# झारखंड के जंगलों में मिला अनोखा पौधा, छूते ही पत्तियां सिकुड़ जाती हैं, पेट और स्किन की बीमारियों में माना जाता है रामबाण

> रांची के आसपास के जंगलों में पाए जाने वाले छुईमुई पौधे की पत्तियां छूते ही मुरझा जाती हैं और फिर खुद खिल जाती हैं, स्थानीय लोग इसे डायरिया, पेट दर्द और स्किन की समस्याओं के इलाज के लिए भी इस्तेमाल करते हैं।

**Type:** article · **Category:** जीवनशैली · **Published:** 2026-07-03 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/lifestyle/jharkhand-ke-jngalon-men-mila-anokha-paudha-chhute-hi-pattiyan-sikura-jati-hain-peta-aura-skina-ki-bimariyon-men-mana-jata-hai-ram-4288 · **Language:** Hindi
**Tags:** छुईमुई पौधा, रांची, झारखंड, खूंटी के जंगल, घरेलू नुस्खे, औषधीय पौधा

झारखंड की राजधानी रांची के आसपास के जंगलों में एक ऐसा पौधा बड़ी तादाद में पाया जाता है, जिसे छूते ही यह अपना रूप बदल लेता है। इस पौधे को छुईमुई के नाम से जाना जाता है और स्थानीय लोग इसे औषधीय गुणों से भरपूर मानते हैं। कहा जाता है कि इसकी पत्तियां डायरिया जैसी पेट की गंभीर समस्या को भी ठीक करने में मदद करती हैं।

## छूते ही मुरझा जाती हैं पत्तियां, फिर खुद खिल जाती हैं
इस पौधे की सबसे बड़ी खासियत यह है कि जैसे ही कोई इसकी पत्ती पर हाथ रखता है, वह तुरंत मुरझाकर सिकुड़ जाती है। कुछ देर बाद यही पत्ती अपने आप फिर से खिल जाती है और पहले जैसी दिखने लगती है। इसी वजह से स्थानीय लोग इसे जादुई पौधा भी कहते हैं। रांची के रहने वाले सुजीत बताते हैं कि गांव के लोग अक्सर इस पौधे के साथ खेलते हैं। बाहर से आने वाले कई लोग खास तौर पर इसी पौधे को देखने के लिए यहां पहुंचते हैं, इसे छूकर इसका मुरझाना और फिर खिलना देखकर आनंद लेते हैं और इसका वीडियो भी बनाते हैं।

## पेट दर्द और डायरिया में काढ़े का इस्तेमाल
सुजीत के मुताबिक, यह पौधा घाव जल्दी भरने में मदद करता है और पेट से जुड़ी लगभग हर तकलीफ के लिए इसे रामबाण माना जाता है। गांव वाले इस पौधे की पत्तियां तोड़कर इसका काढ़ा बनाते हैं। उनका कहना है कि अगर किसी को डायरिया है, पेट में दर्द है या किसी भी तरह की गैस और अपच की शिकायत है, तो सिर्फ दो चम्मच काढ़ा पी लेने से यह दिक्कतें अपने आप ठीक होने लगती हैं।

## स्किन की समस्याओं में भी माना जाता है असरदार
सुजीत यह भी बताते हैं कि त्वचा पर होने वाले दाग और खुजली जैसी समस्याओं के इलाज में भी यह पौधा कारगर साबित होता है। इसके लिए पौधे की पत्तियों का पेस्ट तैयार किया जाता है और जहां स्किन में दिक्कत होती है, वहां इसे रगड़ा जाता है। दो से चार बार ऐसा करने पर चर्म रोग से जुड़ी समस्याएं धीरे-धीरे कम होने लगती हैं। यही वजह है कि इस पौधे को स्थानीय स्तर पर एक तरह की औषधि के रूप में देखा जाता है।

## खूंटी के जंगलों में मिलता है यह पौधा, बना आकर्षण का केंद्र
सुजीत के अनुसार, यह पौधा रांची के आसपास खूंटी के जंगलों में पाया जाता है और इलाके में आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। कई बार लोग सिर्फ इसी पौधे को देखने के लिए दूर-दूर से यहां आते हैं और स्थानीय लोगों से पूछते हैं कि छुईमुई का पौधा कहां मिलेगा। इसके अलावा गांव के लोग इस पौधे का इस्तेमाल जैविक खाद बनाने में भी करते हैं। यानी एक ही पौधे से जुड़े फायदे कई हैं, यही वजह है कि यह इलाके में खास पहचान बना चुका है।

## इसका आप पर असर
यह खबर एक स्थानीय लोक-मान्यता और पारंपरिक घरेलू नुस्खे से जुड़ी है, इसलिए इसका असर सीमित लेकिन दिलचस्प है।

- **भारत में:** घरेलू नुस्खों और जड़ी-बूटियों में दिलचस्पी रखने वाले पाठकों के लिए यह जानकारी दिलचस्प हो सकती है कि आम जंगली पौधों को स्थानीय समुदाय किस तरह पारंपरिक इलाज में इस्तेमाल करते हैं।
- **रांची, झारखंड में:** खूंटी के जंगलों में यह पौधा देखने के लिए बाहर से आने वालों की दिलचस्पी बढ़ सकती है, जिससे इलाके में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ सकती है।

## सवाल-जवाब

### 1. छुईमुई पौधा कहां पाया जाता है?
यह पौधा रांची के आसपास खूंटी के जंगलों में पाया जाता है।

### 2. इस पौधे को छूने पर क्या होता है?
इसकी पत्तियां छूते ही तुरंत मुरझाकर सिकुड़ जाती हैं और कुछ देर बाद अपने आप फिर से खिल जाती हैं।

### 3. लोग इसे जादुई पौधा क्यों कहते हैं?
क्योंकि छूते ही इसकी पत्तियां मुरझा जाती हैं और फिर खुद ब खुद पहले जैसी हो जाती हैं, इसी वजह से स्थानीय लोग इसे जादुई पौधा कहते हैं।

### 4. पेट की समस्याओं के लिए इसका इस्तेमाल कैसे किया जाता है?
पत्तियों को तोड़कर काढ़ा बनाया जाता है और डायरिया, पेट दर्द, गैस या अपच होने पर दो चम्मच काढ़ा पिया जाता है।

### 5. स्किन की समस्याओं के लिए इसका इस्तेमाल कैसे होता है?
पत्तियों का पेस्ट बनाकर प्रभावित जगह पर रगड़ा जाता है, दो से चार बार ऐसा करने पर त्वचा की समस्याएं धीरे-धीरे कम होने लगती हैं।

### 6. इस पौधे के बारे में जानकारी किसने दी?
रांची के स्थानीय निवासी सुजीत ने इस पौधे के बारे में विस्तार से बताया।

### 7. स्थानीय लोग इस पौधे का और क्या इस्तेमाल करते हैं?
स्थानीय लोग इस पौधे का इस्तेमाल जैविक खाद बनाने में भी करते हैं।

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