# आईसीएमआर-एनआईएन के नियमों के बीच जानें काला चना या काबुली चना में से किसमें है अधिक पोषण

> काले और काबुली चने के पोषक तत्वों में अंतर होता है, जिसे समझकर आप अपनी सेहत और डाइट के हिसाब से सही विकल्प का चुनाव कर सकते हैं।

**Type:** article · **Category:** जीवनशैली · **Published:** 2026-09-13 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/lifestyle/icmr-nin-ke-niyamon-ke-bicha-janen-kala-chana-ya-kabuli-chana-men-se-kisamen-hai-adhika-poshana-31700 · **Language:** Hindi
**Tags:** चना, प्रोटीन के स्रोत, फाइबर आहार, स्वस्थ खानपान, पोषण की तुलना

चने को हमारे दैनिक भोजन में एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, जिसे सुबह के नाश्ते, स्वादिष्ट करी, चटपटी चाट और सलाद जैसे कई रूपों में बड़े चाव से खाया जाता है। बाजार में मुख्य रूप से दो प्रकार के चने देखने को मिलते हैं, जिनमें पहला छोटा और गहरे रंग का काला चना (जिसे देसी चना भी कहा जाता है) और दूसरा बड़े आकार वाला हल्के क्रीम रंग का काबुली चना शामिल है। ये दोनों ही चने प्रोटीन और फाइबर के उत्कृष्ट स्रोत माने जाते हैं, जो शाकाहारी भोजन करने वालों के लिए पोषण का एक बेहतरीन जरिया हैं। हालांकि, कौन सा चना सेहत के लिए अधिक फायदेमंद है, इसका फैसला केवल उनके रंग या बाहरी रूप को देखकर नहीं किया जा सकता क्योंकि इनके भीतर छिपे पोषक तत्वों में कुछ बुनियादी अंतर होते हैं।

## पोषण के स्तर पर प्रसंस्करण और पकाने की विधि का प्रभाव
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद और राष्ट्रीय पोषण संस्थान (आईसीएमआर-एनआईएन) के आहार संबंधी दिशा-निर्देशों में साफ तौर पर कहा गया है कि दालें और बीन्स भारतीय भोजन में प्रोटीन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण जरिया हैं। इन दिशा-निर्देशों में यह भी सुझाव दिया गया है कि यदि अनाज और दालों को एक साथ मिलाकर खाया जाए, तो इससे शरीर को मिलने वाले प्रोटीन की गुणवत्ता में काफी सुधार होता है। जब हम काले और काबुली चने के बीच तुलना करते हैं, तो यह ध्यान रखना जरूरी है कि प्रोटीन की मात्रा चने की विशिष्ट किस्म, उसके प्रसंस्करण के तरीके और उसे कच्चा या पकाकर खाने की स्थिति के आधार पर बदल सकती है।

अमेरिकी कृषि विभाग के यूएसडीए फूडडाटा सेंट्रल के आंकड़ों पर नजर डालें तो पोषक तत्वों के इस बदलाव को आसानी से समझा जा सकता है। इन आंकड़ों के मुताबिक, सूखे या कच्चे काबुली चने के प्रति 100 ग्राम में लगभग 20.5 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है। लेकिन जब इसी चने को पानी में उबालकर पकाया जाता है, तो पानी सोखने के कारण प्रति 100 ग्राम में प्रोटीन की मात्रा घटकर करीब 8.9 ग्राम रह जाती है। दूसरी तरफ, देसी या काले चने में भी प्रचुर मात्रा में प्रोटीन के साथ-साथ फाइबर पाया जाता है। यही वजह है कि केवल प्रोटीन की कुल मात्रा को आधार मानकर किसी एक चने को दूसरे से बेहतर घोषित करना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है।

## अपनी सेहत की जरूरतों के हिसाब से सही चने का चुनाव करें
काले और काबुली चने में से किसी एक को चुनते समय आपको अपनी व्यक्तिगत स्वास्थ्य प्राथमिकताओं और भोजन की पसंद पर ध्यान देना चाहिए। यदि आप अपने आहार में फाइबर की मात्रा बढ़ाना चाहते हैं और ऐसा भोजन तलाश रहे हैं जो लंबे समय तक आपके पेट को भरा रखे, तो काला चना आपके लिए सबसे उपयुक्त विकल्प साबित हो सकता है। इसकी सख्त बाहरी परत के कारण इसे पचाने में अधिक समय लगता है, जिससे बार-बार भूख लगने की समस्या से राहत मिलती है। आप इसे अंकुरित करके, उबालकर या फिर सलाद के रूप में आसानी से अपने दैनिक आहार का हिस्सा बना सकते हैं।

इसके विपरीत, काबुली चना भी पोषण से भरपूर एक बेहद शानदार विकल्प है, जो शरीर को जरूरी मात्रा में प्रोटीन और फाइबर प्रदान करता है। अपनी नरम बनावट और हल्के स्वाद के कारण यह हम्मस, छोले की सब्जी और कई प्रकार के पश्चिमी सलाद बनाने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। यदि आपको इसका स्वाद और मुंह में घुल जाने वाली बनावट पसंद है, तो इसे अपनी डाइट में शामिल करना सेहत और स्वाद दोनों के लिहाज से एक बेहतरीन फैसला है।

