मल्चिंग तकनीक से खीरा और टमाटर की बागवानी पर पचास फीसदी अनुदान, किसानों को सीधे मिलेंगे बीस हजार रुपये सब्जी की फसलों को खरपतवार और कीटों से बचाने के लिए केंद्र प्रायोजित एकीकृत बागवानी मिशन के तहत प्लास्टिक मल्चिंग पर किसानों को 20,000 रुपये तक की आर्थिक मदद दी जा रही है। आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाने और फसलों की उत्पादकता में सुधार लाने के उद्देश्य से बागवानी क्षेत्र में उन्नत तकनीकों को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी क्रम में खेतों में नमी बनाए रखने और खरपतवार की रोकथाम के लिए बेहद असरदार मानी जाने वाली मल्चिंग तकनीक पर सरकारी स्तर से सहायता दी जा रही है। बिहार के किसान भी इस केंद्र प्रायोजित योजना के दायरे में आते हैं, जहां कुल लागत पर 50 प्रतिशत तक अनुदान का प्रावधान किया गया है। जहानाबाद जिले में इस योजना के तहत आवेदन स्वीकार किए जा रहे हैं, जिसका लाभ उठाकर स्थानीय काश्तकार अपनी लागत घटाने के साथ पैदावार में बढ़ोतरी कर सकते हैं। सब्जियों की उत्पादकता बढ़ाने में प्लास्टिक मल्च की भूमिका काली प्लास्टिक शीट अथवा मल्चिंग तकनीक का इस्तेमाल सब्जियों की व्यावसायिक खेती में अत्यधिक लाभदायक सिद्ध हो रहा है। खीरा, टमाटर, शिमला मिर्च और आलू जैसी नकदी फसलों में जब जमीन को ब्लैक शीट से ढंककर बुआई की जाती है, तो पैदावार का स्तर सामान्य खेती के मुकाबले काफी बेहतर हो जाता है। पारंपरिक तरीकों से खेती करने पर खेतों में भारी मात्रा में खरपतवार उग आते हैं, जो मिट्टी के पोषक तत्वों को सोख लेते हैं और कई तरह के नुकसानदेह कीटों को भी पनाह देते हैं। मल्चिंग का प्राथमिक मकसद अनचाहे खरपतवार के फैलाव को पूरी तरह रोकना और पौधों के बीच उचित दूरी सुनिश्चित करना है, जिससे फसल का विकास बिना किसी बाधा के होता है। एकीकृत बागवानी मिशन में बीस हजार रुपये की सहायता जहानाबाद की जिला उद्यान पदाधिकारी रूबी कुमारी के अनुसार, यह योजना किसानों की आमदनी बढ़ाने में काफी कारगर साबित हो सकती है। रूबी कुमारी ने बताया कि एकीकृत बागवानी मिशन के अंतर्गत मल्चिंग कार्य के लिए पचास प्रतिशत का अनुदान निर्धारित किया गया है। इस पूरी व्यवस्था में प्रति इकाई लागत 40,000 रुपये तय की गई है, जिस पर चयनित किसान को सीधे 20,000 रुपये की वित्तीय सब्सिडी प्रदान की जाती है। योजना से जुड़ने के इच्छुक किसानों को अपने मोबाइल पर बिहार कृषि ऐप डाउनलोड करना होता है। इसी डिजिटल माध्यम से संबंधित योजना के लिए ऑनलाइन फॉर्म भरा जाता है और विभागीय स्तर पर चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद लाभार्थी को अनुदान की राशि का लाभ मिलता है। कीट नियंत्रण और ड्रिप सिंचाई से कतरासीन के किसान को लाभ खेत में ब्लैक शीट बिछाने से जहां सूरज की रोशनी सीधे मिट्टी पर न पड़ने से जंगली घास और वीड का खात्मा होता है, वहीं मिट्टी में पलने वाले कीटों का प्रभाव भी न्यूनतम रह जाता है। जहानाबाद जिले के कतरासीन क्षेत्र में किसान मनीष कुमार इस तकनीक का सफल व्यावहारिक उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं। मनीष कुमार अपने करीब 3 से 4 बीघा खेत में प्लास्टिक मल्च विधि के जरिए खीरा और टमाटर उगा रहे हैं और इस खेती से बढ़िया मुनाफा कमा रहे हैं। उन्होंने पानी की सटीक आपूर्ति बनाए रखने के लिए पूरे रकबे में ड्रिप स्प्रिंकलर सिस्टम भी लगाया हुआ है, जिससे पौधों की जड़ों तक जरूरत के मुताबिक सीमित पानी पहुंचता है और कम खर्च में शानदार पैदावार हासिल होती है। इसका आप पर असर इस सरकारी पहल से सब्जी उत्पादक किसानों को आधुनिक कृषि उपकरण