# कपड़ों से आ रही है बदबू या फीकी पड़ रही चमक? वॉशिंग मशीन चलाते वक्त न करें ये 4 आम गलतियां

> वॉशिंग मशीन में धुलने के बाद भी अगर कपड़ों में दाग या दुर्गंध बनी रहती है, तो वजह मशीन नहीं आपकी गलतियां हो सकती हैं। जानें डिटर्जेंट, लोड और सफाई से जुड़ी सही तकनीक।

**Type:** article · **Category:** जीवनशैली · **Published:** 2026-08-27 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/lifestyle/kaparon-se-a-rahi-hai-badabu-ya-phiki-para-rahi-chamaka-voshinga-mashina-chalate-vakta-na-karen-ye-4-ama-galatiyan-23149 · **Language:** Hindi
**Tags:** वॉशिंग मशीन टिप्स, कपड़ों की सफाई, होम हैक्स, डिटर्जेंट की मात्रा, मशीन मेंटेनेंस

आज के भागदौड़ भरे दौर में वॉशिंग मशीन हर घर का एक अहम हिस्सा बन चुकी है। यह कपड़ों की धुलाई को आसान बनाने के साथ-साथ समय और मेहनत दोनों की बड़ी बचत करती है। हालांकि, कई बार देखने में आता है कि मशीन में अच्छी तरह धोने के बाद भी कपड़ों से अजीब सी दुर्गंध आती रहती है, जिद्दी दाग पूरी तरह साफ नहीं होते या फिर कपड़ों का रंग फीका और बेजान दिखने लगता है। ऐसी स्थिति में ज्यादातर लोग सीधे वॉशिंग मशीन की गुणवत्ता पर सवाल उठाने लगते हैं। लेकिन असलियत यह है कि खराबी मशीन में नहीं, बल्कि उसे इस्तेमाल करने के हमारे गलत तरीकों में छिपी होती है। अगर आप कपड़ों की ताजगी और चमक बरकरार रखना चाहते हैं, तो रोजमर्रा की कुछ बुनियादी आदतों में बदलाव करना बेहद जरूरी है।

## ओवरलोडिंग से बचें: क्षमता से ज्यादा कपड़े डालना पड़ता है भारी
कपड़े धोते समय लोग अक्सर एक ही बार में ज्यादा से ज्यादा कपड़े ड्रम में ठूस देते हैं ताकि समय बचाया जा सके। लेकिन यह तरीका सफाई के लिहाज से सबसे ज्यादा नुकसानदेह साबित होता है। जब वॉशिंग मशीन में कपड़ों की मात्रा जरूरत से अधिक हो जाती है, तो पानी और सर्फ को कपड़े के रेशों के बीच सही ढंग से घूमने और फैलने की जगह नहीं मिल पाती। इसके परिणामस्वरूप कपड़ों में फंसी गंदगी और पसीने के दाग पूरी तरह नहीं निकल पाते। इतना ही नहीं, ओवरलोडिंग के कारण मशीन की मोटर पर अतिरिक्त दबाव बनता है। इससे न केवल कपड़ों की सफाई प्रभावित होती है, बल्कि वॉशिंग मशीन की कार्यक्षमता और उसकी कुल उम्र पर भी बहुत बुरा असर पड़ता है।

## डिटर्जेंट की सही मात्रा: ज्यादा सर्फ का इस्तेमाल बिगाड़ सकता है कपड़ों की गुणवत्ता
अक्सर लोगों के मन में यह भ्रांति रहती है कि जितना अधिक डिटर्जेंट डाला जाएगा, कपड़े उतने ही अधिक चमकदार और साफ धुलेंगे। वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत है। अत्यधिक सर्फ का प्रयोग करने से कपड़ों के भीतर डिटर्जेंट के अवशेष या कण जमा रह जाते हैं। सूखने के बाद ये अवशेष कपड़ों को बेहद सख्त और खुरदरा बना देते हैं, जिससे कपड़े पहनने पर कुछ लोगों को त्वचा में जलन या एलर्जी की शिकायत भी होने लगती है। इसलिए हमेशा कपड़ों की कुल संख्या और उनकी गंदगी के स्तर के हिसाब से ही डिटर्जेंट की मात्रा तय करनी चाहिए। सामान्य तौर पर एक बार के वॉश साइकिल के लिए केवल 1 से 2 चम्मच डिटर्जेंट ही पूरी तरह पर्याप्त माना जाता है।

