किचन के लिए मसाले खरीदते समय न हों धोखे का शिकार, शुद्धता जांचने के लिए ध्यान रखें ये 7 महत्वपूर्ण बातें बाजार में बिकने वाले हल्दी, लाल मिर्च और धनिया पाउडर में अक्सर मिलावट की शिकायतें सामने आती हैं। पैकेट की स्थिति, FSSAI नंबर, निर्माण तिथि और गंध जैसी 7 आसान बातों की जांच करके आप मिलावटी मसालों से अपने परिवार का बचाव कर सकते हैं। भारतीय रसोई में मसालों का स्थान सबसे खास होता है। हल्दी, लाल मिर्च, जीरा और धनिया जैसे मसाले न केवल खाने का स्वाद और रंग बढ़ाते हैं, बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी बेहद फायदेमंद माने जाते हैं। हालांकि, आजकल बाजार में पिसे हुए मसालों की मांग बढ़ने के साथ ही उनमें मिलावट का खतरा भी काफी बढ़ गया है। आमतौर पर उपभोक्ता पैकेट का आकर्षक डिजाइन, चमकीला रंग या कम कीमत देखकर मसाले खरीद लेते हैं। लेकिन सिर्फ सुंदर पैकिंग या गहरा रंग इस बात की गारंटी नहीं है कि उत्पाद पूरी तरह शुद्ध है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) लगातार उपभोक्ताओं को सतर्क रहने और खाद्य पदार्थ खरीदते समय लेबल व पैकिंग की गहन जांच करने की सलाह देता है। पिसे हुए मसालों में कई बार हानिकारक रंग, स्टार्च, लकड़ी का बुरादा या केमिकल मिला दिए जाते हैं, जिन्हें सामान्य नजरों से पहचानना मुश्किल होता है। रसोई के लिए सही और सुरक्षित मसाले चुनने के लिए कुछ मूलभूत जानकारियों और सावधानियों का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है। पिसे मसालों में मिलावट को पहचानना क्यों कठिन है? साबुत मसालों की गुणवत्ता और शुद्धता का अंदाजा उनकी बनावट, आकार और सुगंध को देखकर आसानी से लगाया जा सकता है। इसके विपरीत, जब मसालों को पीसकर पाउडर के रूप में तैयार किया जाता है, तो उनमें किसी भी बाहरी पदार्थ को मिलाना बेहद आसान हो जाता है। उदाहरण के लिए, हल्दी में सिंथेटिक पीला रंग या मेतानिल येलो, लाल मिर्च में ईंट का चूरा या रंगीन पाउडर और धनिया में लकड़ी का बुरादा या स्टार्च मिलाया जा सकता है। ध्यान देने योग्य बात यह है कि हर पिसा हुआ मसाला मिलावटी नहीं होता। अलग-अलग क्षेत्रों और किस्मों के आधार पर मसालों का प्राकृतिक रंग और सुगंध भिन्न हो सकती है। इसलिए केवल किसी मसाले का रंग थोड़ा हल्का या गहरा होने के आधार पर उसे तुरंत नकली मान लेना सही नहीं है। शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए उपभोक्ता को पैकेट पर दी गई विस्तृत जानकारी और भौतिक संकेतों का मिलान करना चाहिए। मसाले खरीदते समय ध्यान रखने योग्य 7 महत्वपूर्ण नियम बाजार या स्टोर से मसाले खरीदते समय किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी या स्वास्थ्य जोखिम से बचने के लिए निम्नलिखित 7 सुरक्षा बिंदुओं की जांच अवश्य करें 1. FSSAI लाइसेंस नंबर और ब्रांड विवरण की जांच करें पैक्ड मसाले खरीदते समय सबसे पहले पैकेट पर FSSAI का लोगो और 14 अंकों का लाइसेंस नंबर खंगालें। इसके साथ ही निर्माता कंपनी, पैकर का पूरा पता और ब्रांड से जुड़ी प्रामाणिक जानकारी पढ़ी जानी चाहिए। FSSAI लाइसेंस नंबर इस बात का प्रमाण होता है कि निर्माता खाद्य सुरक्षा मानकों के तहत पंजीकृत है। हालांकि, केवल नंबर छपा होना ही 100 प्रतिशत शुद्धता की गारंटी नहीं है, इसलिए इसके साथ अन्य सुरक्षा पैमानों पर भी गौर करें। 