प्लास्टिक के नीले ड्रम से छत पर बनाएं किचन गार्डन, इन पांच सब्जियों की होगी बंपर पैदावार जमीन की कमी के बावजूद घर की छत पर रखे नीले प्लास्टिक ड्रम में ताजी और रसायन मुक्त सब्जियां उगाई जा सकती हैं। सही मिट्टी और देखभाल के आसान तरीकों से टमाटर, बैंगन, भिंडी और बेल वाली सब्जियों की शानदार फसल ली जा सकती है। बाजार में बढ़ती महंगाई और सब्जियों में कीटनाशकों के बढ़ते इस्तेमाल के बीच हर परिवार अपने लिए शुद्ध और सेहतमंद सब्जियां चाहता है। शहरों में जमीन या बगीचे की जगह न होने की वजह से कई लोग बागवानी की ख्वाहिश पूरी नहीं कर पाते। हालांकि बिना जमीन के भी घर की खुली छत पर रखे नीले प्लास्टिक के ड्रमों की मदद से एक शानदार हरी-भरी वाटिका तैयार की जा सकती है। यह तरीका सीमित जगह में भी भरपूर पैदावार लेने का एक बेहद कारगर समाधान बनकर सामने आया है। नीले प्लास्टिक के ड्रम अपनी गहराई और चौड़ाई के कारण बागवानी के लिए आदर्श माने जाते हैं। सामान्य गमलों की तुलना में इनमें पौधों की जड़ों को गहराई तक फैलने के लिए पर्याप्त जगह और पोषण मिलता है। अगर सही तकनीक और योजना के साथ शुरुआत की जाए, तो कुछ ही हफ्तों में छत का एक छोटा सा कोना ताजी सब्जियों की मिनी बगिया में बदल सकता है। ड्रम में उगाने के लिए सबसे मुफीद पांच सब्जियां घर की छत पर नीले ड्रम में उगाने के लिए कुछ खास सब्जियां बेहद अनुकूल साबित होती हैं, जिनकी देखभाल आसान होती है और उत्पादन भी लगातार मिलता रहता है • टमाटर: टमाटर के पौधे गहरे बर्तनों में बहुत तेजी से पनपते हैं। एक बड़े नीले ड्रम में आसानी से दो से तीन टमाटर के पौधे लगाए जा सकते हैं, जो कई महीनों तक लगातार फल देते रहते हैं। • बैंगन: बैंगन के पौधे को पर्याप्त गहराई और भरपूर धूप की दरकार होती है। ड्रम की गहराई मिलने पर इसकी जड़ें मजबूत होती हैं, जिससे पौधों की वृद्धि तेज होती है और बंपर फल आते हैं। • भिंडी: भिंडी के शौकीन लोगों के लिए ड्रम का चौड़ा मुंह बेहद फायदेमंद रहता है। इसमें एक साथ कई पौधे लगाए जा सकते हैं, जिससे नियमित अंतराल पर रसोई के लिए ताजी भिंडी मिल जाती है। • हरी मिर्च: मिर्च के पौधों की देखरेख करना काफी आसान होता है और इन्हें ज्यादा जद्दोजहद की जरूरत नहीं पड़ती। एक ड्रम में दो से तीन मिर्च के पौधे पूरे परिवार की दैनिक खपत के लिए पर्याप्त रहते हैं। • लौकी और तोरई जैसी बेल वाली सब्जियां: नीले ड्रम की मिट्टी धारण करने की क्षमता काफी अधिक होती है। इसमें लौकी, तोरई या करेले जैसी भारी बेलों वाले पौधे आसानी से लगाए जा सकते हैं, जिन्हें रस्सियों या मचान के सहारे छत पर चढ़ाया जा सकता है। प्लास्टिक ड्रम से कंटेनर तैयार करने का चरणबद्ध तरीका छत पर कंटेनर फार्मिंग शुरू करने के लिए पुराने नीले प्लास्टिक के ड्रम को उपयोग में लाया जा सकता है। इसके लिए ड्रम को बीच से