मकान की छतों और दीवारों का प्लास्टर टिकेगा सालों साल, बहराइच के कारीगर शिवप्रकाश ने बताए जरूरी नियम मकान निर्माण के बाद प्लास्टर उखड़ने और पपड़ी बनकर गिरने से रोकने के लिए दीवार की दो दिन पहले तराई, तार के ब्रश से सफाई और 4:1 का मसाला अनुपात बेहद जरूरी है. मकान अथवा किसी भी इमारत के निर्माण कार्य के कुछ ही वक्त बाद छतों और दीवारों से प्लास्टर पपड़ी बनकर झड़ने लगता है. इससे न केवल पूरे घर की सुंदरता पर बुरा असर पड़ता है, बल्कि इमारत की मजबूती और सुरक्षा को लेकर भी मन में संशय पैदा होने लगता है. बहराइच जिले के यादव गांव के रहने वाले अनुभवी मिस्त्री शिवप्रकाश के अनुसार इस परेशानी की सबसे बड़ी वजह निर्माण के दौरान बुनियादी सावधानियों की अनदेखी करना है. प्लास्टर उखड़ने के मुख्य कारण और तराई का महत्व कारीगर शिवप्रकाश बताते हैं कि जब दीवार की पानी से पर्याप्त तराई नहीं की जाती और सीमेंट का घोला सही तरीके से नहीं लगाया जाता, तब प्लास्टर अपनी पकड़ खो देता है. जिस भी दीवार या छत पर प्लास्टर का काम होना हो, उस पर कम से कम दो दिन पहले से नियमित और अच्छी तरह पानी छिड़कना चाहिए. ऐसा करने से दीवार पूरी तरह ठंडी हो जाती है और ईंटें अपनी क्षमता के अनुसार भरपूर पानी सोख लेती हैं. यदि दीवार प्यासी रह जाएगी, तो वह प्लास्टर के मसाले का सारा पानी खुद खींच लेगी, जिससे सीमेंट अपनी मजबूती नहीं बना पाएगा. तार वाले ब्रश से सफाई और सतह की तैयारी पानी की तराई के साथ-साथ दीवार की सतह को साफ करना भी समान रूप से महत्वपूर्ण कदम माना जाता है. दीवार पर जमी किसी भी तरह की धूल, मिट्टी अथवा पुरानी परत को लोहे के तार वाले ब्रश से घिसकर अच्छी तरह हटा देना चाहिए. जब तक लाल ईंटों की सतह बिल्कुल साफ और स्पष्ट दिखाई न देने लगे, तब तक सफाई का यह काम जारी रखना चाहिए. यदि दीवार बिल्कुल नई नहीं है तो भी पूरी तरह पानी देकर ही प्लास्टर का कार्य आगे बढ़ाना चाहिए, ताकि नई परत सतह से पूरी मजबूती के साथ चिपक सके. मसाले का 4:1 अनुपात और सही मोटाई प्लास्टर की दीर्घायु पूरी तरह से सीमेंट और मौरंग के संतुलित मिश्रण पर निर्भर करती है. कारीगर के अनुसार प्लास्टर तैयार करने का सबसे सटीक और मानक अनुपात 4:1 होना चाहिए. इसका सीधा अर्थ है कि चार तसला मौरंग में केवल एक तसला सीमेंट मिलाना चाहिए. इस मसाले की नाप-तौल सटीक होनी चाहिए और इसे सूखी अवस्था में तथा पानी मिलाने के बाद बहुत अच्छी तरह फेंटना चाहिए. यदि मसाले को ठीक से नहीं मिलाया गया, तो मिश्रण में मौरंग की मात्रा कहीं कम और कहीं ज्यादा हो जाती है. यही गड़बड़ी आगे चलकर दो से चार सालों के भीतर प्लास्टर को कमजोर कर देती है और वह पपड़ी बनकर झड़ने लगता है. सामान्य बालू की तुलना में मौरंग और सीमेंट का यह संतुलित मिश्रण कहीं अधिक टिकाऊ साबित होता है. लंबी उम्र के लिए जरूरी तकनीकी बातें मिश्रण के सही अनुपात के अलावा प्लास्टर की मोटाई पर ध्यान देना भी बहुत जरूरी है. प्लास्टर की मोटाई कम से कम आधा इंच जरूर रखनी चाहिए, जिससे दीवार को मौसम की मार से सुरक्षा मिल सके. जब दो दिन की भरपूर तराई, तार के ब्रश से सतह की सफाई, 4:1 के अनुपात में तैयार मसाला और कम से कम आधा इंच की मोटाई एक साथ अमल में लाई जाती है, तो प्लास्टर में पपड़ी पड़ने की शिकायत कभी नहीं आती. नया मकान बनवाते समय अथवा पुराने घर की मरम्मत कराते वक्त इन तकनीकी बातों का पालन करने से निर्माण लंबे समय तक सुरक्षित और मजबूत बना रहता है. इसका आप पर असर