबंद सॉस या खास सामग्री खरीदने की आवश्यकता नहीं होती। • पारंपरिक तकनीक का लाभ: इलेक्ट्रिक मिक्सर के मुकाबले सिलबट्टे पर मसाले बिना गर्म हुए पिसते हैं। इससे मसालों के प्राकृतिक तेल और पोषक तत्व नष्ट नहीं होते। • भोजन की उपयोगिता: साधारण दाल-चावल या सादी रोटी के साथ भी यह एक बेहतरीन विकल्प बनती है। कम मेहनत में यह घर के रोजमर्रा के खाने को अधिक स्वादिष्ट बना देती है। • सामग्री का आसान विकल्प: यदि घर में ताजा हरा धनिया न हो तो भुने साबुत धनिये से काम चल जाता है। इस लचीलेपन से रसोई में बिना किसी झंझट के तुरंत चटनी तैयार की जा सकती है। ऐसा क्यों हुआ पारंपरिक सिलबट्टे की पिसाई से चटनी का स्वाद इलेक्ट्रिक मिक्सर से बेहतर आने के पीछे ठोस तकनीकी और रसोई के कारण हैं। • मसालों का धीमा दबाव: सिलबट्टे के पत्थर पर जब मसालों को धीरे-धीरे रगड़ा जाता है, तो उनके रेशे और तेल कोशिकाएं धीरे-धीरे टूटती हैं। इससे मसालों का असली रस और गाढ़ापन बेहतर तरीके से बाहर निकलकर आपस में घुलमिल जाता है। • तापमान का असर: बिजली से चलने वाले मिक्सर के ब्लेड बहुत तेज गति से घूमते हैं और पिसाई के दौरान गर्मी पैदा करते हैं। यह गर्मी मसालों की नाजुक खुशबूदार भाप और जरूरी तेलों को उड़ा देती है, जबकि सिलबट्टे पर पिसाई पूरी तरह ठंडी रहती है। • मसालों को भूनने की भूमिका: साबुत धनिया, जीरा और सौंफ को सिलबट्टे पर पीसने से पहले हल्का भूनने से उनकी नमी खत्म हो जाती है। नमी हटने से मसाले आसानी से पिसते हैं और उनका सुंगधित स्वाद पूरी चटनी में गहराई से समा जाता है। सवाल-जवाब 1. पारंपरिक देसी चटनी बनाने के लिए किन मुख्य सामग्रियों की आवश्यकता होती है? इसके लिए लहसुन, हरी मिर्च, सूखी लाल मिर्च, नमक, हरा धनिया या भुना साबुत धनिया, जीरा, सौंफ, हींग और मंगरेल की जरूरत होती है। 2. अगर घर में ताजा हरा धनिया न हो तो क्या करें? यदि ताजा हरा धनिया उपलब्ध नहीं है, तो उसकी जगह तवे पर हल्का भुना हुआ साबुत धनिया इस्तेमाल किया जा सकता है। 3. सिलबट्टे पर सामग्री को किस क्रम में पीसना चाहिए? सबसे पहले लहसुन, दोनों मिर्च और नमक को पीसना चाहिए, उसके बाद भुना धनिया और अन्य खड़े मसाले डालकर पीसना चाहिए। 4. मिक्सर के मुकाबले सिलबट्टे पर बनी चटनी अधिक स्वादिष्ट क्यों मानी जाती है? सिलबट्टे पर धीरे-धीरे घिसाई होने से मसालों की प्राकृतिक खुशबू और स्वाद पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं, जो मिक्सर की गर्मी में कम हो जाते हैं। 5. यह देसी चटनी किन व्यंजनों के साथ परोसी जा सकती है? यह चटनी दाल-चावल, सादी रोटी, पराठे, बाटी-चोखा और भटूरे के साथ स्वाद बढ़ाने के लिए खाई जा सकती है। https://trendkia.com/lifestyle/gonda-ki-parnparika-rasoi-se-sikhen-silabatte-vali-desi-chatani-ka-purana-svada-42532 TrendKia — Har trend, sabse pehle.