सावधानीपूर्वक काटकर दो हिस्सों में बांट लिया जाता है। ऐसा करने से एक ही ड्रम से दो बड़े आकार के मजबूत कंटेनर तैयार हो जाते हैं। इसके बाद सबसे महत्वपूर्ण कदम ड्रम के निचले हिस्से में चार से पांच निकासी छेद बनाना है। यह जल निकासी व्यवस्था इसलिए जरूरी है ताकि अतिरिक्त सिंचाई का पानी आसानी से बाहर निकल सके। अगर पानी अंदर जमा रहेगा तो जड़ों में सड़न पैदा हो जाएगी और पौधा सूख सकता है। पौधों के लिए संतुलित पॉटिंग मिक्स तैयार करना कंटेनर बागवानी में अच्छी पैदावार पूरी तरह से मिट्टी की गुणवत्ता पर निर्भर करती है। पौधों को भरपूर पोषण देने के लिए एक आदर्श मिश्रण तैयार किया जाना चाहिए • सामान्य मिट्टी: मिश्रण का पचास प्रतिशत हिस्सा सामान्य बगीचे की मिट्टी का होना चाहिए, जो पौधों को जरूरी आधार देती है। • जैविक खाद: तीस प्रतिशत मात्रा पुरानी सड़ी हुई गोबर की खाद या केंचुआ खाद की मिलानी चाहिए, जो पौधों के लिए प्राथमिक पोषक तत्वों का काम करती है। • रेत या कोकोपीट: बीस प्रतिशत हिस्सा रेत या कोकोपीट का रखा जाता है, जिससे मिट्टी भुरभुरी बनी रहती है और जल निकासी बेहतर होती है। बुवाई, धूप और सिंचाई का सही प्रबंधन पौधे लगाने के लिए नजदीकी नर्सरी से स्वस्थ पौध खरीदी जा सकती है या सीधे बीजों की बुवाई की जा सकती है। बीजों को तैयार मिट्टी में लगभग आधा इंच की गहराई पर बोना चाहिए और उसके बाद हल्का पानी छिड़कना चाहिए। ड्रम को छत के ऐसे हिस्से में स्थापित करना चाहिए जहां रोजाना कम से कम पांच से छह घंटे की सीधी धूप आती हो। अच्छी धूप के बिना सब्जियों का विकास रुक जाता है। मिट्टी में नियमित रूप से नमी बनाए रखना जरूरी है, लेकिन इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए कि गमले में पानी भरा न रहे। पोषण और कीटों से प्राकृतिक सुरक्षा सब्जियों की पैदावार लगातार बनाए रखने के लिए हर पंद्रह से बीस दिन के अंतराल पर पौधों की जड़ों के पास नीम की खली या केंचुआ खाद की एक हल्की परत बिछानी चाहिए। यह जैविक खुराक पौधों के विकास को तेज करती है। पौधों को कीटों और बीमारियों से सुरक्षित रखने के लिए समय-समय पर नीम के तेल का छिड़काव करना चाहिए। यह प्राकृतिक उपाय रसायनों के बिना ही पौधों को कीड़ों से सुरक्षित रखता है, जिससे रसोई के लिए पूरी तरह शुद्ध और स्वास्थ्यवर्धक उपज प्राप्त होती है। इसका आप पर असर घर की छत पर ड्रम फार्मिंग अपनाकर परिवार बाजार के रसायनों से बच सकते हैं और ताजी सब्जियों पर होने वाले खर्च को कम कर सकते हैं। • रसोई का बजट: घर पर उगाई गई सब्जियों से बाजार से बार-बार हरी सब्जियां खरीदने की जरूरत कम हो जाती है। इससे रोजमर्रा के घरेलू बजट में बचत होती है। • सेहत और पोषण: बिना रासायनिक कीटनाशकों के उगाई गई सब्जियां खाने से स्वास्थ्य में सुधार होता है। परिवार को सीधे पौधे से तोड़ी गई पोषक तत्वों