पौधों में चावल का पानी डालना पड़ सकता है भारी, जानिए इसके नुकसान पौधों की देखभाल के लिए चावल धोने के पानी का इस्तेमाल इन दिनों काफी आम हो गया है, लेकिन इसका जरूरत से ज्यादा या गलत तरीके से उपयोग पौधों की सेहत बिगाड़ सकता है। घरों में गार्डनिंग का शौक रखने वाले लोग अक्सर पौधों की ग्रोथ बेहतर बनाने के लिए तरह-तरह के घरेलू नुस्खे आजमाते हैं। आजकल पौधों में चावल धोने का पानी डालने का चलन काफी बढ़ गया है। चूंकि इस पानी में स्टार्च और कुछ मात्रा में पोषक तत्व पाए जाते हैं, इसलिए कई लोग इसे पौधों के लिए किसी टॉनिक की तरह इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, हर प्राकृतिक चीज की तरह इसका भी अतिरेक पौधों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। विशेष रूप से गमलों में बार-बार चावल का पानी डालने से मिट्टी में जरूरत से ज्यादा नमी ठहर जाती है, जिससे पौधों की जड़ों को गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। जड़ों की सेहत पर पड़ता है बुरा असर ऋषिकेश में नर्सरी चलाने वाले गार्डनर राम सागर का कहना है कि चावल के पानी का सबसे बड़ा जोखिम इसके अत्यधिक इस्तेमाल से जुड़ा हुआ है। लगातार इस पानी को डालते रहने से गमले की मिट्टी को सूखने का मौका नहीं मिलता है। पौधों की सेहतमंद ग्रोथ के लिए उनकी जड़ों को केवल पानी ही नहीं, बल्कि सांस लेने के लिए पर्याप्त हवा की भी आवश्यकता होती है। जब मिट्टी हमेशा गीली बनी रहती है, तो जड़ों में सड़न की समस्या पैदा हो सकती है। इसके परिणामस्वरुप पौधे की पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं और उनका विकास भी धीमा हो जाता है। इसलिए इसे हर रोज डालने की गलती बिल्कुल न करें। फफूंद और मिट्टी की गुणवत्ता से जुड़ी समस्याएं चावल धोने के पानी में प्राकृतिक रूप से स्टार्च मौजूद होता है। यदि इस पानी को बार-बार मिट्टी में डाला जाए, तो वहां जैविक पदार्थों की मात्रा अत्यधिक बढ़ जाती है। कई बार इसके कारण मिट्टी की सतह पर फफूंद जैसी सफेद परत भी दिखाई देने लगती है। हालांकि यह परत हर बार खतरनाक नहीं होती, लेकिन इसका लगातार बढ़ना इस बात का संकेत है कि गमले में नमी और जैविक कचरा जरूरत से ज्यादा जमा हो रहा है। ऐसी स्थिति नजर आने पर इस पानी का प्रयोग तुरंत रोक देना समझदारी होगी। किन बातों का रखना चाहिए विशेष ख्याल इस बात का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है कि चावल धोने का हर प्रकार का पानी पौधों के लिए उपयुक्त नहीं होता है। यदि उस पानी में किसी भी तरह का नमक, मसाले, तेल या साबुन जैसी चीजें मिली हुई हैं, तो उसे भूलकर भी गमले में न डालें। इस तरह के तत्व मिट्टी की प्राकृतिक गुणवत्ता को पूरी तरह बिगाड़ सकते हैं और पौधों की नाजुक जड़ों को जला सकते हैं। पौधों के लिए हमेशा वही पानी इस्तेमाल करें जिसमें केवल सादे और कच्चे चावल धोए गए हों। साफ-सुथरा पानी देना ही सबसे सुरक्षित तरीका माना जाता है। छोटे गमलों में पानी का जमाव छोटे आकार के गमलों में चावल का पानी डालते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है। बड़े गमलों के मुकाबले छोटे गमलों की मिट्टी में पानी बहुत जल्दी और ज्यादा मात्रा में एकत्र हो जाता है। यदि गमले के तल में