# नीम और तुलसी के पत्तों से घर पर बनाएं पशुओं के लिए हर्बल स्प्रे, मच्छर-मक्खियों से मिलेगा तुरंत आराम

> मिर्जापुर के पशुपालक गगन उपाध्याय ने बताया कि नीम और तुलसी की पत्तियों को उबालकर बिना किसी खर्च के सुरक्षित स्प्रे बनाया जा सकता है, जिससे पशुओं की त्वचा को नुकसान पहुंचाए बिना कीट दूर रहते हैं।

**Type:** article · **Category:** जीवनशैली · **Published:** 2026-11-01 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/lifestyle/neem-aura-tulsi-ke-patton-se-ghara-para-banaen-pashuon-ke-lie-harbala-spre-machchhara-makkhiyon-se-milega-turnta-arama-54539 · **Language:** Hindi
**Tags:** पशुपालन, देसी नुस्खे, नीम के फायदे, तुलसी अर्क, मच्छर मक्खी स्प्रे, मिर्जापुर किसान

डेयरी और पशुपालन में मवेशियों को सबसे अधिक परेशानी कीड़े, मक्खियों और मच्छरों के प्रकोप से झेलनी पड़ती है। इन कीटों के लगातार काटने और डंक मारने के कारण पशु बेचैन रहते हैं और कई बार गंभीर संक्रामक बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं। आमतौर पर पशुपालक इनसे निपटने के लिए बाजार से महंगे केमिकल युक्त पाउडर या स्प्रे खरीदकर लाते हैं, लेकिन यह रासायनिक उत्पाद पशुओं के स्वास्थ्य और उनकी त्वचा के लिए हानिकारक साबित हो सकते हैं। इन समस्याओं से बचाने के लिए घर पर ही प्राकृतिक और देसी तरीके से ऐसा स्प्रे तैयार किया जा सकता है, जो बिना किसी खर्च के मात्र 10 से 15 मिनट में बनकर तैयार हो जाता है। यह देसी उपाय न सिर्फ कीटों को भगाता है बल्कि पशुओं की त्वचा को भी पूरी तरह सुरक्षित रखता है।

## सामग्री और पत्तों का अनुपात
मिर्जापुर के पशुपालक गगन उपाध्याय ने इस देसी स्प्रे को बनाने की पूरी प्रक्रिया साझा की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि घर पर तैयार होने वाले इस हर्बल लिक्विड के लिए मुख्य रूप से नीम और तुलसी की पत्तियों की आवश्यकता होती है। अगर आप सामान्य मात्रा में स्प्रे तैयार करना चाहते हैं, तो लगभग एक मुट्ठी ताजी तुलसी और एक मुट्ठी नीम के पत्ते पर्याप्त होते हैं। वहीं यदि किसी को एक बड़ी स्प्रे बोतल भरकर घोल तैयार करना है, तो उसके लिए करीब 250 ग्राम पत्तियों का उपयोग करना सही रहता है। इन दोनों औषधीय पौधों के प्राकृतिक गुण कीटों को दूर रखने में बेहद कारगर माने जाते हैं।

## उबालने और छानने का सरल तरीका
इस स्प्रे को तैयार करने की विधि बेहद आसान है। सबसे पहले एक बर्तन या भगोना लें और उसमें आवश्यकतानुसार पानी भरें। पानी की मात्रा इतनी रखी जानी चाहिए कि नीम और तुलसी के पत्ते उसमें पूरी तरह से डूब जाएं। इसके बाद पत्तियों को पानी में डालकर चूल्हे या गैस पर अच्छी तरह गर्म करें। इस मिश्रण को तब तक पकाना है जब तक कि पानी में पूरी तरह से उबाल न आ जाए। उबाल आने के बाद बर्तन को आंच से उतारकर सामान्य तापमान पर ठंडा होने के लिए रख दें। जब यह काढ़ा ठंडा हो जाए, तो एक छन्नी के सहारे पत्तियों को छानकर अलग कर लें। छनने के बाद जो पानी बचता है, वही पशुओं के लिए असरदार प्राकृतिक स्प्रे है।

