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  "type": "article",
  "title": "फसलों को जड़ गलन और उकठा से बचाने के लिए आया चार घटकों वाला जैविक मिश्रण",
  "summary": "खेतों में जड़ सड़न और उकठा जैसी फंगल बीमारियों से मुरझाते पौधों के लिए ट्राइकोकवच जैविक उपाय बनकर उभरा है। इसमें मौजूद चार सूक्ष्मजीव मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के साथ जड़ों को सुरक्षित रखते हैं।",
  "content": "खेतों में खड़ी फसल जब अचानक सूखने लगे या उसकी जड़ें गलने लगें, तो किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फिर जाता है। फसलों में जड़ सड़न, गलन, उकठा और जड़-गांठ जैसे रोग मुख्य रूप से भूमिगत फंगस व हानिकारक जीवाणुओं के कारण फैलते हैं। ये रोग सीधे जड़ों पर हमला करते हैं, जिससे पौधा जमीन से पानी और जरूरी पोषक तत्व खींचना बंद कर देता है और धीरे-धीरे मुरझाकर सूख जाता है। इस तरह के रोगों की रोकथाम के लिए ट्राइकोकवच नाम का जैविक उत्पाद एक असरदार विकल्प के रूप में सामने आया है, जो फसल को नुकसान पहुंचाए बिना मिट्टी के स्वास्थ्य को भी सुधारता है।\n\nचार असरदार जीवाणुओं का अनूठा मेल\nअमन कुमार सिंह के अनुसार, इस खास उत्पाद के भीतर चार प्रमुख जैविक घटक मौजूद हैं। इनमें एज़ोटोबैक्टर, ट्राइकोडर्मा विरिडी, वर्टिसिलियम लेकानी और सूडोमोनास पुटिडा का सम्मिश्रण तैयार किया गया है। ये चारों तत्व मिलकर दोतरफा काम करते हैं। एक तरफ जहां यह मिश्रण पौधों की जड़ों को घातक बीमारियों से सुरक्षा घेरा प्रदान करता है, वहीं दूसरी तरफ यह मिट्टी में पहले से मौजूद पोषक तत्वों को पौधों के अवशोषण के अनुकूल बनाने में भी सहायता करता है।\n\nसब्जियों में उपयोग का सही समय और तरीका\nसब्जी वर्गीय फसलों की खेती करने वाले किसानों के लिए इसका शुरुआती अवस्था में प्रयोग अधिक लाभकारी बताया गया है। अमन कुमार सिंह ने स्पष्ट किया कि जब सब्जी के पौधे रोपाई या अंकुरण के बाद 10 से 15 दिन की आयु पूरी कर लें, तब इसका छिड़काव या प्रयोग शुरू कर देना चाहिए। पौधों के विकास के इस दौर में जड़ों के आसपास इसका प्रयोग करने से नई विकसित हो रही जड़ों को सुरक्षा मिलती है।\n\nघोल बनाने का अनुपात और ड्रेंचिंग की प्रक्रिया\nट्राइकोकवच के पाउडर रूप को इस्तेमाल करने के लिए एक निश्चित अनुपात निर्धारित किया गया है। प्रति लीटर पानी में 5 ग्राम पाउडर डालकर अच्छी तरह घोल तैयार करने की सिफारिश की गई है। इस तैयार तरल को सीधे पौधों की जड़ों के समीप ड्रेंचिंग तकनीक द्वारा डाला जाता है, ताकि दवा सीधे जड़ क्षेत्र तक पहुंच सके। हालांकि, प्रयोग की सटीक मात्रा और सुरक्षा सावधानियों के लिए पैकेट पर दर्ज दिशा-निर्देशों को ध्यानपूर्वक पढ़ना आवश्यक माना गया है।\n\nमिट्टी की उर्वरता में दीर्घकालिक सुधार\nयह उत्पाद केवल बीमारियों को रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि खेत की मिट्टी को लंबे समय के लिए समृद्ध भी बनाता है। अमन कुमार सिंह ने बताया कि इस मिश्रण के नियमित छिड़काव से मिट्टी के भीतर लाभदायक जीवाणुओं की सक्रियता में वृद्धि होती है। यदि कोई किसान अपने खेतों में करीब तीन साल तक निरंतर इसका उपयोग जारी रखता है, तो मिट्टी की संरचना में व्यापक सुधार आने के साथ-साथ मिट्टी जनित रोगों पर स्थायी नियंत्रण पाने में भी मदद मिल सकती है।\n\nबाजार में उपलब्धता और तय दरें\nकिसानों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए यह उत्पाद तरल और चूर्ण दोनों विकल्पों में उपलब्ध कराया गया है। कीमत की बात करें तो इसका लिक्विड फॉर्म ₹450 प्रति लीटर की दर पर मिलता है, जबकि पाउडर फॉर्म के लिए ₹250 प्रति किलोग्राम की दर तय की गई है। इस उत्पाद की खरीद के लिए किसान टीसीएल महिला उद्यमी प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, बहराइच से सीधा संपर्क स्थापित कर सकते हैं।\n\nइसका आप पर असर\nयह जैविक समाधान रासायनिक दवाओं पर किसानों की निर्भरता कम करके भूमि की प्राकृतिक ताकत लौटाने में मददगार साबित हो सकता है।