गुटी कलम तकनीक से घर पर ही तैयार करें सैकड़ों पौधे, मात्र दो साल में फल देने लगेंगे पेड़ एयर लेयरिंग यानी गुटी कलम विधि अपनाकर बिना भारी खर्च के आम, लीची और अमरूद के नए पौधे तैयार किए जा सकते हैं, जिनमें बीज के मुकाबले बहुत तेजी से फल आते हैं। बागवानी के शौकीन लोगों और किसानों के लिए अपनी पसंद के फलदार पेड़ों से नए पौधे बनाना अब बेहद सरल हो चुका है। एयर लेयरिंग अथवा गुटी कलम नाम से पहचानी जाने वाली यह बागवानी विधि किसी भी गुणवत्तापूर्ण पेड़ से ढेरों नए पौधे उगाने का एक सस्ता और कारगर जरिया बनती है। इस बागवानी तरीके के जरिए आम, अमरूद, लीची और नींबू जैसे लोकप्रिय फलों के नए पौधे सीधे मातृ वृक्ष की टहनी से तैयार किए जाते हैं, जिससे बाजार से महंगे पौधे खरीदने का झंझट समाप्त हो जाता है। टहनी का चयन और छाल हटाने की सावधानी वाटिका नर्सरी के विशेषज्ञ राधेश्याम के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया में ज्यादा पैसे लगाने की आवश्यकता नहीं होती। सबसे पहले किसी ऐसे स्वस्थ और बेहतरीन फल देने वाले पेड़ को चुनें जिसकी किस्म आप बढ़ाना चाहते हैं। उस पेड़ से पेंसिल से थोड़ी अधिक मोटाई वाली एक मजबूत और निरोगी शाखा का चुनाव किया जाता है। इसके पश्चात उस शाखा के चारों तरफ लगभग एक इंच के घेरे में ऊपरी छाल को सावधानीपूर्वक काट कर निकाल दिया जाता है। इस दौरान यह ध्यान रखना बेहद आवश्यक है कि केवल छाल ही हटाई जाए और अंदर मौजूद कठोर लकड़ी को किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचे। मिश्रण का लेप और नमी बनाए रखने का तरीका शाखा की छाल हटाने के बाद जड़ें विकसित करने के लिए एक विशेष मिश्रण तैयार किया जाता है। इसके तहत कोकोपीट, केंचुआ खाद यानी वर्मी कंपोस्ट और सामान्य मिट्टी को आपस में मिलाकर एक नम गोला तैयार करते हैं। इस मिश्रण को टहनी के उसी छिले हुए हिस्से पर चारों तरफ अच्छी तरह लपेट दिया जाता है। मिश्रण को अपनी जगह पर स्थिर रखने और उसमें नमी सुरक्षित बनाए रखने के लिए उसे प्लास्टिक की पन्नी से कसकर बांध दिया जाता है, जिससे बाहरी हवा का असर न हो और मिश्रण नीचे न गिरे। जड़ें फूटने की अवधि और रोपाई की प्रक्रिया विशेषज्ञ राधेश्याम के मुताबिक, प्लास्टिक के अंदर बंधे इस हिस्से में लगभग 45 दिनों के भीतर महीन नई जड़ें निकलना शुरू हो जाती हैं। जब प्लास्टिक के पार से जड़ें साफ तौर पर दिखने लगें और पूरी तरह विकसित हो जाएं, तब उस टहनी को मूल पेड़ से काटकर अलग कर लिया जाता है। इसके बाद उस नई कलम को किसी पॉलीथीन बैग में अथवा सीधे खेत और बगीचे की जमीन में रोपा जा सकता है। कम समय में फलन और कमाई के अवसर इस तकनीक की सबसे प्रमुख विशेषता यह है कि तैयार होने वाला नया पौधा पूरी तरह अपने मातृ वृक्ष के समान ही गुण रखता है। साधारण तौर पर बीज द्वारा उगाए गए पेड़ को फल देने में 5 से 6 वर्ष का लंबा समय लग जाता है, जबकि गुटी कलम से रोपा गया पौधा मात्र 2 साल के भीतर फल देना शुरू कर देता है। कम लागत और