2. पैकिंग की तारीख और एक्सपायरी / बेस्ट बिफोर पढ़ें पैकेट के पीछे लिखी निर्माण तिथि (Manufacturing Date) और बेस्ट बिफोर की तारीख जरूर पढ़ें। इससे आपको उत्पाद के इस्तेमाल की सही समय-सीमा का पता चलता है। बेस्ट बिफोर की तिथि निकल जाने का मतलब तुरंत यह नहीं होता कि मसाला जहरीला हो गया है, लेकिन उसकी सुगंध, स्वाद और गुणवत्ता में कमी जरूर आ जाती है। हमेशा हाल ही में पैक किया गया पैकेट खरीदें और घर लाकर उसे नमी से दूर सूखी तथा ठंडी जगह पर स्टोर करें। 3. अत्यधिक चमकीले रंग से सावधान रहें अगर हल्दी पाउडर बहुत ज्यादा गहरा चमकीला पीला दिखे या लाल मिर्च असामान्य रूप से चटक लाल दिखाई दे, तो सतर्क हो जाएं। मसालों का रंग कृत्रिम रूप से आकर्षक बनाने के लिए कई बार अखाद्य रासायनिक रंगों का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, मसालों की प्राकृतिक प्रजाति के अनुसार भी रंग में थोड़ा अंतर हो सकता है, लेकिन अत्यधिक अप्राकृतिक चमक मिलने पर बाकी विवरणों की जांच किए बिना खरीदारी न करें। 4. गांठें और असामान्य गंध को न करें नजरअंदाज पिसे हुए मसाले में अगर बहुत सारी सख्त गांठें बनी हुई हैं या पैकेट से सीलन, फफूंद अथवा रसायनों जैसी अजीब गंध आ रही है, तो ऐसा मसाला न खरीदें। यह नमी प्रवेश करने या खराब रखरखाव का संकेत होता है। यदि पैकेट खोलने के बाद भी मसाले की प्राकृतिक सुगंध गायब लगे या स्वाद कड़वा महसूस हो, तो उसका सेवन न करें। ऐसी स्थिति में विक्रेता से संपर्क करें या खाद्य सुरक्षा विभाग में शिकायत दर्ज कराएं। 5. पैकेट की सीलिंग और बैच नंबर अवश्य देखें खरीदारी करते समय सुनिश्चित करें कि मसाले का पैकेट कहीं से कटा-फटा, ढीला या दोबारा सील किया हुआ न हो। पैकेट की एयरटाइट सील पूरी तरह सुरक्षित होनी चाहिए। इसके अलावा, पैकेट पर छपे बैच नंबर या लॉट नंबर को ध्यान से देखें। भविष्य में यदि उत्पाद की गुणवत्ता में कोई गड़बड़ी पाई जाती है या आपको कोई शिकायत दर्ज करानी पड़ती है, तो यह बैच नंबर जांच एजेंसियों के लिए मुख्य साक्ष्य का काम करता है। 6. साबुत मसाले खरीदकर घर पर पीसना बेहतर विकल्प यदि आपके पास समय और साधन उपलब्ध हों, तो बाजार से साबुत धनिया, जीरा, काली मिर्च, सौंफ और सूखी हल्दी खरीदकर उन्हें घर पर पीसना सबसे सुरक्षित तरीका है। साबुत मसालों में मिलावट करना कठिन होता है और उनकी गुणवत्ता की जांच करना आसान रहता है। हालांकि, साबुत मसाले खरीदते समय भी इस बात का ध्यान रखें कि उनमें कंकड़, धूल, सीलन या कीड़े न लगे हों। हमेशा साफ-सुथरे और अच्छे स्टोर से ही साबुत मसाले चुनें। 7. खुले में बिकने वाले पिसे मसालों के प्रयोग से बचें सड़क किनारे या खुली दुकानों पर बिना पैकिंग के बिकने वाले पिसे मसालों को खरीदने से बचना चाहिए। खुले मसालों में धूल-मिट्टी, नमी, मक्खियां और कीटाणु आसानी से प्रवेश कर जाते हैं। साथ ही, खुले मसालों में मिलावट की संभावना सबसे अधिक होती है और किसी गड़बड़ी के लिए जिम्मेदारी तय करना मुश्किल होता है। हमेशा पंजीकृत कंपनियों के सही तरीके से सील किए गए पैक्ड मसाले ही प्राथमिकता के आधार पर खरीदें। गड़बड़ी की शिकायत कहां और कैसे करें? यदि आपको किसी ब्रांडेड या लोकल मसाले में मिलावट का पक्का संदेह होता है, तो सबसे पहले उस पैकेट को संभाल कर रखें। उस पर अंकित बैच नंबर, FSSAI नंबर और बिल की प्रति के साथ राज्य