मकान बनवाते या मरम्मत कराते समय इन सावधानियों को अपनाकर हजारों रुपये की बर्बादी और बार-बार होने वाली तोड़-फोड़ से बचा जा सकता है. • सीधे वित्तीय बचत: दीवारों पर घटिया प्लास्टर होने से दो से चार साल में दोबारा मरम्मत का भारी खर्च उठाना पड़ता है. सही अनुपात में मसाला और उचित तराई करवाकर इस दोहरे खर्च से हमेशा के लिए राहत मिल सकती है. • मकान की संरचनात्मक सुरक्षा: कमजोर प्लास्टर हटने पर बारिश का पानी सीधे ईंटों तक पहुंचता है और सीलन बढ़ाता है. आधा इंच का मजबूत प्लास्टर इमारत की बाहरी और भीतरी दीवारों को मौसम के नुकसान से सुरक्षित रखता है. • कारीगरों की निगरानी: अक्सर निर्माण के दौरान मजदूर जल्दबाजी में मसाले को ठीक से नहीं मिलाते हैं. आप स्वयं मौके पर खड़े होकर चार तसला मौरंग और एक तसला सीमेंट का अनुपात और दो दिन की तराई सुनिश्चित करवा सकते हैं. • घर के सौंदर्य की सुरक्षा: दीवारों से पपड़ी झड़ने पर महंगे पेंट और वॉल पुट्टी पूरी तरह खराब हो जाते हैं. मजबूत सतह होने पर दीवारों का रंग-रोगन लंबे समय तक चमकदार और सुरक्षित बना रहता है. ऐसा क्यों हुआ निर्माण के कुछ ही समय बाद प्लास्टर झड़ने और पपड़ी बनने की समस्या कारीगरों की जल्दबाजी और बुनियादी निर्माण नियमों की अनदेखी के कारण पैदा होती है. • सूखी दीवारों द्वारा पानी का खिंचाव: जब प्लास्टर से पहले दीवार को दो दिनों तक अच्छी तरह गीला नहीं किया जाता, तो सूखी ईंटें प्लास्टर के ताजे मसाले का पानी सोख लेती हैं. पानी की कमी के चलते सीमेंट का रासायनिक जमाव अधूरा रह जाता है और प्लास्टर कमजोर पड़ जाता है. • धूल और पुरानी परतों की मौजूदगी: ईंटों की सतह पर अगर धूल, मिट्टी या पुरानी परत जमी रह जाए, तो मसाला ईंटों को ठीक से नहीं पकड़ पाता. तार वाले ब्रश से सफाई न होने पर सतह चिकनी या मैली रह जाती है, जिससे परतें बाद में अलग होने लगती हैं. • मसाले का असंतुलित मिश्रण: चार तसला मौरंग पर एक तसला सीमेंट के अनुपात में लापरवाही बरतने और उसे ठीक से न मिलाने से मसाले में असंतुलन आ जाता है. जिस हिस्से में सीमेंट कम पहुंचता है, वहां से दो से चार वर्षों में प्लास्टर पपड़ी बनकर टूटने लगता है. सवाल-जवाब 1. दीवारों से प्लास्टर पपड़ी बनकर क्यों झड़ने लगता है? दीवारों की पर्याप्त तराई न होना, सीमेंट का सही घोला न लगाना और मसाले का गलत मिश्रण प्लास्टर उखड़ने की मुख्य वजहें हैं. 2. प्लास्टर करने से कितने दिन पहले दीवार की तराई शुरू करनी चाहिए? जिस दीवार या छत पर प्लास्टर होना हो, उस पर कम से कम दो दिन पहले से अच्छी तरह पानी छिड़ककर तराई करनी चाहिए ताकि ईंटें पूरी तरह ठंडी हो जाएं. 3. प्लास्टर के मसाले का सही और मानक अनुपात क्या है? मजबूत प्लास्टर के लिए 4:1 का मानक अनुपात होना चाहिए, जिसका अर्थ चार तसला मौरंग और एक तसला सीमेंट है. 4. दीवार की सफाई के लिए तार वाले ब्रश का इस्तेमाल क्यों जरूरी है? तार वाले ब्रश से घिसने पर दीवार की धूल, मिट्टी और पुरानी परतें पूरी तरह हट जाती हैं और लाल ईंटों की सतह साफ होकर मसाले को मजबूती से पकड़ती है. 5. दीवार पर प्लास्टर की मोटाई कम से कम कितनी रखनी चाहिए? दीवार की मजबूती और लंबे समय तक टिकाऊ रखने के लिए प्लास्टर की मोटाई कम से कम आधा इंच जरूर रखनी चाहिए. https://trendkia.com/lifestyle/makana-ki-chhaton-aura-divaron-ka-plastara-tikega-salon-sala-bahraich-ke-karigara-shivprakash-ne-batae-jaruri-niyama-37293 TrendKia — Har trend, sabse pehle.