खिले-खिले और अलग दानेदार चावल पकाने के 5 आसान रसोई नुस्खे दाल, राजमा या कढ़ी के साथ अगर चावल चिपचिपे बन जाएं तो खाने का स्वाद बिगड़ जाता है। कुछ सामान्य सावधानियां बरतकर आप हर बार एकदम खिले-खिले चावल तैयार कर सकते हैं। भारतीय भोजन की थाली में चावल की मौजूदगी सबसे खास मानी जाती है। चाहे दोपहर का भोजन हो या रात का खाना, गरमा-गरम चावल के साथ दाल, राजमा, छोले या फिर तीखी रसेदार सब्जी का मेल हर किसी को पसंद आता है। कई बार पूरी मेहनत के बाद भी पके हुए चावल आपस में चिपक जाते हैं या हलवे जैसे गीले हो जाते हैं। इस तरह के चिपचिपे चावल न केवल दिखने में खराब लगते हैं बल्कि भोजन का पूरा आनंद भी बिगाड़ देते हैं। रसोई में कुछ बुनियादी बातों पर ध्यान देकर आप बेहद आसानी से ऐसे चावल बना सकते हैं जिनका हर एक दाना पूरी तरह अलग और खिला-खिला रहे। चावल को अच्छी तरह धोकर अतिरिक्त स्टार्च निकालें चावल के दानों के आपस में चिपकने का सबसे बड़ा कारण उनकी ऊपरी सतह पर मौजूद अतिरिक्त स्टार्च होता है। जब चावल को बिना धोए सीधे पकाने के लिए चढ़ा दिया जाता है, तो यह स्टार्च गर्म पानी में मिलकर चिपचिपा गाढ़ा घोल बना देता है। इसलिए पकाने की शुरुआत करने से पहले चावल को साफ पानी से कम से कम 2 से 3 बार हल्के हाथों से अवश्य धोना चाहिए। चावल को तब तक धोते रहें जब तक कि बर्तन का पानी पूरी तरह साफ न दिखाई देने लगे और उसका दूधिया या धुंधला सफेद रंग खत्म न हो जाए। यह सरल प्रक्रिया फालतू स्टार्च को बहा देती है और दानों को आपस में जुड़ने से रोकती है। पकाने से पहले 15 से 20 मिनट भिगोना है जरूरी चावल धोने के बाद उन्हें तुरंत आंच पर रखने के बजाय कुछ देर पानी में भिगोकर रखना बेहद फायदेमंद साबित होता है। पकाने से पहले लगभग 15 से 20 मिनट तक भिगोने से दानों के भीतर तक नमी पहुंचती है, जिससे वे अंदर और बाहर से एक समान रूप से पकते हैं। ध्यान रखें कि भिगोने की समय सीमा चावल की किस्म पर भी निर्भर करती है। किसी भी किस्म को जरूरत से ज्यादा देर तक पानी में न छोड़ें, क्योंकि ऐसा करने से कुछ किस्मों के दाने बहुत ज्यादा गल सकते हैं और पकने के दौरान टूट सकते हैं। पानी का सही अनुपात तय करें पतीले या कुकर में आवश्यकता से अधिक पानी डाल देना चावल के गीले और चिपचिपे होने की सबसे आम वजह है। हर प्रकार के चावल में पानी सोखने की क्षमता अलग होती है। इसलिए अपने चावल के पैकेट पर छपे निर्देशों को ध्यान से पढ़ें या उस खास किस्म के अनुसार ही पानी नापकर डालें। जैसे ही आपको अपनी पसंदीदा किस्म के लिए पानी का सटीक माप समझ आ जाएगा, आपके चावल कभी जरूरत से ज्यादा नहीं गलेंगे। पकाते समय चम्मच से बार-बार हिलाने से बचें अक्सर लोग खाना बनाते समय बर्तन का ढक्कन हटाकर चावल को बार-बार करछुल या चम्मच से चलाते रहते हैं। ऐसा करने से नाजुक दाने बीच से टूट जाते हैं और उनके भीतर से अतिरिक्त स्टार्च बाहर निकल आता है, जिससे पूरा बर्तन चिपचिपा हो जाता है। चावल को धीमी आंच पर शांति से पकने दें और जब तक बेहद जरूरी न हो, पकने के दौरान चम्मच बिल्कुल न लगाएं। आंच बंद करने के बाद 5 से 10 मिनट भाप में