से भरपूर उपज मिलती है। • जगह का सदुपयोग: बिना किसी कृषि भूमि के भी खाली पड़ी छत का इस्तेमाल खाद्य उत्पादन के लिए हो जाता है। शहरी घरों में यह हरियाली बढ़ाने और तापमान संतुलित रखने में भी मदद करता है। • शुरुआती लागत: पुराने प्लास्टिक ड्रम और जैविक खाद आसानी से कम खर्च में मिल जाते हैं। एक बार की छोटी सी तैयारी से कई मौसमों तक लगातार सब्जियां मिलती रहती हैं। ऐसा क्यों हुआ शहरीकरण के चलते जमीन की कमी और रासायनिक सब्जियों के डर ने लोगों को घर पर ही खाद्य उत्पादन के विकल्प तलाशने पर मजबूर किया है। • जमीन का अभाव: शहरों में बहुमंजिला मकानों और कंक्रीट के विस्तार के कारण खुली जमीन या क्यारियां उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए लोग छतों पर बड़े प्लास्टिक ड्रमों को गमलों के रूप में उपयोग कर रहे हैं। • कीटनाशकों की चिंता: व्यावसायिक खेती में कीटनाशकों और रासायनिक खादों के अत्यधिक उपयोग से स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं बढ़ी हैं। शुद्ध भोजन की इसी चाह ने छत पर जैविक बागवानी के चलन को बढ़ावा दिया है। • ड्रम की उपयुक्त बनावट: नीले ड्रम बेहद टिकाऊ, सस्ते और गहरे होते हैं जो पौधों की जड़ों को फैलने के लिए आदर्श वातावरण देते हैं। सामान्य गमलों की तुलना में इनमें पौधे लंबे समय तक सूखते नहीं हैं। सवाल-जवाब 1. ड्रम में सब्जियां उगाने के लिए किस आकार का ड्रम लेना चाहिए? एक सामान्य पुराने नीले प्लास्टिक ड्रम को बीच से आधा काटकर दो बड़े गमले तैयार किए जा सकते हैं, जो सब्जियों के लिए आदर्श आकार प्रदान करते हैं। 2. ड्रम के नीचे छेद करना क्यों जरूरी है? अतिरिक्त पानी को बाहर निकालने के लिए चार से पांच निकासी छेद जरूरी हैं, ताकि ड्रम में जलभराव न हो और पौधों की जड़ें सड़ने से बची रहें। 3. मिट्टी का सही मिश्रण कैसे तैयार करें? पचास प्रतिशत सामान्य बगीचे की मिट्टी, तीस प्रतिशत सड़ी हुई गोबर की खाद या केंचुआ खाद और बीस प्रतिशत रेत या कोकोपीट को आपस में मिलाकर आदर्श मिश्रण बनाएं। 4. ड्रम में कौन-कौन सी सब्जियां आसानी से उगाई जा सकती हैं? टमाटर, बैंगन, भिंडी, हरी मिर्च और बेल वाली सब्जियां जैसे लौकी व तोरई नीले ड्रम में बहुत अच्छी तरह पनपती हैं। 5. पौधों को रोजाना कितनी धूप की जरूरत होती है? अच्छी पैदावार के लिए ड्रम को ऐसी जगह रखना चाहिए जहां उसे रोजाना कम से कम पांच से छह घंटे की सीधी धूप मिल सके। 6. कीटों से बचाने के लिए क्या उपाय करना चाहिए? कीड़ों और रोगों से सुरक्षा के लिए हर पंद्रह से बीस दिन में केंचुआ खाद या नीम की खली दें और समय-समय पर नीम के तेल का छिड़काव करें। https://trendkia.com/lifestyle/plastika-ke-nile-drama-se-chhata-para-banaen-kichana-gardana-ina-pancha-sabjiyon-ki-hogi-bnpara-paidavara-34915 TrendKia — Har trend, sabse pehle.