पानी की खाली बोतल से सिर्फ सात रुपये में बनाएं फल मक्खी ट्रैप, बागवानी और सब्जियों की फसल को कीटों से बचाएगा यह देसी नुस्खा मिर्जापुर के किसान योगेंद्र कुमार सिंह ने बेकार पड़ी प्लास्टिक बोतलों और मिथाइल यूजीनॉल की मदद से किफायती कीट ट्रैप तैयार किया है, जिससे बाजार के महंगे फेरोमोन ट्रैप पर होने वाले हजारों रुपये बचेंगे। मिर्जापुर जिले के किसानों के लिए फल और सब्जियों की खेती में फल मक्खी कीट एक गंभीर चुनौती बन चुका है। कद्दू वर्गीय सब्जियों और खट्टे फलों के बागों में यह कीट फसलों को भारी नुकसान पहुंचाता है। कीटों के डंक मारने से फल सड़ने लगते हैं और उत्पादन में तेज गिरावट आती है। इस प्राकृतिक संकट से निपटने के लिए कृषि विशेषज्ञ आमतौर पर खेतों में फेरोमोन ट्रैप लगाने की सलाह देते हैं। बाजार में मिलने वाले ये ट्रैप काफी महंगे होते हैं, जिससे छोटे और सीमांत किसानों की खेती की लागत अचानक बढ़ जाती है। इसी अतिरिक्त आर्थिक बोझ को कम करने के लिए मिर्जापुर के किसान योगेंद्र कुमार सिंह ने घर पर ही कबाड़ की मदद से एक बेहद सस्ता और असरदार देसी ट्रैप विकसित किया है। सब्जियों और बागवानी पर फल मक्खी का बढ़ता हमला वर्तमान समय में इलाके के किसान बड़े पैमाने पर सब्जियों की खेती कर रहे हैं। खेतों में कोहड़ा, लौकी, खीरा और ककड़ी जैसी लता वाली फसलें लगी हुई हैं। इसके साथ ही बागवानी करने वाले किसान मुसंबी, संतरा और नींबू जैसे नींबू वर्गीय फलों की पैदावार ले रहे हैं। मौसम के बदलाव के साथ ही इन सभी फसलों पर फल मक्खी कीटों का प्रकोप अत्यधिक बढ़ गया है। यह कीट कोमल फलों में छेद करके अंडे दे देता है, जिससे फल भीतर से नष्ट हो जाते हैं और बाजार में बेचने लायक नहीं रहते। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार इस कीट के जीवन चक्र को तोड़ने के लिए खेतों में मक्खी ट्रैप लगाना सबसे सुरक्षित उपाय माना जाता है। योगेंद्र कुमार सिंह के अनुसार सामान्य तौर पर बाजार में उपलब्ध एक फल मक्खी ट्रैप करीब 90 से 100 रुपये में बिकता है। यदि किसी किसान को अपने पूरे खेत या बगीचे में दर्जनों ट्रैप लगाने हों, तो उसका बजट हजारों रुपये तक पहुंच जाता है। वैज्ञानिक सिद्धांत और कीट नियंत्रण की देसी तकनीक बाजार में मिलने वाले वाणिज्यिक ट्रैप में एक खास ल्यूर यानी गंध वाली टिकिया लगी होती है, जिसमें मिथाइल यूजीनॉल नाम का रसायन होता है। योगेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि इस दवा की महक से केवल नर कीट आकर्षित होते हैं। जब नर मक्खियां ट्रैप के भीतर पहुंचती हैं, तो वे उसमें फंस जाती हैं। नर कीटों के नष्ट हो जाने से मादा मक्खियों का प्रजनन रुक जाता है और खेत में उनकी आबादी तेजी से घट जाती है। योगेंद्र ने इसी वैज्ञानिक सिद्धांत को अपनाते हुए घरेलू स्तर पर बेहद कम लागत में समाधान निकाला। बाजार के महंगे सांचे की जगह उन्होंने बेकार पड़ी प्लास्टिक की पानी की बोतलों का उपयोग किया। जहां बाजार का एक ट्रैप 100 रुपये का पड़ता है, वहीं घर पर तैयार