सावन की सीलन में भी तरोताजा रहेगी पूजा सामग्री, जानें नमी और फफूंदी से सामान बचाने के असरदार उपाय सावन के पावन महीने में होने वाली लगातार बारिश और हवा की नमी से कपूर, अगरबत्ती, रोली और फूल बहुत जल्दी खराब होने लगते हैं। आसान स्टोरेज टिप्स अपनाकर पूजा की सामग्री को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। सावन का पवित्र महीना शुरू होते ही देश भर के श्रद्धालु भगवान शिव की भक्ति में लीन हो जाते हैं। हर घर में सुबह-शाम नियमित पूजा, रुद्राभिषेक, जलाभिषेक और विशेष व्रत का अनुष्ठान चलने लगता है। इस धार्मिक अनुष्ठान के दौरान ताजे फूल, बेलपत्र, कपूर, धूप, अगरबत्ती, रुई की बाती, रोली, चंदन, अक्षत और तरह-तरह के सूखे मेवों का उपयोग दैनिक रूप से किया जाता है। हालांकि, सावन के महीने के साथ आने वाली मूसलाधार बारिश और वातावरण में फैली अत्यधिक सीलन इन सामग्रियों की गुणवत्ता को तेजी से प्रभावित करती है। कई बार ताजे फूल एक ही दिन में सड़कर खराब हो जाते हैं, कपूर गलने लगता है, अगरबत्ती में नमी आ जाती है जिससे वह ठीक से नहीं जलती और रोली-चंदन में गांठें पड़ जाती हैं। सामग्री के इस तरह खराब हो जाने पर लोगों को बार-बार नया सामान खरीदने के लिए बाजार जाना पड़ता है, जिससे समय और पैसे दोनों का नुकसान होता है। अगर थोड़ी सी सावधानी और सही तकनीकों को अपनाया जाए, तो मानसून की इस सीलन के बावजूद पूजा की हर चीज को पूरे महीने भर के लिए एकदम ताजा और सुरक्षित रखा जा सकता है। सही तरीके से रखी गई सामग्री न केवल लंबे समय तक चलती है, बल्कि प्रतिदिन की पूजा अर्चना में भी किसी तरह की रुकावट नहीं आने देती। आइए विस्तार से जानते हैं कि बारिश के मौसम में अपनी पूजा सामग्री को नमी और फफूंदी से बचाने के सबसे आसान और वैज्ञानिक उपाय कौन से हैं। मानसून की नमी किस तरह बनती है पूजा सामग्री की दुश्मन बारिश के मौसम में वायुमंडल के भीतर आद्रता यानी नमी का स्तर सामान्य दिनों के मुकाबले काफी बढ़ जाता है। यही हवा की सीलन पूजा में इस्तेमाल होने वाली अलग-अलग वस्तुओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है। हवा में मौजूद पानी के कण जब खुले में रखी चीजों के संपर्क में आते हैं, तो जैविक और रासायनिक बदलाव शुरू हो जाते हैं। ताजे फूल और पत्तियां हवा न मिलने और नमी के कारण बहुत जल्दी गलने और महकने लगते हैं। वहीं सूखे नारियल और काजू-बादाम जैसे मेवों पर फफूंदी यानी फंगस जमा होने लगती है। कपूर एक वाष्पशील पदार्थ है जो हवा की नमी सोखकर तेजी से पिघलने लगता है। इसके अलावा धूप और अगरबत्ती सीलन पकड़ लेती हैं, जिसके बाद उन्हें जलाना बेहद मुश्किल हो जाता है और वे आधा जलकर ही बुझ जाती हैं। यदि पूजा का सामान किसी खुली जगह या सामान्य टोकरी में रखा जाए, तो उसका खराब होना तय माना जाता है। फूलों और बेलपत्र की ताजगी को कई दिनों तक बनाए रखने का तरीका भगवान शिव की पूजा में ताजे फूलों और बेलपत्र का सबसे अधिक महत्व होता है। यदि आप रोजाना मंदिर से या बाजार से एक साथ फूल खरीदकर लाते हैं, तो उन्हें कभी भी प्लास्टिक की थैली में बंद करके न रखें। खरीदने के तुरंत बाद फूलों को किसी पतले सूती कपड़े या टिश्यू पेपर में हल्के हाथों से लपेट लें। इसके बाद इन्हें फ्रिज के सबसे निचले हिस्से