सेट होने दें गैस बंद करते ही तुरंत गरमा-गरम चावल परोसने की गलती न करें। पकने के बाद बर्तन को ढककर 5 से 10 मिनट के लिए ऐसे ही छोड़ दें। इसके बाद कांटे वाले चम्मच यानी फोर्क या चौड़े परोसने वाले चम्मच की मदद से हल्के हाथों से दानों को ऊपर-नीचे करें। इससे भीतर फंसी अतिरिक्त भाप बाहर निकल जाती है और हर दाना अलग होकर बेहतरीन बनावट में आ जाता है। इसका आप पर असर रसोई में चावल बनाने की सही तकनीक अपनाने से रोजमर्रा के खाने का स्वाद बेहतर होता है और भोजन की बर्बादी रुकती है। • दैनिक भोजन में सुधार: चिपचिपे और टूटे चावल की समस्या पूरी तरह खत्म हो जाती है। घर पर बनने वाली थाली देखने और खाने दोनों में रेस्टोरेंट जैसी शानदार लगती है। • अनाज की बचत: अक्सर अधिक गल जाने या हलवा बनने के कारण चावल फेंकने पड़ते हैं। सही पानी और आंच का ध्यान रखने से अनाज की बर्बादी रुकती है और पैसे बचते हैं। • पाचन और स्वाद: सही तरीके से धोकर अतिरिक्त स्टार्च निकालने से भोजन हल्का रहता है। दाल, छोले और करी के साथ हर दाने का असली स्वाद खुलकर आता है। • समय का प्रबंधन: केवल 15 से 20 मिनट पहले भिगोकर रखने से पकाने का समय घट जाता है। व्यस्त समय में भी कम ईंधन और कम मेहनत में खाना तैयार हो जाता है। ऐसा क्यों हुआ चावल पकने के दौरान आपस में इसलिए चिपक जाते हैं क्योंकि दानों के स्टार्च और पानी के संपर्क में आने पर रासायनिक बदलाव होते हैं। सही तालमेल न होने पर दाने अलग रहने के बजाय एक ठोस द्रव्यमान बन जाते हैं। • सतही स्टार्च की अधिकता: छंटाई और पॉलिशिंग के बाद दानों पर स्टार्च का महीन चूर्ण चिपका रह जाता है। बिना धोए पकाने पर यह चूर्ण उबलते पानी के साथ मिलकर गाढ़ा सरेस जैसा रूप ले लेता है। • पानी का असंतुलन: निर्धारित सीमा से ज्यादा पानी डालने से दाने अत्यधिक नमी सोखकर फटने लगते हैं। आंतरिक संरचना टूटने से स्टार्च बाहर आ जाता है और चिपचिपाहट पैदा करता है। • अत्यधिक चलाना: आंच पर पकते समय बार-बार करछुल चलाने से नाजुक दाने कट जाते हैं। टूटे हुए सिरों से स्टार्च निकलकर बर्तन में मौजूद सारे चावल को एक-दूसरे से चिपका देता है। सवाल-जवाब 1. चावल पकाने से पहले कितनी बार धोना चाहिए? चावल को कम से कम 2 से 3 बार साफ पानी से तब तक धोना चाहिए जब तक कि पानी का धुंधलापन खत्म न हो जाए और वह एकदम साफ न दिखे। 2. चावल को पकाने से पहले कितनी देर तक भिगोकर रखना सही होता है? चावल को पकाने से पहले करीब 15 से 20 मिनट तक पानी में भिगोकर रखना चाहिए, जिससे दाने एक समान पकते हैं। 3. चावल पकाते समय करछुल या चम्मच से क्यों नहीं चलाना चाहिए? बार-बार चम्मच चलाने से पकते हुए दाने टूट जाते हैं और उनमें से अतिरिक्त स्टार्च बाहर निकलकर चावल को चिपचिपा बना देता है। 4. आंच बंद करने के तुरंत बाद चावल क्यों नहीं परोसने चाहिए? आंच बंद करने के बाद चावल को 5 से 10 मिनट ढका रहने देना चाहिए ताकि भाप निकल जाए और दाने अलग-अलग व खिले-खिले बन सकें। https://trendkia.com/lifestyle/khile-khile-aura-alaga-danedara-chavala-pakane-ke-5-asana-rasoi-nuskhe-34276 TrendKia — Har trend, sabse pehle.