# नवरात्रि व्रत में बनाएं आलू का हलवा और चटपटे नमकीन आलू, धौलपुर की महिलाओं ने साझा की पारंपरिक रेसिपी

> नवरात्रि उपवास के दौरान ऊर्जा और स्वाद बनाए रखने के लिए धौलपुर के ग्रामीण इलाकों में आलू से बने सात्विक व्यंजन खूब पसंद किए जा रहे हैं।

**Type:** article · **Category:** जीवनशैली · **Published:** 2026-10-12 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/lifestyle/navaratri-vrata-men-banaen-alu-ka-halava-aura-chatapate-namakina-alu-dholpur-ki-mahilaon-ne-sajha-ki-parnparika-resipi-46656 · **Language:** Hindi
**Tags:** नवरात्रि रेसिपी, व्रत का खाना, फलाहार, आलू का हलवा, धौलपुर, सात्विक भोजन

नवरात्रि के पावन अवसर पर नौ दिनों तक देवी दुर्गा की उपासना के साथ खानपान के नियमों का पालन करना श्रद्धालुओं की दिनचर्या का अहम हिस्सा बन जाता है। इस दौरान उपवास रखने वाले लोग ऐसे सात्विक आहार की तलाश में रहते हैं जो पौष्टिक होने के साथ तुरंत ऊर्जा भी प्रदान करे। राजस्थान के धौलपुर जिले के ग्रामीण इलाकों में फलाहार के रूप में आलू से तैयार होने वाले दो पारंपरिक पकवान विशेष रूप से बनाए जाते हैं। इनमें पहला मीठा आलू का हलवा है और दूसरा चटपटा नमकीन आलू, जिन्हें तैयार करने में न तो अधिक समय लगता है और न ही बहुत ज्यादा सामग्री की आवश्यकता होती है।

## झटपट तैयार करें चटपटे नमकीन आलू
उपवास के दिनों में नमकीन और हल्का तीखा स्वाद पसंद करने वालों के लिए यह एक बेहद सरल व्यंजन है। धौलपुर की गृहिणी प्रभा शर्मा के मुताबिक, इसे बनाने के लिए सबसे पहले आलुओं को अच्छी तरह साफ पानी से धोकर प्रेशर कुकर में रख लें। कुकर में दो सीटी आने तक आलुओं को उबालें, जिससे वे अंदर तक पक जाएं लेकिन अधिक गलें नहीं। जब आलू ठंडे हो जाएं, तो उनके छिलके उतार लें और हर आलू को चाकू की मदद से चार बराबर टुकड़ों में काट लें।

इसके बाद गैस पर कढ़ाई चढ़ाएं और उसमें चार चम्मच शुद्ध देसी घी डालकर गर्म करें। घी पिघलने पर उसमें कटे हुए उबले आलू डाल दें। अब इसमें स्वादानुसार सेंधा नमक और ताजी कुटी हुई काली मिर्च का पाउडर मिलाएं। सभी चीजों को करछुल से अच्छी तरह चलाएं ताकि नमक और मिर्च आलुओं पर समान रूप से लिपट जाएं। इसके बाद कढ़ाई को ढक्कन से ढक दें और मध्यम आंच पर लगभग तीन मिनट तक पकने दें। तय समय बाद ढक्कन हटाएं, आपके गरमागरम चटपटे नमकीन आलू परोसने के लिए तैयार हैं, जिन्हें परिवार के सभी सदस्य चाव से खा सकते हैं।

## व्रत में ऊर्जा देने वाला स्वादिष्ट आलू का हलवा
उपवास के दौरान यदि कुछ मीठा और शरीर को तुरंत स्फूर्ति देने वाला फलाहार चाहिए, तो आलू का हलवा एक उम्दा विकल्प साबित होता है। इसे बनाने की शुरुआत भी उबले हुए आलुओं से होती है। उबले हुए आलुओं को छीलकर किसी बर्तन में हाथ या मैशर की सहायता से पूरी तरह महीन मैश कर लें, जिससे उसमें कोई बड़ी गांठ न बचे।

अब एक कढ़ाई में चार से पांच चम्मच शुद्ध देसी घी गर्म करें। जब घी अच्छी तरह गर्म हो जाए, तब मैश किया हुआ आलू कढ़ाई में डालें। गैस की आंच धीमी रखें और आलू को लगातार चलाते हुए भूनें, जिससे वह कढ़ाई की तली में चिपककर जले नहीं। धीमी आंच पर करीब पांच मिनट तक भूनने के बाद जब आलू घी सोखकर सिकने लगे, तब उसमें स्वादानुसार चीनी मिला दें। चीनी डालने के बाद मिश्रण को तब तक चलाते रहें जब तक उसका रंग हल्का सुनहरा न हो जाए। जैसे ही हलवे से भीनी-भीनी सौंधी खुशबू आने लगे, समझ लीजिए कि सात्विक आलू का हलवा बनकर तैयार हो चुका है।

