गुलाब के पौधों में कलियों का आना रुका तो अपनाएं धूप, सिंचाई और छंटाई के जरूरी बागवानी नियम पर्याप्त धूप, संतुलित पानी, जैविक खाद और समय पर प्रूनिंग करके गुलाब के पौधों में फिर से ढेरों फूल लाए जा सकते हैं। रायबरेली के एक अनुभवी माली ने पौधों को दोबारा हरा-भरा और कलियों से भरने के उपाय साझा किए हैं। बगीचे या बालकनी में लगे गुलाब के पौधों पर अगर अचानक कलियां खिलना रुक जाएं, तो अक्सर लोग समझ नहीं पाते कि कमी कहां रह गई है। गुलाब की प्रकृति बेहद संवेदनशील मानी जाती है, इसलिए इसे मौसम के हिसाब से नियमित देखभाल, सही मात्रा में खाद और अनुकूल वातावरण की आवश्यकता होती है। यदि पौधों की बुनियादी जरूरतों को समय रहते पूरा कर दिया जाए, तो टहनियां एक बार फिर से नई कलियों और मनमोहक फूलों से लद सकती हैं। सीधी धूप की आवश्यकता और सही स्थान का चयन गुलाब के विकास और नई कलियां तैयार होने के लिए सबसे अनिवार्य कारक सूर्य का प्रकाश है। रायबरेली जिले के एसबीवीपी इंटर कॉलेज में कार्यरत माली अरविंद कुमार के अनुसार, गुलाब के पौधों को हर रोज कम से कम 5 से 6 घंटे की सीधी धूप मिलना जरूरी होता है। धूप की कमी होने पर पौधे की प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है, जिससे नई शाखाओं पर कलियां बनना पूरी तरह थम जाता है। इसलिए गमलों को हमेशा ऐसी खुली जगह पर रखना चाहिए जहां सुबह से दोपहर तक पर्याप्त रोशनी और खुली हवा मिलती रहे। सिंचाई का संतुलन और जड़ों का बचाव गुलाब की देखरेख में पानी का प्रबंधन अत्यंत नाजुक पहलू है, क्योंकि जरूरत से अधिक या बहुत कम पानी दोनों ही पौधों को भारी नुकसान पहुंचाते हैं। आवश्यकता से अधिक पानी देने से गमले की मिट्टी दलदली हो जाती है, जिससे जड़ें गलने लगती हैं और पौधे में फूल आने की क्षमता खत्म हो जाती है। गर्मियों के महीनों में रोजाना हल्की नमी बनाए रखने के लिए पानी देना ठीक रहता है, जबकि सर्दियों के मौसम में मिट्टी की स्थिति देखते हुए दो या तीन दिन के अंतराल पर ही पानी डालना चाहिए। मिट्टी में हमेशा हल्की नमी बरकरार रहनी चाहिए, लेकिन गमले में पानी बिल्कुल भी जमा नहीं होना चाहिए। जैविक खाद और पोषण का समय चक्र मिट्टी में जरूरी पोषक तत्वों का अभाव भी फूलों की संख्या घटने की एक मुख्य वजह बनता है। बेहतर परिणामों के लिए प्रत्येक 15 दिन में एक बार अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद, केंचुआ खाद यानी वर्मीकंपोस्ट या फिर नीम की खली की खुराक मिट्टी में मिलानी चाहिए। इसके अतिरिक्त जैविक पोषण के तौर पर बोन मील अथवा डीएपी का सीमित और हल्का इस्तेमाल नई कलियों को तेजी से उभारने में मदद करता है। सूखी टहनियों की छंटाई और कीटों से सुरक्षा पौधे को घना और फूलों से भरा रखने के लिए पुरानी सूखी टहनियों और मुरझाए हुए फूलों को समय रहते काटते रहना अनिवार्य है। इस तरह की प्रूनिंग से पौधे में नई ऊर्जावान शाखाएं फूटती हैं और कलियां बनने की गति तेज होती है। गुलाब की कटाई और छंटाई के लिए ठंड का मौसम सबसे अनुकूल माना गया है। वहीं पत्तियों का पीला पड़ना, उन पर सफेद धब्बे नजर आना या कीटों का प्रकोप दिखने पर नियमित रूप से नीम के तेल का छिड़काव करना चाहिए, जिससे पौधा निरोगी रहे और बगीचा लंबे