पानी निकासी के लिए पर्याप्त छेद नहीं है, तो स्थिति और भी बिगड़ सकती है। पानी रुका रहने से जड़ों के आसपास नमी स्थायी हो जाती है। इसलिए किसी भी प्रकार का घरेलू तरल देने से पहले गमले के ड्रेनेज सिस्टम की जांच जरूर कर लेनी चाहिए। मिट्टी से आने वाली गंध और बचाव के उपाय चावल का पानी डालने के बाद यदि गमले की मिट्टी से किसी तरह की अजीब या सड़ी हुई गंध आने लगे, तो उसे कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह बदबू इस बात का स्पष्ट संकेत होती है कि गमले में नमी बहुत ज्यादा है या वहां अत्यधिक जैविक पदार्थ सड़ रहे हैं। ऐसी स्थिति उत्पन्न होने पर कुछ दिनों के लिए चावल का पानी देना पूरी तरह बंद कर दें और मिट्टी को अच्छी तरह सूखने दें। यदि गमले में पानी भरा हुआ है, तो उसे बाहर निकालने की तुरंत व्यवस्था करें। साथ ही पौधे की ओवरऑल स्थिति पर भी पैनी नजर रखें। हर पौधे की जरूरत होती है अलग यह बिल्कुल भी आवश्यक नहीं है कि हर पौधे को चावल का पानी पसंद ही आए। अलग-अलग प्रजाति के पौधों को पानी और मिट्टी की जरूरतें अलग-अलग होती हैं। कुछ पौधों को सूखी मिट्टी पसंद होती है, जबकि कुछ को हल्की नमी की दरकार होती है। ऐसे पौधों में बार-बार चावल का पानी डालना उनके लिए हानिकारक साबित हो सकता है। यदि आप पहली बार इसका इस्तेमाल कर रहे हैं, तो बेहद कम मात्रा से शुरुआत करें। पौधे की पत्तियों और उसकी ग्रोथ पर लगातार नजर रखें और कोई भी परेशानी दिखने पर इसका प्रयोग तुरंत बंद कर दें। संतुलित देखभाल है सबसे जरूरी चावल धोने का पानी पूरी तरह से बेकार नहीं है, लेकिन इसे किसी चमत्कारिक खाद समझकर रोजमर्रा की आदत बना लेना गलत है। यदि आप इसका उपयोग करना चाहते ही हैं, तो सादे चावल का साफ पानी लें, उसे पूरी तरह ठंडा होने दें और कभी-कभार ही मिट्टी में डालें। सबसे अहम बात यह है कि गमले में जलभराव न होने पाए। पौधों की बेहतर और स्वस्थ ग्रोथ के लिए केवल घरेलू नुस्खों पर ही पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय पर्याप्त धूप, सही प्रकार की मिट्टी, नियमित पानी और जरूरत के मुताबिक असली खाद का भी पूरा ध्यान रखना चाहिए। इसका आप पर असर भारत में: घरों में गार्डनिंग करने वाले लोगों को पौधों में घरेलू पानी या खाद का इस्तेमाल करते समय सही मात्रा और नियमों का ध्यान रखना चाहिए ताकि पौधे खराब न हों। सवाल-जवाब 1. क्या पौधों में रोज चावल का पानी डालना चाहिए? नहीं, पौधों में रोज चावल का पानी डालने से मिट्टी में नमी और स्टार्च अधिक हो जाता है, जिससे जड़ें सड़ सकती हैं। 2. चावल के पानी से पौधों पर क्या बुरा असर पड़ता है? लगातार चावल का पानी डालने से मिट्टी गीली रहती है, फफूंद पनप सकती है और पौधे की पत्तियां पीली पड़ सकती हैं। 3. कौन सा चावल का पानी पौधों के लिए सुरक्षित है? सिर्फ सादे और कच्चे चावल को धोने के बाद निकला साफ पानी ही पौधों के लिए सुरक्षित माना जाता है। 4. मिट्टी से बदबू आने पर क्या करना चाहिए? मिट्टी से बदबू आने पर चावल का पानी देना तुरंत बंद कर दें और मिट्टी को अच्छी तरह सूखने दें। https://trendkia.com/lifestyle/paudhon-men-chavala-ka-pani-dalana-para-sakata-hai-bhari-janie-isake-nukasana-21748 TrendKia — Har trend, sabse pehle.