मानसून में बंद पोर्स और पिंपल्स से बचना है तो रोज़ अपनाएं ये 3 स्किन केयर आदतें बारिश के मौसम में नमी बढ़ने से चेहरे पर तेल और पसीना जमा होकर पोर्स बंद कर देता है, जिससे पिंपल्स और ब्लैकहेड्स की समस्या बढ़ जाती है। सही क्लींजिंग, एक्सफोलिएशन और मॉइस्चराइज़िंग से इससे बचा जा सकता है। मानसून आते ही उमस और नमी की वजह से त्वचा का रंग-ढंग बदलने लगता है। हवा में नमी बढ़ने से चेहरे पर तेल, पसीना और धूल-मिट्टी ज़्यादा जमा होने लगती है, जिससे रोमछिद्र यानी पोर्स बंद हो जाते हैं और पिंपल्स, ब्लैकहेड्स के साथ-साथ चेहरे की नैचुरल चमक भी फीकी पड़ने लगती है। अच्छी खबर यह है कि रोज़मर्रा की स्किन केयर रूटीन में थोड़ा बदलाव करके इस परेशानी से काफी हद तक बचा जा सकता है। आइए समझते हैं कि बारिश के मौसम में पोर्स बंद क्यों होते हैं और इन्हें खुला और साफ़ रखने के लिए कौन से तीन आसान तरीके अपनाए जा सकते हैं। बारिश के मौसम में पोर्स बंद क्यों हो जाते हैं एक्सपर्ट्स के मुताबिक मानसून में हवा में नमी का स्तर बढ़ने से त्वचा की ऑयल ग्लैंड्स ज़्यादा सक्रिय हो जाती हैं। जब ज़्यादा सीबम यानी तेल, पसीना और गंदगी आपस में मिल जाते हैं, तो वे रोमछिद्रों में जमा होकर उन्हें बंद कर देते हैं। अगर इस दौरान चेहरे की नियमित सफाई न की जाए तो बंद पोर्स में बैक्टीरिया पनपने लगते हैं, जिससे मुहांसे और स्किन से जुड़ी दूसरी दिक्कतें और बढ़ जाती हैं। दिन में दो बार हल्के क्लींज़र से चेहरा धोएं मानसून के दौरान अपनी स्किन टाइप के हिसाब से हल्का यानी माइल्ड क्लींज़र चुनना चाहिए और सुबह-शाम इससे चेहरा धोना चाहिए। ऐसा करने से चेहरे पर जमा एक्स्ट्रा ऑयल, पसीना और गंदगी आसानी से निकल जाती है और पोर्स बंद होने का खतरा कम हो जाता है। हालांकि ध्यान रखें कि ज़रूरत से ज़्यादा बार चेहरा धोना भी नुकसानदेह हो सकता है, क्योंकि इससे त्वचा की नैचुरल नमी छिन जाती है और स्किन बहुत ज़्यादा रूखी हो सकती है। हफ्ते में एक या दो बार हल्के हाथों से एक्सफोलिएट करें डेड स्किन सेल्स यानी मृत त्वचा कोशिकाएं भी पोर्स बंद होने की एक बड़ी वजह मानी जाती हैं। हफ्ते में एक या दो बार हल्के स्क्रब या सैलिसिलिक एसिड जैसे माइल्ड केमिकल एक्सफोलिएंट का इस्तेमाल करने से त्वचा को साफ़ और खुला रखने में मदद मिलती है। जिन लोगों की त्वचा सेंसिटिव है, उन्हें खुद से कोई भी एक्सफोलिएंट आज़माने से पहले डर्मेटोलॉजिस्ट यानी त्वचा रोग विशेषज्ञ की सलाह ज़रूर लेनी चाहिए, ताकि स्किन पर उल्टा असर न पड़े। ऑयल-फ्री मॉइस्चराइज़र और सनस्क्रीन लगाना न भूलें बारिश के मौसम में कई लोग यह सोचकर मॉइस्चराइज़र लगाना बंद कर देते हैं कि त्वचा पहले से ही चिपचिपी लगती है, जबकि हकीकत में