## सात्विक भोजन और पारिवारिक परंपराएं
धौलपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में लोक मान्यता है कि व्रत का आहार न केवल सात्विक होना चाहिए, बल्कि वह सुपाच्य भी होना आवश्यक है ताकि दिनभर पेट हल्का महसूस हो। इन दोनों ही पकवानों में इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री शरीर को तत्काल पोषण और ताकत देती है। गृहिणी प्रभा शर्मा का कहना है कि व्रत के फलाहार में नमक अथवा मसालों का चुनाव करते समय हर श्रद्धालु को अपने परिवार की मान्यताओं और कुल परंपराओं का अवश्य ध्यान रखना चाहिए। रसोई में कम खर्च और कम मेहनत में तैयार होने वाले ये दोनों व्यंजन नवरात्रि के नौ दिनों को स्वाद और सेहत दोनों से भरपूर बना देते हैं।

## इसका आप पर असर
नवरात्रि के दौरान उपवास रखने वाले लोगों के लिए घर पर कम खर्च और कम समय में पौष्टिक फलाहार तैयार करना काफी आसान हो जाएगा।

- **भारत में:** उपवास रखने वाले श्रद्धालुओं को बाजार के महंगे फलाहार पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। वे घर पर उपलब्ध साधारण आलू, घी और सेंधा नमक से तुरंत ऊर्जा देने वाला सात्विक भोजन बना सकते हैं।
- **धौलपुर में:** स्थानीय ग्रामीण रसोई की पारंपरिक पाक विधियों को पहचान मिलेगी। नई पीढ़ी की महिलाएं भी पारंपरिक नियमों और पारिवारिक मान्यताओं के अनुसार आसानी से व्रत के व्यंजन बना सकेंगी।
- **रसोई के बजट पर:** यह विधि उपवास के दौरान रसोई खर्च को काफी नियंत्रित रखती है। कम सामग्री में बनने के कारण यह हर वर्ग के परिवारों के लिए बेहद किफायती साबित होती है।
- **समय की बचत:** व्यस्त दिनचर्या में पूजा-पाठ के बीच खाना बनाने में घंटों नहीं बिताने पड़ेंगे। दोनों व्यंजन कुछ ही मिनटों में तैयार होकर दिनभर के लिए ऊर्जा प्रदान करते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
धौलपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में नवरात्रि उपवास के दौरान आलू आधारित व्यंजनों को प्राथमिकता मिलने के पीछे पोषण, परंपरा और सुलभता से जुड़े कारण हैं।

- **तुरंत ऊर्जा की आवश्यकता:** उपवास के समय दिनभर बिना अन्न के रहने से शरीर में कमजोरी महसूस होती है। आलू और शुद्ध घी का मेल शरीर को तत्काल आवश्यक कार्बोहाइड्रेट और ऊर्जा प्रदान करता है।
- **सुलभता और कम लागत:** ग्रामीण घरों में आलू और घी आसानी से उपलब्ध रहने वाली बुनियादी सामग्रियां हैं। बिना अतिरिक्त बाजार खर्च के इन्हें तुरंत तैयार किया जा सकता है।
- **पाचन में सुगमता:** व्रत का आहार सुपाच्य और सात्विक होना आवश्यक माना जाता है। उबले आलू और काली मिर्च पेट के लिए हल्के होते हैं और पाचन तंत्र पर भारी दबाव नहीं डालते।

## सवाल-जवाब

### 1. नमकीन आलू बनाने के लिए आलू को कितनी सीटी तक उबालना चाहिए?
प्रेशर कुकर में आलुओं को मध्यम आंच पर दो सीटी आने तक उबालना चाहिए।

### 2. नमकीन आलू में कौन-से मसाले डाले जाते हैं?
इसमें शुद्ध देसी घी के साथ केवल स्वादानुसार सेंधा नमक और कुटी हुई काली मिर्च मिलाई जाती है।

### 3. आलू का हलवा बनाते समय घी में आलू को कितनी देर भूनना चाहिए?
मैश किए हुए आलू को धीमी आंच पर लगातार चलाते हुए लगभग पांच मिनट तक भूनना चाहिए।

### 4. हलवा पूरी तरह तैयार होने की क्या पहचान है?
जब मिश्रण का रंग हल्का सुनहरा हो जाए और उससे भीनी सुगंध आने लगे, तब हलवा तैयार माना जाता है।

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