यानी वेजिटेबल बास्केट में रख दें। इस तरीके से फूलों की पंखुड़ियों में ठंडक बनी रहती है और वे कई दिनों तक नहीं मुरझाते। इसी तरह बेलपत्र को स्टोर करने का नियम भी खास है। बाजार से लाए गए बेलपत्र को सबसे पहले साफ पानी से अच्छी तरह धो लें और फिर किसी सूती कपड़े पर फैलाकर पंखे की हवा में पूरी तरह सुखा लें। ध्यान रहे कि बेलपत्र की सतह पर पानी की एक भी बूंद नहीं रहनी चाहिए। पूरी तरह सूखने के बाद ही इन्हें कपड़े में लपेटकर किसी डिब्बे में रखें। यदि आप गीले बेलपत्र को सीधे किसी प्लास्टिक या कांच के डिब्बे में बंद कर देंगे, तो वे दो दिन के भीतर काले पड़ जाएंगे और सड़ने लगेंगे। कपूर, धूप और अगरबत्ती को सीलन से सुरक्षित रखने के उपाय कपूर एक ऐसी पूजा सामग्री है जो वातावरण की नमी को सबसे तेजी से सोखती है। खुले में रखे रहने पर कपूर की गोलियां धीरे-धीरे पिघलकर अपना आकार खो देती हैं और उनकी सुगंध भी कम हो जाती है। कपूर को हमेशा कांच या मजबूत प्लास्टिक के एयरटाइट डिब्बे में कसकर बंद करके रखना चाहिए। यही नियम धूपबत्ती और अगरबत्ती पर भी लागू होता है। अगरबत्ती के पैकेट को खुला छोड़ने के बजाय उसे किसी एयरटाइट डिब्बे के अंदर रखें। यदि आपके इलाके में सीलन बहुत ज्यादा है, तो डिब्बे के अंदर सिलिका जेल का एक छोटा पैकेट रख सकते हैं। सिलिका जेल डिब्बे के भीतर मौजूद सारी अतिरिक्त नमी को खुद सोख लेता है, जिससे अगरबत्ती और धूप हमेशा सूखी रहती हैं। सूखी हुई अगरबत्ती जलाने पर वह तुरंत जल उठती है और उसमें से निकलने वाला धुआं भी कम होता है। रोली, चंदन और हल्दी में गांठें बनने से कैसे रोकें पूजा में इस्तेमाल होने वाले पाउडर जैसे रोली, हल्दी, अक्षत और चंदन के पाउडर को नमी से बचाना बहुत जरूरी होता है। अक्सर देखा जाता है कि लोग जल्दबाजी में गीले हाथों से ही रोली या चंदन के डिब्बे में हाथ डाल देते हैं। इससे पाउडर के अंदर पानी चला जाता है और उसमें छोटी-छोटी सख्त गांठें बन जाती हैं। बाद में यह पूरा पाउडर खराब हो जाता है। इन पाउडर वाली सामग्रियों को हमेशा एक एकदम सूखे और साफ चम्मच की मदद से ही बाहर निकालें। इसके अलावा, इन डिब्बों को रखने की जगह का चुनाव भी सोच-समझकर करें। कई लोग पूजा घर का सामान रसोई की अलमारी में रख देते हैं, जहां खाना बनने की भाप या सिंक के आसपास की नमी आसानी से पहुंच जाती है। रोली, चंदन और हल्दी के डिब्बों को हमेशा किसी सूती कपड़े से पोंछकर पूजा घर की किसी बंद और सूखी अलमारी में ही स्थापित करें। रुई और दीपक की बाती की विशेष देखभाल अधिकांश घरों में रुई का बंडल या पहले से बनाकर रखी गई बाती को किसी खुली कटोरी या खुले डिब्बे में रख दिया जाता है। मानसून के दौरान हवा में मौजूद नमी रुई के धागों में समा जाती है। जब आप सीलन भरी बाती को तेल या घी में डुबोकर जलाते हैं, तो वह आसानी से आग नहीं पकड़ती। ऐसी बाती से बहुत अधिक धुआं निकलता है और दीपक जल्दी बुझ जाता है। इस समस्या से बचने के लिए रुई और तैयार बाती को हमेशा ढक्कन वाले प्लास्टिक या स्टील के डिब्बे में ही रखें। जब भी बाती निकालनी हो, डिब्बे का ढक्कन खोलें और बाती निकालकर तुरंत ढक्कन बंद कर दें। इससे रुई में हवा की नमी नहीं जा पाएगी और दीपक जलाते समय बाती तुरंत जल उठेगी। सूखे मेवे, मिश्री और भोग