स्किन को हाइड्रेटेड रखना बेहद ज़रूरी होता है। ऐसे में हल्का, नॉन-कॉमेडोजेनिक और ऑयल-फ्री मॉइस्चराइज़र चुनना सबसे सही रहता है, जो त्वचा में नमी तो बनाए रखे लेकिन पोर्स को बंद न करे। इसके साथ ही बादल छाए दिनों में भी सनस्क्रीन लगाना न भूलें, क्योंकि यूवी किरणें बादलों को पार करके भी त्वचा तक पहुंच सकती हैं और नुकसान पहुंचा सकती हैं। रोज़मर्रा में अपनाएं ये छोटी-छोटी आदतें • बार-बार अपने चेहरे को हाथों से छूने से बचें, क्योंकि हाथों से गंदगी और बैक्टीरिया चेहरे पर पहुंच सकते हैं। • खूब पानी पिएं और अपनी डाइट को बैलेंस्ड रखें, इससे त्वचा अंदर से सेहतमंद बनी रहती है। • हमेशा साफ़ तकिए के कवर का इस्तेमाल करें, क्योंकि गंदे कवर पर मौजूद बैक्टीरिया और तेल चेहरे के पोर्स बंद कर सकते हैं। इन तीन आसान उपायों को अगर मानसून के दौरान रोज़ाना की स्किन केयर रूटीन में शामिल कर लिया जाए, तो बंद पोर्स, पिंपल्स और बेजान त्वचा जैसी दिक्कतों से काफी हद तक बचा जा सकता है और चेहरे की नैचुरल चमक भी बनी रह सकती है। इसका आप पर असर आपके लिए मायने: • अगर मानसून में आपकी त्वचा भी ऑयली होकर पिंपल्स से भर जाती है, तो दिन में दो बार हल्के क्लींज़र से चेहरा धोना, हफ्ते में एक-दो बार एक्सफोलिएट करना और ऑयल-फ्री मॉइस्चराइज़र व सनस्क्रीन लगाना अपनाकर आप बंद पोर्स और मुहांसों की समस्या को काफी हद तक कम कर सकते हैं। सवाल-जवाब 1. बारिश के मौसम में पोर्स क्यों बंद हो जाते हैं? नमी बढ़ने से त्वचा की ऑयल ग्लैंड्स ज़्यादा सक्रिय हो जाती हैं और ज़्यादा सीबम, पसीना व गंदगी मिलकर पोर्स को बंद कर देते हैं। 2. मानसून में दिन में कितनी बार चेहरा धोना चाहिए? स्किन टाइप के हिसाब से हल्के क्लींज़र से सुबह और रात, यानी दिन में दो बार चेहरा धोना चाहिए। 3. हफ्ते में कितनी बार एक्सफोलिएट करना सही है? हफ्ते में एक या दो बार हल्के स्क्रब या सैलिसिलिक एसिड जैसे माइल्ड केमिकल एक्सफोलिएंट का इस्तेमाल किया जा सकता है। 4. क्या मानसून में मॉइस्चराइज़र लगाना ज़रूरी है? हां, हल्का, नॉन-कॉमेडोजेनिक और ऑयल-फ्री मॉइस्चराइज़र त्वचा को हाइड्रेटेड रखता है और पोर्स को बंद नहीं करता। 5. बादल वाले दिन सनस्क्रीन क्यों ज़रूरी है? यूवी किरणें बादलों को पार करके भी त्वचा तक पहुंच सकती हैं, इसलिए बादल वाले दिनों में भी सनस्क्रीन लगाना चाहिए। 6. सेंसिटिव स्किन वालों को एक्सफोलिएट करते समय क्या ध्यान रखना चाहिए? उन्हें खुद से एक्सफोलिएंट आज़माने की बजाय पहले डर्मेटोलॉजिस्ट की सलाह लेनी चाहिए। https://trendkia.com/lifestyle/manasuna-men-bnda-porsa-aura-pinpalsa-se-bachana-hai-to-roza-apanaen-ye-3-skina-keyara-adaten-5456 TrendKia — Har trend, sabse pehle.