के खाद्य सुरक्षा विभाग या FSSAI के ऑनलाइन पोर्टल 'कनेक्ट FSSAI' पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। जागरूक उपभोक्ता बनकर न केवल आप स्वयं को सुरक्षित रख सकते हैं, बल्कि बाजार में मिलावटखोरी पर भी लगाम लगा सकते हैं। इसका आप पर असर मसालों में होने वाली मिलावट से आम उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और रसोई के बजट पर सीधा असर पड़ता है। सही पैकेट चुनने से आपका परिवार रासायनिक खतरों से सुरक्षित रहता है। • स्वास्थ्य सुरक्षा: मिलावटी मसालों में मौजूद कृत्रिम रंग और स्टार्च पाचन तंत्र तथा लिवर को नुकसान पहुंचा सकते हैं। सही और शुद्ध मसाले खरीदने से आप गंभीर बीमारियों के खतरे से बच सकते हैं। • आर्थिक लाभ: खुले या बिना ब्रांड वाले नकली मसालों में पैसे बर्बाद होने की संभावना अधिक रहती है। सही लेबल और पैकिंग जांचकर खरीदने से आपकी मेहनत की कमाई का सही मूल्य मिलता है। • स्वाद और गुणवत्ता: शुद्ध मसालों का इस्तेमाल करने से भोजन का असली स्वाद और सुगंध बरकरार रहती है। मिलावटी पाउडर से व्यंजन का स्वाद और रंग दोनों बिगड़ जाते हैं। • सुरक्षित भंडारण: पैकिंग और एक्सपायरी तिथि जांचने से मसाले लंबे समय तक खराब नहीं होते। इससे नमी और सीलन से होने वाले नुकसान को रोका जा सकता है। ऐसा क्यों हुआ पिसे हुए मसालों में मिलावट मुख्य रूप से अधिक मुनाफा कमाने और उत्पादन लागत घटाने के उद्देश्य से की जाती है। बाजार में भारी मांग के कारण असामाजिक तत्व प्राकृतिक गुणवत्ता से समझौता करते हैं। • लागत में कमी: असली हल्दी, मिर्च और धनिया की तुलना में स्टार्च, लकड़ी का बुरादा और सस्ता पाउडर बेहद कम कीमत पर उपलब्ध होता है। मुनाफा बढ़ाने के लिए व्यापारी इन्हें असली मसालों में मिला देते हैं। • आकर्षक प्रस्तुति: प्राकृतिक मसालों का रंग समय के साथ धीमा पड़ सकता है। उपभोक्ता को आकर्षित करने के लिए मिलावटखोर अखाद्य चमकीले रासायनिक रंगों का प्रयोग करते हैं। • पहचान में कठिनाई: मसालों के पाउडर बन जाने के बाद उनमें मिले दूसरे तत्वों को केवल देखकर पहचानना बहुत मुश्किल होता है। इसी बात का फायदा उठाकर मिलावटी सामान आसानी से बाजार में बेचा जाता है। सवाल-जवाब 1. पिसे मसालों में मिलावट क्यों की जाती है? मुनाफा बढ़ाने और मसालों की मात्रा तथा रंग को आकर्षक बनाने के लिए स्टार्च या कृत्रिम रंगों की मिलावट की जाती है। 2. मसाला पैकेट पर FSSAI नंबर देखना क्यों जरूरी है? FSSAI लाइसेंस नंबर दर्शाता है कि निर्माता खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता नियमों का पालन करता है। 3. क्या बहुत चमकीला रंग हल्दी या मिर्च के असली होने की गारंटी है? नहीं, अत्यधिक चमकीला रंग कृत्रिम केमिकल या रंगों की मिलावट के कारण भी हो सकता है। 4. खुले पिसे मसाले खरीदने से क्यों बचना चाहिए? खुले मसालों में धूल, नमी, कीटाणु और मिलावट की संभावना सबसे अधिक होती है। 5. मसाले में सीलन या अजीब गंध आने पर क्या करना चाहिए? ऐसा मसाला खराब हो चुका होता है, इसलिए इसका खाने में प्रयोग न करें और विक्रेता या खाद्य विभाग से शिकायत करें। https://trendkia.com/lifestyle/kichana-ke-lie-masale-kharidate-samaya-na-hon-dhokhe-ka-shikara-shuddhata-janchane-ke-lie-dhyana-rakhen-ye-7-mahatvapurna-baten-49065 TrendKia — Har trend, sabse pehle.