न्यूनतम संसाधनों में अपनी व्यक्तिगत नर्सरी शुरू करके किसान इस विधि से अच्छी अतिरिक्त आमदनी भी प्राप्त कर सकते हैं। इसका आप पर असर यह बागवानी विधि फल उगाने के शौकीनों और किसानों के समय और पैसे दोनों की बड़ी बचत करती है। • लागत में बचत: बाजार से महंगे पौधे खरीदने की जरूरत नहीं रहती। आप घर पर उपलब्ध साधारण चीजों से मुफ्त में मनपसंद फलदार पौधे तैयार कर सकते हैं। • फलों का इंतजार खत्म: बीज वाले पौधों के मुकाबले फल तीन गुना तेजी से मिलते हैं। जहां बीज से पेड़ बनने में 5 से 6 साल लगते हैं, वहीं इस विधि से मात्र 2 साल में फल मिलने लगते हैं। • किसानों की आमदनी: ग्रामीण क्षेत्रों और खेतों में कम खर्च पर नर्सरी तैयार की जा सकती है। किसान इन पौधों को स्थानीय बाजारों में बेचकर अतिरिक्त मुनाफा कमा सकते हैं। • नस्ल की शुद्धता: पौधे में ठीक मूल पेड़ जैसे ही मीठे और बड़े फल लगते हैं। नए पौधे में फल की गुणवत्ता बिगड़ने का कोई जोखिम नहीं रहता। ऐसा क्यों हुआ यह विधि पौधों की प्राकृतिक पुनरुत्पादन क्षमता का लाभ उठाकर बिना बीज के नया स्वतंत्र पौधा तैयार करती है। • छाल हटाने का कारण: शाखा से एक इंच छाल हटाने पर पोषक तत्वों का नीचे की ओर प्रवाह रुक जाता है। इसके परिणामस्वरूप उस कटे हुए स्थान पर कोशिकाएं तेजी से नई जड़ें विकसित करने के लिए प्रेरित होती हैं। • कोकोपीट और खाद का उपयोग: कोकोपीट, वर्मी कंपोस्ट और मिट्टी का मिश्रण जड़ों को लगातार नमी और जरूरी पोषण देता है। प्लास्टिक से कसकर बांधने के कारण पानी सूखता नहीं है और 45 दिनों तक अनुकूल वातावरण बना रहता है। • मातृ शाखा की परिपक्वता: चूंकि यह शाखा पहले से ही एक वयस्क पेड़ का हिस्सा होती है, इसलिए इसमें वयस्कता के गुण मौजूद रहते हैं। इसी वजह से यह बीज से उगे पौधे के 5 से 6 साल के मुकाबले मात्र 2 साल में फल देने लगती है। सवाल-जवाब 1. गुटी कलम या एयर लेयरिंग किन फलों के पेड़ों पर की जा सकती है? यह विधि मुख्य रूप से आम, अमरूद, लीची और नींबू जैसे फलदार पेड़ों पर आसानी से अपनाई जा सकती है। 2. एयर लेयरिंग के लिए किस तरह की टहनी चुननी चाहिए? पेड़ से एक स्वस्थ और पेंसिल से थोड़ी मोटी टहनी चुननी चाहिए, जिसमें किसी रोग के लक्षण न हों। 3. टहनी पर छाल हटाने के बाद कौन सा मिश्रण बांधा जाता है? छिले हुए हिस्से पर कोकोपीट, वर्मी कंपोस्ट और थोड़ी मिट्टी को मिलाकर नम गोला बनाकर बांधा जाता है। 4. टहनी में जड़ें फूटने में कितना समय लगता है? प्लास्टिक के अंदर बांधे गए मिश्रण में लगभग 45 दिनों में नई जड़ें निकलना शुरू हो जाती हैं। 5. गुटी कलम से तैयार पौधे में कितने समय में फल आने लगते हैं? इस तकनीक से तैयार पौधे में रोपाई के लगभग 2 साल बाद ही फल आने शुरू हो जाते हैं, जबकि बीज से 5 से 6 साल लगते हैं। https://trendkia.com/lifestyle/guti-kalama-takanika-se-ghara-para-hi-taiyara-karen-saikaron-paudhe-matra-do-sala-men-phala-dene-lagenge-pera-45613 TrendKia — Har trend, sabse pehle.