कमरों में रोशनी और ताजी हवा की कमी से परेशान हैं तो विंडो डिजाइनिंग में अपनाएं ये अहम उपाय मकान निर्माण या मरम्मत के दौरान खिड़कियों की सही दिशा, संतुलित आकार और क्रॉस वेंटिलेशन पर ध्यान देकर घर को दिनभर चमकदार और हवादार रखा जा सकता है। मकान की बनावट में प्राकृतिक उजाला और ताजी हवा का निर्बाध प्रवाह न केवल रहने की जगह को आकर्षक और खुला स्वरूप देता है, बल्कि पूरे माहौल को सुखद भी बनाए रखता है। रिहाइश तैयार करते वक्त कई बार खिड़कियों की तादाद, उनकी दिशा और फैलाव को अनदेखा कर दिया जाता है। इस अनदेखी का सीधा नतीजा यह होता है कि दोपहर के वक्त भी कमरों में स्याह अंधेरा छाया रहता है और भारीपन या घुटन की स्थिति बनी रहती है। सही योजना के साथ विंडो प्लानिंग की जाए, तो बगैर बिजली की रोशनी जलाए भी अंदरूनी हिस्सों को रोशन रखा जा सकता है। नए निर्माण अथवा पुराने ढांचे के नवीनीकरण के दौरान कुछ व्यावहारिक बदलाव कर कमरे के वातावरण को बदला जा सकता है। दिशा और स्थान के सटीक चयन से बढ़ेगा प्राकृतिक उजाला आर्किटेक्ट अखिलेश कुमार मिश्र के अनुसार, खिड़की तैयार कराते वक्त केवल उनकी गिनती बढ़ा देना ही काफी नहीं होता, बल्कि उनकी दिशा और सही स्थान का निर्धारण सबसे प्राथमिक कदम है। जिन कमरों में दिनभर निरंतर रोशनी और वायु प्रवाह की दरकार हो, वहां खिड़कियों का खाका पहले से तय करना चाहिए। खिड़कियों की अवस्थिति ऐसी दीवार पर होनी चाहिए जहां से सूर्य का प्रकाश कमरे के हर कोने तक पहुंच सके। इसके अलावा, कमरे की केवल एक ही दीवार पर खिड़की सीमित करने के बजाय अलग-अलग दिशाओं में खुलने वाले झरोखे तैयार करने चाहिए। अलग-अलग कोणों पर खिड़कियां रखने से कमरे के भीतर हवा का ठहराव खत्म होता है और भारीपन दूर होता है। कमरे के उपयोग और क्षेत्रफल के अनुरूप तय करें खिड़की का आकार खिड़की का फैलाव कमरे के अनुपात के ठीक उलट होना कई दिक्कतें खड़ी करता है। यदि खिड़की बेहद संकरी या छोटी बना दी जाए, तो रोशनी और बाहरी हवा भीतर आने का पर्याप्त मार्ग नहीं तलाश पाती। इसके विपरीत, आवश्यकता से अधिक बड़ा शीशे का क्षेत्र धूप के साथ चकाचौंध और अत्यधिक ताप को अंदर ले आता है। यही वजह है कि कमरे के क्षेत्रफल और उसके नियमित उपयोग के मुताबिक खिड़की का सटीक आकार चुनना चाहिए। शयनकक्ष, बैठक और रसोईघर की जरूरतें एक-दूसरे से काफी भिन्न होती हैं। बड़ी खिड़कियों के ऊपर छज्जा अथवा शेड लगाने से चुभती धूप को नियंत्रित करने में आसानी रहती है। खिड़की के ऊपरी हिस्से में वेंटिलेटर की व्यवस्था भीतरी गर्म हवा को बाहर धकेलने में काफी मददगार साबित होती है। क्रॉस वेंटिलेशन और निकास व्यवस्था से दूर होगी उमस घर के हर हिस्से को तरोताजा बनाए रखने के लिए क्रॉस वेंटिलेशन की पद्धति सबसे कारगर मानी जाती है। इसका सीधा सिद्धांत यह है कि बाहर की ताजी हवा कमरे में एक तरफ से दाखिल हो और दूसरी तरफ से पुरानी या गर्म हवा बाहर निकल जाए। खिड़कियों और दरवाजों की आमने-सामने या तिरछी स्थिति से ऐसा मार्ग तैयार किया जा सकता है। रसोई और स्नानघर जैसे क्षेत्रों में अतिरिक्त नमी और भाप को बाहर फेंकने के लिए एग्जॉस्ट अथवा वेंटिलेशन का विशेष प्रबंध अनिवार्य रूप से होना चाहिए। यदि पुराने मकान की मरम्मत की जा रही हो, तो भी नई खिड़की या वेंटिलेशन पाइंट बनाकर हवा का यह चक्र बहाल किया जा सकता है। इससे दिन के