समय तक महकता रहे। इसका आप पर असर यह जानकारी घर पर बागवानी करने वाले शौकीनों को बिना महंगे रसायनों के गुलाब के पौधों को दोबारा फूलों से भरने में मदद करेगी। • सीधी धूप का नियम: गमलों को रोजाना कम से कम 5 से 6 घंटे खुली धूप में रखें। छायादार जगह से हटाने पर कुछ ही हफ्तों में नई कलियां नजर आने लगेंगी। • सिंचाई का समय: गर्मियों में रोज हल्का पानी दें और सर्दियों में 2 से 3 दिन में एक बार सिंचाई करें। इससे जड़ों में सड़न की समस्या पूरी तरह रुक जाएगी। • पोषक तत्वों का चक्र: हर 15 दिन में वर्मीकंपोस्ट, नीमखली या गोबर की खाद डालें। यह नियमित खुराक कलियों की संख्या में तुरंत इजाफा करेगी। • छंटाई और सफाई: ठंड के दिनों में पुरानी और सूखी टहनियों की कटाई अवश्य करें। इस प्रक्रिया से नई मजबूत शाखाएं निकलेंगी और फूल बड़े आकार में खिलेंगे। • कीटों से बचाव: पत्तियों पर सफेद निशान या कीड़े दिखते ही नीम के तेल का स्प्रे करें। इससे बिना किसी जहरीले रसायन के पौधा स्वस्थ बना रहेगा। ऐसा क्यों हुआ गुलाब के पौधों में कलियों का बनना रुकने के पीछे आमतौर पर धूप की कमी, गलत सिंचाई, पोषक तत्वों का अभाव और अनुपचारित कीट होते हैं। इन बुनियादी कारकों की अनदेखी होते ही पौधा फूल देने की बजाय केवल जीवित रहने तक सीमित हो जाता है। • धूप का अभाव: पर्याप्त रोशनी न मिलने पर पौधा ऊर्जा नहीं बना पाता। इसका सीधा असर कली बनने की प्रक्रिया पर पड़ता है और विकास रुक जाता है। • अत्यधिक सिंचाई से जड़ सड़न: गमले में पानी भरा रहने से जड़ों तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। सड़ी हुई जड़ें मिट्टी से भोजन खींचने में असमर्थ हो जाती हैं। • मिट्टी की उर्वरता घटना: लगातार पानी देने से मिट्टी के पोषक तत्व बह जाते हैं। हर पखवाड़े नई खाद न मिलने पर फूलों का उत्पादन घट जाता है। • सूखी टहनियों का भार: पुरानी और मृत शाखाएं पौधे की जरूरी ताकत सोखती रहती हैं। छंटाई न होने के कारण नई ऊर्जावान शाखाओं का निकलना बंद हो जाता है। सवाल-जवाब 1. गुलाब के पौधे को रोजाना कितनी देर धूप में रखना चाहिए? गुलाब के पौधे को अच्छी तरह फूलने के लिए हर दिन कम से कम 5 से 6 घंटे की सीधी धूप मिलना आवश्यक है। 2. गुलाब में पानी देने का सही तरीका और समय क्या है? गर्मियों में रोजाना हल्का पानी देना चाहिए, जबकि सर्दियों में दो या तीन दिन के अंतराल पर जरूरत के अनुसार सिंचाई करनी चाहिए। 3. पौधे में अधिक फूल लाने के लिए कौन सी खाद उपयोगी मानी जाती है? हर 15 दिन में सड़ी हुई गोबर की खाद, वर्मीकंपोस्ट या नीमखली डालने के साथ डीएपी अथवा बोन मील का हल्का प्रयोग फायदेमंद होता है। 4. गुलाब की कटिंग और छंटाई करने का सबसे सही मौसम कौन सा है? गुलाब की पुरानी टहनियों और सूखी शाखाओं की छंटाई के लिए ठंड का मौसम सबसे बेहतर माना जाता है। 5. गुलाब की पत्तियों में कीड़े या सफेद धब्बे दिखने पर क्या उपाय करें? सफेद धब्बे, पत्तियां पीली होने या कीड़े लगने की स्थिति में नीम के तेल का छिड़काव करना चाहिए। https://trendkia.com/lifestyle/gulaba-ke-paudhon-men-kaliyon-ka-ana-ruka-to-apanaen-dhupa-sinchai-aura-chhntai-ke-jaruri-bagavani-niyama-34142 TrendKia — Har trend, sabse pehle.