\n\n• भारत में किसानों के लिए: जड़ सड़न और उकठा जैसी मिट्टी जनित बीमारियों से होने वाले फसल नुकसान को बिना जहरीले रसायनों के रोका जा सकता है। इससे लागत कम होने के साथ-साथ जैविक उपज का बेहतर बाजार मूल्य मिलने की संभावना बढ़ती है।\n• बहराइच और आसपास के क्षेत्रों में: स्थानीय किसान सीधे टीसीएल महिला उद्यमी प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड से संपर्क कर यह उत्पाद प्राप्त कर सकते हैं। ₹250 प्रति किलोग्राम पाउडर और ₹450 प्रति लीटर लिक्विड की तय दर पर स्थानीय स्तर पर उत्पाद उपलब्ध होने से किसानों की भागदौड़ बचेगी।\n• सब्जी उत्पादकों के लिए: पौध लगाने के 10 से 15 दिनों के भीतर ड्रेंचिंग शुरू करने से शुरुआती फसल नष्ट होने का खतरा घट जाता है। इससे सब्जियों की गुणवत्ता बेहतर होती है और कटाई के समय उत्पादन में स्थिरता आती है।\n• दीर्घकालिक भूमि सुधार के लिए: तीन वर्षों तक इसका लगातार इस्तेमाल मिट्टी में मित्र जीवाणुओं को बढ़ाकर जमीन को बंजर होने से बचाता है। लंबे समय में रासायनिक उर्वरकों पर होने वाला किसानों का अतिरिक्त खर्च काफी हद तक घट सकता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nखेतों में अत्यधिक रासायनिक प्रयोग और मिट्टी में फफूंद जनित रोगों के बढ़ने के कारण फसलों की जड़ें तेजी से नष्ट हो रही हैं, जिससे बचने के लिए जैविक सूक्ष्मजीवों का सहारा लिया गया है।\n\n• रोगों का भूमिगत प्रकोप: मिट्टी में मौजूद हानिकारक फंगस और जीवाणु पौधों की जड़ों पर हमला करके जड़ सड़न, गलन, उकठा और जड़-गांठ पैदा करते हैं। इस संक्रमण के चलते पौधों की संवहनी प्रणाली अवरुद्ध हो जाती है और नमी न मिलने से वे सूखने लगते हैं।\n• चार सूक्ष्मजीवों का संयुक्त प्रभाव: रासायनिक फंगीसाइड्स के नुकसान से निपटने के लिए एज़ोटोबैक्टर, ट्राइकोडर्मा विरिडी, वर्टिसिलियम लेकानी और सूडोमोनास पुटिडा का सम्मिश्रण बनाया गया है। यह साझा तंत्र मिट्टी के हानिकारक तत्वों को दबाकर पोषक तत्वों को सक्रिय करता है।\n• मिट्टी की बिगड़ती सेहत: रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से खेतों में प्राकृतिक मित्र जीवाणुओं की संख्या तेजी से घटी है। ऐसे में तीन वर्ष तक जैविक घटकों का चक्र चलाने से भूमि का जैविक संतुलन दोबारा बहाल करने की जमीन तैयार होती है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. ट्राइकोकवच किन प्रमुख फसल बीमारियों से बचाव में मदद करता है?\nयह मुख्य रूप से फसलों को जड़ सड़न, गलन, उकठा और जड़-गांठ जैसी मिट्टी जनित बीमारियों से बचाने में सहायता करता है।\n\n2. इस जैविक उत्पाद में कौन-कौन से चार घटक शामिल हैं?\nइसमें एज़ोटोबैक्टर, ट्राइकोडर्मा विरिडी, वर्टिसिलियम लेकानी और सूडोमोनास पुटिडा शामिल हैं।\n\n3. सब्जी वर्गीय फसलों में इसका प्रयोग कब शुरू करना चाहिए?\nअमन कुमार सिंह के अनुसार, सब्जियों के पौधों की उम्र 10 से 15 दिन होने पर इसका इस्तेमाल शुरू किया जा सकता है।\n\n4. पाउडर का घोल बनाते समय क्या अनुपात रखना चाहिए?\nपाउडर को 5 ग्राम प्रति लीटर पानी के अनुपात में घोलकर पौधों की जड़ों के पास ड्रेंचिंग करने की सलाह दी गई है।\n\n5. मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने के लिए इसे कितने समय तक इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है?\nमिट्टी की सेहत में टिकाऊ सुधार और बीमारियों के प्रबंधन के लिए इसे करीब तीन साल तक लगातार इस्तेमाल करने की बात कही गई है।\n\n6. बाजार में इसकी कीमत और उपलब्धता क्या है?\nयह लिक्विड रूप में ₹450 प्रति लीटर और पाउडर रूप में ₹250 प्रति किलोग्राम पर टीसीएल महिला उद्यमी प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, बहराइच से उपलब्ध है।",
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  "publishedAt": "2026-10-31",
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