समय अनावश्यक ट्यूबलाइट या बल्ब जलाने की निर्भरता घटती है और घर प्राकृतिक रूप से शीतल रहता है। इसका आप पर असर खिड़कियों की सही बनावट और दिशा तय करने से घर के भीतर बिजली का अनावश्यक खर्च घटता है और रहने का वातावरण स्वास्थ्यवर्धक बनता है। • बिजली बिल में बचत: दिन के समय कमरों में पर्याप्त रोशनी आने से बल्ब और ट्यूबलाइट जलाने की जरूरत खत्म हो जाती है। इससे हर महीने बिजली की खपत में उल्लेखनीय कमी आती है। • घर के तापमान पर असर: खिड़कियों पर छज्जा और शेड लगाने से दोपहर की तीखी धूप और अंदरूनी गर्मी नियंत्रित रहती है। परिणामस्वरूप पंखे और कूलिंग उपकरणों पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता। • आंतरिक वायु गुणवत्ता: क्रॉस वेंटिलेशन अपनाने से कमरों के भीतर नमी, उमस और बासी हवा जमा नहीं हो पाती। ताजी हवा के निरंतर प्रवाह से सांस लेने में ताजगी महसूस होती है। • रेनोवेशन में बदलाव: पुराने घरों में भी अतिरिक्त वेंटिलेटर या विपरीत दीवार पर खिड़की खोलकर घुटन दूर की जा सकती है। इससे भारी तोड़फोड़ के बिना भी कमरा खुला-खुला लगने लगता है। ऐसा क्यों हुआ कमरों में अंधेरा और घुटन की समस्या निर्माण के दौरान दिशा, अनुपात और वायु प्रवाह के बुनियादी नियमों की अनदेखी के कारण पैदा होती है। • गलत दिशा का चयन: खिड़कियों को ऐसी दीवारों पर लगा दिया जाता है जहां दिनभर सूरज की किरणें नहीं पहुंच पातीं। इसके चलते मुख्य समय में भी कमरों के भीतर अंधेरा पसरा रहता है। • अनुपातहीन आकार का होना: कमरे के बड़े क्षेत्रफल के सामने खिड़की को बहुत छोटा रख देने से रोशनी और वायु का प्रवेश सीमित हो जाता है। बहुत बड़ा ग्लास एरिया बिना शेड के लगाने से तेज गर्मी पैदा होती है। • क्रॉस वेंटिलेशन का अभाव: केवल एक तरफ खिड़की रखने से हवा के आने और बाहर निकलने का चक्र पूरा नहीं हो पाता। निकासी का रास्ता न मिलने पर गर्म हवा अंदर ही कैद होकर घुटन पैदा करती है। सवाल-जवाब 1. दिन के समय कमरों में अंधेरा और घुटन रहने का मुख्य कारण क्या है? मकान बनाते समय खिड़कियों की सही दिशा, कमरे के अनुरूप उनका आकार और हवा के आने-जाने के मार्ग की सही योजना न बनाना इसका प्रमुख कारण है। 2. कमरे में खिड़की किस दिशा और स्थान पर लगानी चाहिए? खिड़की ऐसी जगह होनी चाहिए जहां से दिनभर पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी आ सके, और संभव हो तो एक ही दीवार के बजाय अलग-अलग दिशाओं वाली दीवारों पर खिड़कियां रखें। 3. क्या बहुत बड़ी खिड़की बनवाना फायदेमंद होता है? जरूरत से ज्यादा बड़ा शीशे का क्षेत्र कमरे में तीखी धूप, चकाचौंध और गर्मी बढ़ा सकता है, इसलिए खिड़की का आकार कमरे के अनुसार होना चाहिए और साथ में छज्जा जरूरी है। 4. कमरे में क्रॉस वेंटिलेशन कैसे तैयार किया जा सकता है? खिड़कियों और दरवाजों की स्थिति इस तरह तय करें कि हवा एक तरफ से कमरे में दाखिल हो और विपरीत दिशा से बाहर निकल सके। 5. किचन और बाथरूम में हवा के लिए क्या प्रबंध करना चाहिए? रसोई और स्नानघर में गर्म हवा और भाप को बाहर निकालने के लिए एग्जॉस्ट अथवा उचित वेंटिलेशन की व्यवस्था अनिवार्य रूप से रखनी चाहिए। https://trendkia.com/lifestyle/kamaron-men-roshani-aura-taji-hava-ki-kami-se-pareshana-hain-to-vindo-dijaininga-men-apanaen-ye-ahama-upaya-42220 TrendKia — Har trend, sabse pehle.