किए गए इस देसी मॉडल की प्रति यूनिट लागत मात्र 5 से 7 रुपये बैठती है। घर पर बोतल से कीट ट्रैप तैयार करने की सरल विधि इस देसी फल मक्खी ट्रैप को बनाने के लिए किसी खास उपकरण की जरूरत नहीं पड़ती। योगेंद्र कुमार सिंह ने इसे तैयार करने की पूरी विधि साझा की • सामग्री का चुनाव: किसान पानी की पुरानी खाली बोतल ले सकते हैं। यदि प्लास्टिक की बोतल उपलब्ध न हो, तो बिस्कुट का खाली प्लास्टिक डब्बा भी इस्तेमाल किया जा सकता है। • हवा और प्रवेश के लिए छेद: सबसे पहले बोतल या डब्बे के ढक्कन में एक छेद करें। इसके बाद बोतल के ऊपरी और मध्य हिस्से में अलग-अलग जगहों पर 5 से 8 छोटे छेद बना दें, जिनसे मक्खियां भीतर प्रवेश कर सकें। • रुई और दवा लगाना: एक पतले लकड़ी के टुकड़े की मदद से बोतल के भीतर रुई का फाहा फंसा दें। इसके बाद उसी रुई पर मिथाइल यूजीनॉल दवा की लगभग 5 बूंदें टपका दें। • लटकाने की व्यवस्था: दवा डालने के बाद ढक्कन को अच्छी तरह बंद कर दें और बोतल को धागे या पतले तार के सहारे पौधे या मचान पर लटका दें। जैसे ही बोतल में मौजूद दवा की गंध बाहर फैलती है, नर कीट छेदों के रास्ते अंदर दाखिल हो जाते हैं और ढक्कन बंद होने के कारण बाहर नहीं निकल पाते। हजारों रुपये की बचत और जबरदस्त परिणाम इस नवाचार की सबसे बड़ी खूबी इसका किफायती होना है। बाजार में मिथाइल यूजीनॉल की 25 एमएल की शीशी करीब 200 रुपये में मिल जाती है। योगेंद्र कुमार सिंह के आकलन के अनुसार 200 रुपये की इस 25 एमएल दवा से लगभग 50 देसी ट्रैप आसानी से तैयार किए जा सकते हैं। यदि कोई किसान बाजार से 50 रेडीमेड ट्रैप खरीदता है, तो उसे लगभग 5000 रुपये खर्च करने पड़ेंगे। वहीं घर पर खाली डब्बे, घर में उपलब्ध तार और 200 रुपये की दवा से किसान पूरा काम कर लेते हैं। योगेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि यह देसी जुगाड़ खेत में बेहद तगड़ा काम करता है और बाजार के महंगे उत्पादों की तुलना में किसानों के लिए कहीं अधिक फायदेमंद साबित हो रहा है। इसका आप पर असर इस देसी तकनीक से छोटे किसान और बागवान बेहद कम खर्च में अपनी फसल को फल मक्खी के नुकसान से बचा सकते हैं। • खर्च में कटौती: 50 वाणिज्यिक ट्रैप खरीदने पर जहां 5,000 रुपये खर्च होते हैं, वहीं इस विधि से मात्र 200 रुपये की दवा में 50 ट्रैप तैयार हो जाते हैं। इससे प्रत्येक किसान के सीधे 4,800 रुपये तक बचते हैं। • फसल की सुरक्षा: लौकी, कद्दू, खीरा, ककड़ी और नींबू वर्गीय फलों में मक्खी द्वारा होने वाले नुकसान में भारी कमी आएगी। फल सड़ने से बचेंगे और बाजार में उपज का बेहतर भाव मिलेगा। • सामग्री की उपलब्धता: इसे बनाने के लिए केवल घर में पड़ी खाली पानी की बोतल, बिस्कुट का डब्बा, रुई और तार की आवश्यकता होती है। किसान बिना किसी तकनीकी सहायता के इसे स्वयं 10 मिनट में बना सकते हैं। • पर्यावरण अनुकूल: कीटनाशकों का अंधाधुंध छिड़काव करने के बजाय फेरोमोन ट्रैप से नर कीटों का प्राकृतिक नियंत्रण होता है। इससे फलों में जहरीले रासायनिक अवशेष नहीं