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  "type": "article",
  "title": "मकान की दीवारों और छत पर उगने वाले पीपल-बरगद से ढांचा हो सकता है कमजोर, कृषि वैज्ञानिक ने बताए बचाव के असरदार नुस्खे",
  "summary": "मकान की दरारों और छतों पर पीपल, बरगद या अनचाही घास उगने से इमारत की उम्र घटती है। कृषि वैज्ञानिक ने बताया कि इन जिद्दी पौधों को बिना ढांचा तोड़े सुरक्षित तरीके से कैसे हटाया जाए।",
  "content": "रिहायशी मकानों, पुरानी हवेलियों अथवा नई बहुमंजिला इमारतों की छतों और दीवारों पर अक्सर अनचाहे पौधे, जंगली घास और यहाँ तक कि पीपल व बरगद जैसे विशालकाय पेड़ों के अंकुर फूटते दिखाई देते हैं। पहली नजर में यह सामान्य वनस्पति लग सकती है, परंतु धीरे-धीरे इनकी जड़ें ईंटों और कंक्रीट के भीतर गहराई तक समाने लगती हैं। इससे न केवल इमारत का बाहरी सौंदर्य बिगड़ता है, बल्कि चिनाई की पकड़ ढीली पड़ जाती है और पूरे ढांचे की मजबूती गंभीर खतरे में आ जाती है। बहराइच कृषि अनुसंधान केंद्र के प्रभारी अधिकारी डॉ. मनीष कुशवाहा ने इस विकट समस्या के पीछे छिपे वैज्ञानिक कारणों और इमारतों को सुरक्षित रखने के व्यावहारिक उपायों पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया है।\n\nऊंची दीवारों और संकरी दरारों तक कैसे पहुंच जाते हैं ये बीज?\nअधिकांश लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि बिना मिट्टी और खाद के छतों के कोनों अथवा ऊंची दीवारों की संकरी दरारों तक विशाल पेड़ों के बीज आखिर पहुंचते कैसे हैं। डॉ. मनीष कुशवाहा बताते हैं कि यह प्रक्रिया पूरी तरह से प्राकृतिक कारकों और बीजों की बनावट पर निर्भर करती है। प्रकृति ने कई खरपतवारों और पौधों के बीजों को हवा में तैरने के अनुकूल बनाया है। कुछ बीजों में कुदरती रूप से रोएं, पंख अथवा पैराशूट जैसी संरचना होती है, जिसे वानस्पतिक भाषा में पैपस कहा जाता है। जब भी तेज हवा या आंधी चलती है, तो ये हल्के बीज हवा के झोंकों के साथ उड़कर कई मंजिलों की ऊंचाई तक पहुंच जाते हैं और प्लास्टर के उखड़े हिस्सों या बारीक दरारों में फंस जाते हैं। इसके अलावा खेतों और खुली जमीन पर उगने वाले कई बीज आकार में इतने सूक्ष्म होते हैं कि वे सीधे वायु प्रवाह के साथ छतों पर जाकर टिक जाते हैं।\n\nबीजों के फैलाव का दूसरा बड़ा जरिया जीव-जंतु और परिंदे बनते हैं। कई किस्म के जंगली बीजों में छोटे कांटे या हुक जैसी बनावट होती है। जब गिलहरी, बिल्ली अथवा चूहे जैसे जीव दीवारों और छज्जों के सहारे इधर-उधर दौड़ते हैं, तो ये बीज उनके बालों पर चिपक जाते हैं। बाद में जब ये जानवर दीवारों पर अपना शरीर रगड़ते हैं, तो बीज वहीं गिरकर दरारों में समा जाते हैं। इंसानों के जूतों या कपड़ों के संपर्क से भी ये बीज छतों तक पहुंच सकते हैं।\n\nबारिश और सीलन से शुरू होती है जड़ों की पकड़\nसूखी दरार में फंसा बीज तब तक सुप्त अवस्था में रहता है, जब तक उसे जीवन के लिए जरूरी नमी नहीं मिलती। जैसे ही बरसात का मौसम शुरू होता है, हवा में उमस बढ़ती है और बारिश का पानी दीवारों की दरारों में रिसने लगता है। पानी के संपर्क में आते ही बीज के भीतर मौजूद पोषक तत्व, जिन्हें एंडोस्पर्म कहा जाता है, सक्रिय हो जाते हैं। इन आंतरिक पोषक तत्वों के सहारे बीज अंकुरित होकर नन्हा पौधा बन जाता है। एक बार अंकुर फूटने के बाद यह पौधा हवा की नमी और निर्माण सामग्री में मौजूद चूने या खनिजों से खुराक खींचने लगता है और अपनी जड़ों को ईंटों के बीच पसारना शुरू कर देता है।