# कतरनों से तराशा फैशन और तंग गलियों को बनाया रैंप, भोपाल की प्रीति प्रजापति ने सोशल मीडिया पर रचा इतिहास

> भोपाल की प्रीति प्रजापति और उनकी बहन ने दर्जी की दुकानों की बची कतरनों से डिजाइनर कपड़े बनाकर कच्ची गलियों में कैटवॉक किया, जिसके वीडियो अब इंटरनेट पर धूम मचा रहे हैं।

**Type:** article · **Category:** जीवनशैली · **Published:** 2026-10-12 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/lifestyle/kataranon-se-tarasha-phaishana-aura-tnga-galiyon-ko-banaya-rainpa-bhopal-ki-preeti-prajapati-ne-soshala-midiya-para-racha-itihasa-46975 · **Language:** Hindi
**Tags:** प्रीति प्रजापति, भोपाल, स्ट्रीट मॉडल, फैशन, सोशल मीडिया, वायरल वीडियो

फैशन की जब भी चर्चा होती है, तो लोगों के जेहन में अक्सर मिलान, पेरिस या न्यूयॉर्क के चकाचौंध से भरे रनवे की तस्वीरें उभरती हैं। लाखों रुपये के डिजाइनर परिधान, बड़े-बड़े मेकअप आर्टिस्ट और बैकस्टेज पर काम करने वाले दर्जनों सहयोगियों के बिना मॉडलिंग की कल्पना करना भी आम तौर पर नामुमकिन माना जाता है। मगर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की रहने वाली प्रीति प्रजापति और उनकी बहन ने इस स्थापित धारणा को पूरी तरह से उलट दिया है। सीमित संसाधनों और साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि के बावजूद इन दोनों बहनों ने जो कर दिखाया है, उसने इंटरनेट पर लाखों लोगों का दिल जीत लिया है। एक बहन दर्जी की फेंकी गई कतरनों को सिलकर आकर्षक परिधान तैयार करती है, तो दूसरी बहन उन्हीं कपड़ों को पहनकर अपनी बस्ती की संकरी गलियों में पूरे आत्मविश्वास के साथ कैटवॉक करती है।

## सीमित साधनों के बीच बड़े सपनों की शुरुआत
भोपाल की एक साधारण बस्ती में रहने वाली प्रीति प्रजापति एक दिहाड़ी मिस्त्री की बेटी हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि मॉडलिंग या फैशन डिजाइनिंग जैसे महंगे शौक पूरे किए जा सकें। किसी बड़े फैशन संस्थान से डिग्री लेना या पेशेवर पोर्टफोलियो बनवाना उनके लिए एक दूर का सपना था, क्योंकि इस क्षेत्र में कदम रखने के लिए आमतौर पर लाखों रुपये का बजट और मजबूत संपर्कों की दरकार होती है। इसके बावजूद प्रीति के मन में बचपन से ही मॉडलिंग और कैटवॉक का गहरा जुनून था। वे टीवी और इंटरनेट पर मॉडल्स को देखकर हमेशा सोचती थीं कि क्या किसी दिन उन्हें भी ऐसा मंच मिल सकेगा। जब अवसरों के दरवाजे बंद दिखे, तो उन्होंने किस्मत के भरोसे बैठने के बजाय खुद अपना रास्ता तराशने का साहसिक फैसला किया।

## कतरनों और पुरानी साड़ियों से बुना गया अनोखा अंदाज
प्रीति के इस अनोखे सफर में सबसे मजबूत सहारा बनीं उनकी बहन, जिन्हें सिलाई और कढ़ाई का हुनर बखूबी आता था। चूंकि महंगे ब्रांडेड कपड़े खरीदने की आर्थिक हैसियत नहीं थी, इसलिए दोनों बहनों ने बेहद रचनात्मक तरीका खोज निकाला। उन्होंने स्थानीय टेलरिंग दुकानों से फेंके जाने वाले कपड़ों के छोटे टुकड़े यानी कतरनें जुटानी शुरू कीं। इसके साथ ही घर में रखी मां की पुरानी साड़ियों और अप्रयुक्त कपड़ों को भी सहेजकर काम में लिया गया। प्रीति की बहन ने अपनी सिलाई मशीन पर इन विभिन्न रंगों और डिजाइनों वाली कतरनों को इस खूबसूरती और सफाई से जोड़ा कि वे आधुनिक डिजाइनर वियर जैसे दिखने लगे। जो कतरनें कूड़े में फेंक दी जातीं, उन्हें दोनों बहनों ने अपनी कलात्मक सोच से शानदार गाउन, स्कर्ट और स्टाइलिश परिधानों में तब्दील कर दिया। इन कपड़ों को देखकर कोई भी पहली नजर में यह नहीं कह सकता कि इन्हें घर में बेकार पड़े टुकड़ों से बनाया गया है।