रहते। ऐसा क्यों हुआ मिर्जापुर में सब्जियों और फलों की फसलों पर फल मक्खियों के बढ़ते प्रकोप और बाजार में मिलने वाले महंगे कीटनाशक ट्रैप के चलते किसान ने यह विकल्प निकाला। • अनुकूल मौसम में कीटों का प्रसार: वर्तमान मौसम में ककड़ी, खीरा, लौकी और नींबू वर्गीय फलों की पैदावार के दौरान फल मक्खियों की सक्रियता अत्यधिक बढ़ जाती है। यह कीट फलों की सतह में छेद कर अंडे देते हैं, जिससे पूरी फसल नष्ट हो जाती है। • व्यावसायिक उत्पादों की ऊंची कीमत: कृषि विशेषज्ञ फसलों को बचाने के लिए फेरोमोन ट्रैप की सलाह देते हैं, लेकिन बाजार में एक ट्रैप 90 से 100 रुपये का आता है। बड़े भूभाग में ट्रैप लगाना छोटे किसानों के लिए आर्थिक रूप से कठिन था। • समान रासायनिक सिद्धांत की पहचान: किसान ने पाया कि बाजार के महंगे सांचे का मुख्य घटक केवल मिथाइल यूजीनॉल दवा है। अतः बेकार बोतलों में इस गंध का उपयोग कर घर पर ही नर कीटों को आकर्षित कर नष्ट करने का रास्ता निकाला गया। सवाल-जवाब 1. फल मक्खी ट्रैप बनाने में कितना खर्च आता है? घर पर बोतल से एक देसी ट्रैप बनाने में करीब 5 से 7 रुपये का खर्च आता है, जबकि बाजार में यह 90 से 100 रुपये में मिलता है। 2. देसी ट्रैप बनाने के लिए किन चीजों की आवश्यकता होती है? इसके लिए पानी की खाली प्लास्टिक बोतल या बिस्कुट का डब्बा, लकड़ी का टुकड़ा, रुई, तार और मिथाइल यूजीनॉल दवा की जरूरत होती है। 3. मिथाइल यूजीनॉल दवा बाजार में किस कीमत पर मिलती है? मिथाइल यूजीनॉल की 25 एमएल की शीशी बाजार में लगभग 200 रुपये में मिलती है। 4. 200 रुपये की दवा से कितने ट्रैप बनाए जा सकते हैं? 25 एमएल मिथाइल यूजीनॉल की मदद से किसान लगभग 50 देसी फल मक्खी ट्रैप तैयार कर सकते हैं। 5. यह ट्रैप फल मक्खी को कैसे नियंत्रित करता है? दवा की गंध से आकर्षित होकर नर मक्खियां बोतल के अंदर चली जाती हैं और फंस जाती हैं, जिससे कीटों का प्रजनन रुक जाता है। 6. यह देसी ट्रैप किन फसलों के लिए सबसे ज्यादा उपयोगी है? यह कोहड़ा, लौकी, खीरा, ककड़ी जैसी सब्जियों तथा संतरा, मुसंबी और नींबू जैसे फलों के लिए बेहद उपयोगी है। प्रेरणा और सबक मिर्जापुर के किसान योगेंद्र कुमार सिंह की यह पहल दिखाती है कि व्यावहारिक सूझबूझ और वैज्ञानिक समझ से खेती के बड़े खर्चे घटाए जा सकते हैं। • समस्या का व्यावहारिक समाधान: महंगे बाजारू उत्पादों पर निर्भर रहने के बजाय किसान ने घर के कबाड़ और बुनियादी विज्ञान का इस्तेमाल कर स्वयं उपाय तैयार किया। • लागत घटाने की सोच: खेती में केवल उत्पादन बढ़ाना ही नहीं, बल्कि उत्पादन लागत को न्यूनतम करना भी मुनाफे की कुंजी है। • संसाधनों का पुनर्चक्रण: प्लास्टिक की फेंकी जाने वाली पानी की बोतलों का दोबारा उपयोग कर पर्यावरण संरक्षण और खेती दोनों को साधा गया। https://trendkia.com/lifestyle/pani-ki-khali-botal-se-sirf-sat-rupaye-mein-banaye-fal-makkhi-trap-bagwani-aur-sabjiyon-ki-fasal-ko-keeton-se-bachayega-yeh-desi-n-37524 TrendKia — Har trend, sabse pehle.