\n\nइमारत को नुकसान से बचाने के प्राथमिक और रोकथाम उपाय\nडॉ. मनीष कुशवाहा के अनुसार, इस समस्या से पार पाने के लिए सबसे पहली रणनीति बचाव की होनी चाहिए। इमारत में कहीं भी प्लास्टर टूटा हो, जोड़ों में खाली जगह बन गई हो या किसी भी प्रकार के क्रैक्स नजर आएं, तो उन्हें बिल्कुल नजरअंदाज न करें। बरसात से पहले ही इन दरारों और गड्ढों को अच्छी गुणवत्ता वाले सीमेंट या वाटरप्रूफ पुट्टी की मदद से पूरी तरह सील कर देना चाहिए। जब बीजों को टिकने और जड़ों को पनपने के लिए कोई खाली स्थान नहीं मिलेगा, तो पौधे अपने आप नहीं उग पाएंगे।\n\nइसके साथ ही निगरानी रखना भी बेहद जरूरी है। छतों या दीवारों पर दिखने वाले मौसमी और एक-वर्षीय खरपतवारों को तुरंत उखाड़ देना चाहिए। सबसे अहम बात यह है कि इन छोटे पौधों में फूल या बीज बनने से पहले ही इन्हें जड़ से निकाल दिया जाए। अगर इनमें नए बीज तैयार हो गए, तो वे हवा और पानी के जरिए उसी जगह बिखर जाएंगे और अगली बरसात में समस्या कई गुना बढ़कर सामने आएगी।\n\nछत की बागवानी में लकड़ी के बुरादे की परत बिछाएं\nआजकल शहरों में छत पर गमले, ग्रो बैग या पक्की क्यारियां बनाकर सब्जियां और फूल उगाने का चलन तेजी से बढ़ा है। ऐसे टेरेस गार्डन में नमी लगातार बनी रहने के कारण अनचाही घास और खरपतवार बहुत तेजी से फैलते हैं। इस परेशानी से निपटने के लिए डॉ. कुशवाहा ने मल्चिंग तकनीक अपनाने की सलाह दी है। इसके तहत गमलों और क्यारियों की मिट्टी के ऊपर लकड़ी के बुरादे की लगभग 1 इंच मोटी परत बिछा देनी चाहिए। यह परत सूरज की धूप को सीधे मिट्टी तक पहुंचने से रोक देती है। जब खरपतवार का बीज मिट्टी में अंकुरित भी होगा, तब भी उसे प्रकाश संश्लेषण के लिए धूप नहीं मिलेगी। नतीजतन, वह नन्हा पौधा पीला पड़कर बिना फैले ही दम तोड़ देगा।\n\nदीवारों पर उगे पीपल और बरगद को हटाने की सुरक्षित वैज्ञानिक विधि\nअगर दीवार में पीपल या बरगद का पौधा उग आया है, तो उसे हाथ से जोर लगाकर खींचने की भूल कभी न करें। इन वृक्षों की जड़ें दीवारों के भीतर बहुत बारीक जाल बना लेती हैं। यदि इन्हें जबरन खींचा जाए, तो पूरी दीवार का प्लास्टर उखड़ सकता है और चिनाई क्षतिग्रस्त हो सकती है। इन्हें जड़ से समाप्त करने के लिए वैज्ञानिक चरणबद्ध प्रक्रिया का पालन करना चाहिए। सबसे पहले हंसिये या छोटी आरी की मदद से पौधे के मुख्य तने को दीवार की सतह के करीब से सावधानीपूर्वक काट दें।\n\nतना काटने के तुरंत बाद उसके कटे हुए ठूंठ पर कांटेक्ट हर्बिसाइड जैसे पैराक्वाट अथवा सिस्टमिक हर्बिसाइड जैसे ग्लाइफोसेट का लेप लगाएं या उसका छिड़काव करें। इस दवा को लगभग 10-10 दिनों के अंतराल पर 2 से 3 बार दोबारा स्प्रे करना जरूरी होता है। इस रासायनिक उपचार से दवा पौधे के भीतरी संवहनी तंत्र में उतर जाती है, जिससे दीवार के अंदर छुपी जड़ें और तने का अवशेष धीरे-धीरे सूखकर पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं। इसके बाद वह पौधा दोबारा कभी अंकुरित नहीं होता।\n\nपरिसर और खाली जमीन के प्रबंधन के सुझाव\nइमारत के आसपास पड़ी खुली जमीन या बाग-बगीचे में उगे खरपतवार भी बीजों का मुख्य स्रोत होते हैं। यदि घर के आसपास छोटा खाली क्षेत्र है, तो वहां हाथ से चलने वाले वीडर यंत्र की सहायता से खरपतवार को जड़ समेत बाहर निकालें। यदि खाली भूखंड बड़ा है, तो ट्रैक्टर या रोटावेटर की सहायता से जमीन की गहरी जुताई करा दें, जिससे घास की जड़ें उखड़कर धूप में सूख जाएं। जिन स्थानों पर मशीन चलाना मुमकिन न हो और वहां कोई उपयोगी पेड़-पौधे भी न लगे हों, वहां कांटेक्ट हर्बिसाइड का संतुलित छिड़काव किया जा सकता है। यदि 15 से 20 दिनों के बाद दोबारा कोई नई घास उगती दिखाई दे, तो दवा के छिड़काव को एक बार फिर दोहराएं। इन व्यावहारिक और वैज्ञानिक कदमों को अमल में लाकर मकान की मजबूती को बरकरार रखा जा सकता है।