## नियमित सफाई: ड्रम, फिल्टर और रबर सील की देखभाल है बेहद जरूरी
केवल कपड़े धोना ही काफी नहीं है, बल्कि जिस वॉशिंग मशीन में कपड़े धोए जा रहे हैं उसकी स्वच्छता भी उतनी ही मायने रखती है। लंबे समय तक लगातार इस्तेमाल के बाद मशीन के ड्रम, डिटर्जेंट ट्रे, रबर सील और फिल्टर वाले हिस्सों में धूल-मिट्टी, फफूंदी, लिंट और साबुन के अवशेष धीरे-धीरे जमने लगते हैं। यही जमाव आगे चलकर बैक्टीरिया और फफूंद का रूप ले लेता है, जिसकी वजह से धुले हुए साफ कपड़ों से भी सीलन और दुर्गंध आने लगती है। इस परेशानी से बचने के लिए महीने में कम से कम एक बार अपनी वॉशिंग मशीन की अंदरूनी हिस्से और उसके फिल्टर की गहन सफाई अवश्य करनी चाहिए।

## कपड़े के ताने-बाने के अनुसार चुनें सही वॉश मोड
अलग-अलग फैब्रिक को अलग तरह की देखभाल की जरूरत होती है। वॉशिंग मशीन में कॉटन, डेनिम, सिंथेटिक, सिल्क और ऊनी कपड़ों के लिए अलग-अलग वॉश मोड दिए गए होते हैं। नाजुक कपड़ों जैसे सिल्क या वूलन के लिए जेंटल साइकिल का चुनाव करना चाहिए, जबकि बेहद गंदे कपड़ों के लिए सही और गहन वॉश मोड चुनना बेहतर रहता है। सही मोड का चयन करने से कपड़ों के ताने-बाने को कोई नुकसान नहीं पहुंचता और कपड़ों की चमक सालों-साल बनी रहती है। कपड़ों को हमेशा साफ और ताजा बनाए रखने के लिए सिर्फ एक बेहतरीन मशीन होना ही काफी नहीं है, बल्कि उसे सही तकनीक के साथ इस्तेमाल करना भी बेहद आवश्यक है।

## इसका आप पर असर
सही वॉशिंग तकनीक अपनाने से आपके कपड़ों का जीवन लंबा होगा और वॉशिंग मशीन की मरम्मत का खर्च बचेगा।

- **कपड़ों की लाइफ:** गलतियों को सुधारने से कपड़ों का रंग और फैब्रिक सालों तक नया जैसा बना रहता है। इससे आपको बार-बार नए कपड़े खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
- **डिटर्जेंट की बचत:** हर वॉश में सिर्फ 1 से 2 चम्मच सर्फ का इस्तेमाल करने से महीने का बजट सुधरेगा। ज्यादा सर्फ न खर्च होने से आपकी बचत में इजाफा होगा।
- **त्वचा की सुरक्षा:** कपड़ों में केमिकल और डिटर्जेंट के अवशेष न रहने से एलर्जी का खतरा खत्म होता है। संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को खुजली और जलन से राहत मिलेगी।
- **मशीन की लाइफ:** ड्रम को ओवरलोड न करने से मोटर पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ेगा। इससे वॉशिंग मशीन सालों-साल बिना किसी बड़े मेंटेनेंस के सही चलेगी।
- **दुर्गंध से मुक्ति:** महीने में एक बार मशीन और उसके फिल्टर की सफाई करने से कपड़ों से सीलन की बदबू नहीं आएगी। आपके कपड़े हमेशा ताजे और खुशबूदार बने रहेंगे।

## सवाल-जवाब

### 1. कपड़ों की अच्छी सफाई के लिए कितना डिटर्जेंट इस्तेमाल करना चाहिए?
एक बार की धुलाई में कपड़ों की संख्या और गंदगी के हिसाब से 1 से 2 चम्मच डिटर्जेंट ही काफी होता है।

### 2. वॉशिंग मशीन और उसके फिल्टर की सफाई कितनी बार करनी चाहिए?
कपड़ों में बदबू और फफूंदी से बचने के लिए मशीन और उसके फिल्टर की सफाई महीने में कम से कम एक बार जरूर करनी चाहिए।

### 3. वॉशिंग मशीन को ओवरलोड करने से क्या नुकसान होता है?
ओवरलोडिंग से कपड़े ठीक से साफ नहीं होते और मशीन की मोटर पर दबाव पड़ने से उसकी कार्यक्षमता और उम्र घटती है।

### 4. कपड़ों के ताने-बाने को खराब होने से कैसे बचाएं?
कॉटन, सिल्क, डेनिम और ऊनी कपड़ों के लिए मशीन में दिए गए सही वॉश मोड या जेंटल साइकिल का चुनाव करें।

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