## इसका आप पर असर
काले और काबुली चने के बीच पोषण संबंधी अंतर को समझकर स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग अपनी फिटनेस और सेहत के लक्ष्यों के अनुसार अपने डाइट प्लान को तैयार कर सकते हैं।

- **आहार में बदलाव:** सही चने का चयन करने से आपको वजन नियंत्रित करने या मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद मिलती है। काले चने का चुनाव करने से शरीर को अधिक फाइबर मिलता है जिससे भूख नियंत्रित रहती है, जबकि पका हुआ काबुली चना आसानी से पच जाता है।
- **ऊर्जा का निरंतर स्तर:** अपने नाश्ते में फाइबर से भरपूर काले चने को शामिल करने से ब्लड शुगर अचानक बढ़ने से रुकती है। ऊर्जा का यह निरंतर स्तर कामकाजी लोगों को उनके काम के दौरान सक्रिय और केंद्रित रहने में मदद करता है।
- **किफायती पोषण:** दोनों ही प्रकार के चने उच्च गुणवत्ता वाले पादप-आधारित प्रोटीन के बेहद किफायती स्रोत हैं। परिवार महंगे सप्लीमेंट्स या विदेशी सुपरफूड्स पर अधिक खर्च किए बिना अपनी दैनिक पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा कर सकते हैं।
- **बेहतर भोजन योजना:** यह जानने से कि पकाने के बाद प्रोटीन की मात्रा पर क्या प्रभाव पड़ता है, आपको भोजन की मात्रा का सटीक आकलन करने में मदद मिलती है। आप पके हुए चने के वजन के अंतर को ध्यान में रखकर अपने दैनिक मैक्रो-न्यूट्रीएंट सेवन को ठीक से संभाल सकते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
काले और काबुली चने में प्रोटीन और फाइबर की मात्रा में अंतर मुख्य रूप से प्रजातियों के भीतर आनुवंशिक भिन्नता और पकाने के दौरान होने वाले भौतिक परिवर्तनों के कारण होता है।

- **आनुवंशिक विकासवादी अंतर:** हालांकि दोनों चने एक ही पौधे की प्रजाति से संबंधित हैं, लेकिन समय के साथ हुए आनुवंशिक बदलावों ने इन्हें अलग-अलग शारीरिक विशेषताएं दी हैं। काले चने में एक मोटा छिलका होता है जिसमें सघन फाइबर होता है, जबकि काबुली चने को बड़े आकार और पतले छिलके के लिए विकसित किया गया है।
- **पानी सोखने का प्रभाव:** चने को पकाने से पानी के अत्यधिक समावेश के कारण प्रति 100 ग्राम प्रोटीन की सघनता काफी कम हो जाती है। जब सूखे चने को उबाला जाता है, तो वे पानी सोखकर फूल जाते हैं, जिससे कच्चे चने की तुलना में पोषक तत्वों का अनुपात बदल जाता है।
- **भोजन का सही संयोजन:** पौधों से मिलने वाले प्रोटीन में अक्सर पूर्ण प्रोटीन निर्माण के लिए आवश्यक कुछ एमीनो एसिड की कमी होती है। राष्ट्रीय आहार दिशा-निर्देशों के अनुसार, इन चनों को चावल या गेहूं जैसे अनाजों के साथ मिलाकर खाने से शरीर को सभी आवश्यक एमीनो एसिड मिल जाते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. वजन घटाने के लिए काला चना और काबुली चना में से कौन सा बेहतर है?
अधिक फाइबर और सख्त बाहरी छिलके के कारण वजन घटाने के लिए काला चना आम तौर पर बेहतर माना जाता है। इसे पचाने में अधिक समय लगता है जिससे लंबे समय तक पेट भरा रहता है और भूख नियंत्रित रहती है।

### 2. 100 ग्राम कच्चे काबुली चने में कितना प्रोटीन होता है?
पोषण संबंधी आंकड़ों के अनुसार, 100 ग्राम कच्चे या सूखे काबुली चने में लगभग 20.5 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है।

### 3. चना पकाने के बाद उसमें प्रोटीन की मात्रा क्यों कम हो जाती है?
पकाने के दौरान चने पानी की भारी मात्रा को सोख लेते हैं, जिससे उनका वजन और आकार बढ़ जाता है। इस कारण प्रति 100 ग्राम चने में पोषक तत्वों की सघनता कम हो जाती है।

### 4. आईसीएमआर-एनआईएन अनाज और दालों को एक साथ मिलाकर खाने की सलाह क्यों देता है?
अनाज और दालों को एक साथ मिलाकर खाने से भोजन में प्रोटीन की गुणवत्ता में सुधार होता है। यह संयोजन शरीर को सभी आवश्यक एमीनो एसिड प्रदान करने में मदद करता है।

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