अपनाने में सीधा आर्थिक संबल मिलेगा और उनकी कुल इनपुट लागत घटेगी। • भारत में: केंद्र प्रायोजित बागवानी मिशन के जरिए किसान महंगी प्लास्टिक मल्चिंग तकनीक पर पचास फीसदी सरकारी मदद पा सकते हैं। इससे पानी की भारी बचत के साथ रासायनिक कीटनाशकों और निराई-गुड़ाई पर होने वाला खर्च काफी हद तक कम हो जाता है। • बिहार में: राज्य के किसान घर बैठे बिहार कृषि मोबाइल ऐप के माध्यम से अपना पंजीकरण करा सकते हैं। जहानाबाद सहित संबंधित जिलों में 40,000 रुपये की इकाई लागत पर सीधे 20,000 रुपये का अनुदान बैंक खाते में हासिल किया जा सकता है। • सब्जी उत्पादकों के लिए: टमाटर, खीरा, आलू और शिमला मिर्च उगाने वाले किसानों को खरपतवार और कीटों से सुरक्षा मिलती है। इससे प्रति बीघा उपज में उल्लेखनीय इजाफा होता है और शुद्ध लाभ बढ़ जाता है। • जल संरक्षण के स्तर पर: मल्चिंग के साथ ड्रिप और स्प्रिंकलर प्रणाली जोड़ने से सिंचाई के लिए जरूरी पानी की खपत में भारी कमी आती है। सूखे या कम पानी वाले इलाकों में भी किसान सीमित भूजल के सहारे भरपूर पैदावार ले सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ बागवानी फसलों में बढ़ते खरपतवार, कीड़ों के प्रकोप और अनियंत्रित जल बर्बादी की समस्याओं को दूर करने के लिए आधुनिक प्लास्टिक मल्चिंग को रियायती दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है। • सीधा कारण: पारंपरिक खेती में अनचाहे पौधों और कीड़ों के कारण फसलों की गुणवत्ता खराब होती है तथा मजदूरी खर्च बहुत बढ़ जाता है। सरकार इस समस्या के स्थायी समाधान के रूप में प्लास्टिक शीट मल्चिंग को प्रोत्साहित कर रही है। • योजना का आधार: केंद्र प्रायोजित एकीकृत बागवानी मिशन का लक्ष्य किसानों को आधुनिक वैज्ञानिक तौर-तरीकों से जोड़ना है। चालीस हजार रुपये की लागत को वहनीय बनाने के लिए पचास प्रतिशत यानी बीस हजार रुपये का प्रत्यक्ष अनुदान रखा गया है। • डिजिटल प्रक्रिया: बिचौलियों की भूमिका समाप्त करने और वास्तविक किसानों तक मदद पहुंचाने के लिए आवेदन की पूरी प्रक्रिया को राज्य के समर्पित कृषि मोबाइल ऐप से जोड़ा गया है। • आगे की दिशा: आवेदन की जांच के उपरांत चयनित किसानों के खेतों में तकनीक स्थापित की जाती है, जिससे भविष्य में कम लागत पर निरंतर अधिक पैदावार ली जा सके। सवाल-जवाब 1. मल्चिंग तकनीक पर सरकार कितना अनुदान दे रही है? एकीकृत बागवानी मिशन के अंतर्गत इस तकनीक पर 50 प्रतिशत यानी 40,000 रुपये की इकाई लागत पर 20,000 रुपये का अनुदान दिया जा रहा है। 2. इस योजना के लिए किसान कहां और कैसे आवेदन कर सकते हैं? इच्छुक किसान अपने मोबाइल में बिहार कृषि ऐप डाउनलोड करके इस योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन जमा कर सकते हैं। 3. खेत में ब्लैक शीट या मल्चिंग लगाने से क्या फायदा होता है? ब्लैक शीट के इस्तेमाल से खरपतवार की रोकथाम होती है, खतरनाक कीड़ों का हमला कम होता है और फसलों की पैदावार में सुधार आता है। 4. मल्चिंग विधि किन-किन फसलों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है? यह तकनीक मुख्य रूप से खीरा, टमाटर, शिमला मिर्च और आलू जैसी बागवानी फसलों के लिए बेहद फायदेमंद है। 5. कतरासीन के किसान मनीष कुमार किस तरह खेती कर रहे हैं? मनीष कुमार करीब 3 से 4 बीघा में ड्रिप स्प्रिंकलर और मल्चिंग विधि के जरिए खीरा व टमाटर उगाकर मुनाफा कमा रहे हैं। https://trendkia.com/lifestyle/malchinga-takanika-se-khira-aura-tamatara-ki-bagavani-para-pachasa-phisadi-anudana-kisanon-ko-sidhe-milenge-bisa-hajara-rupaye-41364 TrendKia — Har trend, sabse pehle.