## छिड़काव का तरीका और इसके फायदे
तैयार हुए इस औषधीय पानी को किसी भी साधारण स्प्रे बोतल में भर लें। इसके बाद इसे पशुओं के शरीर पर ऊपर से आसानी से छिड़का जा सकता है। गगन उपाध्याय के अनुसार इस प्राकृतिक तरल की कोई निश्चित एक्सपायरी डेट नहीं होती है, इसलिए जब तक यह बोतल में समाप्त न हो जाए, तब तक इसका नियमित इस्तेमाल बेझिझक किया जा सकता है। तुलसी और नीम के पत्तों के अर्क से निकलने वाली तेज प्राकृतिक महक के कारण मक्खियां और मच्छर पशुओं के पास नहीं फटकते हैं और न ही उन्हें काट पाते हैं। इससे पशु शांत और सुरक्षित रहते हैं, जिससे वे कीट-जनित गंभीर बीमारियों से भी बचे रहते हैं।

## इसका आप पर असर
यह घरेलू नुस्खा पशुपालकों को बिना किसी लागत के मवेशियों को गंभीर बीमारियों से बचाने का सीधा और सुरक्षित साधन देता है।

- **लागत में बचत:** बाजार में मिलने वाले महंगे रासायनिक स्प्रे और पाउडर की जगह यह घोल पूरी तरह मुफ्त में तैयार हो जाता है। इससे छोटे और सीमांत डेयरी किसानों का नियमित कीटनाशक खर्च शून्य हो जाता है।
- **स्वास्थ्य और त्वचा सुरक्षा:** रसायनों के अभाव के कारण यह स्प्रे पशुओं की चमड़ी पर जलन या एलर्जी पैदा नहीं करता। मवेशी बिना किसी साइड इफेक्ट के लगातार इस्तेमाल के बावजूद सुरक्षित रहते हैं।
- **बीमारियों से रोकथाम:** मच्छरों और मक्खियों के डंक से फैलने वाली गंभीर संक्रामक बीमारियों का खतरा खत्म हो जाता है। पशु तनावमुक्त रहते हैं, जिससे उनका खानपान और दूध उत्पादन प्रभावित नहीं होता।
- **इस्तेमाल में सुगमता:** इस हर्बल घोल को 10 से 15 मिनट में उबालकर बनाया जा सकता है और इसकी कोई एक्सपायरी तारीख नहीं होती। इसे बोतल में भरकर खत्म होने तक किसी भी मौसम में इस्तेमाल किया जा सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
गर्म और नम मौसम में मवेशी बाड़ों में पनपने वाले परजीवियों से निपटने के लिए किसान अक्सर महंगे और हानिकारक रसायनों पर निर्भर रहते हैं। इसी समस्या के सुरक्षित विकल्प के तौर पर इस पारंपरिक घोल की जरूरत समझी गई।

- **कीटों का प्रकोप और बीमारियां:** पशु बाड़ों में मक्खी और मच्छरों का निरंतर डंक पशुओं को कमजोर करता है और गंभीर बीमारियां फैलाता है। रासायनिक उत्पाद पशुओं के स्वास्थ्य पर विपरीत असर डालते हैं, इसलिए प्राकृतिक समाधान तलाशा गया।
- **नीम और तुलसी के प्राकृतिक गुण:** नीम और तुलसी दोनों ही अपने कड़वे तत्व और तेज गंध के कारण जाने जाते हैं। उबालने पर इनका अर्क पानी में घुलकर कीड़ों को दूर भगाने वाली एक सशक्त गंध छोड़ता है।
- **सुलभता और शून्य लागत:** ग्रामीण क्षेत्रों में नीम और तुलसी के पत्ते आसानी से उपलब्ध होते हैं। 10 से 15 मिनट की सामान्य उबाल प्रक्रिया से बिना किसी तकनीकी उपकरण के इसे तैयार किया जा सकता है।

## सवाल-जवाब

### 1. इस देसी स्प्रे को बनाने के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?
इसके लिए केवल नीम और तुलसी की पत्तियों तथा साधारण पानी की आवश्यकता होती है।

### 2. स्प्रे तैयार करने में कितना समय लगता है?
इस पूरे काढ़े को उबालने और तैयार करने में केवल 10 से 15 मिनट का समय लगता है।

### 3. एक बड़ी स्प्रे बोतल के लिए कितनी पत्तियों की जरूरत होगी?
एक बड़ी बोतल घोल तैयार करने के लिए लगभग 250 ग्राम पत्तियों की जरूरत पड़ती है।

### 4. क्या इस घरेलू स्प्रे की कोई एक्सपायरी तारीख होती है?
नहीं, इस प्राकृतिक लिक्विड की कोई एक्सपायरी डेट नहीं है और इसे बोतल खत्म होने तक छिड़का जा सकता है।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._