## बस्ती की उबड़-खाबड़ गलियां बन गईं ग्लोबल रनवे
आकर्षक परिधान तैयार होने के बाद सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि इनका प्रदर्शन कहां किया जाए। दोनों बहनों के पास न तो कोई प्रोफेशनल फोटो स्टूडियो था, न ही कोई फैंसी बैकड्रॉप या आधुनिक लाइटिंग का उपकरण। ऐसे में प्रीति ने किसी औपचारिक मंच का इंतजार करने के बजाय अपनी बस्ती की पथरीली, संकरी और कच्ची गलियों को ही अपना रनवे बना लिया। टूटे-फूटे मकानों, दीवारों और आम रास्ते के बीच जब प्रीति ने पूरे आत्मविश्वास, सधे हुए कदमों और बेहतरीन बॉडी लैंग्वेज के साथ वॉक करना शुरू किया, तो देखने वाले दंग रह गए। उनके चेहरे पर किसी महंगे मंच की कमी का कोई मलाल नहीं दिखता, बल्कि उनकी आंखों में अपने हुनर और मेहनत पर अटूट भरोसा साफ झलकता है।

## सोशल मीडिया पर वायरल हुई दोनों बहनों की जुगलबंदी
इन अनूठे कैटवॉक वीडियो को साधारण स्मार्टफोन से रिकॉर्ड कर जब इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया मंचों पर साझा किया गया, तो वे देखते ही देखते वायरल हो गए। इंस्टाग्राम रील्स और यूट्यूब शॉर्ट्स पर प्रीति के वीडियो को करोड़ों बार देखा जा चुका है। आम दर्शकों से लेकर फैशन जगत के जानकारों और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक ने उनकी प्रतिभा और रचनात्मकता की जमकर सराहना की है। लोगों को सबसे ज्यादा प्रभावित प्रीति का आत्मविश्वास और उनकी बहन की बारीकी से की गई सिलाई करती है। आज इंटरनेट पर लाखों लोग उन्हें फॉलो करते हैं और उनकी हर नई रील का बेसब्री से इंतजार करते हैं।

## संसाधनों के अभाव पर हौसले की शानदार विजय
प्रीति प्रजापति की महत्वाकांक्षा सिर्फ स्थानीय स्तर या सोशल मीडिया तक सीमित रहने की नहीं है। वे अंतरराष्ट्रीय फैशन मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व करने का सपना देख रही हैं। उनकी यात्रा साबित करती है कि आगे बढ़ने के लिए हमेशा बड़े अवसरों या बहुत सारे पैसों की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि काम शुरू करने की लगन हो तो अवसर खुद-ब-खुद बनने लगते हैं। भोपाल की इन दो बहनों ने यह दिखा दिया है कि यदि इंसान का इरादा पक्का हो, तो बस्ती की धूल भरी सड़क भी दुनिया के किसी भी भव्य रैंप से कम साबित नहीं होती।

## इसका आप पर असर
यह कहानी दर्शाती है कि रचनात्मकता और डिजिटल मंचों का सही इस्तेमाल करके सीमित साधनों में भी अपनी प्रतिभा को देश-दुनिया तक पहुंचाया जा सकता है।

- **भारत में:** यह पहल उन लाखों युवाओं को राह दिखाती है जो आर्थिक तंगी के चलते अपने सपनों को छोड़ देते हैं। सोशल मीडिया अब महंगे स्टूडियो के बिना भी हुनर दिखाने का एक मजबूत और सुलभ माध्यम बन चुका है।
- **भोपाल में:** स्थानीय प्रतिभाओं और छोटे शहरों के कलाकारों को अपने परिवेश पर गर्व करने की नई प्रेरणा मिली है। इससे यह संदेश गया है कि पहचान बनाने के लिए महानगरों में जाना अनिवार्य नहीं है।
- **फैशन प्रेमियों के लिए:** स्क्रैप कपड़ों और पुरानी साड़ियों का यह प्रयोग दिखाता है कि सस्टेनेबल फैशन को कम खर्च में भी अपनाया जा सकता है। महंगे ब्रांड्स पर अत्यधिक निर्भर रहने के बजाय घरेलू कपड़ों की रीसाइक्लिंग से नए ट्रेंड्स बनाए जा सकते हैं।
- **कंटेंट क्रिएटर्स के लिए:** महंगी तकनीक या कैमरों के बजाय मौलिक सोच और लगन पर ध्यान केंद्रित करने की सीख मिलती है। जो भी क्रिएटर शुरुआत करने से हिचक रहे हैं, वे उपलब्ध साधनों से ही काम शुरू कर सकते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
यह घटनाक्रम इसलिए संभव हुआ क्योंकि दोनों बहनों ने अपनी आर्थिक सीमाओं को बाधा मानने के बजाय उन्हें एक अनूठी रचनात्मक शैली में बदल दिया। पारंपरिक मॉडलिंग जगत के महंगे रास्तों के बंद होने पर उन्होंने उपलब्ध संसाधनों से एक नया रास्ता निकाला।