के प्रसाद का रख-रखाव रुद्राभिषेक और सावन सोमवार के व्रत में भगवान को भोग लगाने के लिए पंचमेवा, मखाना, किशमिश, बादाम और मिश्री का बड़ा भंडार खरीदकर रखा जाता है। इन सभी मेवों को एक साथ मिलाने के बजाय अलग-अलग एयरटाइट कंटेनर में रखना चाहिए। मखाना और किशमिश बहुत जल्दी हवा से नमी सोखते हैं, जिससे मखाना नरम पड़ जाता है और किशमिश चिपचिप करने लगती है। अलग डिब्बों में रखने से इनका स्वाद और कुरकुरापन लंबे समय तक कायम रहता है। इसके साथ ही, घर में बनाए जाने वाले ताजे प्रसाद जैसे हलवा, खीर या पेड़े को लंबे समय तक बाहर न छोड़ें। पूजा संपन्न होने के तुरंत बाद प्रसाद को बांट दें या ढककर सुरक्षित जगह पर रख दें, क्योंकि नमी के मौसम में पके हुए खाने में जीवाणु बहुत तेजी से पनपते हैं। टोकरी की सफाई और सामग्री रखने के लिए सही जगह का चुनाव पूजा सामग्री की सुरक्षा केवल डिब्बों तक सीमित नहीं है, बल्कि जिस टोकरी या थाली में आप सामान रखते हैं उसकी नियमित सफाई भी उतनी ही जरूरी है। हफ्ते में कम से कम एक बार पूजा की टोकरी को पोंछकर सुखाएं। यदि किसी डिब्बे के नीचे या टोकरी के कोने में थोड़ी भी नमी महसूस हो, तो सामग्री को बाहर निकालकर उस स्थान को पूरी तरह सुखाएं। किसी भी डिब्बे में हल्की सी भी फफूंदी दिखने पर उसे तुरंत साफ करें, अन्यथा वह फफूंदी बाकी सामान में भी फैल सकती है। इसके अलावा, घरों में पूजा का सामान अक्सर खिड़की या वेंटिलेटर के पास वाली शेल्फ पर रखा होता है। बारिश के दिनों में खिड़की से आने वाली ठंडी हवा और पानी की बौछारें सामान को नुकसान पहुंचाती हैं। पूजा सामग्री को हमेशा कमरे के उस हिस्से में रखें जो दीवार के अंदर बनी अलमारी में हो या जहां सीधी बारिश की हवा न आती हो। इस्तेमाल के तुरंत बाद हर डिब्बे का ढक्कन मजबूती से बंद करना न भूलें। इन छोटी-छोटी लेकिन बेहद कारगर आदतों को अपनाकर आप सावन के पूरे महीने अपनी पूजा सामग्री को सीलन से बचा सकते हैं और शुद्धता के साथ अपनी भक्ति जारी रख सकते हैं। इसका आप पर असर भारत भर के लिए: सावन में पूजा सामग्री को सही तरीके से स्टोर करने से सामान की बर्बादी रुकेगी और बार-बार बाजार जाने की जरूरत तथा अतिरिक्त खर्च से बचाव होगा। सवाल-जवाब 1. सावन में बेलपत्र को लंबे समय तक ताजा कैसे रखा जा सकता है? बेलपत्र को धोकर सूती कपड़े पर पूरी तरह सुखा लें, फिर उसे सूती कपड़े में लपेटकर फ्रिज के वेजिटेबल सेक्शन में रखें। 2. अगरबत्ती और कपूर को पिघलने या सीलन से कैसे बचाएं? कपूर और अगरबत्ती को हमेशा एयरटाइट डिब्बे में रखें और अतिरिक्त नमी सोखने के लिए डिब्बे के अंदर सिलिका जेल का छोटा पैकेट रख दें। 3. पूजा की रोली और चंदन में गांठें क्यों बनती हैं? गीले हाथों का इस्तेमाल करने या डिब्बे को रसोई की भाप के पास रखने से नमी अंदर चली जाती है, जिससे रोली और चंदन में गांठें बनने लगती हैं। 4. मानसून के दौरान दीये की बाती आसानी से क्यों नहीं जलती? खुली जगह पर रखी रुई हवा की नमी सोख लेती है। रुई और बाती को हमेशा ढक्कन वाले बंद डिब्बे में रखने से यह समस्या नहीं होती। https://trendkia.com/lifestyle/monsoon-puja-samagri-care-guide-how-to-keep-worship-items-fresh-and-damp-free-during-sawan-13563 TrendKia — Har trend, sabse pehle.