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  "type": "article",
  "title": "जमशेदपुर की खाओ गली में चखिए ट्राइबल रसोई का पोड़म चिकन, 50 रुपये में मिल रहे 10 से 12 पीस",
  "summary": "जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित खाओ गली में विशाल हांसदा की ट्राइबल रसोई साल के पत्तों में लपेटकर लकड़ी की आंच पर पोड़म चिकन परोस रही है।",
  "content": "मांसाहारी भोजन के शौकीनों के बीच चिकन की लोकप्रियता हमेशा बनी रहती है, लेकिन आम तौर पर मिलने वाले ज्यादा तेल और गरिष्ठ मसालों वाले पकवानों से हटकर पारंपरिक स्वाद तलाशने वालों के लिए एक खास ठिकाना चर्चा में है। झारखंड के जमशेदपुर शहर में पारंपरिक तौर-तरीकों से पकाया जाने वाला पोड़म चिकन खानपान के प्रेमियों को खूब भा रहा है। बिष्टुपुर इलाके की प्रसिद्ध खाओ गली में शाम ढलते ही इस अनूठे पकवान की महक लोगों को अपनी ओर खींचने लगती है, जहां शाम 6 बजे से इस देसी स्वाद का लुत्फ उठाया जा सकता है।\n\nविशाल हांसदा की ट्राइबल रसोई में देसी अंदाज\nइस स्ट्रीट फूड ठिकाने को ट्राइबल रसोई नाम से पहचाना जाता है, जिसका संचालन विशाल हांसदा करते हैं। इस स्टॉल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां चिकन पकाने के लिए किसी आधुनिक उपकरण या भारी मसालों का सहारा नहीं लिया जाता, बल्कि झारखंड की सदियों पुरानी जनजातीय पाक कला का इस्तेमाल होता है। विशाल हांसदा इस पारंपरिक व्यंजन को उसकी मूल विधि के अनुसार तैयार करते हैं, जिससे इसका देसी रूप और असली जायका पूरी तरह बरकरार रहता है।\n\nसाल के पत्तों और लकड़ी की आंच पर पकाने की विधि\nपोड़म चिकन बनाने की प्रक्रिया बेहद दिलचस्प और सादगी भरी है। सबसे पहले चिकन के टुकड़ों को बुनियादी मसालों के साथ मैरिनेट किया जाता है। इसके बाद इन टुकड़ों को प्राकृतिक साल के पत्तों में अच्छी तरह लपेटा जाता है। पत्तों में बंधे चिकन को फिर लकड़ी की धीमी आंच पर सेका जाता है। लकड़ी की आग और साल के पत्तों के प्राकृतिक गुणों के कारण यह चिकन करीब 15 मिनट में पककर पूरी तरह तैयार हो जाता है। पत्तों के भीतर अपनी ही भाप और रस में पकने से इसका मांस बेहद रसीला और खुशबूदार बन जाता है।\n\nस्वाद, सेहत और परोसने का पारंपरिक तरीका\nतैयार होने के बाद इस गरमा-गरम पोड़म चिकन को ताजे कटे प्याज और तीखी हरी चटनी के साथ ग्राहकों को परोसा जाता है। साल के पत्तों की सोंधी सुगंध और लकड़ी के धुएं का हल्का अहसास इसके स्वाद को साधारण चिकन करी या फ्राइड चिकन से बिल्कुल जुदा बना देता है। इसके अलावा, सेहत के लिहाज से भी यह एक बेहतर विकल्प साबित होता है। चिकन प्रोटीन का एक बढ़िया स्रोत माना जाता है, लेकिन उसकी पौष्टिकता इस बात से तय होती है कि उसे कैसे पकाया गया है। चूंकि इसमें भारी तेल और तेज मसालों का इस्तेमाल नहीं होता, इसलिए लोग बिना किसी भारीपन के इसके स्वाद का आनंद ले पाते हैं।