# खेतों और कीचड़ में काम से पैर गलने और फटने पर आजमाएं ये पारंपरिक घरेलू नुस्खे

> लंबे समय तक गीली मिट्टी, कीचड़ और पानी में रहने से पैरों की उंगलियों की त्वचा गलने और एड़ियां फटने की समस्या पर गांव के पारंपरिक देसी तरीके असरदार साबित होते हैं।

**Type:** article · **Category:** जीवनशैली · **Published:** 2026-09-19 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/lifestyle/kheton-aura-kichara-men-kama-se-paira-galane-aura-phatane-para-ajamaen-ye-parnparika-gharelu-nuskhe-34979 · **Language:** Hindi
**Tags:** घरेलू नुस्खे, फटी एड़ियां, पैरों की देखभाल, मधुबनी, देसी उपचार, त्वचा की देखभाल

गांवों और ग्रामीण अंचलों में खेती-किसानी करने वाले लोगों, खेतों में उतरने वाले मजदूरों और दिनभर पानी का काम करने वाली महिलाओं को अक्सर पैरों की गंभीर दिक्कतों से जूझना पड़ता है। अत्यधिक देर तक पानी और कीचड़ के संपर्क में रहने के कारण पैरों की उंगलियों के बीच की नाजुक त्वचा गलने लगती है, जिसे बोलचाल में पैर में पानी लगना भी कहा जाता है। इसके अलावा पैरों का फटना, खुरदरापन आना और एड़ियों में गहरी दरारें पड़ जाना यानी पैरों का बीमाय होना भी बेहद आम बात है। ये दरारें जब गहरी हो जाती हैं तो चलने-फिरने में तेज दर्द और जलन पैदा करती हैं।

## बिना किसी खर्च के आराम देने वाले पारंपरिक तरीके
इस तरह के दर्द और त्वचा के कटने-गलने की समस्या से निपटने के लिए महंगे इलाज या दवाओं की हर बार आवश्यकता नहीं पड़ती। पुराने समय से ग्रामीण परिवेश में बिना पैसे खर्च किए घर और आसपास मिलने वाली प्राकृतिक चीजों से इनका समाधान निकाला जाता रहा है। मधुबनी की बीना देवी के अनुसार, कुछ ऐसे पारंपरिक नुस्खे हैं जो पीढ़ियों से आजमाए जाते रहे हैं और आज भी लोगों को तुरंत सुकून पहुंचाते हैं।

## तुलसी, मेहंदी और सरसों तेल का उपयोग
ग्रामीण इलाकों में आसानी से उपलब्ध वनस्पतियां इस परेशानी में दवा की तरह काम करती हैं। अगर पैरों में पानी लग गया हो या त्वचा छिलने लगी हो, तो मेहंदी के ताजे पत्तों को पीसकर पैरों और उंगलियों के बीच लगाने से ठंडक और राहत मिलती है। इसके साथ ही तुलसी के पत्तों को बारीक पीसकर उसका लेप लगाने से भी त्वचा के घाव भरने में मदद मिलती है। फटी हुई एड़ियों और रूखेपन से राहत पाने के लिए सरसों का तेल गर्म करके दरारों पर लगाना बेहद लाभकारी माना जाता है। इसके अलावा एक पुराना लोक तरीका होली में इस्तेमाल होने वाले रंग को पानी में घोलकर पैरों पर लगाने का भी रहा है, जिसे लोग फटे पैरों पर लगाते रहे हैं।

## महावर यानी आलता का आजमाया हुआ लेप
घरों में मिलने वाला सबसे आसान और सहज उपाय महावर यानी आलता है। आमतौर पर महिलाएं श्रृंगार के रूप में इसे पैरों पर लगाती हैं, लेकिन पारंपरिक तौर पर इसे पैरों की दरारें, खुरदरापन और उंगलियों के बीच पानी लगने की तकलीफ में भी लगाया जाता है। वर्तमान समय में बाजार में फटी एड़ियों और त्वचा संक्रमण की कई दवाइयां मौजूद हैं, फिर भी ग्रामीण क्षेत्रों के लोग इन सदियों पुराने देसी उपायों पर आज भी गहरा भरोसा जताते हैं।

## इसका आप पर असर
खेतों में काम करने वालों और लगातार पानी में रहने वाले लोगों को बिना किसी अतिरिक्त खर्च के पैरों के दर्द और दरारों से राहत मिल सकती है।

- **दैनिक राहत:** यह तरीका उन लोगों के लिए तुरंत राहत देता है जिनके पैर पानी के काम से कटने लगते हैं। घरेलू चीजें तुरंत उपलब्ध होने से संक्रमण और दर्द का बढ़ना रुक जाता है।
- **आर्थिक बचत:** बाजार की महंगी क्रीम या मलहम खरीदे बिना घर में मौजूद सरसों तेल, तुलसी और मेहंदी से पैरों की देखभाल हो जाती है। शून्य लागत में समस्या का समाधान संभव होता है।
- **आसान उपलब्धता:** ग्रामीण क्षेत्रों में जहां मेडिकल स्टोर दूर होते हैं, वहां यह पारंपरिक विधि तुरंत काम आती है। घर की महिलाएं या किसान काम खत्म करने के बाद आसानी से इसे लगा सकते हैं।
- **सुरक्षित विकल्प:** प्राकृतिक पत्तों और शुद्ध तेल का प्रयोग रासायनिक दुष्प्रभावों से बचाता है। लंबे समय तक खेत में काम करने वाले नियमित तौर पर इसका उपयोग कर सकते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
लंबे समय तक पानी और गीली मिट्टी के संपर्क में रहने के कारण त्वचा की बाहरी सुरक्षात्मक परत कमजोर हो जाती है, जिससे पैरों में दरारें और सड़न पैदा होती है।

- **नमी और कीचड़ का असर:** खेतों में बुवाई, निराई या घर के धुलाई वाले कामों में पैर लगातार गीले रहते हैं। त्वचा अधिक नमी सोखकर मुलायम और कमजोर हो जाती है, जिससे उंगलियों के बीच का हिस्सा गलने लगता है।
- **त्वचा का रूखापन और दबाव:** लगातार गीले होने के बाद सूखने पर पैरों की नमी तेजी से छिन जाती है। नंगे पैर चलने और जमीन के दबाव से एड़ियों में दरारें और खुरदरापन बढ़ जाता है।
- **पारंपरिक उपचार की जड़ें:** ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाओं के सीमित होने पर पूर्वजों ने स्थानीय वनस्पति गुणों को परखा। तुलसी के जीवाणुरोधी और मेहंदी के शीतलता देने वाले गुणों के कारण यह नुस्खा चलन में आया।

## सवाल-जवाब

### 1. पैरों में पानी लगने का मुख्य कारण क्या है?
लंबे समय तक पानी और कीचड़ में काम करने से पैरों की उंगलियों के बीच की त्वचा गलने लगती है।

### 2. पैरों की दरारों पर सरसों के तेल का इस्तेमाल कैसे किया जाता है?
सरसों के तेल को हल्का गर्म करके फटी हुई एड़ियों और दरारों पर लगाने से आराम मिलता है।

### 3. मेहंदी और तुलसी के पत्ते किस प्रकार मदद करते हैं?
मेहंदी और तुलसी के ताजे पत्तों को पीसकर पैरों पर लेप लगाने से जलन और घाव में राहत मिलती है।

### 4. क्या महावर या आलता का इस्तेमाल भी पैरों की दरार में किया जाता है?
हां, पारंपरिक तौर पर पैरों के खुरदरेपन, दरार और पानी लगने की समस्या में महावर का लेप लगाया जाता है।

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