- **सीमित आर्थिक संसाधन:** महंगे कपड़े और मॉडलिंग स्कूल का खर्च वहन न कर पाने की मजबूरी ने दोनों बहनों को दर्जी की बची कतरनें और पुरानी साड़ियां इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया। इस विवशता ने उनके काम को एक अनूठी सस्टेनेबल पहचान दिला दी।
- **बहन का सिलाई कौशल:** प्रीति की बहन के पास कपड़ों को आधुनिक अंदाज में सिलने का हुनर था, जिसने साधारण वेस्ट मैटेरियल को आकर्षक आउटफिट में बदल दिया। दोनों के बीच इस साझेदारी ने परियोजना को व्यावहारिक रूप दिया।
- **सोशल मीडिया की सीधी पहुंच:** बिना किसी मीडिया एजेंसी या ब्रांड के समर्थन के, स्मार्टफोन वीडियो और शॉर्ट-फॉर्म प्लेटफॉर्म्स ने उनकी कला को सीधे दर्शकों के सामने पेश किया। इस बेबाक प्रस्तुति ने तेजी से वायरल होकर उन्हें व्यापक पहचान दिलाई।

## सवाल-जवाब

### 1. प्रीति प्रजापति कौन हैं और वे क्यों चर्चा में हैं?
प्रीति प्रजापति भोपाल की रहने वाली एक स्ट्रीट मॉडल हैं, जो कपड़ों की कतरनों से बने परिधान पहनकर बस्ती की गलियों में कैटवॉक करने के कारण सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं।

### 2. प्रीति के कपड़ों को कौन तैयार करता है?
प्रीति के सभी परिधान उनकी बहन तैयार करती हैं, जो टेलर की दुकानों से बची कतरनें और पुरानी साड़ियां सिलकर स्टाइलिश आउटफिट बनाती हैं।

### 3. प्रीति के पिता क्या काम करते हैं?
प्रीति प्रजापति के पिता भोपाल में एक दिहाड़ी मिस्त्री का काम करते हैं।

### 4. प्रीति प्रजापति का भविष्य का क्या सपना है?
प्रीति का सपना केवल सोशल मीडिया तक सीमित न रहकर अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित फैशन रैंप पर वॉक करने का है।

## प्रेरणा और सबक
भोपाल की प्रीति प्रजापति और उनकी बहन का सफर सिखाता है कि बड़े सपनों को सच करने के लिए सिर्फ दृढ़ संकल्प और रचनात्मक सोच की जरूरत होती है।

- **संसाधनों की कमी को बहाना न बनाएं:** यदि आपके पास महंगे संसाधन नहीं हैं, तो उपलब्ध चीजों में ही रचनात्मक समाधान तलाशें। कतरनों से कपड़े बनाना सिखाता है कि हुनर किसी साधन का मोहताज नहीं होता।
- **परिवेश से शर्मिंदा न हों:** अपनी परिस्थितियों या पृष्ठभूमि को छुपाने के बजाय उसे अपनी पहचान की ताकत बनाएं। प्रीति ने कच्ची गली को ही अपना रनवे बनाकर यह साबित कर दिखाया।
- **पारस्परिक सहयोग की ताकत पहचानें:** जब दो लोग मिलकर एक साझा लक्ष्य पर काम करते हैं, तो मुश्किलें आसान हो जाती हैं। एक बहन की सिलाई और दूसरी के आत्मविश्वास ने मिलकर यह कमाल किया।
- **सही मौके का इंतजार करने के बजाय शुरुआत करें:** अवसर हमेशा बने-बनाए नहीं मिलते, कई बार काम शुरू करने के बाद ही रास्ते खुलते हैं। बिना किसी मंच के अपनी गली से शुरुआत करना ही सफलता की पहली सीढ़ी बना।

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