\n\nबजट के अनुकूल दाम और बढ़ती लोकप्रियता\nइस स्वादिष्ट जनजातीय पकवान की एक और बड़ी वजह इसका किफायती होना है। ट्राइबल रसोई में महज 50 रुपये के दाम पर चिकन के 10 से 12 पीस परोसे जाते हैं। इतने कम खर्च में पौष्टिक और अनोखा चिकन मिलना छात्रों और बजट में खाने के शौकीनों के लिए एक बेहतरीन विकल्प बन गया है। शाम होते ही बिष्टुपुर की खाओ गली में लगने वाली भीड़ इस बात का सबूत है कि पारंपरिक और सादा खानपान आज भी लोगों की पहली पसंद बन सकता है।\n\nइसका आप पर असर\nकम तेल और पारंपरिक तरीके से तैयार मांसाहारी भोजन की तलाश करने वाले लोगों के लिए यह एक किफायती और पौष्टिक विकल्प बनकर उभरा है।\n\n• जमशेदपुर में: बिष्टुपुर की खाओ गली में शाम 6 बजे जाकर भोजन प्रेमी पारंपरिक तरीके से पके चिकन का स्वाद ले सकते हैं। यहां महज 50 रुपये में 10 से 12 पीस चिकन प्याज और हरी चटनी के साथ उपलब्ध कराया जा रहा है।\n• मांसाहारी खानपान के शौकीनों के लिए: अधिक तेल और गरिष्ठ मसालों वाले चिकन के मुकाबले यह साल के पत्तों में लकड़ी की आंच पर 15 मिनट में पकने वाला एक स्वास्थ्यवर्धक विकल्प देता है। इससे कम बजट में भी प्राकृतिक स्वाद और प्रोटीन से भरपूर आहार मिल जाता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह पारंपरिक व्यंजन आधुनिक तली-भुनी चीजों से हटकर अपनी शुद्ध देसी पाक कला और बेहद कम कीमत के तालमेल की वजह से लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है।\n\n• पारंपरिक तैयारी की विधि: चिकन को साल के पत्तों में लपेटकर सीधे लकड़ी की धीमी आंच पर करीब 15 मिनट तक पकाया जाता है। पत्तों और लकड़ी की सोंधी महक चिकन के स्वाद को अनोखा बना देती है।\n• तेल और मसालों का न्यूनतम उपयोग: आम चिकन डिशेज के विपरीत इसमें ज्यादा तेल या भारी मसालों का इस्तेमाल नहीं होता। चिकन में मौजूद प्राकृतिक प्रोटीन और सादगी भरा स्वाद स्वास्थ्य के प्रति जागरूक ग्राहकों को पसंद आ रहा है।\n• किफायती स्ट्रीट फूड मॉडल: विशाल हांसदा की ट्राइबल रसोई में मात्र 50 रुपये में 10 से 12 पीस चिकन परोसा जाता है। सस्ता और सुलभ होने के कारण यह बिष्टुपुर के स्थानीय लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हुआ।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. पोड़म चिकन जमशेदपुर में कहां मिलता है?\nयह जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित खाओ गली में ट्राइबल रसोई नाम के स्टॉल पर मिलता है।\n\n2. ट्राइबल रसोई का संचालन कौन करता है?\nइस स्टॉल का संचालन विशाल हांसदा करते हैं।\n\n3. पोड़म चिकन की एक प्लेट की कीमत कितनी है और उसमें कितने पीस होते हैं?\nइसकी कीमत 50 रुपये है, जिसमें चिकन के 10 से 12 पीस मिलते हैं।\n\n4. पोड़म चिकन को किस तरह पकाया जाता है?\nचिकन को मैरिनेट करने के बाद साल के पत्तों में लपेटा जाता है और लकड़ी की आंच पर लगभग 15 मिनट तक पकाया जाता है।\n\n5. पोड़म चिकन को किन चीजों के साथ परोसा जाता है?\nइसे कटे हुए प्याज और तीखी हरी चटनी के साथ परोसा जाता है।\n\n6. इस स्टॉल पर जाने का सही समय क्या है?\nलोग बिष्टुपुर की खाओ गली में शाम 6 बजे से इस पोड़म चिकन का आनंद ले सकते हैं।",
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  "category": "जीवनशैली",
  "publishedAt": "2026-11-03",
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