\n\nइसका आप पर असर\nदीवारों और छतों पर अनचाहे पेड़-पौधों के उगने से होने वाले नुकसान को समय रहते रोककर मकान मालिक बड़े वित्तीय नुकसान से बच सकते हैं।\n\n• सीपेज और दरारें: अनचाहे पौधों की जड़ें समय के साथ कंक्रीट को चीर देती हैं, जिससे बारिश का पानी कमरों में टपकने लगता है। मानसून से पहले दरारों को सीमेंट से भरने पर भारी मरम्मत खर्च से बचा जा सकता है।\n• सुरक्षित निष्कासन: पीपल या बरगद को जबरन खींचने से दीवार टूट सकती है, इसलिए तने को काटकर हर्बिसाइड लगाने का तरीका अपनाएं। 10-10 दिनों के अंतर पर दो से तीन बार कीटनाशक लगाने से पौधा बिना दीवार तोड़े जड़ से समाप्त हो जाता है।\n• टेरेस गार्डन की देखभाल: छत पर गमलों में बागवानी करने वालों को तुरंत 1 इंच लकड़ी के बुरादे की मल्चिंग अपनानी चाहिए। इससे बार-बार खरपतवार उखाड़ने की मेहनत खत्म होती है और पौधों की वृद्धि बेहतर होती है।\n• खाली जमीन की जुताई: घर के पास खाली पड़ी जमीन पर रोटावेटर या वीडर चलाकर घास नष्ट करें। इससे हवा में उड़कर छत तक आने वाले बीजों का फैलाव पूरी तरह रुक जाता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nइमारतों की दीवारों और छतों पर पौधों का उगना बीजों के प्राकृतिक फैलाव, पक्षियों की गतिविधियों और बरसात की नमी के संयुक्त प्रभाव से होता है।\n\n• हवा और पक्षियों से बीजों का फैलाव: कुछ बीजों में रोएं या पैराशूट जैसी बनावट होती है, जो तेज हवा के साथ उड़कर ऊंची दीवारों की दरारों में चिपक जाते हैं। इसके अलावा गिलहरी और परिंदों के जरिए भी कांटेदार बीज छतों तक पहुंच जाते हैं।\n• नमी और पोषक तत्वों की उपलब्धता: बारिश का पानी दरारों में जमा होते ही बीज का एंडोस्पर्म सक्रिय हो जाता है, जिससे अंकुर फूट पड़ता है। पौधा धीरे-धीरे दीवार की निर्माण सामग्री में मौजूद नमी और खनिजों से खुराक लेने लगता है।\n• उपेक्षित दरारें और रखरखाव की कमी: छतों और बाहरी दीवारों पर पुराने प्लास्टर की टूटन को नजरअंदाज करने से पौधों को जड़ जमाने के लिए अनुकूल स्थान मिल जाता है। नियमित सीलिंग और निराई न होने पर यह समस्या विशालकाय पेड़ों के रूप में बदल जाती है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. दीवार पर उगे पीपल या बरगद को सीधे हाथ से क्यों नहीं खींचना चाहिए?\nइन पेड़ों की जड़ें दीवार के अंदर बहुत गहराई तक जाल बना लेती हैं। उन्हें जबरन खींचने से दीवार का प्लास्टर और ईंटें टूट सकती हैं।\n\n2. दीवार में लगे जिद्दी पौधे को सुखाने के लिए कौन सा रासायनिक उपाय बताया गया है?\nपौधे के तने को काटकर उस पर पैराक्वाट या ग्लाइफोसेट जैसे हर्बिसाइड का लेप लगाएं और 10-10 दिनों के अंतराल पर 2 से 3 बार छिड़काव करें।\n\n3. छत पर बागवानी करने वालों को खरपतवार रोकने के लिए क्या करना चाहिए?\nगमलों और क्यारियों में लकड़ी के बुरादे की लगभग 1 इंच मोटी परत बिछा देनी चाहिए, जिससे धूप न मिलने के कारण खरपतवार नष्ट हो जाते हैं।\n\n4. ऊंची इमारतों तक बीजों के पहुंचने का मुख्य जरिया क्या है?\nपैराशूट जैसी संरचना वाले हल्के बीज हवा में उड़कर और कांटेदार बीज जानवरों के शरीर से चिपककर छतों और दरारों तक पहुंच जाते हैं।",
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  "category": "जीवनशैली",
  "publishedAt": "2026-09-27",
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